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गुरुवार, 9 जुलाई 2026

एक गुनाह और सही- पवन

 Hindi pulp fiction में पवन पॉकेट बुक्स के अंतर्गत प्रकाशित होने वाले उपन्यासकार 'पवन' का सामाजिक उपन्यास 'एक गुनाह और सही' प्रस्तुत है।
Sahityadesh के स्तम्भ 'उपन्यास अंश' में आपका स्वागत है।
Sahityadesh के स्तम्भ 'उपन्यास अंश' में आपका स्वागत है।

एक गुनाह और सही - पवन

फोन की घण्टी बज उठी । सरिता देवी चौंक उठी। फिर हाथ बढ़ाकर रिसीवर उठाया और बोली- "हैल्लो- सरिता दिस साईड ।"
"आपको बास ने याद किया है मैडम !"
"अभी ?"
"जी हां - तुरन्त ।"

रविवार, 19 अप्रैल 2026

आनंद कुमार सिंह, साक्षात्कार

 साहित्य देश की साक्षात्कार शृंखला में इस बार आपके लिए प्रस्तुत है युवा लेखक आनंद कुमार सिंह का साक्षात्कार ।
 माता शांति सिंह और पिता अजित प्रसाद सिंह के घर पैदा हुये आनंद कुमार सिंह को बचपन से ही पढने में रूचि रही है। कभी बालमन बाल साहित्य में रूचि रखता था और समय के साथ यह रूचि लेखन‌ में परिवर्तित हो गयी। 
आनंद कुमार सिंह पेशे से पत्रकार हैं।
पत्रकारिता के अब तक के अपने 20 वर्ष के करिअर में उन्हें तीन बार श्रेष्ठ पत्रकार होने का पुरस्कार मिल चुका है।
वे क्राइम, राजनीति, स्पोर्ट्स, बिजनेस आदि क्षेत्रों में गहरी रुचि रखते हैं।
कहानी लिखने का उन्हें हमेशा से शौक रहा है। कहानी लेखन की कई प्रतियोगिताओं में वे विजेता रह चुके हैं।
उन्हें शतरंज खेलने का भी काफी शौक है। प्रेस क्लब, कोलकाता के वह लगातार तीन वर्षों से चैंपियन हैं।
मूल रूप से बिहार के रहने वाले आनंद कुमार सिंह का जन्म, पढ़ाई-लिखाई, कोलकाता में हुई। हालांकि बचपन का उनका बड़ा हिस्सा रेणुकूट में गुजरा है।
   यह साक्षात्कार ekbookjournal के संचालक श्री विकास नैनवाल जी के सहयोग से यहाँ प्रकाशन हुआ है।

प्रश्न – लेखन क्षेत्र में आज लेखक आनंद कुमार सिंह का नाम पाठक वर्ग के लिए अपरिचित नहीं रहा है। लेकिन जैसा की साक्षात्कार की परम्परा है उसी परम्परा अनुसार हम आपका विस्तृत परिचय जानना चाहेंगे ?
उत्तर – मेरा जन्म कोलकाता में हुआ हालांकि जन्म के बाद ही पिताजी की नौकरी के कारण हम लोग रेणुकूट चले गये। मेरी प्रारंभिक शिक्षा (चौथी कक्षा तक) वहीं हुई। पिताजी को पढ़ने का शौक था तो वहीं से शौक मुझे भी आ गया। बचपन, चंपक, नंदन, चंदामामा, कॉमिक्स से शुरू होते ही जल्द ही एससी बेदी के राजन-इकबाल सीरीज तक पहुंच गया। घर में उस वक्त सरिता, रीडर्स डाइजेस्ट से लेकर कई अन्य पत्रिकाएं आती थीं। मैं सबकुछ पढ़ जाता था भले ही वो बच्चों के लिए न हो। रेणुकूट के पहाड़ी इलाके में बारिश के बाद जंगली पत्तों की जो खुशबू आती थी वो आज भी जेहन में रची-बसी है। उस वक्त खेलकूद के अलावा मनोरंजन का साधन केवल किताबें-मैगजीन आदि पढ़ना ही था।
       इसके बाद हम लोग वापस कोलकाता आ गये। पांचवीं से बीएससी तक की पढ़ाई मैंने यहीं की। यहाँ आने के बाद भी किताबें पढ़ने का शौक बरकरार रहा। मुझे वेद प्रकाश शर्मा के उपन्यासों का चस्का लग गया। तीन तिलंगे, विधवा का पति, केशव पंडित, कानून का बेटा, कोख का मोती की यादें आज भी हैं। स्कूली जीवन में ही मुझे सुरेंद्र मोहन पाठक का उपन्यास मिल गया। हालांकि यह याद नहीं कि पहले मैंने उनके जेम्स हेडली चेज के अनुवादित उपन्यास पढ़े या फिर उनके स्वरचित उपन्यास। लेकिन जो भी उनकी लेखनी बेहद धमाकेदार लगी। दुस्साहसिक, ऑन टू योर फेस..वाली। जहाँ वीपीएस हमें मनोरंजन की दुनिया का रोलर-कोस्टर राइड कराते थे वहीँ एसएमपी रियलिस्टिक दुनिया के दायरे में रहकर इंटरटेनमेंट का तड़का प्रदान करते थे। पैसे न होने के कारण किराये पर किताबें लेकर पढ़ता था और खूब पढ़ता था। एसएमपी को पढ़ने के बाद अन्य किसी हिंदी लेखक की किताबें कम ही पढ़ी। एसएमपी के अलावा मैं अंग्रेजी नॉवल पढ़ने लगा। इसमें शुरूआत सिडनी शेल्डन के उपन्यासों से हुई। लेकिन मेरे लिए लेखक मायने नहीं रखता था...कोई भी किताब मिल जाये...तमन्ना बस यही रहती थी। किताबें पढ़ने का सिलसिला आज भी जारी है। 

प्रश्न- जैसा की आपने बताया बचपन में ही आपको पढने की रूचि थी। फिर यह रूचि पढने से लेखन की तरफ कब बढ गयी ?

आनंद कुमार सिंह

नाम-        आनंद कुमार सिंह
माता-       शांति सिंह
पिता-       स्व. अजित प्रसाद सिंह
जन्म -      18 दिसंबर
शिक्षा-      बीएससी
ईमेल -     anand.singhnews@gmail.com 
सम्प्रति-    पत्रकार 

प्रकाशित रचनाएँ
1. हीरोइन की हत्या 
2. रुक जा ओ जानेवाली
3. टिक टॉक टिक टॉक

(इसके अलावा  कहानी लेखन)

शनिवार, 18 अप्रैल 2026

नर्क की छाया - रीमा भारती, उपन्यास अंश

 साहित्य देश के स्तम्भ 'उपन्यास अंश' में इस बार प्रस्तुत है धीरज पॉकेट बुक्स से प्रकाशित लोकप्रिय उपन्यासकार रीमा भारती जी के उपन्यास 'नर्क की छाया' का एक अंश-

नर्क की छाया - रीमा भारती

रीमा भारती अपने फ्लैट के बेडरूम में आराम कर आइने के सामने बैठी अपने मेकअप को अंतिम टच दे रही थी।
आजकल रीमा भारती एकदम फ्री थी।
और जब वह फ्री होती थी, उसके डिपार्टमेंट ने उसे कोई खतरनाक मिशन नहीं सौंपा होता था, तो वह मनोरंजन के मूड में होती थी। अपनी व्यस्त जिन्दगी से चन्द लम्हें चुराकर क्लब, पार्टियों और अपने दोस्तों के साथ घूमती थी। उसका रोज का यही शगल होता था।

और आजकल वह यही कर रही थी।
रीमा भारती मेकअप करके उठ खड़ी हुई और पलटकर दरवाजे की तरफ बढ़ती चली गई।
इस वक्त वह अपने पसंदीदा लिबास में थी।
उसने आसमानी रंग की साड़ी और उसी से मैच करता हुआ ब्लाउज पहना हुआ था। अपने बॉबकट बालों को पीछे ले जाकर आसमानी रंग के स्कार्फ से बांधा हुआ था। कानों में सोने के टॉप्स चमक रहे थे। इस लिबास में वह आसमान से उतरी अप्सरा लग रही थी।
रीमा भारती !
आई०एस०सी० अर्थात् भारत की सबसे महत्वपूर्ण जासूसी संस्था इण्डियन सीक्रेट कोर की नम्बर वन एजेन्ट । दीस्तों की दोस्त और दुश्मनों के लिये साक्षात् मौत, जो अपने जिस्म पर दो नहीं, बल्कि हजारों आंखें रखती है और एक जासूस होने के नाते मामूली-सी घटना पर संदेह करना उसका पेशा था। मां भारती की शरारती, उद्दण्ड किन्तु लाडली बेटी। वो बला, जिससे मौत भी पनाह मांगे।
रीमा भारती ने ड्राइंगरूम में पहुंचकर मेज पर रखा अपना वेनिटी बैग उठाया।
उसी पल !
फोन की घण्टी बज उठी।
रीमा भारती ने हाथ बढ़ाकर रिसीवर उठाया।
"हेलो।"
"रीमा!"

बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

क्या सुन रहे हो- हास्य रस,आरिफ मारहर्वी

 साहित्य देश के स्तम्भ के हास्यरस में आज प्रस्तुत है लोकप्रिय उपन्यासकार 'आरिफ मारहर्वी' के उपन्यास 'भयानक भिखारी' से एक रोचक हास्य अंश । 



 भयानक भिखारी - आरिफ मारहर्वी
फिर उन्हें गाईड एक खम्बे के निकट खड़ा हुआ दिखाई दिया । वह खम्बे से कान लगाये इस प्रकार खड़ा था जैसे कुछ सुनने की कोशिश कर रहा हो । सोजी ने गाईड पूछा-

गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

कुंदन कबाड़ी, फन्ने खा तातारी और गोकुल मदारी का परिचय

 साहित्य देश के काॅलम 'पात्र परिचय' में इस बार पढें लोकप्रिय उपन्यासकार वेदप्रकाश काम्बोज जी के प्रसिद्ध पात्रों में तीन विशेष पात्र कुंदन कबाड़ी, फन्ने खा तातारी और गोकुल मदारी का परिचय और वह भी उन्हीं पात्रों की जुबानी ।
  प्रस्तुत अंश वेदप्रकाश काम्बोज जी के उपन्यास '
मौत की आवाज' से है। यहां कुंदन कबाड़ी, फन्ने खां तातारी और गोकुल मदारी जासूस विजय से मिलने जाते हैं और विजय को अपना परिचय देते हैं। 
तो अब पढिये इन तीनों पात्रों का परिचय इन्हीं की जुबान से- 

विजय ने दरवाजा खोला ।
और गुरुदेव का उच्च नाद करते हुए तीन नमूनों ने उसके पैर पकड़ लिए। चकित सा विजय पहले तो उन तीनों के काले सिरों को देखता रहा जो उसके पैरों के निकट इस तरह एकत्रित हो गए थे जैसे तीन विभिन्न रेखाएं एक बिन्दु पर आकर मिल गई हों।
विजय ने आशीर्वाद की मुद्रा में अपने हाथ फैलाये और फिर गुरू ने गम्भीर मुद्रा में कहा- 'सदा खाओ गुड़ के सेव ।'
'धन्य हैं गुरुदेव आप धन्य हैं।' उन तीनों ने उसके पैर पकड़े हुए समवेत स्वर में कहा। किसी ने भी सिर उठाकर देखने की चेष्टा नहीं की।  

गुरुवार, 25 दिसंबर 2025

वीरेन्द्र दत्त शर्मा

वीरेन्द्र दत्त शर्मा

लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में वीरेन्द्र दत्त शर्मा जी को 'मास्टर जी' के नाम से जाना जाता रहा है। वीरेन्द्र दत्त शर्मा जी के मेरठ शहर ने निकटवर्ती किसी गांव के निवासी थे।

आबिद रिजवी साहब के शब्दों में 'मास्टर जी साइकिल से प्रकाशकों के यहां आया करते थे और वह जासूसी उपन्यास लेखक थे ।'

वीरेन्द्र दत्त शर्मा जी शायद पेशे से अध्यापक रहे होंगे तभी वह मास्टर जी के नाम से प्रसिद्ध हुये थे। उन्होंने विकास सीरीज के उपन्यास लिखे है।

मास्टर जी के उपन्यास नीलम पॉकेट बुक्स मेरठ से प्रकाशित होते रहे है।

वीरेन्द्र दत्त शर्मा जी के उपन्यास

  1. रघुनाथ का बेटा (शायद यह शब्द बेटा ही है या फिर पुत्र)
  2. विकास मेरा दुश्मन
  3. शेरदिल
  4. हरामखोर
  5. हत्या एक परिवार की 




राजभारती के साथ- युगांक धीर

राजभारती के साथ-  युगांक धीर

 

        2000 से 2015 तक मैं दिल्ली में पटेल नगर में रहा ! ... बीच में एक-दो महीनों के लिए अपने परिवार के पास मुंबई चला आता था ... मई-जून और दिसंबर-जनवरी में ... और फिर वापस दिल्ली लौट जाता था ... जहां राजकमल और वाणी प्रकाशन के लिए मैं अनुवाद और संपादन का काम कर रहा था ! 
        इसी बीच ... "अमिताभ की संघर्ष कथा" और "सार्त्र का सच" नाम से मेरी दो मौलिक पुस्तकें भी प्रकाशित हुईं ! 
       साथ ही मैंने आजादी की लड़ाई के आधार स्तंभ रहे घनश्याम दास बिड़ला के सुपुत्र और हिंदुस्तान टाइम्स के भूतपूर्व चेयरमैन कृष्ण कुमार बिड़ला की आत्मकथा "इतिहास का स्पर्श बोध" और कुलदीप नैयर की आत्मकथा "एक जिंदगी काफी नहीं" और उन्हीं के द्वारा लिखी गई भगत सिंह पर अब तक की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक "सरफरोशी की तमन्ना" समेत कई दर्जन महत्वपूर्ण और उत्कृष्ट पुस्तकों का हिंदी अनुवाद किया !

मंगलवार, 22 जुलाई 2025

The डेड man's प्लान- समीर सागर, उपन्यास अंश

 साहित्य देश के स्तम्भ 'उपन्यास अंश' में इस बार प्रस्तुत है एक बिलकुल अलग कथानक पर आधारित लेखक समीर सागर के प्रथम उपन्यास 'The डेड man's प्लान' के उपन्यास का अंश।

 

 शहर : पुणे (महाराष्ट्र)
दिनांक 19-दिसंबर-2017
समय : शाम 05:15

वो किसी पुरानी सी वीरान इमारत का एक कमरा था, जिस इमारत को शायद किसी वजह से सालों पहले अधूरा छोड़ दिया गया था। जिसको देख कर ही गुमान होता था कि एक लंबे वक़्त से किसी को इस इमारत की याद तक नहीं आई थी। दीवारों पर प्लास्टर नहीं था और ईटो का लाल रंग उस कमरे को एक भयानक सा रूप दे रहा था। खिड़कियों के लिए छोड़ी गयी जगह से, कमरे में हवा की आवाज़ सीटी की तरह गूँज रही थी और उस कमरे के बीचों-बीच इस समय लोहे की एक टंकी रखी हुई थी, जिसके अंदर से उठती हुई आग की तेज़ लपटें उस पूरे कमरे को गर्म कर रही थीं। और साथ ही तप रहा था वह चेहरा, जो उस आग के पास खड़ा हुआ था। लपटों की रौशनी में उसका गोरा चेहरा भी आग की ही तरह लाल नज़र आ रहा था। उसके बिखरे हुए बाल, चेहरे पर बड़ी हुई दाढ़ी, अंगारों की तरह दहकती हुई उसकी आँखें और उसके भींचे हुए जबड़े चीख-चीख कर कह रहे थे कि वह आग सिर्फ आग नहीं बल्कि किसी ज्वालामुखी के फटने की शुरुआत है।


सोमवार, 2 जून 2025

चरनजीत कलेर

नाम- चरनजीत कलेर

लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में एक और नाम सामने आया है चरनजीत कलेर का। हालांकि इनके विषय में उपलब्ध जानकारी नगण्य ही है।
इनके क्षेत्र की बात करें तो 'हरविंदर' के बाद यह दूसरे लोकप्रिय साहित्य के उपन्यासकार हैं जो पंजाब से संबंध रखते हैं।
चरनजीत कलेर का अभी तक एक उपन्यास ही सामने आया है जो साधना पॉकेट बुक्स से प्रकाशित हुआ था। यह लेखक का प्रथम उपन्यास है।
चरनजीत कलेर के उपन्यास

  1. जुआघर में डाका

संपर्क-
चरनजीत कलेर
मकान नम्बर 195
सेक्टर-2A,
चण्डीगढ- 160001


लेखक चरनजीत कलेर के विषय में किसी पाठक मित्र को कोई जानकारी हो तो संपर्क करें-
Sahityadesh@gmail.com

सोमवार, 31 मार्च 2025

दीपक

नाम- दीपक
श्रेणी- सामाजिक उपन्यासकार, Ghost Writer

दिल्ली की संस्थान 'विमल प्रकाशन, शक्ति नगर, दिल्ली- 7' ने लोकप्रिय उपन्यासकार दीपक को बाजार में उतारा । 

लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में यह Ghost writing का समय था, प्रत्येक प्रकाशन चार-पांच अलग अलग नाम से छद्म लेखक (Ghost writer) खड़े कर चुका था । इस भीड़ में असली-नकली की पहचान भी लुप्त हो गयी थी । इसी दौर में विमल प्रकाशन का दीपक भी कब आया और कब गया कुछ पता न चला ।

दीपक के उपन्यास
  1. समाज के बंधन
  2. अहंकार
  3. डोली
  4. संगम
  5. सहारा
  6. उपकार
  7. मंगल टीका
  8. अकेली


दीपक के विषय में‌ या विमल प्रकाशन के विषय में‌ किसी भी पाठक के पास कोई भी जानकारी हो तो अवश्य शेयर करें। धन्यवाद।
Email- sahityadesh@gmail.com

रविवार, 30 मार्च 2025

सुशील भारती

नाम- सुशील भारती
श्रेणी- सामाजिक उपन्यासकार

लोकप्रिय कथा साहित्य में सुशील भारती जी सामाजिक उपन्यासकार के रूप में अपनी पहचान रखते हैं। 
इलाहाबाद उपन्यास साहित्य का जब केन्द्र था तो वहां का प्रसिद्ध प्रकाशन था 'कुसुम प्रकाशन' । अपने समय के अधिकांश लेखक यहाँ से प्रकाशित होते रहे हैं, जिनमें से एक हैं सुशील भारती जी ।

हमारे पास सुशील भारती जी के विषय में कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं है, यहां प्रस्तुत जानकारी 'कुसुम प्रकाशन' की एक मासिक पत्रिका 'नूतन कहानियाँ' दिसंबर 1977 के एक विज्ञापन से ली गयी है।

सुशील भारती जी के उपन्यास
  1. अधूरी चाह
  2. उलझन
  3. ढहते कगार
  4. लकीर
  5. टूटती सीमाएं
  6. दीपशिखा
  7. आतंक
  8. समर्पण
  9. बिखरे फूल
  10. आदेश


- कुसुम प्रकाशन, 17- शिवचरण लाल रोड, इलाहाबाद-3

उपन्यासकार सुशील भारती जी के विषय में किसी भी पाठक के पास कोई भी जानकारी हो तो हमसे अवश्य शेयर करें।
धन्यवाद
Email-  sahityadesh@gmail.com

सोमवार, 24 फ़रवरी 2025

विश्व पुस्तक मेला - 2025

विश्व पुस्तक मेला -2025
प्रगति मैदान- नई दिल्ली

 भारत धर्म और आस्था प्रधान देश है । यह पर्व और त्योहरों का देश है । यहां हर माह कोई न कोई पर्व या त्योहार मनाया जाता है और लोग पूरी आस्था के साथ ऐसे पर्वों को मनाते हैं । बारह वर्ष बाद महाकुम्भ का आयोजन प्रयागराज में हो रहा और भारतीय संस्कृति को मानने वाले लोग पूरी आस्था के साथ महाकुम्भ में स्नान करने जा रहे हैं । यही है भारत की परम्परा, धर्म और आस्था ।
            जहां एक तरफ महाकुम्भ का धार्मिक आयोजन हो रहा है वहीं नयी दिल्ली के प्रगति मैदान में विश्व पुस्तक मेला-2025 का आयोजन 01-09 फरवरी के मध्य हो रहा है । पुस्तक प्रेमियों का महाकुम्भ तो यही है । 
बायें से- गुरप्रीत सिंह, अंकित, सुनील भादू, राजेन्द्र, ओम सिहाग

इस बार तो पूर्व में ही विचार था कि पुस्तक मेले में जाना ही है और दोस्तों को भी सूचना थी । इस सिलसिले में हरियाणा से मित्र अंकित और सुनील भादू तैयार थे । मेरे ही गांव से शिक्षक साथी ओम सिहाग भी तैयार थे । लेकिन ओम की एक विभागीय डयूटी की सूचना आने के कारण विचार अधूरा रह गया था । मैंने शनिवार शाम को दो फरवरी की दो टिकटें श्री गंगानगर से मेरी और अंकित की कन्फर्म करवा ली थी । 
हमारे यहां से दिल्ली के लिये एकमात्र ट्रेन है दिल्ली सराय रोहिला एक्सप्रेस जो बीकानेर से चल कर मेरे शहर रायसिंहनगर में रात्रि को आठ बजे पहुचंती है । लेकिन मेरी टिकट श्री गंगानगर से थी क्योंकि अंकित श्री गंगानगर से इस ट्रेन में सवार होने वाला था । 

शनिवार, 8 फ़रवरी 2025

योगेश मित्तल जी को 'साहित्य देश सम्मान पत्र'

योगेश मित्तल जी को साहित्य देश सम्मान पत्र से किया सम्मानित ।
विश्व पुस्तक मेला- 2025, नई दिल्ली 03 फरवरी, प्रगति मैदान 

लोकप्रिय उपन्यास साहित्य के सितारे और छद्म लेखन के लिए चर्चित दिल्ली निवासी योगेश मित्तल जी को साहित्य देश सम्मान से सम्मानित करता गया ।
योगेश मित्तल जी को सम्मान पत्र भेंट करते हुये 

  साहित्य देश ब्लॉग लोकप्रिय साहित्य संरक्षण के लिए प्रयासरत एक ब्लॉग है। साहित्य देश ने उपन्यास साहित्य संरक्षण के लिए लेखकों के साक्षात्कार, उपन्यास परिचय, विभिन्न शृंखला समय-समय पर ब्लॉग पर प्रकाशित की हैं । इसी क्रम में‌ इस क्षेत्र के साहित्यकारों को सम्मानित करने का यह प्रथम अवसर है।
दिल्ली निवासी योगेश मित्तल जी लोकप्रिय साहित्य में जो सराहनीय कार्य किया है, इनकी उन्हीं सेवाओं को देखते हुये साहित्य देश ब्लॉग ने अपना प्रथम सम्मान पत्र योगेश मित्तल जी भेंट किया है।

विश्व पुस्तक मेला- 2025 के अवसर पर दिनांक 02.02.2025 को हाॅल नम्बर 2&3 में नीलम जासूस कार्यालय की बुक स्टाॅल पर कार्यक्रम आयोजित किया गया ।
        इस संक्षिप्त कार्यक्रम का संचालन नीलम जासूस के प्रबंधन श्री सुबोध भारतीय जी ने किया । उन्होंने योगेश मित्तल जी का परिचय करवाते हुये कहा- आज हम विश्व पुस्तक मेला 2025 नई दिल्ली में मौजूद हैं। यह नीलम‌ जासूस कार्यालय का स्टाॅल है और हमारे बीच हैं देश के सबसे बड़े Ghost writer (प्रेत लेखक) योगेश मित्तल जी । इन्होंने विभिन्न लेखकों के नाम से साढे चार सौ (450) से ज्यादा पुस्तकें लिखी हैं। हमने (नीलम जासूस कार्यालय) भी इनकी तीन पुस्तकें प्रेत लेखक की आत्मकथा, वेदप्रकाश शर्मा- यादें, बातें और अनकहे किस्से और एक उपन्यास शैतान ।

रविवार, 29 दिसंबर 2024

आकाश ठाकुर

नाम- आकाश ठाकुर
प्रकाशक- वीर पॉकेट बुक्स, मेरठ

लेखक आकाश ठाकुर और प्रकाशक 'वीर पॉकेट बुक्स' नाम मेरी नजर में पहली बार ही आया है। इस विषय में कोई विषय जानकारी उपलब्ध नहीं है।
वीर पॉकेट बुक्स के एक सेट में रितुराज जी के दो उपन्यास 'प्यासी कली' और 'बदनसीब' का विज्ञापन देखने का अवश्य मिला है।
आकाश ठाकुर के उपन्यास
  1. विक्रांत और खूनी टाइगर
  2. विक्रांत और चक्रम

रविवार, 8 दिसंबर 2024

शारदा पाॅकेट बुक्स, मेरठ

       शारदा पॉकेट बुक्स, मेरठ

जहां मेरठ उपन्यास साहित्य का केन्द्र रहा है, वहीं यह भी विदित रहे कि यहाँ प्रकाशन असंख्य पनपे और खत्म हुये थे।
और 99% प्रकाशन 'जैन परिवार' के  ही थे।
इसी क्रम में एक प्रकाशन का और नाम सामने आता है और वह है शारदा पॉकेट बुक्स, मेरठ।
यह प्रकाशन किस दशक में था, कब बंद हुआ यह तो कन्फर्म जानकारी नहीं अपितु यह सन् 2000 से पूर्व का ही था, जब मेरठ में उपन्यास साहित्य का स्वर्णकाल रहा था।
इस प्रकाशन से संबंधित कुछ जानकारी मिली हैं।
शारदा पॉकेट बुक्स के मालिका का नाम 'घसीटा मल जैन' था, यह प्रकाशन क्षेत्र में 'जी. एम. जैन' से जाने जाते थे।
हालांकि यह प्रकाशन ज्यादा नहीं चला।

शारदा पॉकेट बुक्स, मेरठ

  शारदा पॉकेट बुक्स के एक सैट का परिचय-

1. विक्रांत की अरब यात्रा-   ओमप्रकाश शर्मा
2. मैडम इन चाइना-             चंदर
3. लाशों की बस्ती-              एन. सफी
4. खून का पुजारी-               वेदप्रकाश काम्बोज
5. गुजरते दिन, तड़पती यादें- मस्तराम

धन्यवाद- मनेष जैन (रवि पॉकेट बुक्स, मेरठ)

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2024

कंवल पाॅकेट बुक्स, दिल्ली

कंवल पॉकेट बुक्स, दिल्ली 

कंवल पॉकेट बुक्स, दिल्ली-35
A-1/239B, लाॅरेसं रोड़, 
दिल्ली-110035

पॉकेट बुक्स के इतिहास में असंख्य प्रकाशक आये और गये । कुछ का नाम चला और कुछ अँधेरे में लुप्त हो गये ।
   इस शृंखला में हमारा प्रयास रहेगा आपको पॉकेट बुक्स के विषय में जानकारी देने का ।
हालांकि हमने ब्लॉग पर पहले भी काफी प्रकाशकों के विषय में जानकारी शेयर की है।
  आज हम प्रस्तुत कर रहे हैं दिल्ली के एक पुराने प्रकाशन 'कंवल पॉकेट बुक्स' के विषय में ।
इसके मालिक का नाम 'जगदीश कंवल' था, जो दिल्ली के निवासी थे। इनके प्रकाशन का एक उपन्यास 'कत्ल के बाद कत्ल' पढने को मिला, जिसके लेखक संजय नागपाल हैं। इस उपन्यास मं दिये गये विज्ञापनों से यही प्रतीत होता है की इस प्रकाशन का अधिकांश लेखन 'छद्म लेखन' में ही आता है।
आप भी इनको के नाम देख लीजिये- कंवल, संजय नागपाल, जगदीश, चन्द्रेश, कामना इत्यादि।
'जगदीश' नाम स्वयं प्रकाशक महोदय का था। उन्हे लिखने का शौक था। यह नाम वास्तविक भी है।
दूसरा इन्होंने अपने 'कंवल' नाम से पॉकेट बुक्स स्थापित की और इसी नाम से उपन्यास प्रकाशित किये ।
संजय नागपाल नाम थोड़ा वास्तविक प्रतीत होता है, पर इसकी सत्यता हम नहीं परख सकते।
शेष दो नाम 'चन्द्रेश' और 'कामना' समान्यत Ghost writing ही है।
   आदरणीय योगेश मित्तल जी के शब्दों में - "हां, यह प्रकाशन बन्द हो चुका है। ज्यादा सैट नहीं निकले। जगदीश कंवल को लेखक बनने का शौक था। कोई छापने वाला नहीं मिला। पास में पैसा था। खुद प्रकाशक बन गये। इस तरह के प्रकाशन कभी ज्यादा नहीं चलते। हद से हद दो तीन सैट्स तक ही ज़िन्दगी होती है इनकी। फिर बन्द हो जाते हैं। यह भी बन्द हो गया।"

 कंवल पाकेट से प्रकाशित कुछ उपन्यासों की जानकारी
जगदीश-          कांच के टुकड़े, दर्द भरा आंचल, उनके सितम
कंवल-              दर्द के रिश्ते, थोड़ा सा प्यार, उजड़ा आशियाना
संजय नागपाल- कत्ल के बाद कत्ल, जहरीली नागिन
चन्द्रेश-             चूड़िया, नया सुहाग, मुकद्दर
कामना-          ‌  भाई बहन, अधूरी सुहागिन


मंगलवार, 29 अक्टूबर 2024

सुभाष प्रभाकर

नाम- सुभाष प्रभाकर
प्रकाशक- तरंग पॉकेट बुक्स, मेरठ
जासूसी कथा साहित्य की खोज में एक और नाम देखने को मिला है- सुभाष प्रभाकर ।
  मेरठ के प्रकाशन 'तरंग पॉकेट बुक्स' का एक विज्ञापन देखने को मिला है जिसमें सुभाष प्रभाकर के एक उपन्यास का वर्णन है।
हालांकि सुभाष प्रभाकर वास्तविक नाम है या छद्म लेखन (Ghost Writer) यह तो नहीं कहा जा सकता है। और न हीं सुभाष प्रभाकर का अभी तक कोई उपन्यास देखने को मिला है।
 किसी पाठक के पास सुभाष प्रभाकर जी से संबंधित कोई सूचना हो तो हमसे अवश्य शेयर करें।
Sahityadesh@gmail.com


सुभाष प्रभाकर के उपन्यास
  1.  शतरंज के मोहरे

तरंग पॉकेट के एक सैट की सूचना


मंगलवार, 18 जून 2024

कानून का पाण्डव, करेगा ताण्डव- केशव पण्डित, उपन्यास अंश

 साहित्य देश के लोकप्रिय स्तम्भ 'उपन्यास अंश' में इस बार पढें चर्चित उपन्यासकार केशव पण्डित का दहकते शोले सा उपन्यास 'कानून का पाण्डव करेगा ताण्डव' का एक रोचक अंश ।
"मुझे सबसे बड़ा अफसोस तो मिस्टर केशव पण्डित पर हो रहा है योर ऑनर ! मिस्टर पण्डित ने अपनी जिन्दगी में मुजरिमों के खिलाफ केस लड़े तो उन्हें मुजरिम साबित करके सजा दिलवाई। किसी निर्दोष की पैरवी की तो उसे निर्दोष साबित करके बा-इज्जत बरी कराया। यानि इन्होंने हमेशा कानून की मदद की। इन्साफ के इस मन्दिर में मुजरिमों को सजा और मजलूमों को इन्साफ ही दिलवाया। कभी भी किसी मुजरिम को बचाने और मजलूम या निर्दोष को फंसाने की चेष्टा नहीं की। इन्हें जब पूरा विश्वास हो गया कि इनका मुवक्किल सच्चा और निर्दोष है, तभी उसे अपना मुवक्किल बनाया और मुजरिम को सजा दिलवाकर उसे इन्साफ दिलवाया। लेकिन...।"
          अधेड़ व अधगंजे सरकारी वकील कालीचरण वर्मा ने अपनी वाणी को अल्प-विराम दिया, फिर कठघरे में मुल्जिम के रूप में खड़े दढ़ियल युवक को घृणा भरी नजरों से देखा, फिर न्याय की कुर्सी पर विराजमान जज महोदय से सम्बोधित होकर बोला "... लेकिन इस बार मिस्टर पण्डित कैसे गच्चा खा गये... मेरी समझ से परे की बात है। मैं ये इल्जाम भी नहीं लगा सकता कि मिस्टर पण्डित ने जानबूझकर एक मुजरिम को बचाने के लिये ये केस अपने हाथ में लिया। क्योंकि मुजरिम मजनूं एक टैक्सी ड्राइवर है, जो कि स्वयं को बचाने के लिये बहुत मोटी रकम खर्च नहीं कर सकता। मिस्टर पण्डित लाख-दो लाख रुपयों के लिये तो अपना ईमान नहीं बेचेंगे... अपने जमीर का गला नहीं घोटेंगे। मुजरिम कोई बड़ी हस्ती होता तो सोचा भी जा सकता था कि मिस्टर पण्डित ने मोटी रकम के लालच में एक मुजरिम को निर्दोष साबित करने को ये केस ले लिया। वैसे भी मिस्टर पण्डित की सच्चे और ईमानदार वकील की छवि है। इनसे ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती कि ये कानून और अदालत को भ्रमित करके इन्साफ का गला घोंटने की चेष्टा करेंगे...।"
"आप कहना क्या चाहते हैं मिस्टर वर्मा...?" भीनी-भीनी मुस्कान के साथ पूछा जज महोदय ने।
"यही कि जिन्दगी में पहली मर्तबा मिस्टर पण्डित से गलती हो गई है। शायद मुजरिम इनके सामने रोया-गिड़गिड़ाया होगा झूठी कसमें खाकर स्वयं को निर्दोष बतलाया होगा और मिस्टर पण्डित भावनाओं में बह गये होंगे। एक मुजरिम को निर्दोष समझकर इन्होंने उसकी पैरवी करने की गलती कर डाली। मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि मिस्टर पण्डित अपनी जिन्दगी में पहली बार कोई केस हारेंगे। इनके लगातार जीतने का रिकॉर्ड टूटेगा। इनकी वो काबिलियत धूल में मिल जाने वाली है, जिसके कारण लोग इन्हें दिमाग का जादूगर कहते हैं। मुझे इनके हारने का अफसोस तो है ही, लेकिन इस बात पर गर्व भी महसूस हो रहा है कि दिमाग के जादूगर को शिकस्त देने का श्रेय मुझे मिलेगा। क्योंकि आज ही मैं ये साबित कर दूंगा कि कठघरे में खड़े मजनूं नाम के इस भोले-भाले नजर आने वाले हैवान ने ही सलोनी का कत्ल करके मेरे मुवक्किल मिस्टर प्रकाश की दुनिया उजाड़ डाली है...।" 

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