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शुक्रवार, 25 नवंबर 2022

रणविजय सिंह का चरित्र चित्रण - तरकीब उपन्यास

 उपन्यास साहित्य में कुछ पात्र ऐसे होते हैं जो पाठकवर्ग में अपनी विशेष पहचान छोड़ जाते हैं। वह पात्र चाहे जैसा भी हो, अच्छा या बुरा लेकिन उसका व्यवहार, चरित्र ऐसा होता है जो पाठक को प्रभावित कर लेता है। 
   श्री आलोक खालौरी जी का तृतीय उपन्यास है 'तरकीब'। इसी उपन्यास का खल पात्र है रणविजय। रणविजय विपक्षी पार्टी का नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री रह चुका है। लेकिन उसका चरित्र ऐसा है जो एक अलग पहचान स्थापित करता है और वह उपन्यास का मुख्य खल पात्र है।
  यहाँ हम  'तरकीब' उपन्यास के खल पात्र रणविजय के चरित्र को समझने का प्रयास करते हैं।
चित्र गूगल से

1. शारीरिक चित्रण-  रणविजय शारीरिक रूप से मजबूत और आकर्षक व्यक्तित्व है। इस आकर्षण के बल पर सामने वाले को प्रभावित भी करता है। 
  उसका वर्णन देखें।
रणविजय कोई पचपन साल का औसत क़दकाठी का आदमी था। सिर पर घने काले बाल थे, जो वक़्त के साथ सफेद हो चले थे। गोरा रंग, सुंदर नैननक़्श, आँखों पर सुनहरी फ्रेम का नज़र का चश्मा लगाए, वह बहुत ही संभ्रांत और पढ़ा लिखा नज़र आता था, जबकि पढ़ाई-लिखाई के नाम पर वह दसवीं फेल था, और सभ्रांत दिखने का, उसके इस ऊँचाई तक पहुँचने में बहुत बड़ा रोल था। (उपन्यास अंश)
2. फर्श से अर्श तक का सफर- रणविजय ने अपने जीवन में बहुत संघर्ष देखा है, लेकिन उसने कभी हार स्वीकार नहीं की। छल- बल से उसने अपने आपको स्थापित किया है। यही कारण है की एक दसवीं फेल आटो ड्राइवर से वह केन्द्र सरकार में मंत्री पद तक पहुँच गया।

रविवार, 16 मई 2021

मेरठ का बदमाश- पात्र चर्चा

मेरठ का बदमाश- गैरीसन
हम जब भी कोई कृति पढने हैं तो उस कृति में कोई न कोई संवाद, घटना या पात्र हमें ऐसा मिल ही जाता है जो पाठक को प्रभावित करता है।
   पाठक भी एक बार उपन्यास को पढना छोड़ कर उसके विषय में सोचने लगता है।
आदरणीय वेदप्रकाश शर्मा जी का उपन्यास 'सिंगही और मर्डरलैण्ड' पढते वक्त भी एक ऐसा पात्र सामने आया जिसने कम भूमिका होते हुये भी अपना प्रभाव स्थापित किया। वह पात्र है गैरीसन। 
    यहाँ गैरीसन के विषय में चर्चा करने का एक और विशेष कारण है वह है -गैरीसन का मेरठ का बदमाश होना। वेदप्रकाश शर्मा जी स्वयं मेरठ के निवासी थे और उन्होंने यहां के एक पात्र का सर्जन किया।
     हालांकि गैरीसन नामक पात्र की भूमिका बहुत कम है, लेकिन विजय के साथ टकराते वक्त विजय भी उसकी ताकत को स्वीकारता है।
एक दृश्य देखें
विजय गुलफाम की ओर थोड़ा झुककर बोला-"गैरीसन नाम के किसी गुण्डे को जानते हो?"
"क्या? गैरीसन....।"- लगता था गुलफाम गैरूसन के नाम पर बुरी तरह से चौंका था।
" हाँ, क्या तुम गैरीसन से परिचित हो?"
"आप उसके विषय में क्यों पूछ रहे हो?"
"उस से काम है थोड़ा।"
"गैरीसन बहुत घाघ व्यक्ति है, बेहद खतरनाक लड़का है वो। आजकल उसकी खूब चल-पिल रही है। उसके इलाके में उस से टकराना आत्महत्या करना समझा जाता है। वास्तव में मास्टर, मैंने भी उसे कई बार देखा है, वह खतरनाक व्यक्ति है।"- गुलफाम एक ही साँस में कह गया।
" प्यारे गुलफाम‌ मियां।"- विजय बोला-"शायद भूल रहे हो तुम कि किस से बातें कर रहे हो। गैरीसन इससे ज्यादा खतरनाक नहीं हो सकता, जितने अपने जमाने के तुम थे।"
"वो तो मैं जानता हूँ मास्टर, लेकिन मेरे ख्याल से उसके इलाके में जाकर उससे टकराना मौत के बस का रोग भी नहीं है। अगर आप कहें तो उसे यहाँ बुलवा दूँ?"

"नहीं प्यारे, अब हम वहीं जाकर उससे मिलेंगे। तुम उसकी तारीफ के पुल बाँधना छोड़ दो और उसके विषय में क्या जानते हो वह बताओ।"
"उसके विषय में यह सुना गया है कि वह मेरठ का बदमाश है, वहाँ पहले बहुत शरीफ था, किंतु सामाजिक तत्वों ने उसे बदमाश बनने पर मजबूर कर दिया और देखते ही देखते उसकी बदमाशी इतनी बढ गयी कि समस्त मेरठ उससे काँपने लगा। मेरठ की बदमाशी नामी है, ये तो आप जानते ही हैं।" (पृष्ठ-56,57)
  गैरीसन और विजय के मध्य एक लड़ाई का दृश्य भी है। यहाँ विजय को यह महसूस होता है कि यह गैरीसन को हराना कोई आसान काम नहीं है।
पहला वार किया विजय ने।
उसने उछलकर एक फ्लाइंग किक जमानी चाही, किंतु तुरंत ही विजय की आँख खुल गयी। सिर्फ आँख ही न खुल गई बल्कि जनाब की नानी भी याद आ गयी। साथ ही यह पता लग गया कि गैरीसन भी वह रसगुल्ला नहीं है, जिसे बस तुरंत ही हजम कर जाओ।(पृष्ठ-65)
    यह तो तय था कि विजय और गैरीसन के मध्य हुयी लड़ाई में विजय की जय तय है। और होता भी यही है लेकिन‌ इस लडा़ई के दौरान जब विजय गैरीसन पर शारीरिक रूप से विजय प्राप्त कर उसे मानसिक रूप से भी मात देता है तभी एक नकाबपोश गैरीसन की हत्या कर देता है।      विजय जैसा व्यक्ति भी गैरीसन से प्रभावित था, तभी तो वह उसकी मृत्यु पर दुखी होता है।
गैरीसन को उठाया गया, तेजी से अस्पताल पहुँचाने का प्रयास किया गया किंतु व्यर्थ। रास्ते में ही गैरीसन ने प्राण त्याग दिये।
न जाने क्यों विजय को गैरीसन की मौत का गहरा अफसोस था। (पृष्ठ-68)
उपन्यास- सिहंगी और मर्डरलैण्ड
लेखक-    वेदप्रकाश शर्मा 
धन्यवाद।
उपन्यास पढते वक्त आपके सामने भी ऐसे पात्र आये होंगे जिनसे आप प्रभावित हुये हैं। अगर आप उन पात्रों पर अपने विचार लिख कर भेजते हैं तो 'साहित्य देश ब्लॉग' पर आपके नाम के साथ उनका प्रकाशन होगा।
संपर्क- sahityadesh@gmail.com

रविवार, 4 अगस्त 2019

रघुनाथ और विजय नामकरण

मेरे मन में एक इच्छा थी की उपन्यास पात्रों पर एक श्रृंखला आरम्भ की जाये जिसमें  पात्रों के बारे में महत्वपूर्ण बाते/घटनाएं आदि वर्णित हो। जैसे इमरान, अलफांसे, विमल, देवराज चौहान, नाना पाटेकर, विजय-विकास जैसे बहुसंख्यक पात्रों पर कुछ लिखा जाये।
श्री मान प्रवीण जैन जी ने एक सराहनीय प्रयास किया है और यह प्रयास स्वयं में अनूठा और एकदम अलग है। प्रवीण जी ने आदरणीय वेदप्रकाश कांबोज साहब के पात्रों का ज्योतिषीय महत्व रेखांकित किया है। 
इस श्रृंखला की प्रथम कड़ी में आप पढेंगे रघुनाथ और विजय के नाम का ज्योतिषीय महत्व। (गुरप्रीत सिंह, साहित्य देश)
     

     भाई वेद प्रकाश कम्बोज के जासूसी उपन्यास पढ़ने वाले मित्र उनके अन्य पात्र रघुनाथ को नही भूल सकते खास तौर से इसलिए कि विजय हमेशा उसे प्यारे तुला राशि कह कर सम्भोदित करता है। पाठको को ऐसी अनुभूति होती है जैसे अपने किसी अति घनिष्ठ मित्र से मिल रहे हो। पर क्या कभी आपने पढ़ा है कि विजय को किसी ने, रघुनाथ ने भी  वृष राशि कह कर पुकारा हो। नही न। ऐसा इसलिए कि कम्बोज ने कभी ऐसा लिखा ही नही। परंतु जाने अनजाने में उन्होंने दोनों के मध्य एक ज्योतिषीय साम्य प्रस्तुत किया है। वृष और तुला दोनो राशियों का स्वामी ग्रह शुक्र है। और उनकी मित्रता का मजबूत आधार है। रघुनाथ हमेशा विजय के पास प्रोफेशनल मदद की अपेक्षा करता है। क्यों? इसका उत्तर दोनो के नज़्म में ही छुपा है।
     विजय का नामांक 1, रघुनाथ के नामांक 5 का मित्र है इसके विपरीत रघुनाथ के नामांक 5 के लिए विजय का नामांक सपोर्टिव है मददगार है।
ज्योतिष के विद्वान जैमिनी ज्योतिष से भली भांति परिचित है। इसमें अंको की 'क, ट, प, य' आदि पद्धति से भावो को इंगित किया जाता है। इस पद्धति से विजय और रघुनाथ दोनों शब्दो से कुंडली के प्रथम भाव का बोध होता है।
   दोनों के राशि स्वामी होने से नव पंचम दोष इनके सम्बन्धो में बाधक नही बनता।।

लेखक- प्रवीण जैन
 
प्रस्तुत पोस्ट आपको कैसी लगी। अपने विचार अवश्य व्यक्त करें। 

शनिवार, 25 नवंबर 2017

अनिल मोहन के पात्र

अनिल मोहन (अपडेट जारी)
थ्रिलर सीरिज
1) जुर्म का जहाज
2) आतंक के साये
3) मौत की शतरंज
4) सीक्रेट एजेंट
5) नकली चेहरा
6) घर का भेदी
7) कसाई
8) खुन का रिश्ता
9) नफरत की दिवार
10) अनोखी दुल्हन
11) खून कि प्यासी
12) दो नवों का सवार
13) दाव

मोना चौधरी सीरिज <3

1 चूङेल एक्सप्रेस
2 जिंदाबाद
3 आतंक का चेहरा
4 सौ सुनार की एक लुहार की
5 कहीं पे निगाहें कहिं पे निशाना
6 मैडम डाईनामाईट की वापसी
7 खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे
8 हरी झंडी
9 दहाङ
10 जल्लाद
11 नया नौ दिन पुराना सौ दिन
12 कब्बाब मे हड्डी
13 लम्बी रेश का घोङा
14 अघोरी
15 हूक्म मेरे आका
16 एक अनार सौ बिमार
17 गुलेल
18 बुढी घोङी लाल लगाम
19 खबरी
20 गिरगिट
21 सुंरग
22 एक म्यान दो तलवारे
23 आ बैल मुझे मार
24 मोना चौधरी खतरे में
25 तू चल मैं आई
26 दौलत बुरी बला
27 नागीन मेरे पीछे
28 एक तीर दो शिकार
29 बुरे फसे
30 जान बची लाखों पाये
31 बल खाती बला
32 डायनामाईट
33 लाल बत्ती
34 बिगुल।

<3 देवराज चौहान+मोना चौधरी सीरिज <3
1) हमला
2) जालिम
3) सरगना
4) मास्टर
5) गुड्डी
6) मंत्र
7) जथुरा
8) पोते बाबा
9) महाकाली
10) बंधक
11) सबसे बङा हमला
12) wanted अली
13) जीत का ताज
14) ताज के दावेदार
15) कौन लेगा ताज
16) पहली चोट
17) दुसरी चोट
18) तिसरी चोट
19) महामाया की माया
20) नागमणी
21) नरबली
22) नागिन
23) देवदासी
24) इछाधारी
25) नागराज की हत्या
26) विष मानव
27) मैं हु देवराज चौहान
28) सबसे बङा गुंडा
29) महल {आगामी उपन्यास}

अर्जुन भारद्वाज सीरिज
1) किंबो
2) काम का मोहरा
3) कुएं का मेंढक
4) हिंसा का तांडव
5) खतरनाक आदमी
6) गैंगस्टर
7) खतरे का हथौङा
8) प्यादा
9) एक का दस
10) दरौगा
11) निशाना
12) एक चाल मेरी भी
13) नगाङा
14) मेहरा मर्डर केस
15) दौलत का डंक
16) दौलत की खातिर
17) कुर्बानी का बकरा
18) हमशक्ल

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 लोकप्रिय उपन्यास साहित्य को समर्पित मेरा एक ब्लॉग है 'साहित्य देश'। साहित्य देश और साहित्य हेतु लम्बे समय से एक विचार था उपन्यासकार...