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Thursday, September 29, 2022

यादें वेदप्रकाश शर्मा जी की -25

 वो आखिरी मुलाकात। 
अंतिम अंक, प्रस्तुति- योगेश मित्तल
योगेश मित्तल जी द्वारा लिखित संस्मरण 'यादें वेदप्रकाश शर्मा जी की' शृंखला का पुस्तक रूप में प्रकाशन किया जा चुका है। इसलिए इस शृंखला को यहीं पूर्ण किया जा रहा है। आप इस शृंखला को योगेश मित्तल जी द्वारा लिखित 'वेदप्रकाश शर्मा- यादें, बातें और अनकहे किस्से' (पृष्ठ-300) नामक रचना में पढ सकते हैं।

यादें वेदप्रकाश शर्मा जी की -25 अंक उस पुस्तक में से लिया गया। 


फिर महीनों बीत गये।
'एक ही नारा - केशव हमारा' भी छपकर, बिक-बिकाकर खत्म हो गई। मैं अपनी लिखी किताबों की राइटर्स कॉपी लेने भी नहीं गया। बाद में जब मेरठ गया, तब शगुन नेकहा- 'अंकल, अभी कॉपी नहीं है। वापसी आयेगी तो मैं आपके एडरेस पर पाँच कॉपी भिजवा दूँगा ।'
'नहीं, कोई जरूरत नहीं है। मैं खुद ही आते-जाते, मिल-मिलाकर ले लूँगा।' मैंने कहा। 
मुझे अच्छी तरह याद नहीं कि उसके बाद मेरा अगला चक्कर कितने महीनों या साल के बाद लगा, पर याद है कि तब शास्त्रीनगर में ही वेद के परिचितों में से किसी के यहाँ चोरी की घटना घटी थी। खास बात यह थी कि जिनके यहाँ चोरी हुई थी, वे मेरठ से बाहर थे।

Wednesday, September 28, 2022

यादें वेदप्रकाश शर्मा जी -24

 यादें वेद प्रकाश शर्मा जी  की - 24
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'यादें वेदप्रकाश शर्मा जी की'  संस्मरण के रचयिता योगेश मित्तल जी इस अंक में बता रहे हैं वेद जी से जुड़े रोचक पल।
 वेद ने कहा और मैं लग गया धन्धे पे। कीबोर्ड पर अब मेरी अंगुलियाँ पहले से फास्ट चलने लगी थीं। अंग्रेजी के कीबोर्ड के किस-किस अल्फाबेट से हिन्दी के स्वर और व्यंजन के कौन-कौन से अक्षर आते हैंसारा विवरण मेरी मेमोरी में ऐसे फिक्स हो गया था कि टाइपिंग करते हुए अंगुलियों को सेकेण्ड मात्र ही लगता थालेकिन एक समस्या थीवह यह कि मैंने बाकायदा टाइपिंग नहीं सीखी थीइसलिये दोनों हाथों की अंगुलियों से टाइपिंग नहीं करता थादायें हाथ की तर्जनी ही मेरी टाइपिंग का एकमात्र औजार थी और यह स्थिति आज भी बरकरार है और अब बाकायदा टाइपिंग सीखने और दोनों हाथों की सारी अंगुलियाँ चलाने की आवश्यकता महसूस ही नहीं होती। 
यह मैंने इसलिये लिखा हैक्योंकि जो मित्र टाइपिंग नहीं जानतेलेकिन कम्प्यूटर पर काम करना चाहते हैंवे मन में किसी प्रकार की निराशा नहीं रखेंएक अंगुली से भी टाइपिंग का भरपूर मज़ा लिया जा सकता है। 

Monday, September 26, 2022

नये उपन्यास

 नमस्कार पाठको मित्रो,
  साहित्य देश के स्तम्भ 'नये उपन्यास' में प्रस्तुत है कुछ नये उपन्यासों की जानकारी।  और एक नये लेखक महोदय का नया उपन्यास भी आपके समक्ष प्रस्तुत है। 
1. काम्बोजनामा- राम पुजारी
प्रकाशक-      नीलम जासूस कार्यालय
      लोकप्रिय उपन्यास साहित्य के मजबूत स्तम्भ आदरणीय श्री वेदप्रकाश काम्बोज जी के लेखन से प्रेरित होकर युवा लेखक राम पुजारी जी ने काम्बोज जी की जीवनी 'काम्बोजनामा' लिखी है। 
कांबोजनामाःकिस्सा किस्सागो का...यह हिंदी पल्प फिक्शन का एक ऐसा अनमोल दस्तावेज है जिसके बिना हिंदी के लोकप्रिय साहित्य का इतिहास पूरा नहीं हो सकता। युवा लेखक राम पुजारी द्वारा वर्षों के अनुसंधान के बाद यह बृहद ग्रंथ लिखा गया है जो कि हिंदी पल्प फिक्शन के हर एक पाठक को पढ़ना चाहिए। रोचक शैली में लिखी गई एक अनमोल पुस्तक
  यह जीवनी काम्बोज जी के जीवन के अतिरिक्त तात्कालिक समय और साहित्य पर भी प्रकाश डालती है। 
  लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में 70 वर्ष कोई जीवनी प्रकाशित हुयी है। कुशवाहा कांत जी के योग्य शिष्य ज्वाला प्रसाद केसर जी ने कुशवाहा कांत जी की जीवनी लिखी थी और अब यह प्रयास किया है वेदप्रकाश काम्बोज जी के शिष्य राम पुजारी जी ने।
   पठनीय और संग्रहनीय रचना है।
प्राप्ति लिंक - काम्बोजनामा 
पृष्ठ - 338
मूल्य - 400₹


2. खूनी मसीहा- सुरेश चौधरी
प्रकाशक -     shopizen
  सामाजिक उपन्यास लेखन में अपनी पहचान बना चुके सुरेश चौधरी जी 'खूनी मसीहा' उपन्यास के साथ जासूसी उपन्यास में पदार्पण कर चुके हैं। 
  एक नये विषय पर लिखा उनका यह उपन्यास रोचक और पठनीय है।
लिंक - खूनी मसीहा
मूल्य - 277₹

3. ब्लैकमेल - हादी हसन
प्रकाशक -  flydreams
         'जहरीली' के पश्चात यह जादी हसन जी का द्वितीय उपन्यास है जो उनके स्वयं के नाम से प्रकाशित हुआ है। अगर आपने हादी हसन जी का 'जहरीली' उपन्यास पढा है तो आप उनके लेखन की क्षमता से परिचित होंगे ही।
         वह सब कुछ देखता है। वह सब सुनता है। उसे सबकी खबर है लेकिन हर कोई उससे बेखबर है।
उसे हर गुनाह की जानकारी है और इसी जानकारी के बल पर वो करता है सबको ब्लैकमेल
क्या होगा जब उसका टकराव होगा मेजर रनवीर बरार से?
जानने के लिए पढ़ें एक सनसनीखेज पेशकश - ब्लैकमेल

प्राप्ति लिंक - ब्लैकमेल
पृष्ठ -   219
मूल्य - 199

4. एसिड मैन- शुभानंद , रुनझुन सक्सेना
प्रकाशक -   सूरज पॉकेट बुक्स
          डाॅ. दम्पति अपने संयुक्त लेखन के साथ पाठक के लिए एक अनमोल रचना लेकर प्रस्तुत हुये हैं। यह उपन्यास एक मर्डर मिस्ट्री है। 
मुम्बई के एक फ्लाईओवर के भूमिपूजन के दौरान मुख्यमंत्री की उपस्थिति में जमीन के नीचे से उजागर हुई लाश ने जो हलचल मचाई उसने पुलिस महकमे, मीडिया व पूरे शहर को हिला कर रख दिया। केस पर सीआईडी ऑफिसर मकरंद राज और विजय को लगा दिया गया जिनके हाथ सबूत के नाम पर एक पार्किंग टिकट के सिवा कुछ न लग सका। हालांकि डॉक्टर मैत्रेयी व उसकी फोरेंसिक टीम की इंवेस्टिगेशन से उजागर हुए रहस्यों के बाद लाश की पहचान हो सकी। जिसकी लाश मिली थी उसे मुम्बई की पब्लिक ‘एसिड मैन’ नाम से जानती थी। अब पूरा शहर एसिड मैन के क़ातिल को जानने के लिये उत्सुक था।

‘ड्रॉप डेड’ के बाद फोरेंसिक साइंस और थ्रिल-सस्पेंस के समावेश से उपजी क्राइम एम डी सीरीज़ की एक और सनसनीखेज मर्डर मिस्ट्री

प्राप्ति लिंक - द एसिड मैन
पृष्ठ -   170
मूल्य - 155₹


5. संचिता मर्डर केस - विकास सी. एस. झा
प्रकाशक - सूरज पॉकेट बुक्स
      विकास जी का उपन्यास बैंक राॅबरी और मर्डर मिस्ट्री का संगम लिये हुये है। अपनी लेखनी से पाठकों को आकृष्ट करने वाले विकास जी का यह उपन्यास रोचक है।
वो एक हसीन सूरत और जहीन सीरत वाली लड़की थी जिसकी लाश एक शाम उसकी ही कार से बरामद हुई थी। मासूम सी दिखने वाली उस लड़की के क़त्ल की जांच जब शुरू हुई तो बैंक रॉबरी और तीन और क़त्ल का मामला सामने आया। एक ऐसी कहानी जो आपके दिमाग की नसों को झकझोड़ कर रख देगी। जहां हर शख्स को कत्ल का मौका भी हासिल था और मकसद भी। मगर जब राज़ खुला तो मानो लोगों के पैरों तले जमीन ही खिसक गई। सनसनीखेज खुलासों के साथ अश्विन ग्रोवर का एक नया कारनामा।
लिंक - संचिता मर्डर केस 
पृष्ठ- 224
मूल्य - 165₹

6. मैं गुनहगार हूँ - मोहन मौर्य
प्रकाशक - सूरज पॉकेट बुक्स
     मोहन मौर्य जी अपने पूर्व उपन्यास 'बो बेगुनाह थी' से आगे की कहानी लेकर उपस्थित हुये हैं। ध्यान रहे प्रस्तुत उपन्यास 'मैं गुनहगार हूँ' पूर्व उपन्यास 'वो बेगुनाह थी' का कोई भाग नहीं है। दोनों का कथानक अलग है। यह बेहतरीन थ्रिलर रचना है‌। अगर आपने 'वो बेगुनाह थी' पढी है तो आपको पता होगा मोहन मौर्य जी कितना अच्छा थ्रिलर लिखते हैं। 
जासूसी उपन्यास पढ़ने का शौकीन 38 वर्षीय आई टी प्रोफेशनल राहुल वर्मा जब ड्रग्स केस में फंसी एक 22 वर्षीय खूबसूरत लड़की को बेगुनाह साबित करने निकला तो खुद एक ऐसा गुनाह कर बैठा था, जिसकी वजह से ना सिर्फ एक बेगुनाह फांसी के फंदे पर जा पहुँचा बल्कि उसका खुद का भी जीना दुश्वार हो गया।अपनी आत्मा पर लगे ‘मैं गुनहगार हूं’ के दाग को मिटाने के लिये फिर उसने जो रास्ता चुना, उसने आगे चल कर ऐसा रुख अख्तियार किया जिसने न सिर्फ हैदराबाद के ड्रग्स माफिया को हिला डाला बल्कि उसकी खुद की जान के लाले भी पड़ गये।
लिंक - मैं गुनहगार हूँ
मूल्य- 165₹
प्रकाशन तिथि- 30 अगस्त 2022

7. खिलाड़ी नम्बर वन - राजेश शर्मा
       लोकप्रिय साहित्य में एक और लेखक का पदार्पण हो चुका है। गाजियाबाद के लेखक राजेश शर्मा जी का यह प्रथम उपन्यास है।

प्राप्ति लिंक- खिलाड़ी नम्बर वन
मूल्य- 390₹

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यादें वेदप्रकाश शर्मा जी की -23

यादें वेद प्रकाश शर्मा जी की - 23
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टावर वाली गली में उस समय गली के आरम्भ के किसी भी मकान के आसपास कोई नहीं था, ना ही उन मकानों के द्वार खुले हुए थे, लेकिन गली के पांचवें मकान का लोहे की सलाखों वाला मेन गेट खुला हुआ था और उसमें से एक गोरा-चिट्टा लम्बा और बेहद खूबसूरत नौजवान बाहर निकल रहा था।
मैं उसी मकान की ओर बढ़ गया। तभी मकान से दो और शख्स बाहर आये। एक कुछ छोटे कद का गेंहुए रंग का नौजवान था और दूसरा दबे सांवले रंग का औसत कद का नौजवान था, जो पहले नौजवान से कद में छोटा और दूसरे से बड़ा था।
मैं आगे बढ़ता हुआ उन तीनों अजनबियों के निकट पहुँचा और लम्बे और गोरे नौजवान से बोला-”यहाँ कोई कम्प्यूटर ठीक करने वाले रहते हैं?”
देवदत्त सर, हाँ, यही घर है।” लम्बा गोरा नौजवान बोला-”कोई काम है सर से....?”
मेरा कम्प्यूटर खराब हो गया है।”-  मैंने कहा। 
क्या गड़बड़ हुई है?”
*पता नहीं...। स्टार्ट नहीं हो रहा।” - मैंने कहा। 
कब से....?”

Sunday, September 25, 2022

यादें वेद प्रकाश शर्मा जी की - 22

यादें वेद प्रकाश शर्मा जी की - 22
 प्रस्तुति- योगेश मित्तल
सुशील कुमार से मेरी पहली मुलाकात उत्तमनगर, नन्दराम पार्क के बी ब्लॉक क्षेत्र में रामगोपाल के यहाँ हुई थी, जहाँ उन दिनों राजभारती जी द्वारा आरम्भ की गई नयी अपराध पत्रिका 'अपराध कथाएँ'  तथा माया पाकेट बुक्स में रजत राजवंशी नाम से प्रकाशित होने वाला पहला उपन्यास 'रिवाल्वर का मिज़ाज' कम्प्यूटर पर टाइप हो रहा था। 
रामगोपाल और उसकी पत्नी निशा दोनों ही सरकारी नौकरी में थे। उनके दो लड़के थे। उत्तमनगर में ही अपना मकान भी था, लेकिन रामगोपाल ने साइड बिजनेस के रूप में किसी भाई या अन्य के तीसरे नाम से कम्प्यूटर टाइपिंग और प्रिन्ट आउट का काम कर रखा था। 
       रामगोपाल के मकान में बाहर सामने खड़े व्यक्ति के हिसाब से बायीं ओर अन्दर जाने का लोहे की सलाखों का बड़ा और ऊंचा गेट था और दायीं ओर एक आम दरवाजों सा दरवाजा था, जो उस बाहरी कमरे का द्वार था, जिसमें तीन ब्लैक एण्ड व्हाइट मानीटर वाले फोर एट सिक्स कम्प्यूटर लगे थे। प्रिन्टर एक ही था। 
        जब हमने रामगोपाल के यहाँ काम आरम्भ करवाया था, तब तीन में से एक ही कम्प्यूटर पर एक भारी बदन की बहुत ही भले स्वभाव की लड़की उषा ही दिन भर टाइपिंग करती थी। शाम को जब रामगोपाल आफिस से लौटता तो टाइप्ड मैटर के पढ़े गये प्रूफ देखकर करेक्शन लगाने का काम वह स्वयं करता था। बाद में उषा की शादी तय हो गयी तो उसने काम छोड़ दिया और तब रामगोपाल के यहाँ कम्प्यूटर सीखने तीन लड़कियाँ आने लगी। एक मीना तो सामने ही रहने वाली जाट या गुर्जर लड़की थी, बाकी दोनों गढवाली लड़कियाँ आशा और कुसुम थीं। उन लड़कियों के आने के बाद रामगोपाल के यहाँ काम बहुत बढ़ गया। सीखने आई लड़कियाँ टाइपिंग भी करने लगीं थीं और रामगोपाल उनसे सिखाने के पैसे लेने की जगह काम करने के पैसे देने लगा था, लेकिन तब कम्प्यूटर जल्दी-जल्दी खराब होने लगे।  

Saturday, September 24, 2022

शंभुप्रसाद जैन 'अशोक'

 नामशंभुप्रसाद जैन 'अशोक' 

शंभुप्रसाद जैन 'अशोक' के उपन्यास
  अशोक जी के उपन्यास मासिक पत्रिका ' रहस्य' में प्रकाशित होते रहे हैं।
  1. फांसी का संगीत - अक्टूबर 1961
  2. पहाड़ी का भूत - जनवरी-1962
  3. भूत का परिचय - अप्रैल 1963
  4. अंतिम अपराध

पत्रिका-  रहस्य मासिक
उक्त लेखक के विषय में अन्य कोई जानकारी किसी मित्र को हो तो शेयर करें।
sahityadesh@gmail.com


Sunday, September 11, 2022

My Novel List

 मेरे पास उपलब्ध उपन्यासों की सूची

Last  update 31.08.2022

उपन्यास

उपन्यासकार मित्रों के साथ 17.09.2022 मेरठ

अंजुम अर्शी

फार्मुल प्लस फार्मुला माइंस

तलाश हत्यारे की

मुजरिमों का अजायबघर

अंसार अख्तर

मैंटल मसीहा

अकरम इलाहाबादी

मौत के सौदागर

अजगर

मौत बुलाती है

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