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वैसे तो यह हर शहर में रहने वाले, अपने शहर के लिए महसूस करते हों, पर दिल्ली वालों की बात कुछ और ही है।
दिल बड़ा है दिल्ली का, किसी भी गाँव, शहर, प्रान्त, देश का व्यक्ति दिल्ली आता है तो दिल्ली का होकर रह जाता है।
“जासूस शब्द सुनते ही दो नाम मस्तिष्क
की दीवारों पर उभरते हैं पहला शरलक होम्स और दूसरा इसके रचियता सर आर्थर कानन डॉयल
। 221 B, बेकर
स्ट्रीट में रहने वाला शरलक वह जासूस है जो अपनी विलक्षण प्रतिभा के बल पर अनुमान लगाता
है, तर्क
करता है और फिर निष्कर्ष पर पहुँचता है और अंत में अपराधियों का पता लगा लेता है ।”
हिन्दी भाषा में जासूस के लिए ‘गुप्तचर’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता था बाद में इसकी जगह जासूस शब्द प्रचलित होता चला गया । आचार्य विष्णुगुप्त चाणक्य ने मौर्य साम्राज्य की नींव और संचालन के लिए गुप्तचरों के एक ऐसे तंत्र की रचना की जोकि अभेद्य थी । उस काल खंड से लेकर आज के आधुनिक काल तक प्रशासन की सफलता गुप्तचरों अथवा जासूसों पर ही निर्भर रहती है । पुलिस विभाग में जब कोई व्यक्ति एक रकम के एवज में कोई सूचना या इन्फोर्मेशन देता है तो उसे ‘इन्फोर्मर’ कहा जाता है ।
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| वार्ष्णय टाइम्स, दिसम्बर2020 |
आइये, आपकी पुरानी किताबी दुनिया से पहचान करायें - 41
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