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रविवार, 19 अप्रैल 2026

आनंद कुमार सिंह

नाम-        आनंद कुमार सिंह
माता-       शांति सिंह
पिता-       स्व. अजित प्रसाद सिंह
जन्म -      18 दिसंबर
शिक्षा-      बीएससी
ईमेल -     anand.singhnews@gmail.com 
सम्प्रति-    पत्रकार 

प्रकाशित रचनाएँ
1. हीरोइन की हत्या 
2. रुक जा ओ जानेवाली
3. टिक टॉक टिक टॉक

(इसके अलावा  कहानी लेखन)

रविवार, 13 जनवरी 2019

कर्नल रंजीत

‘मख़मूर’ जालंधरी / MAKHMOOR JALANDHARI
‘मख़मूर’ जालंधरी
वास्तविक नाम: गुरबक्श सिंह
जन्म: 1915
मृत्यु: 1 जनवरी 1979

प्रसिद्ध उपन्यासकार कर्नल रंजीत साहब का वास्तविक नाम मख़मूर जालंधरी था। उन्होंने कर्नल रंजीत के नाम से हिंद पॉकेट बुक्स के लिए उपन्यास लेखन किया और 'मेजर बलवंत' नामक जासूस को स्थापित किया। 


‘मखमूर’ जालंधरी साहब का जन्म सन 1915 में पंजाब राज्य के जालंधर शहर के लालकुर्ती इलाके में हुआ था. उनके पिता का नाम केसर सिंह था. बचपन से ही उनको साहित्य से लगाव रहा. उन्होंने पढ़ाई के साथ साथ शायरी करना भी शुरू कर दिया था. 1938 में उनकी शादी दमयंती देवी से हुई. पढ़ाई समाप्त करने के बाद रोजगार की तलाश करने के दौरान उन्होंने आल इंडिया रेडियो जालंधर के लिये ड्रामे लिखने शुरू कर दिये. यह सिलसिला कई बरस तक चलता रहा. उनके लिखे ड्रामे श्रोताओं में खासे मकबूल होते थे. उन्होंने रेडियो के लिये लगभग 250 ड्रामा लिखे. उन्हीं दिनों वह प्रगतिशील लेखक संघ और कम्युनिस्ट पार्टी से भी जुड़ गये.

बुधवार, 12 दिसंबर 2018

अनिल सलूजा, परिचय, उपन्यास सूची


परिचय-
नाम- अनिल सलूजा
माता- कृष्णा रानी
पिता- रोशन लाल
जन्म- 15.04.1957
प्रथम उपन्यास- फंदा
हरियाणा निवासी अनिल सलूजा उपन्यास जगत के एक चर्चित नाम हैं। इनके लिखे उपन्यासों की जबरदस्त मांग रही है।
       इनके पात्र सतीश रावण उर्फ भेड़िया और स्मैकिया....काफी चर्चित रहे हैं। उनके अलावा अनिल जी ने बलराज गोगिया, राजा ठाकुर, रीमा राठौर सीरिज से भी उपन्यास लिखे।
     अनिल जी‌ ने आज तक सौ उपन्यास लिख चुके हैं जो विभिन्न प्रकाशन संस्थानों से प्रकाशित हो चुके हैं।
संपर्क-
अनिल सलूजा
मकान नंबर- 494
वार्ड नंबर- 12
पानीपत (हरियाणा)
अनिल सलूजा जी के उपन्यास
1. एक गुनाह और (रीमा राठौर)
2. अंधेर गर्दी  (बलराज गोगिया( शिवा पॉकेट बुक्स)
3. आदमखोर. (भेड़िया) धीरज पॉकेट बुक्स
4. आग लगे वर्दी को (तुलसी पेपरबुक्स)
5. अजगर- रीमा राठौर- शिवा पॉकेट
6. अटैक- रीमा राठौर- शिवा पॉकेट
7. आधा पागल (रीमा राठौर)-रवि पॉकेट बुक्स
8. अचंभा 
9. आघात- बलराज गोगिया( राधा पॉकेट बुक्स)(प्रथम भाग- लाश बिकाऊ है)
10. आखिरी अंग्रेज - रीमा राठौर- राधा पॉकेट बुक्स
11. बड़बोला
12. भगोड़ा (रीमा राठौर)
13. भेड़िया- रीमा राठौर- शिवा पॉकेट
14. बारूद की आँधी (बलराज गोगिया) धीरज पॉकेट बुक्स (खूंखार - द्वितीय भाग)
15. बदनसीब (बलराज गोगिया)
16. 
17. बच्चा दस करोड़ का- रीमा राठौर-माया पॉकेट बुक्स
18. बोतल- अजय जोगी- राधा पॉकेट बुक्स
19. छक्का (राजा ठाकुर)
20. चित्त भी मेरी पट्ट भी मेरी ( राधा पॉकेट बुक्स) -अजय जोगी
21. चैलेंज- रीमा राठौर- शिवा पॉकेट (इण्डिया पॉकेट बुक्स)
22. चोट- रीमा राठौर
23. धर्मराज (बलराज गोगिया)
24. दुर्योधन (राजा ठाकुर सीरीज)
25. दो मुँहा सांप (तुलसी पेपर बुक्स)
26. दौलत मेरी माँ (भेड़िया सीरीज़)
27. फंदा (प्रथम उपन्यास (बलराज गोगिया सीरिज)
28. गुण्डा (बलराज गोगिया) शिवा पाकेट
29. गिद्ध- भेड़िया
30. गले पड़ा ढोल - अजय जोगी- राधा पॉकेट बुक्स
31. हारा हुआ जुआरी (बलराज गोगिया)
32. हथगोला   (बलराज गोगिया) अगस्त 2005
33. हादसा- रीमा राठौर- शिवा पॉकेट
34. जजमेंट (बलराज गोगिया, सतीश रावण और रीमा राठौर) -प्रथम भाग- उस्ताद
35. जवाब देगी गोली (रीमा राठौर) शिवा पॉकेट बुक्स
36. खूंखार (बलराज गोगिया) धीरज पॉकेट- प्रथम भाग- बारूद की आंधी
37. कृष्ण बना कंस   (रीमा राठौर)
38. खून बहेगा गली - गली
39. खून की होली (बलराज गोगिया)
40. कब्जा   (भेड़िया) धीरज पॉकेट बुक्स
41. काला खून (बलराज गोगिया)
42. कालदूत (बलराज गोगिया) शिवा पॉकेट
43. कमीना (भेड़िया) शिवा पॉकेट
44. कटार   (रीमा राठौर)
45. कर बुरा हो भला- (भेडिया सीरीज)
46. लंगड़ा यार (बलराज गोगिया)
47. लाश बिकाऊ है-   बलराज गोगिया (राधा पॉकेट बुक्स) (द्वितीय भाग- आघात)
48. मास्टर माइण्ड (बलराज गोगिया)
49. मोर्चा (बलराज गोगिया) शिवा पॉकेट
50. मुखबिर (बलराज गोगिया) शिवा पॉकेट
51. मर गयी रीमा (रीमा राठौर)
52. मुझे मौत चाहिए (बलराज गोगिया)
53. मौत की बाहों में (बलराज गोगिया)
54. मैं आया मौत लाया( भेड़िया सीरीज)
55. मेरा फैसला मेरा कानून (रीमा राठौर) तुलसी पेपर बुक्स
56. शूटर- (बलराज गोगिया)
57. मृत्युदंड
58. मुर्गा
59. मरा हुआ सांप-  बलराज गोगिया- राधा पॉकेट बुक्स
60. नृशंसक   (बलराज गोगिया) रवि पॉकेट बुक्स
61. नाली का कीड़ा (रीमा राठौर)
62. नेकी कर गोली खा ( भेड़िया सीरीज)
63. पिशाच (सतीश रावण उर्फ भेडिया सीरीज)
64. पैट्रोल बम (बलराज गोगिया)
65. राघव की वापसी  (बलराज गोगिया)
66. राजा ठाकुर ( राजा ठाकुर)
67. रस्सी का सांप (रीमा राठौर)
68. रावण की बारात
69. रेड अलर्ट (बलराज गोगिया)
70. राम नाम सत्य है - राधा पॉकेट बुक्स
71. शैतान- रीमा राठौर- (शिवा पॉकेट)
72. सत्यमेव जयते- रीमा राठौर- (शिवा पॉकेट)
73. स्टिंग  आप्रेशन
74. शिकंजा
75. शिकारी -रीमा राठौर, (शिवा पॉकेट बुक्स)
76. शनि का बेटा (तुलसी पेपर बुक्स)
77. सारे खून माफ-     (बलराज गोगिया)- शिवा पॉकेट बुक्स
78. सदमा-     रीमा राठौर- राधा पॉकेट बुक्स
79. टारगेट (रीमा राठौर)
80. उड़ान
81. उस्ताद (बलराज गोगिया, रीमा राठौर, सतीश रावण)- द्वितीय भाग- जजमैंट
82. वक्त का मारा ( तुलसी पेपरबुक्स)
83. यम हैं हम (बलराज गोगिया)
84.  कसम कानून की (रीमा राठौड़) (तीन गज की तलवार- द्वितीय भाग)
85. सजा ए मौत (प्रथम भाग)
86. मेरी अदालत ( द्वितीय भाग)
87. चिंगारी (बलराज गोगिया)
88. मौत का सफर (भेडिया सीरीज) रवि पॉकेट बुक्स
89. 
90. उन्नीस -बीस (रीमा राठौर, रजत पॉकेट बुक्स)
91. तीन गज की तलवार (रीमा राठौड, रजत प्रकाशन)
92. मेरी माँ मेरी दुश्मन (रीमा राठौड़, रजत प्रकाशन)
92. खूनी चक्र (बलराज गोगिया)
93. निशान - ( भेड़िया सीरीज)- रवि पॉकेट बुक्स
94. 
95. मेरी चाहत सबकी मौत (भेड़िया) मनोज पॉकेट बुक्स
96. गड़ा मुर्दा- भेड़िया - माया पॉकेट बुक्स
97. कानून का शिकारी -रीमा राठौर- रवि पॉकेट बुक्स
98. भेड़िया की वापसी- भेड़िया- धीरज पॉकेट बुक्स
99.
100. मर्द का बच्चा (लेखक का द्वितीय उपन्यास)
पलीता (सपना पॉकेट बुक्स, विज्ञापन)
गर्जना ( भेडिया सीरीज)
पलीता और गर्जना उपन्यास के विषय में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। पता नहीं यह उपन्यास प्रकाशित हुये थे या नहीं। किसी साथी को कोई जानकारी हो तो अवश्य बतायें।







शनिवार, 6 अक्टूबर 2018

दुर्गाप्रसाद खत्री

दुर्गाप्रसाद खत्री
Surendra Sabhani की फेसबुक पोस्ट।


दुर्गाप्रसाद खत्री जी का परिचय



दुर्गा प्रसाद खत्री (12 जुलाई, 1895- 5 अक्टूबर, 1974) हिन्दी के प्रसिद्ध उपन्यास लेखकों में से एक थे। ये ख्याति प्राप्त देवकीनन्दन खत्री के पुत्र थे, जिन्हें भारत ही नहीं, अपितु पूरे विश्व में भी तिलिस्मी उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त थी।बाबू देवकीनन्दन खत्री के सुपुत्र बाबू दुर्गा प्रसाद खत्री भी अपने पिता के समान ही प्रतिभाशाली थे।दुर्गा प्रसाद खत्री जी अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए साथ में कहानी / उपन्यास लिखने लगे। पिता-पुत्र के लेखन में कोई अंतर नहीं कर सकता। एक बार देवकी नन्दन खत्री जी को किसी कारणवश कहीं बाहर जाना पड़ा। उन्होंने पुत्र को निर्देश दिया कि कथा का क्रम संभाल लेना। ज्ञातव्य है कि किसी कहानी की कोई रूपरेखा उनके द्वारा कहीं लिखी नहीं थी, केवल दिमाग में रहती थी। कहानी की किस्तें लगभग रोज छपनी थी इसलिए रोज लिखना आवश्यक था। करीब 3-4 हफ्ते बाद बाबू देवकी नन्दन खत्री जी लौटे और दुर्गा प्रसाद खत्री जी से पूछा कि कहानी कहाँ तक पहुँची। पुत्र ने कहा - 'वहीं, जहाँ आप छोड़ गए थे'। हुआ यह था कि दुर्गा प्रसाद जी ने इस बीच एक तिलिस्म की यात्रा करा दी थी और पात्रों को वापस वहीं पहुँचा दिया था। 1912 ई. में विज्ञान और गणित में विशेष योग्यता के साथ स्कूल लीविंग परीक्षा उन्होंने पास की। इसके बाद उन्होंने लिखना आरंभ किया और डेढ़ दर्जन से अधिक उपन्यास लिखे। इनके उपन्यास चार प्रकार के हैं-
तिलस्मी एवं ऐय्यारी
जासूसी
सामाजिक
अद्भुत किन्तु संभाव्य घटनाओं पर आधारित उपन्यास।
तिलस्मी उपन्यास में दुर्गा प्रसाद खत्री ने अपने पिता की परंपरा का बड़ी सूक्ष्मता के साथ अनुकरण किया है। जासूसी उपन्यासों में राष्ट्रीय भावना और क्रांतिकारी आंदोलन प्रतिबिम्बित हुआ है। सामाजिक उपन्यास प्रेम के अनैतिक रूप के दुष्परिणाम उद्घाटित करते हैं। लेखक का महत्व इस बात में भी है कि उसने जासूसी वातावरण में राष्ट्रीय और सामाजिक समस्याओं को प्रस्तुत किया।
भूतनाथ (1907-1913) (अपूर्ण) - देवकीनन्दन खत्री ने अपने उपन्यास 'चन्द्रकान्ता सन्तति' के एक पात्र को नायक बना कर 'भूतनाथ' उपन्यास की रचना की, किन्तु असामायिक मृत्यु के कारण वह इस उपन्यास के केवल छह भागों ही लिख पाये।आगे के शेष पन्द्रह भाग उनके पुत्र दुर्गा प्रसाद खत्री ने लिख कर पूरे किये। 'भूतनाथ' भी कथावस्तु की अन्तिम कड़ी नहीं है।इसके बाद बाबू दुर्गा प्रसाद खत्री लिखित 'रोहतास मठ' (दो खंडों में) आता है।उन्होंने अपने अतुल्य पिता के अनुपम उपन्यास 'भूतनाथ' को पूरा करने का बीड़ा उठाया और इस दायित्व को इस खूबी के साथ पूरा किया कि पता ही नहीं चलता कि कहाँ पिता ने कलम छोड़ी और कहाँ पुत्र ने कलम उठाई।
उनके सर्वाधिक चर्चित उपन्यास 'रक्त मंडल' और सुफेद शैतान' रहे। इन उपन्यासों को ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबंधित (बैन) कर दिया गया था l

कृतियाँ
दुर्गा प्रसाद खत्री ने 1500 कहानियाँ, 31 उपन्यास व हास्य प्रधान लेख लिखे। दुर्गा प्रसाद खत्री ने ‘उपन्यास लहरी’ और 'रणभेरी' नामक पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया था। इनके उपन्यास चार प्रकार के हैं-

तिलस्मी ऐयारी उपन्यास
भूतनाथ और रोहतासमठ उनके इस विधा के उपन्यास हैं और इनमें उन्होंने अपने पिता की परंपरा को जीवित रखने का ही प्रयत्न नहीं किया है वरन्‌ उनकी शैली का इस सूक्ष्मता से अनुकरण किया है कि यदि नाम न बताया जाय तो सहसा यह कहना संभव नहीं कि ये उपन्यास देवकीनंदन खत्री ने नहीं वरन्‌ किसी अन्य व्यक्ति ने लिखे हैं।

जासूसी उपन्यास
प्रतिशोध, लालपंजा, रक्तामंडल, सुफेद शैतान जासूसी उपन्यास होते हुए भी राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत हैं और भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन को प्रतिबिंबित करते हैं। सुफेद शैतान में समस्त एशिया को मुक्त कराने की मौलिक उद्भावना की गई है। शुद्ध जासूसी उपन्यास हैं-
सुवर्णरेखा
स्वर्गपुरी
सागर सम्राट् साकेत
कालाचोर
इनमें विज्ञान की जानकारी के साथ जासूसी कला को विकसित करने का प्रयास है।
सामाजिक उपन्यास
इस रूप में अकेला 'कलंक कालिमा' है जिसमें प्रेम के अनैतिक रूप को लेकर उसके दुष्परिणाम को उद्घाटित किया गया है। बलिदान को भी सामाजिक चरित्रप्रधान उपन्यास कहा जा सकता है किंतु उसमें जासूसी की प्रवृत्ति काफ़ी मात्रा में झलकती है।
संसार चक्र अद्भुत किंतु संभाव्य घटनाचक्र पर आधारित उपन्यास
माया उनकी कहानियों का एकमात्र संग्रह है। ये कहानियां सामाजिक नैतिक हैं। उनकी साहित्यिक महत्ता यह है कि उन्होंने देवकीनंदन खत्री और गोपालराम गहमरी की ऐयारी जासूसी-परंपरा को तो विकसित किया ही है, सामाजिक और राष्ट्रीय समस्याओं को जासूसी वातावरण के साथ प्रस्तुतकर एक नई परंपरा को विकसित करने की चेष्टा की है।

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आलेख- Surendra Sabhani
 लेखक की मूल फेसबुक पोस्ट यहाँ है।



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