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गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

कुंदन कबाड़ी, फन्ने खा तातारी और गोकुल मदारी का परिचय

 साहित्य देश के काॅलम 'पात्र परिचय' में इस बार पढें लोकप्रिय उपन्यासकार वेदप्रकाश काम्बोज जी के प्रसिद्ध पात्रों में तीन विशेष पात्र कुंदन कबाड़ी, फन्ने खा तातारी और गोकुल मदारी का परिचय और वह भी उन्हीं पात्रों की जुबानी ।
  प्रस्तुत अंश वेदप्रकाश काम्बोज जी के उपन्यास '
मौत की आवाज' से है। यहां कुंदन कबाड़ी, फन्ने खां तातारी और गोकुल मदारी जासूस विजय से मिलने जाते हैं और विजय को अपना परिचय देते हैं। 
तो अब पढिये इन तीनों पात्रों का परिचय इन्हीं की जुबान से- 

विजय ने दरवाजा खोला ।
और गुरुदेव का उच्च नाद करते हुए तीन नमूनों ने उसके पैर पकड़ लिए। चकित सा विजय पहले तो उन तीनों के काले सिरों को देखता रहा जो उसके पैरों के निकट इस तरह एकत्रित हो गए थे जैसे तीन विभिन्न रेखाएं एक बिन्दु पर आकर मिल गई हों।
विजय ने आशीर्वाद की मुद्रा में अपने हाथ फैलाये और फिर गुरू ने गम्भीर मुद्रा में कहा- 'सदा खाओ गुड़ के सेव ।'
'धन्य हैं गुरुदेव आप धन्य हैं।' उन तीनों ने उसके पैर पकड़े हुए समवेत स्वर में कहा। किसी ने भी सिर उठाकर देखने की चेष्टा नहीं की।  

रविवार, 11 दिसंबर 2022

काम्बोजनामा - एक अद्भुत काव्यकथा - योगेश मित्तल

 काम्बोजनामा - एक अद्भुत काव्यकथा 
काम्बोजनामा :वेदप्रकाश काम्बोज की लेखन यात्रा

कुछ लोग अपनी जीवनी लिखते हैं - कुछ किसी अन्य की, लेकिन इमोशन के बादशाह राम पुजारी जब कुछ लिखते हैं, अपना सब कुछ उसमें इस तरह झोंक देते हैं, इस कदर झोंक देते हैं कि लिखी हुई पुस्तक खूबसूरत शब्दों की एक गंगा बन, आनन्दप्रद शीतल धारा की तरह  मन-मस्तिष्क और आत्मा में मीठे-मीठे एहसास और प्रसंग, चित्र की भाँति उकेरती और चलचित्र की भाँति उभारती चली जाती है। 
काम्बोजनामा - जासूसी साहित्य में वर्षों शीर्ष पर रहने वाले दिग्गज उपन्यासकार वेद प्रकाश काम्बोज की सहज-सरल जीवनी नहीं है। यह उनका जन्म से अब तक का जिन्दगीनामा भी नहीं है। यह तो वेद प्रकाश काम्बोज के लेखकीय जीवन के अनन्त अच्छे-बुरे, सरल-कठिन, खट्टे-मीठे प्रसंगों की बेहद खूबसूरत झांकी है, जिसके लिए मैं आदरणीय वेद प्रकाश

बुधवार, 30 नवंबर 2022

काम्बोजनामा- रामपुजारी

 काम्बोजनामा- रामपुजारी 

आइए हम सभी काम्बोज सर के जन्मदिन के अवसर पर शुभकामना संदेश भेजें।

इस अवसर पर #काम्बोजनामा से एक झलकी आप सभी के लिए प्रस्तुत है...

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बंद आँखों से तो आमजन भी सपने देख लेते हैं लेकिन जो खुली आँखों से सपने देखे उसे या तो लोग दीवाना, पागल कहते हैं या फिर विचारक अथवा दार्शनिक! अठारह साल का किशोर मन अपनी सपनों की दुनिया में खोया रहता। मन में हमेशा कुछ न कुछ चलता रहता, जिसका जिक्र वह किसी से भी नहीं कर पाता था। पड़ोस के ही बाबूराम स्कूल में वह पढ़ता था। जब स्कूल में नहीं होता था तो वह शॉप पर होता था। उसके पास वक़्त ही कहाँ था। वहीं वह अंतर्मुखी वेद अपने सपनों में खोया हुआ अपने पिता जितेंद्र सिंह काम्बोज का हाथ बँटाता था। आर्टिफ़ैक्ट्स और हैंडीक्राफ्ट की ये सोविनियर शॉप उस जमाने में लालकिले की एक बड़ी मशहूर शॉप थी।

रविवार, 28 फ़रवरी 2021

साक्षात्कार- वेदप्रकाश कांबोज

 मैं मानसिक रूप से एक बेहद आवारा किस्म का आदमी हूँ- वेदप्रकाश कांबोज
साहित्य देश इस बार प्रस्तुत कर रहा है लोकप्रिय साहित्य के सितारे आदरणीय वेदप्रकाश कांबोज जी का साक्षात्कार। सन् 1958 में अपने लेखन की शुरुआत करने वाले कांबोज जी आज भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।
     साहित्य देश ब्लॉग के लिए यह  साक्षात्कार युवा उपन्यासकार राम पुजारी जी ने लिया है।

1. आदरणीय वेदप्रकाश कांबोज जी आपका का नाम लोकप्रिय साहित्य में एक मील का पत्थर है। आपके पाठकों का एक बहुत बड़ा वर्ग रहा है। यहाँ हम सर्वप्रथम जानना चाहेंगे आपके के जीवन के आरम्भिक पृष्ठों को जैसे बचपन, शिक्षा इत्यादि के बारे में।
- सबसे पहले तो इस बात को समझो कि जो तुम कह रहे हो नाम है। या ...मान लो कि नहीं है,  नाम का होना या न होना महत्त्वपूर्ण  नहीं है। महत्त्वपूर्ण होता है लेखन यात्रा पर इसका प्रभाव। समझदार वही  होता जो लगातार सीखता रहता है। फिर लेखन तो  एक सतत धारा है। इसमें मुझ से पहले भी बड़े लेखक रहे हैं और मेरे समकालीन भी रहे और बाद में भी रहेंगे। 
और जहां तक बचपन का सवाल है तो ये जान लो कि मेरा बचपन साधारण होते हुए भी विशेष था। असल में वो समय ही विशेष था। देश नया-नया आज़ाद हुआ था। संघर्ष के दिन थे। पढ़ने का शौक था स्कूली पुस्तकों से ज्यादा मैंने अन्य पुस्तकें ज्यादा पढ़ी।
अपने पुस्तकालय में कांबोज जी
अपने पुस्तकालय में कांबोज जी
2. कांबोज जी आपका झुकाव उपन्यास लेखन की तरफ कैसे हो गया, तब आपकी उम्र क्या रही होगी और आप क्या करते थे? 

रविवार, 25 अक्टूबर 2020

नये उपन्यास- 2020

 लोकप्रिय साहित्य के लिए यह हर्ष का विषय है की अपने समय की चर्चित मासिक पत्रिका 'नीलम जासूस कार्यालय' पुनः प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हो रही है। 

   नीलम जासूस के अंतर्गत वेदप्रकाश काम्बोज जी के सात उपन्यास पुनः प्रकाशित हो रहे हैं।

प्रकाशक महोदय लिखते हैं-

आज के दिन मुझे यह घोषणा करते हुए बेहद ख़ुशी हो रही है की आप के प्रिय लेखक श्री वेद प्रकाश काम्बोजजी के 7 उपन्यास नीलम जासूस कार्यालय द्वारा शीघ्र ही प्रकाशित किये जा रहे हैं।

1.  बदमाशों की बस्ती
2.  देवता का हार
3.  अनोखा कैदी
4.  अलफांसे
5.  विजय पाकिस्तानी कैद में
6.  विद्रोह की आग
7.  चीते की आँख



रविवार, 4 अगस्त 2019

रघुनाथ और विजय नामकरण

मेरे मन में एक इच्छा थी की उपन्यास पात्रों पर एक श्रृंखला आरम्भ की जाये जिसमें  पात्रों के बारे में महत्वपूर्ण बाते/घटनाएं आदि वर्णित हो। जैसे इमरान, अलफांसे, विमल, देवराज चौहान, नाना पाटेकर, विजय-विकास जैसे बहुसंख्यक पात्रों पर कुछ लिखा जाये।
श्री मान प्रवीण जैन जी ने एक सराहनीय प्रयास किया है और यह प्रयास स्वयं में अनूठा और एकदम अलग है। प्रवीण जी ने आदरणीय वेदप्रकाश कांबोज साहब के पात्रों का ज्योतिषीय महत्व रेखांकित किया है। 
इस श्रृंखला की प्रथम कड़ी में आप पढेंगे रघुनाथ और विजय के नाम का ज्योतिषीय महत्व। (गुरप्रीत सिंह, साहित्य देश)
     

     भाई वेद प्रकाश कम्बोज के जासूसी उपन्यास पढ़ने वाले मित्र उनके अन्य पात्र रघुनाथ को नही भूल सकते खास तौर से इसलिए कि विजय हमेशा उसे प्यारे तुला राशि कह कर सम्भोदित करता है। पाठको को ऐसी अनुभूति होती है जैसे अपने किसी अति घनिष्ठ मित्र से मिल रहे हो। पर क्या कभी आपने पढ़ा है कि विजय को किसी ने, रघुनाथ ने भी  वृष राशि कह कर पुकारा हो। नही न। ऐसा इसलिए कि कम्बोज ने कभी ऐसा लिखा ही नही। परंतु जाने अनजाने में उन्होंने दोनों के मध्य एक ज्योतिषीय साम्य प्रस्तुत किया है। वृष और तुला दोनो राशियों का स्वामी ग्रह शुक्र है। और उनकी मित्रता का मजबूत आधार है। रघुनाथ हमेशा विजय के पास प्रोफेशनल मदद की अपेक्षा करता है। क्यों? इसका उत्तर दोनो के नज़्म में ही छुपा है।
     विजय का नामांक 1, रघुनाथ के नामांक 5 का मित्र है इसके विपरीत रघुनाथ के नामांक 5 के लिए विजय का नामांक सपोर्टिव है मददगार है।
ज्योतिष के विद्वान जैमिनी ज्योतिष से भली भांति परिचित है। इसमें अंको की 'क, ट, प, य' आदि पद्धति से भावो को इंगित किया जाता है। इस पद्धति से विजय और रघुनाथ दोनों शब्दो से कुंडली के प्रथम भाव का बोध होता है।
   दोनों के राशि स्वामी होने से नव पंचम दोष इनके सम्बन्धो में बाधक नही बनता।।

लेखक- प्रवीण जैन
 
प्रस्तुत पोस्ट आपको कैसी लगी। अपने विचार अवश्य व्यक्त करें। 

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