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रविवार, 19 अप्रैल 2026

आनंद कुमार सिंह, साक्षात्कार

 साहित्य देश की साक्षात्कार शृंखला में इस बार आपके लिए प्रस्तुत है युवा लेखक आनंद कुमार सिंह का साक्षात्कार ।
 माता शांति सिंह और पिता अजित प्रसाद सिंह के घर पैदा हुये आनंद कुमार सिंह को बचपन से ही पढने में रूचि रही है। कभी बालमन बाल साहित्य में रूचि रखता था और समय के साथ यह रूचि लेखन‌ में परिवर्तित हो गयी। 
आनंद कुमार सिंह पेशे से पत्रकार हैं।
पत्रकारिता के अब तक के अपने 20 वर्ष के करिअर में उन्हें तीन बार श्रेष्ठ पत्रकार होने का पुरस्कार मिल चुका है।
वे क्राइम, राजनीति, स्पोर्ट्स, बिजनेस आदि क्षेत्रों में गहरी रुचि रखते हैं।
कहानी लिखने का उन्हें हमेशा से शौक रहा है। कहानी लेखन की कई प्रतियोगिताओं में वे विजेता रह चुके हैं।
उन्हें शतरंज खेलने का भी काफी शौक है। प्रेस क्लब, कोलकाता के वह लगातार तीन वर्षों से चैंपियन हैं।
मूल रूप से बिहार के रहने वाले आनंद कुमार सिंह का जन्म, पढ़ाई-लिखाई, कोलकाता में हुई। हालांकि बचपन का उनका बड़ा हिस्सा रेणुकूट में गुजरा है।
   यह साक्षात्कार ekbookjournal के संचालक श्री विकास नैनवाल जी के सहयोग से यहाँ प्रकाशन हुआ है।

प्रश्न – लेखन क्षेत्र में आज लेखक आनंद कुमार सिंह का नाम पाठक वर्ग के लिए अपरिचित नहीं रहा है। लेकिन जैसा की साक्षात्कार की परम्परा है उसी परम्परा अनुसार हम आपका विस्तृत परिचय जानना चाहेंगे ?
उत्तर – मेरा जन्म कोलकाता में हुआ हालांकि जन्म के बाद ही पिताजी की नौकरी के कारण हम लोग रेणुकूट चले गये। मेरी प्रारंभिक शिक्षा (चौथी कक्षा तक) वहीं हुई। पिताजी को पढ़ने का शौक था तो वहीं से शौक मुझे भी आ गया। बचपन, चंपक, नंदन, चंदामामा, कॉमिक्स से शुरू होते ही जल्द ही एससी बेदी के राजन-इकबाल सीरीज तक पहुंच गया। घर में उस वक्त सरिता, रीडर्स डाइजेस्ट से लेकर कई अन्य पत्रिकाएं आती थीं। मैं सबकुछ पढ़ जाता था भले ही वो बच्चों के लिए न हो। रेणुकूट के पहाड़ी इलाके में बारिश के बाद जंगली पत्तों की जो खुशबू आती थी वो आज भी जेहन में रची-बसी है। उस वक्त खेलकूद के अलावा मनोरंजन का साधन केवल किताबें-मैगजीन आदि पढ़ना ही था।
       इसके बाद हम लोग वापस कोलकाता आ गये। पांचवीं से बीएससी तक की पढ़ाई मैंने यहीं की। यहाँ आने के बाद भी किताबें पढ़ने का शौक बरकरार रहा। मुझे वेद प्रकाश शर्मा के उपन्यासों का चस्का लग गया। तीन तिलंगे, विधवा का पति, केशव पंडित, कानून का बेटा, कोख का मोती की यादें आज भी हैं। स्कूली जीवन में ही मुझे सुरेंद्र मोहन पाठक का उपन्यास मिल गया। हालांकि यह याद नहीं कि पहले मैंने उनके जेम्स हेडली चेज के अनुवादित उपन्यास पढ़े या फिर उनके स्वरचित उपन्यास। लेकिन जो भी उनकी लेखनी बेहद धमाकेदार लगी। दुस्साहसिक, ऑन टू योर फेस..वाली। जहाँ वीपीएस हमें मनोरंजन की दुनिया का रोलर-कोस्टर राइड कराते थे वहीँ एसएमपी रियलिस्टिक दुनिया के दायरे में रहकर इंटरटेनमेंट का तड़का प्रदान करते थे। पैसे न होने के कारण किराये पर किताबें लेकर पढ़ता था और खूब पढ़ता था। एसएमपी को पढ़ने के बाद अन्य किसी हिंदी लेखक की किताबें कम ही पढ़ी। एसएमपी के अलावा मैं अंग्रेजी नॉवल पढ़ने लगा। इसमें शुरूआत सिडनी शेल्डन के उपन्यासों से हुई। लेकिन मेरे लिए लेखक मायने नहीं रखता था...कोई भी किताब मिल जाये...तमन्ना बस यही रहती थी। किताबें पढ़ने का सिलसिला आज भी जारी है। 

प्रश्न- जैसा की आपने बताया बचपन में ही आपको पढने की रूचि थी। फिर यह रूचि पढने से लेखन की तरफ कब बढ गयी ?
उत्तर – पेशे से मैं एक पत्रकार हूँ। लिखना मेरा कारोबार रहा है। लेकिन जहाँ पत्रकार केवल हार्ड फैक्ट्स सामने रखता है, वहीं लेखक कल्पना की दुनिया रचता है। पहली बार लेखन का सिलसिला एक मैगजीन में लिखने से शुरू हुआ। उस क्वार्टर्ली मैगजीन में मुझे कहानी लिखनी पड़ती थी। कहानियों की ठीक-ठाक प्रशंसा मिलने लगी थी। लेकिन तब भी उपन्यास लेखन का कभी मैंने सोचा नहीं था। फिर एक वेबसाइट पर कहानी लेखन की प्रतियोगिता हुई। पहली बार थ्रिलर मिस्ट्री कहानी, मैंने 'गर्लफ्रेंड की हत्या' लिखी। लोगों ने पसंद किया और मुझे उस कहानी के लिए पुरस्कार भी मिला। उसी वेबसाइट पर कहानी संबंधी कुछेक प्रतियोगिताएं भी हुईं, उनमें भी मुझे पुरस्कार मिले। फिर मित्रों के व्हाट्सऐप ग्रुप में एसएमपी के किरदारों को लेकर फैन राइटिंग का एक सिलसिला शुरू हुआ। वहाँ ग्रुप के सदस्य उस कहानी को आगे बढ़ाते थे। मैंने जब अपना योगदान दिया तो दोस्तों ने पसंद किया और वहीं पर कुछेक दोस्तों ने सुझाव दिया कि मैं सीरियसली कोई नॉवल क्यों नहीं लिखता। उपन्यास लेखन का बीजरोपण वहीं हुआ। उसके बाद ही मैंने हीरोइन की हत्या लिखी। अपने दोस्त, विकास नैनवाल को पहली बार उसे पढ़ने के लिए दिया। उन्होंने सराहना की। उसे मैंने किंडल पर बतौर ई-बुक प्रकाशित किया। यह देखकर काफी अच्छा लगा कि अपने जॉनर में वह बुक कई हफ्तों तक टॉप टेन (या टॉप फाइव) में रही। फिर एकाएक लव स्टोरी लिखने का मन किया। मैंने 'रुक जा ओ जानेवाली' नामक नॉवेला लिखा। उसे भी दोस्तों ने खूब पसंद किया। मेरे दोस्त, गुरप्रीत सिंह जीपी ने तो यहाँ तक कहा कि इस उपन्यास ने उन्हें गुलशन नंदा जैसों की याद दिला दी और उनकी दशकों से सोई हुई भावना को जगा दिया। मेरा तीसरा नॉवल, टिक टॉक टिक टॉक अब प्रकाशित हो चुका है। 

प्रश्न - आपकी लेखन यात्रा का आरम्भ बहुत रोचक लगा और पाठकों ने आपकी प्रथम रचना को पसंद किया, और आप स्वयं लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में आप किन लेखकों से ज्यादा प्रभावित रहे हो और किन लेखकों को ज्यादा पढा है ?
उत्तर – मैंने हिंदी में सबसे ज्यादा सुरेंद्र मोहन पाठक जी के उपन्यास पढ़े हैं। उसके बाद वेद प्रकाश शर्मा का नाम आता है। अंग्रेजी में संभवतः मैंने सबसे ज्यादा उपन्यास जो नेस्बो, स्टीफन किंग, डॉन विंसलो को पढ़े हैं। मैं प्रभावित भी इन्हीं से हुआ है। इन सभी लेखकों की जो खासियत है वह अपनाने का प्रयास करता हूँ। जैसे डॉन विंसलो के डायलॉग छोटे होते हैं वर्णन सिनेमैटिक होता है। जो नेस्बो ऑलराउंडर हैं। जहां उनकी थीम डार्क होती है वहीं वह मनमोहन देसाई वाली फीलिंग भी कई नॉवल्स में दे देते हैं। हिंदी में एसएमपी और वीपीएस का प्रभाव भी मेरे पर है। 

प्रश्न - वर्तमान समय में पाठक कम हो रहे हैं और इंटरनेट की तरफ लोग ज्यादा बढ रहे हैं, ऐसे समय में मनोरंजक पुस्तकों का आपकी दृष्टि में क्या स्थान है ?
उत्तर – पुस्तकें हमेशा रहेंगी क्योंकि क्रियेटिविटी कंज्यूम की भूख किसी सोशल मीडिया के पोस्ट से पूरी तरह नहीं मिट सकती। इसके लिए ठीक-ठाक कंटेंट की जरूरत होगी। यह जरूर है कि यह भूख नेटफ्लिक्स और अन्य माध्यमों से भी लोग मिटाने का प्रयास करते हैं लेकिन नॉवल्स के भी पाठक हैं। बस उनतक पहुंचना है। हालांकि बदलते वक्त के साथ नॉवल को परोसने का तरीका भी बदलना होगा। ऑडियोबुक और ई-बुक को प्रमोट करना होगा ताकि लोग कहीं भी कभी भी किताबों को पढ़ सकते हैं। 

प्रश्न - आपके लेखन की शुरूआत कब हुयी और अब तक कौन कौन से उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं।
उत्तर – जैसा कि मैंने ऊपर बताया कि मित्रों के व्हाट्सऐप ग्रुप से प्रेरणा मिली। वह समय संभवतः 2020 होगा। लेकिन उससे पहले जैसा कि मैंने बताया कि लेखन की शुरूआत हो चुकी थी। 
अब तक मेरे तीन उपन्यास 'हीरोइन की हत्या','रुक जा ओ जाने वाली' तथा सद्य प्रकाशित उपन्यास 'टिक टाॅक टिक टाॅक' प्रकाशित हो चुके हैं। इनके अतिरिक्त कहानी लेखन भी किया है।

प्रश्न - पुस्तक प्रकाशन में कोई समस्याएँ भी आयी या प्रकाशन आसानी से हो गया ?
उत्तर – मैंने अपना पहला उपन्यास बतौर ई-बुक पब्लिश किया हालांकि बाद में वह फ्लाईड्रीम्स से पेपरबैक के तौर पर छपा। छपने में कोई मुश्किल नहीं आई। दोस्तों का सहयोग जिनकी जानपहचान थी, मिला। इनमें विकास नैनवाल का नाम सबसे पहले लूंगा। इसके अलावा पहले उपन्यास के बाद कई अन्य प्रकाशकों के फोन भी आये। इसलिए यह कह सकता हूं कि छपने में कभी समस्या नहीं हुई। 

प्रश्न - आपने मर्डर मिस्ट्री, प्रेम कथा और रहस्य कथा का लेखन किया जो आपकी विविधता को दर्शाता है। और आप स्वयं किस तरह का पढना-लिखना ज्यादा पसंद करते हैं ?
उत्तर – यह अच्छा सवाल किया आपने। सीधे कहूँ तो भले ही मिस्ट्री, थ्रिलर या साइंस फिक्शन मुझे निजी तौर पर पसंद है लेकिन यह कोई बाध्यता नहीं है। मुझे हर वह किताब पसंद है जो मेरे भीतर की क्रियेटिविटी की भूख को शांत करे। इसमें हॉरर, रोमांस, कॉमेडी, एक्शन से लेकर साहित्यिक लेखन, सबकुछ शामिल है। मुझे लगता है कि यह बात हर किसी के लिए लागू होती है। खुद को किसी जॉनर में बांधकर भला कोई शानदार किताब से क्यों वंचित रहे ?

प्रश्न - आपकी रचना 'टिक टॉक टिक टॉक के विषय में संक्षिप्त में कुछ जानकारी जो आप पाठकों तक पहुंचाना चाहते हैं ?
उत्तर – टिक टॉक टिक टॉक में वह सबकुछ है जो मुझे एक शानदार मनोरंजक उपन्यास में पसंद आता है। मिस्ट्री, थ्रिल, एडवेंचर और साइंस फिक्शन। यह उपन्यास मेरे दिल के काफी करीब है। इसमें पाठक एक यात्रा पर निकलेगा। एक ऐसी यात्रा जो उसने कभी नहीं की होगी। उस यात्रा में थ्रिल है, खौफ है, दर्द है, एक्शन है, रोमांस है। लब्बोलुआब यह है कि एक कंप्लीट किताब जिसे पढ़कर पाठकों को लगेगा कि उन्हें भरपेट अपना पसंदीदा भोजन का आनंद लिया है। 

प्रश्न - 'टिक टाॅक टिक टाॅक' में ऐसा क्या विशेष है जो आपने लेखन के लिए सोच और चाहा भी की पाठक इसे पढें?
उत्तर – टिक टॉक टिक टॉक लिखने के पीछे एक बड़ी वजह यह है कि हिंदी के पाठकों को एक ऐसी किताब उपलब्ध करायी जाये जो उन्हें पढ़ने को आमतौर पर नहीं मिलती। पढ़ने के बाद उन्हें अहसास हो कि ऐसी किताबें भारत में भी उपलब्ध होनी चाहिए। पाठकों को यह किताब अपनी क्रियेटिविटी की भूख को शांत करने के लिए पढ़नी चाहिए। 

प्रश्न - साहित्य देश लोकप्रिय उपन्यास साहित्य संरक्षण हेतु एक अल्प प्रयास है । साहित्य देश के विषय में कोई दो शब्द ।
उत्तर – आपका यह प्रयास बहुत शानदार है। आप जैसे मंच के हाथों को मजबूत करने की जरूरत है। नयी पीढ़ी तक पहुंचने के लिए साहित्य देश जैसी संस्थाओ की बहुत आवश्यकता है। अपना प्रयास जारी रखें।


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