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रविवार, 24 सितंबर 2023

कैप्टन राजेश

लेखक - कैप्टन राजेश
प्रकाशक - कुसुम प्रकाशन, इलाहाबाद

01. काला मकान
02. मौत की बाँहों में
03. सूनी घाटी का कत्ल
04. साँपों की प्रेमिका
05. सर कटी लाश 
06. मौत के दावेदार
07. शह और मात
08. सुनहला कीड़ा
09. शैतान की मौत
10. खूनी प्यास 
11. औरत का जहर
12. रहस्य की आवाज
13. शिकारी पक्षी
14. साया और मौत
15. विदेशी राक्षस
16. खून के धब्बे
17.  जहरीला आदमी

शनिवार, 23 सितंबर 2023

 समकालीन और उसपर भी प्रतिस्पर्धी लेखकों से सराहना पाना दुर्लभ है। यह सराहना यदि लेखक के लेखकीय जीवन काल में मिले तो यह दुर्लभतम कही जानी चाहिए।
यह एक ऐसी जिंस है जिसके लिए इसके लिए न सिर्फ अच्छा लेखक होना बल्कि उम्दा इंसान होना भी मूलभूत गुण है। 
जनप्रिय ओम प्रकाश शर्मा दोनों ही थे। बकौल "आबिद रिजवी" दोपहर में जनप्रिय के घर के सामने से  गुजरते घोस्ट राइटर या संघर्षरत लेखकों में से कोई ऐसा नहीं होता था,जो उनकी नजर में आ जाए और बिना खाना खाए गुजर जाए।"
दरअसल,तब मेरठ पॉकेट बुक्स के प्रकाशकों का बड़ा बाजार था (मेरी समझ से यह भी जनप्रिय की ही देन थी,  उन्होंने दिल्ली छोड़ कर मेरठ को अपने लेखन का शहर बनाने के प्रयास में व्यवसायियों को प्रकाशन की राह दिखाई।बाकी सब इतिहास है)
तब के प्रयत्नशील और संघर्षरत लेखक, मैनपुरी,इटावा, बरेली,हापुड़ जैसे शहरों से अपनी पांडुलिपि जमा करने प्रकाशकों के पास आते और पहुंचते न पहुंचते दोपहर तक भूखे रह जाते।  जनप्रिय यह पीड़ा समझते थे। कोई लेखक यदि उनकी आंखों के आगे पद जाता तो वह  साधिकार उन्हें घर ले आते। 
जनप्रिय ने लेखकों की पांडुलिपि  देखने की कोशिश नही की। कारण यह था कि वह जानते थे कि 90 फीसद लेखक  उनके ही पात्रों पर रची पांडुलिपि लेकर आए हैं।जिन्हे बाद में प्रकाशक "ओम प्रकाश शर्मा" के जाली नाम से ही चिपका कर प्रकाशित कर देगा।वह युवा और संघर्षरत लेखकों को इसलिए दोषी भी नहीं मानते थे। द ट्रिब्यून(संभवतः) को दिए अपने साक्षात्कार में उन्होंने कहा था वह जानते थे कि यह युवा लेखकों की रोजी रोटी का मसला है। असली दोषी तो प्रकाशक हैं। वह ट्रेड नामों के खिलाफ लामबंद होने के लिए स्थापित लेखकों से आग्रह करते रहे। मगर हासिल वह स्वयं भी जानते ही थे।
बहरहाल साथ लगी कतरन और कवर सामाजिक लेखक साधना प्रतापी की 1970 में प्रकाशित उपन्यास "अंधेरी रात के हमसफर से है" जहां उन्होंने ओम प्रकाश शर्मा की प्रतिष्ठा की बाबत जिक्र किया है। गौरतलब यह कि साधना प्रतापी, सत्तर के दशक में स्वयं ही एक अच्छे लेखक थे।उनकी दो एक किताबों का फिल्मीकरण भी हुआ है। 
किताब के नाम और कवर पर न  जाएं। यह भ्रामक ही हुआ करती थीं । कहानी एक संघर्षरत लेखक की है, जो अपना उपन्यास प्रकाशित करवाना चाहता है।
आलेख- सत्य व्यास


सोमवार, 11 सितंबर 2023

विनोद प्रभाकर- साक्षात्कार

 21 वर्ष की उम्र में मैं एक सफल उपन्यासकार और प्रकाशक बन चुका था- विनोद प्रभाकर

साक्षात्कार की इस शृंखला में इस बार प्रस्तुत है लोकप्रिय साहित्य के सितारे विनोद प्रभाकर उर्फ सुरेश साहिल जी का प्रथम साक्षात्कार। मेरठ निवासी विनोद प्रभाकर जी ने यहां अपने वास्तविक नाम से जासूसी लेखन किया वहीं सुरेश साहिल के नाम से लौट आओ सिमरन जैसी चर्चित कृति का सर्जन भी किया।
वर्तमान में मेरठ के मलियाना में निवासरत सुरेश जी निजी शिक्षण संस्थान का संचालन करते है और दीर्घ समय पश्चात अपनी रचना लेखन में व्यस्त हैं।

01. लोकप्रिय साहित्य में विनोद प्रभाकर या सुरेश साहिल का नाम काफी चर्चित रहा है। लेकिन हम एक बार अपने पाठकों के लिये आपका जीवन परिचय जानना चाहेंगे।

- मेरा जन्म मेरठ जिले के मलियाना ग्राम में हुआ था। जो मेरठ सिटी रेलवे स्टेशन से एक किलोमीटर की दूरी पर है। मेरे पिता श्री किरन सिंह मेरठ जिले की सरधना तहसील के हबड़िया गांव के एक छोटे किसान परिवार से थे। और मेरठ नगर महापालिका में सरकारी ओहदे पर थे।

               मेरी शिक्षा ग्रेजुएट तक रही। किसी कारणवश मुझे पोस्ट ग्रेजुऐशन की पढाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। पूर्व संस्कार ही रहे होंगे की कक्षा पांच तक पहुंचते -पहुंचते मेरे अंदर का लेखक जागृत हो चुका था।  यह बचपन का वह दौर था, जब क्लासरूम में बच्चों के झुण्ड के बीच फिल्मी गानों पर परोडी बनाकर सुनाता था। और ताज्जुब इस बात का रहा कि दस फिट दूर बैठे सख्त मिजाज अध्यापक को मेरी आवाज सुनाई नहीं देती थी। उस वक्त के मेरे ही ग्रुप का एक बच्चा (जिसका नाम शायद चतर सिंह था) कहीं से दो अजीब सी लैंग्वेज सीख कर आया था। और मैं एकमात्र स्टुडेंट था जो हफ्ते भर में उससे धाराप्रवाह उस लैंग्वेज में बातें करने लगा था। वह दोनों भाषायें में आज भी धाराप्रवाह बोलना जानता हूँ। मुझे नहीं लगता लिखने में और बोलने में संस्कृत जैसी प्रतीत होती दोनों भाषायें कहीं बोली भी जाती रही होंगी या अब भी कहीं बोली जाती होंगी।

 बहरहाल, दोनों भाषाओं का इतिहास कुछ भी हो, मगर अब यह भाषायें उन दो देशों की राष्ट्रीय भाषायें बन चुकी हैं, जो मेरे आने वाले उपन्यास के दो काल्पनिक देश हैं।

रविवार, 3 सितंबर 2023

होशियार सिंह

नाम-होशियार सिंह
लोकप्रिय साहित्य में एक नाम और सामने आया है, वह नाम है। होशियार सिंह। हालांकि होशियार सिंह जी का एक ही उपन्यास अभी तक हमारी जानकारी में आया है। यहाँ प्रस्तुत जानकारी उसी उपन्यास पर आधारित है। 
होशियार सिंह के उपन्यास
1. जंजीर और हथकडियां (नूतन पॉकेट बुक्स, मेरठ)
2. कसमें वायदे
संपर्क-
होशियार सिंह /
13/8, शाहगंज दरवाजा
कच्ची सडक- मथुरा
पिन-281001
उक्त समस्त जानकारी हमें छत्तीसगढ़ निवासी नवीन जी ने प्रेषित की है। नवीन जी का हार्दिक धन्यवाद |
लेखक होशियार सिंह जी के विषय में अन्य कोई जानकारी
किसी पाठक के पास हो तो हमसे संपर्क करें।

आनंद चौधरी, परिचय

नाम- आनंद चौधरी
जन्म - 10-05-1981
माता- श्रीमती उर्मिला देवी
पिता- श्री विजय चौधरी
शिक्षा- स्नातक 
वर्तमान कार्य- उपन्यास लेखन, contractor (machenical steel construction) founder of our construction company "omkar engineering".
संपर्क- 8578853325, 9472621470.
Email- omkarengineering.1525@gmail.com 
Add.- ग्राम- नुरपुर, पोस्ट- फुलाड़ी, थाना-अजीमाबाद, 
जिला- भोजपुर (आरा), बिहार- 802164
उपन्यासकार आनंद चौधरी
उपन्यासकार आनंद चौधरी

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उपन्यास सूची- 

1. साजन मेरे शातिर- [ क्राइम -थ्रिलर ] नवम्बर 2009 
दुर्गा पॉकेट बुक्स 
2. हैरीटेज होस्टल हत्याकांड- [ मर्डर मिस्ट्री ] 10- 05- 2022 - अजय पॉकेट बुक्स
3.आयुष्मान- [ साइंस फिक्शन ] 1 जनवरी 2023 अजय पॉकेट बुक्स
4. मौत मेरे पीछे - [ मर्डर मिस्ट्री ] - प्रकाशकाधीन

आनंद चौधरी के उपन्यासों की समीक्षा यहाँ पढें

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