साहित्य देश के स्तम्भ के हास्यरस में आज प्रस्तुत है लोकप्रिय उपन्यासकार 'आरिफ मारहर्वी' के उपन्यास 'भयानक भिखारी' से एक रोचक हास्य अंश ।
भयानक भिखारी - आरिफ मारहर्वीफिर उन्हें गाईड एक खम्बे के निकट खड़ा हुआ दिखाई दिया । वह खम्बे से कान लगाये इस प्रकार खड़ा था जैसे कुछ सुनने की कोशिश कर रहा हो । सोजी ने गाईड पूछा-
'क्या सुन रहे हो तुम ?'
गाईड ने होठों पर उँगली रखकर चुप रहने का संकेत किया सीमा और सोजी ने विस्मयपूर्वक उसे देखा, फिर उन दोनों ने भी अपना-अपना कान खम्बे से लगा दिया, फिर सोजी ने कान हटा कर साश्चर्य से गाईड से कहा--
'मुझे तो कुछ सुनाई नहीं दे रहा।'
'हूँ....'गाईड झल्लाकर बोला - 'अजी, मैं यहाँ आधे घंटे से कान लगाये खड़ा झल्लाकर बोला- 'जज जब मुझे ही कुछ सुनाई नहीं दिया तो आपको एक सेकन्ड में कैसे सुनाई दे जायेगा ?'
सोजी हंस पड़ी ।

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