उपन्यास साहित्य का रोचक संसार- भाग-01
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भारती पाॅकेट बुक्स नाम पढ़ते-सुनते आप सबके मन-मस्तिष्क में एक ही बात आती होगी कि इस संस्था के मालिक तो राज भारती ही रहे होंगे।
बात सही है, पर पूरी तरह ऐसा भी नहीं था, लेकिन भारती पाॅकेट बुक्स में अपने प्रवेश और पहचान के बारे में बताने से पहले आपकी किताबी दुनिया से कुछ और भी पहचान करा दूँ।
तब दरीबाँ कला दो बातों के लिए मशहूर था।
1. एक तो वहाँ ज्वैलरी की बहुत दुकानें थीं।
2. दूसरे पुस्तकों के थोक विक्रेताओं का यही एक गढ़ था।
इसके अलावा दो और खाशियत थीं दरीबे की।
एक तो हीरा टी स्टाल, जिसकी चाय का स्वाद घर की चाय से भी बेहतर होता था। चाय की सतह पर दूध की मलाई का स्वाद भी हीरा टी स्टाल की चाय में उठाया जा सकता था।
दूसरी खासियत थी दरीबे में प्रवेश के नुक्कड़ पर स्थित हलवाई की दुकान, जिसका नाम अब याद नहीं।
देशी घी की जलेबी और समोसे के लिए वह दुकान काफी मशहूर थी। मुझे नहीं पता कि अब भी ये हैं या नहीं।
तो हमारी दिलचस्पी तो पुस्तकों में है तो आगे की बात पुस्तकों की ही हो जाये।
दरीबे में राज पुस्तक भंडार, नारंग पुस्तक भंडार, गर्ग एंड कम्पनी, रतन एंड कम्पनी, पंजाबी पुस्तक भंडार आदि पुस्तकों के थोक विक्रेताओं की दुकानें थीं, जहाँ से पुस्तकें खरीदने दिल्ली के नहीं दिल्ली के नजदीकी क्षेत्रों के पुस्तक बिक्रेता आया करते थे।
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भारती पाॅकेट बुक्स नाम पढ़ते-सुनते आप सबके मन-मस्तिष्क में एक ही बात आती होगी कि इस संस्था के मालिक तो राज भारती ही रहे होंगे।
बात सही है, पर पूरी तरह ऐसा भी नहीं था, लेकिन भारती पाॅकेट बुक्स में अपने प्रवेश और पहचान के बारे में बताने से पहले आपकी किताबी दुनिया से कुछ और भी पहचान करा दूँ।
तब दरीबाँ कला दो बातों के लिए मशहूर था।
1. एक तो वहाँ ज्वैलरी की बहुत दुकानें थीं।
2. दूसरे पुस्तकों के थोक विक्रेताओं का यही एक गढ़ था।
इसके अलावा दो और खाशियत थीं दरीबे की।
एक तो हीरा टी स्टाल, जिसकी चाय का स्वाद घर की चाय से भी बेहतर होता था। चाय की सतह पर दूध की मलाई का स्वाद भी हीरा टी स्टाल की चाय में उठाया जा सकता था।
दूसरी खासियत थी दरीबे में प्रवेश के नुक्कड़ पर स्थित हलवाई की दुकान, जिसका नाम अब याद नहीं।
देशी घी की जलेबी और समोसे के लिए वह दुकान काफी मशहूर थी। मुझे नहीं पता कि अब भी ये हैं या नहीं।
तो हमारी दिलचस्पी तो पुस्तकों में है तो आगे की बात पुस्तकों की ही हो जाये।
दरीबे में राज पुस्तक भंडार, नारंग पुस्तक भंडार, गर्ग एंड कम्पनी, रतन एंड कम्पनी, पंजाबी पुस्तक भंडार आदि पुस्तकों के थोक विक्रेताओं की दुकानें थीं, जहाँ से पुस्तकें खरीदने दिल्ली के नहीं दिल्ली के नजदीकी क्षेत्रों के पुस्तक बिक्रेता आया करते थे।