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मंगलवार, 15 जून 2021

पहली वैम्पायर- विक्रम ई. दीवान, उपन्यास समीक्षा

एक पिशाचनी की दिल दहला देने वाली ख़ौफ़नाक कहानी
उपन्यास :- पहली वैम्पायर
लेखक :     विक्रम ई. दीवान 
प्रकाशन :  बुक कैफे पब्लिकेशन
पृष्ठ संख्या -184
उपन्यास समीक्षा - संजय आर्य

वारलॉक श्रृंखला के बाद 'पहली वैम्पायर' का पाठकों को बेसब्री से इंतजार था। लगता है विक्रम ई.दीवान सर ने कसम खाई है कि वो पाठकों को नए नए तरीकों से डराकर ही रहेंगे। और इस बार पाठकों को उन्होंने एक ऐतिहासिक डरावनी कहानी के माध्यम से डराने का न केवल बेहतरीन प्रयास किया है बल्कि डराने में सफल भी रहे है। 
        कहानी की पृष्ठभूमि में है- सन 1818 का ब्रिटिश काल और उनका ठगों के साथ संघर्ष। ब्रिटिश कैप्टेन जोनाथन स्मिथ एक घमंडी और सनकी आदमी है उसके साथ इंग्लैंड की ही मानवविज्ञानी एलेन भी रहती है जो भारत घूमने आई है। स्मिथ को एक दिन जब अपने इलाके में एक आदमी की पेड़ पर उल्टी लटकी लाश मिलती है।और जैसे किसी जीव ने उसके शरीर से खून की आखरी बून्द तक  निकाल ली  हो, उसके बाद शुरू होती है स्मिथ की खोजबीन और उसका सामना होता है खून पीने वाली पिशाचिनी से और वो एक अघोरी की सहायता लेता है। 
पिशाचिनी की कहानी काफी रोचक और ख़ौफ़नाक है।एक बानगी देखिये।
"मुझे लगता है, तुम और कैप्टन दोनों इस जीव को बहुत हल्के में ले रहे हो।

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