लेबल

पत्रिका लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
पत्रिका लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 24 दिसंबर 2023

मनोहर कहानियां, मई 1999

  इलाहाबाद के मित्र प्रकाशन से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका मनोहर कहानियाँ अपने समय सर्वाधिक रोमांचक पत्रिका रही है।

   सत्य और काल्पनिक कहानियों के संगम वाली इस पत्रिका को हर वर्ग के पाठकों ने चाहा, सराहा और पढा है।
  इलाहाबाद के मुट्ठीगंज के 'मित्र प्रकाशन' से मनोहर कहानियाँ, सत्यकथा, माया जैसे चर्चित पत्रिकाएं प्रकाशित होती थी। इसके संस्थापक स्वर्गीय श्री क्षितिज मोहन मित्र थे।
मनोहर कहानियाँ पत्रिका का आरम्भ सन 1944 में हुआ था, तब इस पत्रिका में मात्र रहस्य-रोमांच कथाएं ही प्रकाशित होती थी।  मित्र प्रकाशन ने सन् 1972 में 'सत्यकथा' नामक पत्रिका की शुरुआत की जिसमें सिर्फ सत्यकथाएं ही प्रकाशित होती थी। पाठकवर्ग ने सत्यकथा के साथ-साथ रहस्य-रोमांच को ज्यादा महत्व दिया। मित्र प्रकाशन ने सन् 1973 में मनोहर कहानियाँ पत्रिका में रहस्य- रोमांच के साथ-साथ सत्यकथाएं छापनी शुरु की।
सन् 2000 तक यह पत्रिका नियमित प्रकाशित होती रही लेकिन मित्र प्रकाशन की आंतरिक स्थितियां कुछ बदल गयी और मित्र प्रकाशन बंद हो गया।
  बाद में 'डायमंड प्रकाशन दिल्ली' से इस पत्रिका का प्रकाशन हुआ, लेकिन वर्तमान में यह पत्रिका अपने तृतीय प्रकाशन 'दिल्ली प्रेस' के अंतर्गत प्रकाशित हो रही है।
  अब इस पत्रिका में वह 'स्वाद' नहीं रहा, जिसके कारण इसे पाठकों को अत्यंत प्रयास मिल रहा है।
जिन पाठकों ने 90 के दशक में इसे पढा है उन्हें प्रमेन्द्र मित्र, कुमार मित्र, पुष्पक पुष्प, इंस्पेक्टर अहमद यार खान, इंस्पेक्टर नवाज खान,  सुरजीत के अनुवाद, पुलिस की डायरी जैसे किस्से याद ही होंगे।
   अब यह पत्रिका और इसकी यादें ही शेष हैं।

मनोहर कहानियाँ, मई 1999, आवरण पृष्ठ

यहाँ हम मनोहर कहानियाँ may 1999 के अंक के कुछ महत्वपूर्ण पृष्ठ प्रस्तुत कर रहे हैं, जो इस पत्रिका के विषय में बहुत कुछ कहने में सक्षम हैं।

रविवार, 25 अक्टूबर 2020

नये उपन्यास- 2020

 लोकप्रिय साहित्य के लिए यह हर्ष का विषय है की अपने समय की चर्चित मासिक पत्रिका 'नीलम जासूस कार्यालय' पुनः प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हो रही है। 

   नीलम जासूस के अंतर्गत वेदप्रकाश काम्बोज जी के सात उपन्यास पुनः प्रकाशित हो रहे हैं।

प्रकाशक महोदय लिखते हैं-

आज के दिन मुझे यह घोषणा करते हुए बेहद ख़ुशी हो रही है की आप के प्रिय लेखक श्री वेद प्रकाश काम्बोजजी के 7 उपन्यास नीलम जासूस कार्यालय द्वारा शीघ्र ही प्रकाशित किये जा रहे हैं।

1.  बदमाशों की बस्ती
2.  देवता का हार
3.  अनोखा कैदी
4.  अलफांसे
5.  विजय पाकिस्तानी कैद में
6.  विद्रोह की आग
7.  चीते की आँख



शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020

कृष्ण मेहता

 नाम- कृष्ण मेहता

लोकप्रिय साहित्य का गढ इलाहाबाद होता था। इसके बाद दिल्ली और मेरठ केन्द्र बने।

     हिन्दी लोकप्रिय साहित्य में कुछ अन्य जगहों से भी जासूसी पत्र- पत्रिकाएं प्रकाशित होती रही हैं। गुजरात, आगरा और मुंबई इत्यादि से।

     बुद्धिमान प्रकाशन भी मुंबई से प्रकाशित होने वाली एक पत्रिका थी। इसमें कृष्ण मेहता जी का उपन्यास प्रकाशित हुआ था।

कृष्ण मेहता के उपन्यास

1. मौत का घण्टा


 

शहजादा तबस्सुम

 नाम- शहजादा तबस्सुम

दिल्ली से प्रकाशित होने वाली पत्रिका 'नीलम जासूस' का लोकप्रिय साहित्य में विशेष स्थान रहा है। इस पत्रिका के सम्पादक थे 'सत्यपाल वार्ष्ण्य (BA.) प्रभाकर' और सलाहकार थे -बनवारी लाल सादा RMP.

 वेदप्रकाश काम्बोज जी के उपन्यास भी यहीं से प्रकाशित होते रहे हैं।

   इसी पत्रिका से एक लेखक शहजादा तबस्सुम का उपन्यास प्रकाशित हुआ था। 

  हालांकि लेखक शहजादा तबस्सुम का नाम कभी चर्चा में नहीं रहा ।

शहजादा तबस्सुम के उपन्यास

1. कोहतूर की चोरी - नवम्बर 1959




रविवार, 1 सितंबर 2019

जासूसी दुनिया पत्रिका

जासूसी दुनिया पत्रिका की रोचक जानकारी।

आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि जासूसी दुनिया पहले राही मासूम रजा लिखने वाले थे. उन्होंने लिखा नहीं था. उनसे अब्बास हुसैनी ने नमूना माँगा था और उन्हें व इब्ने सफी को फाइनल किया गया. लेकिन अंत में सफी साहब को इसलिए फाइनल किया गया क्योंकि उनमें जासूसी के साथ हास्य की भी समझ थी. और यह अच्छा ही हुआ. इससे उर्दू ही नहीं हिंदी को भी बेहतरीन जासूसी लेखक मिला. कल्ट लेखक भी कह सकते हैं. वो इकलौते लेखक हैं जिनका उपन्यास छपते छपते बिकना शुरू हो जाता था।
      तब ट्रेडल पर धीमी छपाई होती थी. इलाहबाद के खासकर इक्के वाले शाम ही से प्रेस के पास मंडराने लगते थे और छपाई के बाद बाइंडिंग का भी इंतज़ार नहीं करते थे और वैसे ही खरीद कर ले जाते थे. हालाँकि बाइंडिंग के नाम पर इसमें सिर्फ पिन ही लगती थी. लेकिन लोग इतना भी सब्र नहीं दिखाते थे. हॉट केक का नाम सबने सुना होगा, लेकिन हॉट केक की तरह बिकने वाला हिंदुस्तान का एकमात्र लेखक था इब्ने सफी।

- प्रस्तुति- विनोद भास्कर

Featured Post

मेरठ उपन्यास यात्रा-01

 लोकप्रिय उपन्यास साहित्य को समर्पित मेरा एक ब्लॉग है 'साहित्य देश'। साहित्य देश और साहित्य हेतु लम्बे समय से एक विचार था उपन्यासकार...