साहित्य देश के स्तम्भ 'उपन्यास अंश' में उस बार प्रस्तुत है युवा उपन्यासकार विकास सी एस झा द्वारा रचित 'सी.एस.टी. सीरीज' के उपन्यास 'सात जुलाई की रात' के रोचक अंश।
'सात जुलाई की रात' के कुछ अंश :
मेफेयर रेस्टोरेंट।
बांद्रा, मुम्बई।
ड्रीम हाउस का विजेता आदित्य आहूजा अपनी मौजूदा गर्लफ्रैंड तान्या मुखर्जी, जो शो के अंदर उसकी को-कंटेस्टंट भी थी, के साथ इस वक्त बांद्रा के एक रेस्टोरेंट के अंदर मौजूद था जहां वे किसी गंभीर चर्चा में रत दिख रहे थे।
"आदी, मुझे उस रात के बाद से पता नहीं क्यों हमेशा एक डर सा लगा रहता है।" तान्या मुखर्जी ने चेहरे पर आशंका के भाव लिए हुए आदित्य आहूजा से कहा।
"इसमें डरने की कौन सी बात हुई भला ? जिसे जाना था, चला गया। तकदीर की लिखी को कौन काट सकता है !" आदित्य आहूजा ने समझाते हुए तान्या से कहा।
"यार, लेकिन मुझे गीता की खुदकुशी वाली बात पर अब भी यकीन नहीं होता। इतना क्या पागलपन सवार हो गया था उसे। अच्छी-खासी जिंदादिल लड़की थी, पता नहीं क्यों ऐसा कदम उठा बैठी ?" तान्या के चेहरे पर तनाव साफ दिख रहा था।
"यार, तुम ये पूछ रही हो ? पता तो है तुम्हें सब।" आदित्य ने उसकी ओर देखा।