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गुरुवार, 14 अक्टूबर 2021

जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा जी की पुण्यतिथि पर

 जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा जी 14.10.1998 को इस नश्वर संसार को अलविदा कह गये। उनका भौतिक अस्तित्व चाहे न रहा पर अपने उपन्यासों और यादगार पात्रों से वे साहित्य संसार में अमर हो गये।
    जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा जी की पुण्यतिथि पर युवा लेखक अजिंक्य शर्मा जी श्रद्धांजलि स्वरूप उन्हें इस आर्टिकल के माध्यम से याद कर रहे हैं। 
        उपन्यास जगत में जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा जी का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वे सर्वश्रेष्ठ उपन्यासकारों में से एक थे। उन्होंने हिंदी उपन्यास जगत में ऐसा करिश्मा कर दिखाया, जो शायद ही कोई और कर सका हो। उनकी अदभुत लेखनी के दीवानों की संख्या करोड़ों में है। लोग बुकस्टालों पर उनका नाम ले-लेकर पूछा करते थे कि शर्मा जी कि नई किताब आई क्या?
आखिर उनकी रचनाओं में ऐसा क्या था? 

सोमवार, 26 जुलाई 2021

द ट्रेल- अजिंक्य शर्मा, समीक्षा

द ट्रेल - अजिंक्य शर्मा 
उपन्यास समीक्षा- संजय आर्य
                                उपन्यास समीक्षा-03
 "एक और नई मर्डर मिस्ट्री जिसमे रहस्य के साथ जज्बातों का सैलाब भी है जिसमे आप खो जाएंगे । कातिल को पकड़ने में इस बार पाठकों को बहुत मशक्कत करनी होगी । अंत काफी चौकाने वाला है।"
         'द ट्रेल' अजिंक्य शर्मा का सातवां उपन्यास है और  उनके पहले उपन्यास 'मौत अब दूर नही' को पाठकों से अच्छा प्रतिसाद मिला था जिसके कारण  लेखक से पाठकों की उम्मीद बढ़ गई थी जिस पर 'द ट्रेल' के माध्यम से लेखक 100 प्रतिशत खरे उतरे है, और मिस्ट्री लेखक के रूप में अपना सिक्का एक बार फिर से जमाने मे सफल रहे है। 
        'द ट्रेल' को मैंने एक बार पढ़ना शुरू किया तो खत्म करके ही माना। उपन्यास का अंत काफी हैरत अंगेज है  उनके अन्य उपन्यास से इतर इसमें जज्बातों का तूफान भी है । ऐसी मर्डर मिस्ट्री की आप भी खुद को जासूस मानते हुवे कातिल की तलाश करने लग जाएंगे।

रविवार, 18 जुलाई 2021

लौटेंगें वे दिन- अजिंक्य शर्मा

 लौटेंगें वे दिन- अजिंक्य शर्मा
बने रहे ये पढ़ने वाले, बनी रहे ये पाठशाला

जी हांँ, हिन्दी पाठकों की मस्ती की पाठशाला, जिसमें पाठकों ने बहुत मजे किए। एक वक्त था जब बुकस्टालों पर जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा, इब्ने सफी, वेद प्रकाश काम्बोज, कर्नल रंजीत, सुरेंद्र मोहन पाठक, अनिल मोहन, वेद प्रकाश शर्मा, अमित खान आदि लेखकों के उपन्यासों का इंतजार उतनी ही शिद्दत से किया जाता था, जितनी शिद्दत से आज दर्शक क्रिस्टोफर नोलन या मार्वल सिनेमेटिक यूनिवर्स की नई फिल्म का इंतजार करते हैं। इन लेखकों की लोकप्रियता का आलम ये था कि किताबें बुकस्टाल पर आते ही हाथों-हाथ बिक जातीं थीं। आज भी इनके दीवानों की कमी नहीं है और इनके उपन्यास रिप्रिंट होकर भी बिक रहे हैं।  
उपन्यासकार अजिंक्य शर्मा
                     उपन्यासकार अजिंक्य शर्मा

मंगलवार, 25 अगस्त 2020

दूसरा चेहरा- अजिंक्य शर्मा

दूसरा चेहरा- अंजिक्य शर्मा
 उपन्यास 'दूसरा चेहरा' का एक अंश-

इंस्पेक्टर सुबीर पाल ने होटल जश्न की छठवीं मंजिल पर स्थित कमरा नम्बर 303 में कदम रखा।
वो उस तरह के शानदार होटलों में मिलने वाले सुइट्स की तरह ही एक शानदार सुइट था, जिसमें कुल तीन रूम थे। एक बाहर वाला हॉलनुमा रूम, उसे पार करके अंदर एक छोटा रूम और आखिर में तीसरा व आखिरी कमरा।
लाश सबसे बाहर वाले कमरे में ही पड़ी थी।
       इंस्पेक्टर ने गौर से लाश का मुआयना किया। वो कोई 30-32 वर्ष का सेहतमंद ऊंची कद-काठी वाला युवक था। उसके गले के पास खून का छोटा-सा तालाब जैसा बन कर सूख भी चुका था। गले पर धारदार हथियार से काटे जाने का निशान था। 

       कुछ देर उस कमरे में रूकने के पश्चात इंस्पैक्टर पाल अगले कमरे को पार करते हुए सबसे अंदर वाले कमरे-बैडरूम में पहुंचा। वहां सब इंस्पैक्टर दिनेश रावत और पुलिस का डॉक्टर वी.के. खुराना पहले ही मौजूद थे। 

सोमवार, 29 जून 2020

मैं और मेरी छोटी सी साहित्यिक दुनिया- अजिंक्य शर्मा

मैं और मेरी छोटी सी साहित्यिक दुनिया- अजिंक्य शर्मा
(उपन्यास जगत के सुनहरी दौर को रेखांकित करता अंजिक्य शर्मा जी का यह आलेख आपको उस समय में ले जायेगा जब मनोरंजन का माध्यम पुस्तकें होती थी।)

    उपन्यास! चार अक्षरों और एक अर्धाक्षर का ये शब्द कुछ लोगों के लिये बिल्कुल नया होता है तो कुछ की इसे सुनकर भृकुटि चढ़ जाती है लेकिन हम जैसे बहुत से पुस्तकप्रेमी ऐसे भी हैं, जिनके दिलों के लिये ये शब्द ऐसा है, जैसे तपती गर्मी में सावन की बौछार।
       अगर आप उपन्यास प्रेमी नहीं हैं तो शायद इसे महसूस न कर सकें लेकिन एक उपन्यास प्रेमी इसे अच्छी तरह समझ सकता है। बहुत से पाठकों ने किशोरावस्था से, तो बहुत से ने तो बचपन में ही ये रोग दिल से लगा लिया था। कॉमिक्सों से तरक्की कर हमने उपन्यास पढ़ना शुरू किया और कब ये जीवन का अभिन्न अंग बनती चली गईं, पता भी न चला। वो समय भी कितना सुनहरा था, जब किसी काम से या घूमने कहीं भी जाओ तो चाहे बाजार हो, रेलवे स्टेशन हो, बस स्टैंड हो या गांव-शहर का कोई गली-मोहल्ला ही हो, नजरें किसी ऐसी दुकान या गुमटी को ढूंढतीं थीं, जिन पर एक पतली रस्सी पर कॉमिक्सें लटकी हुईं और सीधे कतार में या आड़े रखे हुए उपन्यास दिख जायें। खरीदने के लिये या किराये पर पढ़ने के लिए ही मिल जायें। शहरों में उम्मीद ज्यादा होती थी क्योंकि शहरों में लाइब्रेरियाँ अधिक हुआ करतीं थी। 
         लेकिन टीवी पर लगातार बढ़ते चैनलों और फिर इंटरनेट ने इन पुस्तकों के व्यवसाय पर करारा प्रहार किया। फिर बहुउपयोगी विलक्षण यंत्र मोबाइल और उसका स्मार्ट और स्मार्ट से भी ज्यादा स्मार्टफोन के रूप में विकसित हो जाना तो जैसे ऊंट की पीठ पर आखिरी तिनका था। 

बुधवार, 24 जून 2020

हिन्दी उपन्यास जगत के 'स्टीवन स्पीलबर्ग'.... - अजिंक्य शर्मा

हिन्दी उपन्यास जगत के 'स्टीवन स्पीलबर्ग'-जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा
  अजिंक्य शर्मा जी की कलम से

      हिन्दी उपन्यास जगत में कई महान हस्तियां हुईं हैं, जिन्होंने अपनी अद्वितीय प्रतिभा के बल पर जासूसी साहित्य को समृद्ध बनाया। जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा जी भी ऐसे ही लेखकों में से थे, जिनकी गिनती सर्वश्रेष्ठ लेखकों में होती है। सहज सरल भाषा और मन को छू लेने वाली कहानियां उनकी लेखनी की विशेषता थीं। उनकी रचनाएं वास्तविकता के इतनी करीब होतीं हैं कि उन्हें पढ़ते वक्त पाठकों को लगने लगता है, जैसे वे स्वयं उन घटनाओं के साक्षी हों।

       जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा जी को लेखन में  विविधता के कारण भारत में हिन्दी उपन्यास जगत का 'स्टीवन स्पीलबर्ग' कहा जा सकता है। जिस तरह स्टीवन स्पीलबर्ग ने 'सेविंग प्राइवेट रायन', 'ई.टी.', 'शिण्डलर्स लिस्ट' से लेकर 'जुरासिक पार्क' तक अलग अलग जॉनर की एक से बढ़कर एक फिल्में बनाईं, उसी तरह ओमप्रकाश शर्मा जी ने भी ऐतिहासिक, सामाजिक, जासूसी, व्यंग्य से लेकर हॉरर आदि विभिन्न विधाओं में एक से बढ़कर एक उपन्यास लिखे। उस समय की डाकुओं की समस्या का चित्रण करते हुए उन्होंने कई शानदार उपन्यास लिखे। राष्ट्रों के हथियारों के प्रति बढ़ते मोह और न्यूक्लियर बम जैसी समस्याओं की ओर भी 'कटे हुए सिर' जैसे उपन्यासों के माध्यम से उन्होंने पाठकों को जागरूक किया। उनके द्वारा रचित 'सांझ का सूरज' जहां एक महान ऐतिहासिक रचना है, वहीं अपने देश का अजनबी बेहद मर्मस्पर्शी उपन्यास है, जो विदेशों में बसे भारतीयों को उनके देश से जोड़ने का सन्देश देता है। 'छुपे चेहरे' भारत के 'अवेंजर्स' की तरह है, वहीं 'पिशाच सुन्दरी' 'ड्रैक्यूला' के भारतीय रूप की तरह। 'भूतनाथ की संसार यात्रा' पढ़कर आप हंसते हंसते लोटपोट हो जायेंगें, वहीं 'सबसे बड़ा पाप' जैसे उपन्यास देह व्यापार जैसे घृणित कारोबार की सच्चाई आपकी आंखों के आगे बेनकाब करते हैं।
              ये सचमुच एक आश्चर्य का विषय रहा कि आखिर जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा जी अलग अलग विधाओं में इतना शानदार कैसे लिख लेते थे? उन पर मां सरस्वती की विशेष कृपा थी। उनकी अपार लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बुकस्टाल्स पर लोग सीधे पूछते थे-"शर्मा जी का नया उपन्यास आया क्या?" उनकी बढ़ती लोकप्रियता का लाभ उठाने कुछ अन्य लेखकों ने भी उनके नाम से लिखना शुरू कर दिया, जिसके चलते उनके असली नॉवल्स ढूंढने के लिये उनके नाम के साथ 'जनप्रिय लेखक' ही उनकी पहचान बन गया।
            उनके उपन्यासों की तरह ही उनके पात्र भी विविधता से परिपूर्ण हैं। राजेश जहां एक आदर्श चरित्र वाले मानवतावादी जासूस हैं, वहीं जगत एक मस्तमौला अंतर्राष्ट्रीय ठग है, जो जिन्दगी को खुलकर जीने में विश्वास रखता है। गोपाली राजस्थान के जाने माने जासूस हैं, जिनके साहस और काबिलियत की लोग मिसालें देते हैं। 'पिशाच सुन्दरी' के नायक भी गोपाली ही हैं। चक्रम थोड़े सनकी किस्म के जासूस हैं, जिनका पालतू कुत्ता...ओह सॉरी...हवाबाज अपनी आश्चर्यजनक हरकतों से मंत्रमुग्ध कर देता है। राजेश का साथी जयन्त की हरकतों से आप हंसने के लिये विवश हो जायेगें, वहीं आधुनिक जासूसों जगन-बन्दूकसिंह की जोड़ी भी लाजवाब है।
जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा जी की लेखनशैली की एक खास बात ये भी है कि उनमें अनावश्यक हिंसा का प्रदर्शन नहीं होता। उनके कई उपन्यासों में आप देखेंगे कि पूरा उपन्यास खत्म हो जायेगा लेकिन किसी का खून नहीं होगा। इसके बावजूद उनके उपन्यासों की रोचकता में कोई कमी नहीं आती थी। इसी प्रकार जनप्रिय लेखक अश्लीलता से भी हमेशा कोसों दूर रहे। उनके उपन्यास इस तरह के होते हैं कि एक पिता अपनी पुत्री को, एक भाई अपनी बहन को पढ़ने के लिये दे सकता है।
              जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा जी के उपन्यासों की एक खास बात ये भी है कि उनसे हमें हिम्मत और मानवता की सीख मिलती है। राजेश, जगत जैसे साहस के शिखर पुरुषों से सीखने को मिलता है कि कभी भी किन्हीं भी परिस्थितियों में हार नहीं माननी चाहिये। राजेश, जगत बिना किसी हथियार के केवल अपने बुद्धिकौशल के बल पर पूरी की पूरी फौज को धूल चटा देने की क्षमता रखते हैं। जगत तो 'फैंटम' के भारतीय रूप की तरह है। अविजित और अडिग।
            बेहद दुख की बात है कि ऐसे महान लेखक आज हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन उनकी कालजयी रचनाएँ आज भी हमारे साथ हैं। रीप्रिंट नहीं होने से उनके उपन्यास आज पाठकों को उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।मैं शर्मा जी के सुपुत्र श्री वीरेन्द्र शर्मा जी एवं 'महासमर' व 'सत्यमेव जयते नानृतं' के रचयिता श्री रमाकान्त मिश्रा जी का विशेष रूप से आभार व्यक्त करना चाहता हूं, जिनके प्रयासों से जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा जी की वेबसाइट  http://omprakashsharma.com के माध्यम से ओमप्रकाश शर्मा जी के बहुत से अनमोल उपन्यास पाठकों को पढ़ने के लिये उपलब्ध हो पा रहे हैं। इन पंक्तियों के लेखक को स्वयं भी ओमप्रकाश शर्मा जी के अनेक उपन्यास इस वेबसाइट के माध्यम से ही पढ़ने को मिल सके। वहीं ईबुक के आदि नहीं होने के कारण बहुत से पाठक अब भी पुराने उपन्यासों के रीप्रिंट होने की बेसब्री के साथ प्रतीक्षा कर रहे हैं। उम्मीद है ओमप्रकाश शर्मा जी के अनगिनत प्रशंसकों का ये सपना शीघ्र पूरा हो और उनके उपन्यास रीप्रिंट होकर हमें पढ़ने को मिल सकें।

हिन्दी उपन्यास जगत के महान लेखक जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
    लेखक- अजिंक्य शर्मा (ब्रजेश शर्मा) उपन्यासकार

सोमवार, 27 अप्रैल 2020

4. अजिंक्य शर्मा- साक्षात्कार

मेरी कोशिश है कि मैं पाठकों के लिये मौलिक और बेहतरीन लिखूं -अजिंक्य शर्मा
साक्षात्कार शृंखला-04

साहित्य देश ब्लॉग के साक्षात्कार स्तम्भ के अन्तर्गत लोकप्रिय जासूसी साहित्य की श्रेणी में छतीसगढ के युवा उपन्यासकार अजिक्य शर्मा जी का साक्षात्कार प्रस्तुत है।‌
अजिंक्य शर्मा जी का मूल नाम ब्रजेश शर्मा है और इनके अब तक तीन उपन्यास क्रमशः 'मौत अब दूर नहीं', 'पार्टी स्टार्टेड नाओ' और 'काला साया' किंडल पर प्रकाशित हो चुके हैं। इनके उपन्यास शीघ्र ही हाॅर्डकाॅपी के रूप में पाठकों को उपलब्ध होंगे।
अपने तीन उपन्यासों के दम पर इन्होंने पाठकवर्ग में एक विशेष स्थान प्राप्त कर लिया है। 

अजिंक्य शर्मा
1. सबसे पहले आप अपना परिचय दीजिएगा।
-    मेरा नाम ब्रजेश कुमार शर्मा है। वर्तमान में मैंने अजिंक्य शर्मा के पैन नेम से उपन्यास लिखना आरम्भ किया है और मुझे कहते हुए हर्ष का अनुभव हो रहा है कि मेरे इस प्रयास को पाठकों की भरपूर सराहना भी मिल रही है। मैं छतीसगढ़ के महासमुन्द नामक एक छोटे से नगर में रहता हूं और वर्तमान में यहां के एक प्रतिष्ठित साप्ताहिक समाचार पत्र में कार्यरत हूं। उपन्यास लेखन मैंने एक शौक के रूप में आरम्भ किया लेकिन मुझे अंदाजा नहीं था कि पाठकों का इतना प्यार और विश्वास मिलेगा। पाठकों के इसी प्यार और विश्वास से प्रेरित होकर मैं आगे भी और भी अच्छा लिखने का प्रयास करूंगा।

2. आपने अपने वास्तविक नाम 'ब्रजेश शर्मा' के स्थान पर पैन नेम 'अजिंक्य शर्मा' के नाम से क्यों लिखना पसन्द किया?
- ये प्रश्न मुझसे मेरे सभी मित्र एवं पाठकगण पूछते हैं। दरअसल पैन नेम के रूप में दूसरे नाम से लिखने का कारण ये है कि मेरी दिलचस्पी विभिन्न विधाओं में लिखने की है। जासूसी थ्रिलर तो लिख ही रहा हूँ लेकिन साइंस फिक्शन में भी मेरी गहन रुचि है। हिन्दी में साइंस फिक्शन उतने लोकप्रिय भी नहीं हैं तो सम्भवतः इंग्लिश में लिखूं। इसी विचार से मैंने 'अजिंक्य शर्मा' के पैन नेम से लिखना शुरू किया। साइंस फिक्शन ब्रजेश कुमार शर्मा के नाम से ही आएगा लेकिन उसमें अभी काफी समय है। वैसे भी पाठकों की ही राय के अनुसार मेरा पैन नेम ही काफी पसन्द किया जा रहा है। इस स्नेह के लिये मैं सभी पाठकों का तहेदिल से आभार व्यक्त करता हूं।

3. उपन्यास लेखक की तरफ झुकाव कैसे हुआ?
-     इस बारे में मैंने अपने पहले उपन्यास 'मौत अब दूर नहीं' के लेखकीय में थोड़ी चर्चा की थी। दरअसल मैं बचपन से ही उपन्यास पढ़ने में मेरी काफी रुचि रही है और इस रुचि के कारण ही मैं कब लेखन की ओर आकृष्ट हो गया, इसका पता ही नहीं चला। अब माँ सरस्वती की कृपा से हिंदी लोकप्रिय साहित्य की सेवा करने का अवसर मिला है तो मैं अपनी पूरी क्षमता से इस कार्य में जुट गया हूं। पाठकों का भरपूर प्यार और प्रोत्साहन तो मिल ही रहा है। एक लेखक को और क्या चाहिये?

4. आपके अब तक तीन उपन्यास आये हैं और सभी में साइको पात्र हैं, इसकी कोई वजह? 

अजिंक्य शर्मा- परिचय



नाम- अजिंक्य शर्मा (लेखकीय नाम)
नाम-   ब्रजेश कुमार शर्मा (मूल नाम)
माता- 
पिता- 
जन्मतिथि-13.06.1990
पता- BTI रोड, महासमुंद,       
  छतीसगढ़

सम्पर्क- ajinkyasharma181@yahoo.co


उपन्यास सूची- (उपन्यास समीक्षा पढने के लिए उपन्यास शीर्षक पर क्लिक करें)
  1. मौत अब दूर नहीं     (25 अक्टूबर 2019)
  2. पार्टी स्टार्टेड नाओ   (31 जनवरी 2020)
  3. काला साया           (अप्रैल 2020)
  4. दूसरा चेहरा
  5. अनचाही मौत
  6. ब्रेकिंग न्यूज- वहशी कातिल
  7. द ट्रेल               (द ट्रेल सीरीज)
  8. द ट्रायो             (द ट्रेल सीरीज)
  9. निमिष             (साइंस फिक्शन थ्रिलर)
  10. वतन के रखवाले


अजिक्य शर्मा- परिचर्चा

अजिंक्य शर्मा- परिचर्चा
नमस्कार,
साहित्य देश इस बार पाठकों के लिए लेकर आया है नव लेखक अजिंक्य शर्मा जी से संबंधित विस्तृत जानकारी। उनका परिचय, उपन्यास सूची, साक्षात्कार और उनके प्रथम उपन्यास का लेखकीय


       छतीसगढ के महासमुन्द में जन्म ब्रजेश शर्मा जी को बचपन से ही कथा-कहानियां पढने का शौक था। विद्यालय शिक्षा और उम्र के साथ-साथ यह शौक भी जवान होता चला गया।
लेखक के चलते शिक्षा के साथ-साथ इन्होंने एक साप्ताहिक पत्र में काम करना भी आरम्भ कर दिया। लेकिन अंदर कहीं न कहीं एक जासूसी लेखन करवटें ले रहा था। सोशल मिडिया मित्रों के संपर्क में आने के पश्चात इन्हें कुछ उपन्यास पाठक मिले तो इन्होंने भी लेखन में हाथ आजमाया।
       EBook का समय था, इधर लिखा और उधर प्रकाशित हुआ। इनकी पहली रचना 'मौत अब दूर नहीं' को पाठकों का भरपूर प्यार मिला। यही प्यार फिर आगामी उपन्यासों का आधार बना।
अजिंक्य शर्मा जी ने मर्डर मिस्ट्री के साथ-साथ स्लैशर जैसे कथानकों की भी हिन्दी जासूसी साहित्य में नीव डाल दी। वहीं मर्डर मिस्ट्री में भी कुछ नये प्रयोग इनके उपन्यासों में दृष्टिगत होते हैं।
पुलिस की सकारात्मक छवि प्रस्तुत करना, वर्तमान परिस्थितियों को उपन्यासों में स्थान देना आदि इनके उपन्यासों में देखा जा सकता है।

हम लेखक के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।
लेखक के विषय में अन्य जानकारी निम्न लिंक पर उपलब्ध है।

1. परिचय / उपन्यास सूची 
लेखक- अजिंक्य शर्मा
2. साक्षात्कार
3. उपन्यास लेखकीय
4. उपन्यास समीक्षा
उपन्यास चित्र



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 लोकप्रिय उपन्यास साहित्य को समर्पित मेरा एक ब्लॉग है 'साहित्य देश'। साहित्य देश और साहित्य हेतु लम्बे समय से एक विचार था उपन्यासकार...