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शनिवार, 20 अगस्त 2022

हास्य रस - काॅनमैन- सुरेन्द्र मोहन पाठक

सुरेन्द्र मोहन पाठक जी मर्डर मिस्ट्री लेखन के लिए विख्यात, वहीं उनके उपन्यासों में हास्यरस भी देखने को मिलता है। पाठक जी के प्रिय पात्र पत्रकार सुनील चक्रवर्ती के मित्र रमाकांत अपने विशेष अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 
  उपन्यास 'काॅनमैन' का एक दृश्य देखें जहां रमाकांत एक युवती के साथ कैसे हास्य अंदाज में बातचीत करते हैं।

रमाकान्त ने उसके बालों की तरफ उंगली उठाई।
"ये विग है ?” वो बोला ।
“नहीं।” वो बड़े सब्र से बोली।
“विग है। "
“नहीं, भई ।”
"मेरे खयाल से तो विग है !”
“तुम्हारा खयाल गलत है।”
“विग है. मोतियांवालयो।”
“अच्छा, भई, विग है।"
“कमाल है? लगता तो नहीं !"
युवती ने आंखें तरेरीं।


रविवार, 1 नवंबर 2020

सुरेन्द्र मोहन पाठक बनाम मिर्जापुर -2

  वेब सीरीज मिर्जापुर-2 रिलीज के साथ एक विवाद में उलझ गयी। वह विवाद था आदरणीय सुरेन्द्र मोहन पाठक जी के उपन्यास 'धब्बा' के एक संवाद पर। 

   SMP बनाम मिर्जापुर-2 पर पढें #सहर जी का यह आर्टिकल

मिर्ज़ापुर 2 के स्क्रीनप्ले में ऐसी दसियों बाते हैं जो आपत्तिजनक हैं, ससुर बहु का हौलनाक रिश्ता, बिना मतलब की गालियां, लचर फिलर्स, धीमा होता कथानक या बेहद बचकाना क्लाइमेक्स; ऐसे कई पॉइंट्स हैं जिसको टेक्निकल समझ न रखने वाले भी ये ज़रूर कह सकते हैं कि ‘नहीं यार, मज़ा नहीं आया’
     इन सबसे इतर, एक आपत्ति ऐसी उठी है जो किताबों से दूरी रखने वाला न समझ पायेगा लेकिन वो ख़ामी इन सारे टेक्निकल लापरवाहियों पर भारी है।
Series के तीसरे एपिसोड में एक सीन है कि जब कुलभूषण खरबंदा नॉवेल पढ़ रहे हैं, voice-over चल रहा है “बलराज को अपनी चचेरी बहन अच्छी लगती थी... जब वो स्नान करने के लिए निवस्त्र हुई..“ ठीक इसी वक़्त रसिका दुग्गल उनके हाथ से नॉवेल छीन लेती हैं। इस नॉवेल का नाम धब्बा है और ये सुरेंद्र मोहन पाठक साहब के चर्चित पात्र सुनील series का नॉवेल है। तो इसमें आपत्ति क्या है? आपत्ति ये है कि voice-over में सुनाई कथा बिलकुल बेतुकी है, उस नॉवेल में ऐसा कुछ है ही नहीं।    
मिर्जापुर-2 का विवादास्पद  voice-over दृश्य
  

बुधवार, 28 नवंबर 2018

काम्बोज जी- पाठक जी

 उपन्यास जगत के दो सितारे। 

वेदप्रकाश कंबोजी जी और सुरेन्द्र मोहन पाठक।

 बचपन के मित्र। एक बार फिर साथ-साथ। 

    

29.11.2018

शनिवार, 9 जून 2018

सुरेन्द्र मोहन पाठक की एक स्क्रिप्ट

सुरेन्द्र मोहन पाठक जी के उपन्यास 'ओवरडाॅज' की हस्तलिखित स्क्रिप्ट।
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     आज के समय के प्रसिद्ध मर्डर मिस्ट्री लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक जी के  एक उपन्यास 'ओवरडाॅज' की हम पाण्डुलिपि यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं।
      ओवरडाॅज उपन्यास की मूल स्क्रिप्ट के कुछ पृष्ठ यहाँ प्रकाश्य हैं ताकी पाठक देख सके की एक लेखक कितनी मेहनत से एक उपन्यास तैयार करता है।
पाठक साहब तो स्वयं एक -एक बिंदु पर बहुत मेहनत करते थे, यह उनकी स्क्रिप्ट देख कर जाना जा सकता है।
    अपने उपन्यास का टाइटल डिजाइन तक भी स्वयं तैयार करते थे।
       रवि पॉकेट बुक्स के मालिक मनेष जैन जी ने पाठक जी की‌ मेहनत की बहुत सराहना की है।
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उपन्यास- ओवरडाॅज
लेखक-   ‌‌सुरेन्द्र मोहन पाठक


धन्यवाद- मनेष जैन जी (रवि पॉकेट बुक्स)







सोमवार, 21 अगस्त 2017

सुरेन्द्र मोहन पाठक

सुरेन्द्र मोहन पाठक को हिंदी का सर्वश्रेष्ठ मिस्ट्री राइटर माना जाता है।
सुरेन्द्र मोहन पाठक की प्रथम कहानी सन् 1959 'सतावन साल पुराना आदमी' मनोहर कहानियाँ में प्रकाशित हुयी। उसके बाद  विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में इनकी कहानियाँ प्रकाशित हुयी।
1963 में इनका प्रथम उपन्यास 'पुराने गुनाह, नये गुनहगार' प्रकाशित हुआ। उसके पश्चात इनके एक से एक बढकर उपन्यास आये।
संपर्क-
smpmystrywriter@gmail.com

सुरेन्द्र मोहन पाठक के समस्त उपन्यास सूची
सुनील सीरीज के उपन्यास
1.पुराने गुनाह नये गुनाहगार- अक्टूबर - 1963
2.समुद्र में खून (धरती का स्वर्ग)- मई - 1964
3. होटल में खून -  नवम्बर - 1965
4. बदसूरत चेहरे- दिसम्बर - 1965
5. ब्लेकमेलर की हत्या (एक तीर दो शिकार)फरवरी - 1966
6. हांगकांग में हंगामा (देश द्रोही)- मार्च - 1966
7. मूर्ति की चोरी- मार्च - 1966

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