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मंगलवार, 18 जुलाई 2023

शुक्रवार, 21 सितंबर 2018

गजाला करीम

उपन्यासकार गजाला करीम जी के साथ। 03.06.2018

प्रसिद्ध जासूसी उपन्यासकार गजाल करीम जी के साथ श्री मान आबिद रिजवी साहब के घर पर।


बुधवार, 2 मई 2018

Iam Back- गजाला करीम

जासूसी उपन्यास जगत में एक और हलचल

लगभग दस वर्ष की खामोशी के पश्चात गजाला अपने उपन्यास के साथ लौट रही है।

उपन्यास नाम- iam Back

प्रकाशन- 3 मई 2018

फाॅरमेट- इ बुक

प्रकाशक- प्राची डिजीटल पब्लिकेशन- मेरठ

बुक्स प्राप्ति के लिए यहाँ क्लिक करें- iam Back- playstor


रविवार, 17 दिसंबर 2017

गजाला-प्रथम भारतीय हिंदी जासूसी महिला उपन्यासकार

गजाला करीम लोकप्रिय उपन्यास जगत का एक वह नाम है जिसने कम समय में ही अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर ली थी।
     स्वर्गीय वेदप्रकाश शर्मा की इस शिष्या ने बाल्यावस्था में ही जासूसी उपन्यास लेखन का शुभारंभ कर दिया और कम समय में ही प्रसिद्धि प्राप्त कर ली।
स्वयं वेदप्रकाश शर्मा जी ने गजाला जी के बारे में लिखा था, -" यह गर्व की बात है कि भारत की पहली महिला जासूसी उपन्यासकार मेरठ शहर की है। गजाला मुझे अपना गुरु मानती है, मैं इस काबिल नहीं हूँ । जब‌ मैंने उनमें लिखने की प्रतिभा और जज्बा देखा, तो उन्हें लेखन के कुछ गुर बताये थे। उन्होंने अभी तक जितने भी उपन्यास लिखे हैं, उनमें से कुछ मैंने पढे हैं। उनमें कथानक चयन की सलाहियत मौजूद है। दरअसल, जासूसी लेखन वो विधा है, जिस पर हमेशा से ही, खासकर भारत में पुरुषों का एकाधिकार रहा है। गजाला ने यह साबित किया है कि भारत कि महिलाएं भी जासूसी उपन्यास लिख सकती हैं।"
      
   बाल्यावस्था का फायदा प्रकाशकों ने इस तरह से उठाया की गजाला जी की प्रतिभा का इस्तेमाल गलत रूप से किया गया। इनके प्रारंभिक उपन्यासों को किसी और के नाम से प्रकाशित किया गया लेकिन प्रतिभा आखिर कहां तक छुपी रहती।
           कुछ पाठकों को इनके उपन्यासों के नाम पर आपत्ति हो सकती है लेकिन इनके उपन्यासों के नाम भी प्रकाशक महोदय अपने लालच के लिए बदल देते थे।
वेदप्रकाश शर्मा जी ने अपने उपन्यासों में‌ अश्लीलता का हमेशा विरोध किया है और फिर उनकी शिष्या के उपन्यासों में अश्लील कहां हो सकती है। सिर्फ उपन्यासों के शीर्षक जो कुछ उत्तेजक नजर आते हैं वह सिर्फ प्रकाशकों की देन है।
        कुछ विशेष वजह से गजला जी ने उपन्यास जगत से दूरी बना ली।
हमारी गजाला जी से यही प्रार्थना है की वे पुन: लेखन क्षेत्र में सक्रिय हों।
  अगर आप गजाला जी के बारे में जानाना चाहते हैं तो निम्न लिंक से उनकी आत्मकथा डाउनलोड करके पढें।
  अगर आप गजाला जी से संबंधित कोई भी प्रश्न करना चाहते हैं तो ब्लॉग के कमेंट बाॅक्स में लिखें।
गजाला करीम की आत्मकथा यहाँ उपलब्ध है।
क्लिक करें- आत्मकथा
नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।


रविवार, 21 मई 2017

गजाला

हिंदी लुगदी उपन्यास संसार में आपको कई महिला उपन्यासकार के नाम से उपन्यास मिल जायेंगे। पर आप को जानकर आश्चर्य होगा वे सभी के सभी छद्म लेखक (Ghost Writer) हैं।
डार्लिंग, सोफिया,  आदि।
हिंदी लुगदी उपन्यास जगत में वास्तविक महिला लेखक है और वह भी जासूसी उपन्यासकार।
हम आज चर्चा कर रहें है हिंदी की प्रथम महिला जासूसी उपन्यासकार गजाला की।
उत्तर प्रदेश निवासी गजाला स्वर्गीय वेदप्रकाश शर्मा की शिष्या है।
ये सन् 2005-2010 तक सक्रिय रही थी।
गजाला के उपन्यास
1. तुरुप का इक्का
2. ख्वाबों की शहजादी
3. कट्टो
5. अंगूरी बदन
6. चुलबुली

7.रंगीन फितना

8.परी हूँ मैं

9.रूप मस्तानी

10.जवानी जिंदाबाद

11. हवा हवाई

12. गोल्डन बुलेट

13. लेडी हंटर

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