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बुधवार, 9 जून 2021

बिच्छू का खेल- अमित खान

साहित्य देश अपने ब्लॉग पर एक नया स्तम्भ आरम्भ कर रहा है- उपन्यास समीक्षा। जिसमें आप विभिन्न पाठकों द्वारा लिखी ्यी रोचक समीक्षाएं पढेंगे। 
इस क्रम में सब से पहले हम हरियाणा निवासी सुनील भादू जी द्वारा लिखित एक समीक्षा यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं।
  अगर आप भी किसी उपन्यास पर समीक्षा लिखते हैं तो हमें भेज सकते हैं। 
Emial- sahityadesh@gmail.com
उपन्यास- बिच्छू का खेल
लेखक- अमित खान
प्रकाशक- Book cafe
एमेजन‌ लिंक- बिच्छू का खेल
उपन्यास समीक्षा- सुनील भादू
पर सुपरहिट वेब सीरीज़ बनी। पर वेब सीरीज और उपन्यास दोनों की कहानी अलग लग रही है।

कहानी की शुरुआत मुख्य किरदार अखिल से होती है। अखिल के पिता उसे एक वकील बनाना चाहते है। अखिल का एडमिशन लॉ कॉलेज में करवाने के लिए उनको एक लाख की जरूरत होती है। वो अगले दिन उस्मान भाई के पास जाता है पर उस्मान भाई उसे एक भी पैसा नही देते,  रात को अखिल के पिता देर से आते हैं और अपने साथ एक लाख रुपए लेकर आते हैं। 
     अगले दिन सुबह पुलिस इंस्पेक्टर तिवारी आता है और अखिल के पिता को उस्मान भाई की हत्या के जुर्म में गिरफ्तार कर लेता है। 
उस्मान भाई की वाइफ सभी वकीलों को अखिल के पिता का केस लड़ने से मना कर देती है पर क्रिमिनल लॉयर तलोनी अखिल के पिता का केस लेता है और उसे लड़ता है। पर तलोनी उस केस को हार जाता है और अखिल उर्फ़ ‘बिच्छू’ के पिता को एक झूठे मर्डर के इल्ज़ाम में फाँसी हो जाती है। 
फिर अखिल को पता चलता है कि उनकी मौत के लिये तलोनी ज़िम्मेदार है, तब अखिल अपने फ़ादर की मौत का बदला लेने के लिये तलोनी के मर्डर की प्लानिंग बनाता है। यह ‘बिच्छू का खेल’ था - ज़बरदस्त खेल ।
- क्या सच में तलोनी ने अखिल (बिच्छू) के साथ धोखा किया था? 
- ऐसी कौनसी बात थी जो तलोनी ने अखिल से छुपाई?
- अब क्या करने वाला था बिच्छू? क्या सजा देने वाला था वो
- तलोनी को या फिर उसे कुछ नही करने वाला था ?
- क्या सच में अखिल के पिता ने उस्मान भाई का कत्ल किया था ?

रविवार, 29 सितंबर 2019

दो लेखक

परशुराम शर्मा जी और अमित खान
 ले

सितंबर,2019, परशुराम शर्मा जी और अमित खान जी मुंबई में।

रविवार, 15 सितंबर 2019

मैं जासूसी उपन्यासकार क्यों बना?- अमित खान

मैं जासूसी उपन्यासकार ही क्यों बना ?

 मैं समझता हूँ, उपन्यास लेखन अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है । जिसमें पात्रों के माध्यम से आप अपने मन की बात कहते हैं । दूसरे शब्दों में, उपन्यास-लेखन एक जादू की तरह है । जैसे काला जादू ! उपन्यासकार एक जादूगर की तरह रंगमंच पर खड़ा होता है और वह अपने दिमाग रूपी हैट में-से घटनाओं का ऐसा चमत्कारी जाल निकालकर दिखाता है, ऐसा महिमा-मंडल चारों तरफ बुनता है कि सब बेहद मन्त्र-मुग्ध होकर कागज़ पर लिखे शब्दों को पढ़ते हैं ।

       जिस उपन्यासकार में पाठकों को शब्दों से चिपकाने का जितना ज्यादा कौशल होगा, वह उतना ही कामयाब उपन्यासकार बनेगा  ।

         कहने को सब कुछ काफी आसान है, लेकिन फिर भी यह जादू बिखेरना कोई बच्चों का खेल नहीं । उसके लिये उपन्यासकार के पास कठोर परिश्रम, अगाध कल्पनाशीलता और पाठकों की नब्ज परखने का ख़ास आला होना चाहिए ।

       बचपन से ही मुझे अच्छा लगता था, रहस्यमयी रचनाओं का ताना-बाना बुनना । मैं घंटों के लिये ऐसे कल्पना-लोक में खो जाता, जो एक अजब ही दुनिया होती । थ्रिल (रोमांच) से मुझे प्यार था, आज भी है । ज़रा सोचिये, आम जिन्दगी में भी कितना थ्रिल होता है । जिन्दगी में कितने अद्भुत होते हैं वो क्षण, जब आपको मालूम ही नहीं होता कि अगले पल क्या होने वाला है ? क्या घटने वाला है ? सब कुछ सस्पेंसफुल होता है । फिर चाहे वह सस्पेंस कैरियर को लेकर हो या जिन्दगी और मौत को लेकर । थ्रिल आखिर जिन्दगी में कहाँ नहीं है ? हर जगह रोमांच है । हर जगह सस्पेंस है । और जब हमारी जिन्दगी ही इतनी रोमांचकारी होती है, तो फिर व्यवसाय भी कोई रोमांचकारी ही क्यों न चुना जाये । यही सोचकर मैं जासूसी उपन्यासकार बन गया ।

     श्रद्धेय देवकीनंदन खत्री से शुरू हुआ भारत में जासूसी उपन्यास का यह सफ़र इब्ने सफी और ओमप्रकाश शर्मा से लेकर आज तक जारी है ।
      फिर भी एक बात का दुःख अवश्य है । भारत में जासूसी साहित्य को वह सम्मान आज भी नहीं मिला, जो मिलना चाहिए था । जबकि वेद प्रकाश शर्मा और सुरेन्द्र मोहन पाठक जैसे शलाका पुरुष इस क्षेत्र में हुए हैं, जिन्होंने अद्भुत लेखन-कार्य किया है । आज भी जासूसी साहित्य को भारत में साहित्य के नाम पर कूड़ा परोसने वाला एक व्यवसाय समझा जाता है । जबकि विदेशों में जासूसी साहित्यकारों ने अथाह मान-सम्मान प्राप्त किया है । अगाथा क्रिस्टी, इयान फ्लेमिंग और जेम्स हेडली चेइज जैसे दर्जनों उपन्यासकार इस बात के साक्षी हैं । इतना ही नहीं, शरलाक होम्ज पात्र के रचयिता आर्थर कानन डायल को इंग्लैंड में ‘सर’ जैसी मानद उपाधि से भी अलंकृत किया गया ।

क्या भारत में ऐसा संभव है ?
हरगिज नहीं ।
अभी जासूसी साहित्य के लिये यहाँ एक खुली मानसिकता की आवश्यकता है । स्वस्थ्य बहस की आवश्यकता है ।

       फिर भी मुझे इस बात पर गर्व है कि मैं एक जासूसी उपन्यासकार हूँ और मुझे दया आती है उन कुंठित मानसिकता वाले लोगों पर, जो जासूसी उपन्यासों को सिर्फ इसलिये नहीं पढ़ते, क्योंकि उनकी निगाह में यह एक स्तरहीन साहित्य है ।

ज़रा सोचिये, वह मनोरंजन के कितने महत्वपूर्ण साधन से वंचित हैं ।

     मैं इस कामना के साथ इस लेखकीय को बंद करता हूँ कि एक दिन हालात सुधरेंगे । एक दिन जासूसी साहित्य को भारत में वही दर्जा हासिल होगा, जो विदेशों में हासिल है ।

अब आज्ञा चाहूंगा ।
आपका अपना
अमित खान
मुंबई – 400104
सम्पर्क सूत्र : foramitkhan@gmail.com

यह खास लेखकीय, जो "मैडम नताशा का प्रेमीे" उपन्यास का हिस्सा है।  


बुधवार, 17 अप्रैल 2019

अमित खान जी के लिए

कुछ टिप्पणियाँ अख़बारों से लेख़क  के बारे में


1. अमित खान—हिन्दी पल्प फिक्शन का बेहद मशहूर और सबसे युवा चेहरा।-  हिन्दुस्तान टाइम्स


2. हिन्दी पल्प साहित्य के सबसे युवा लेखक, जिनकी निगाह लेखन के इस बदलते युग में इंटरनेट व्यवसाय पर भी है।-    फेमिना


3. अमित खान—वह लेखक, जिन्होंने अपनी ज़िद और शर्तों पर ज़िन्दगी जी।- दैनिक जागरण


4. अमित खान—थ्रिलर उपन्यासों की दुनिया में एक प्रभावशाली नाम है।- मिड डे


5. बारह साल की उम्र में पहली कहानी। 15 साल की उम्र में पहला धारावाहिक उपन्यास। यह किसी कहानी के किरदार का ज़िक्र नहीं है बल्कि ‘अमित खान’नाम के एक ऐसे शख्स का परिचय है—जिसका लिखा बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने पढ़ा और अब पर्दे पर लाखों लोग देख रहे हैं।- दैनिक जनवाणी


6. अमित खान—वह नाम, जो लेखन की दुनिया का अद्भुत व्यक्तित्व है।- द फ्री प्रेस जनरल


7. चेतन भगत वर्सिस अमित खान- दिव्य भास्कर

अमित खान

शनिवार, 26 मई 2018

अमित खान

अमित खान के उपन्यास
कमाण्डर करन सक्सेना सीरीज
1. तिलक रोङ का भूत(प्रथम उपन्यास)
2. दो डकैत
3. जान खतरे में
4. मौत की कुर्सी
5. खतरनाक आदमी
6. मुट्ठी में‌ बदं मौत
7. गैंडास्वामी का आतंक
8. एक चिट्ठी खून भरी
9. मिस्टर जीरो
10. चौकी नंबर ती‌न
11. गोली करेगी फैसला
12. आगे खतरा, पीछे मौत
13. हत्यारे का चैलेंज
14. लाल कफन
15. गन‌ मास्टर
16. भेदिया
17. कत्ल होगा सरेआम
18. चक्रा का चक्रव्यूह
19. जलता शहर
20. हाहाकार
21. कैदी
22. डण्डा परेड
23. एक डकैती ऐसी भी
24. एक नंबर का जल्लाद
25. हमलावर
26. सात दिन का अभियान
27. गद्दार
28. कमाण्डर
29. दोहरी चाल
30. मुर्दाघर
31. बम‌ काण्ड
32. मेरे हाथ, मेरे हथियार
33. बारूद का बेटा
34. दस टन सोना
35. मौत के मुँह में
36. आखिरी गोली
37. हिटलर का खजाना
38. आतंकवादी
39. हेराफेरी
40. सात तालों‌ में बंद मौत
41. एक वैज्ञानिक की तलाश
42. कौन जीता, कौन हारा
43. एक गोली, एक निशान
44. पासे पलट गये
45. रॉयल पैलेस
46. सांप-सीढी का खेल
47. नाकाब के पीछे
48. बाज बिग्रेड
49. एक चोट लौहार की
50. झांसेबाज
51. प्लानर
52. मरियम का बेटा
53. वन मैन आर्मी
54. सांप का बिल
55. नौ इंच का आदमी
56. एक अजनबी लङकी
57. रावणलीला
58. प्राइम‌ मिनिस्टर का मर्डर (धीरज पॉकेट बुक्स)
59. किस्मत का सुल्तान
60.

शीतल राजपूत सीरीज

61. घायल शेरनी
62. निशाना निगाहों‌ का
63. परकटा पंक्षी
64. मौत का जहाज
65. पुरानी बीवी नया प्यार

थ्रिलर

66. चकमें पर चकमा
67. बिच्छू का खेल
68. बाॅस
69. हादसे की रात
70. फंस जाओ मेरे लिए
71. तुम‌ मरोगी मेरे हांथों
72. गरम छुरी
73. नाइट क्लब
74. मैडम नताशा का प्रेमी
75. साथ जियेंगे, साथ मरेंगे
76. करिश्मा हाथों‌ का
77. औरत मेरी दुश्मन
78. तीन मुकदमें
79. मोहब्बत एक गुनाह
80. मेरा प्रेमी कातिल नहीं
81. जुआरी
82.
83.
84.
85.

लेखक संपर्क
अमित खान
D-603, स्काई पार्क
अजीत ग्लास गार्डन के‌ नजदीक,
आॅफ एस. वी. रोङ, गोरेगाँव(वेस्ट)
मुंबई-40040
Mob- 9821163955(only Sunday)
Email- for am it khan I gmail.com
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