प्रकाशक- भवानी पॉकेट बक्स, मेरठ
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| अजगर-भवानी पॉकेट बुक्स, मेरठ |
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| अपने पुस्तकालय में कांबोज जी |
सन् 2021 उपन्यास साहित्य के लिए बहुत अच्छा साबित हो रहा है।
पाठकों के लिए नित नये उपन्यास आये रहे हैं। जहाँ नये लेखकों के नये उपन्यास प्रकाशित हुये हैं वहीं कुछ रिप्रिंट भी सामने आये हैं।![]() |
| रीमा भारती™ दुर्गा पाॅकेट बुक्स |
साहित्य देश साक्षात्कार की इस शृंखला में इस बार लेकर आया है युवा उपन्यासकार विजय कुमार बोहरा जी का साक्षात्कार। यह विजय कुमार जी का प्रथम साक्षात्कार है।
विजय जी अपने प्रथम उपन्यास मर्डर ऑन वैलेंटाइन नाईट के कारण काफी चर्चा में रहे हैं।
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| विजय कुमार बोहरा जी अपने प्रथम उपन्यास के साथ |
1. विजय जी, सर्वप्रथम हम आपका परिचय जानना चाहेंगे।- जन्म, शिक्षा, वर्तमान स्थिति आदि।
- मेरा जन्म 31 जनवरी , 1988 को राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित बेगूं कस्बे में हुआ। स्नातक तक की शिक्षा यहीं हुई।
2. आपका साहित्य की तरफ झुकाव कैसे हुआ?
- बचपन में चम्पक पत्रिका पढ़ने को मिली। कहानियों में मेरी रुचि इस पत्रिका में छपने वाले रंग - बिरंगे चित्रों को देखकर जाग्रत हुई। इसके बाद तो बस हर तरह की किताबें पढ़ने लगा। हालाँकि अपने पारिवारिक वातावरण की वजह से कॉमिक्स और उपन्यासों तक पहुंच मेरे लिए काफी मुश्किल थी। फिर बचा गंभीर साहित्य, ...तो 15 - 16 की आयु में गंभीर साहित्य की ओर रुचि होने का मेरे पास कोई कारण नहीं था। इसी बीच रामचरितमानस और कुछ पुराण हाथ लगे। जल्द ही मैं समझ गया कि इनमें बहुत ही रोचक कहानियां हैं। इस तरह बाल साहित्य के बाद मेरी रुचि आध्यात्मिक साहित्य में हुई। फिर जब कॉलेज पहुँचा और वहाँ की लाइब्रेरी देखी तो जैसे खज़ाना हाथ लग गया, बाल साहित्य तो वहाँ था नहीं, किन्तु बाकी बहुत तरह की किताबें थी। गंभीर साहित्य, विश्व की श्रेष्ठ कृतियों के साथ ही संस्कृत के कुछ नाटकों के हिन्दी अनुवाद, सेल्फ- हेल्प बुक्स - इन सबसे न केवल पहली बार परिचित हुआ, बल्कि इनमें कभी खत्म न होने वाली रूचि भी जागृत हुई। इन किताबों में न केवल कहानियां थी, बल्कि वे भावनाएं भी कूट कूटकर भरी हुई थी, जिनको महसूस करने के लिए मैं कठिन से कठिन पुस्तक भी पढ़ने के लिए तैयार हो जाता।
3. आप अध्यापक हैं, गंभीर साहित्य में रुचि आपकी, फिर लेखन में आपने लोकप्रिय जासूसी साहित्य कैसे चुना?
लोकप्रिय साहित्य के सितारे वेदप्रकाश शर्मा जी पुण्यतिथि पर जयदेव चावरिया जी का एक विशेष आर्टिकल।
10 जून, 1955 को मेरठ में जन्मे वेद प्रकाश शर्मा जी हिंदी के लोकप्रिय उपन्यासकार थे। उनके पिता पं. मिश्रीलाल शर्मा मूलतः बुलंदशहर के रहने वाले थे। वेद सर की एक बहन और सात भाइयों में सबसे छोटे हैं। एक भाई और बहन को छोड़कर सबकी मृत्यु हो गई। 1962 में बड़े भाई की मौत हुई और उसी साल इतनी बारिश हुई कि किराए का मकान टूट गया। फिर एक बीमारी की वजह से पिता ने खाट पकड़ ली। घर में कोई कमाने वाला नहीं था, इसलिए सारी ज़िम्मेदारी मां पर आ गई। मां के संघर्ष से इन्हें लेखन की प्रेरणा मिली और फिर देखते ही देखते एक से बढ़कर एक उपन्यास लिखते चले गये।
वेद सर का शुरुआती दौर काफी मुश्किलों से भरा हुआ था।जब वेद सर अपने पहले उपन्यास कि स्क्रिप्ट लेकर कई प्रकाशकों के चक्कर काटे पर कोई फायदा नहीं हुआ। सब प्रकाशक एक ही बात बोलते थे कि तुम्हारा उपन्यास किसी और के नाम से ही छाप सकते हैं वरना नहीं । लगभग ढाई साल प्रकाशकों के चक्कर काटने के बाद वेद सर ने कई उपन्यासों की स्क्रिप्ट लिख डाली। अंत में वेद सर ने सोचा मेरे नाम से ना सही पर पाठकों तक मेरी रचना तो पहुंचेगी। फिर वेद सर के शुरुआती उपन्यास कई प्रसिद्ध लेखकों के नाम से प्रकाशित हुए। वेद सर का पहला उपन्यास 'डायमंड किंग' लक्ष्मी पॉकेट बुक्स से प्रकाशित हुआ था। वेद सर के एक बाद एक सात उपन्यास प्रकाशित हुए । पाठक उनके द्वारा लिखे उपन्यास काफी पसंद कर रहे थे। पर हकीकत तो यह थी कि वह किसी अन्य लेखक के नाम से प्रकाशित हो रहे थे। वेद सर ने समाजिक उपन्यास भी लिखे जो 'राजेश' के नाम से प्रकाशित हुए । 
वेदप्रकाश शर्मा
नाम- संतोष आनंद
संतोष आनंद जी के एक उपन्यास के विषय में और उनके विषय में संक्षिप्त जानकारी मिली है।
संतोष आनंद के उपन्यास
1. टैरर(भय)- पारस पब्लिकेशन, मेरठ
लोकप्रिय उपन्यास साहित्य को समर्पित मेरा एक ब्लॉग है 'साहित्य देश'। साहित्य देश और साहित्य हेतु लम्बे समय से एक विचार था उपन्यासकार...