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बुधवार, 20 फ़रवरी 2019

उपन्यास साहित्य का रोचक संसार-19,20

आइये, आपकी पुरानी किताबी दुनिया से पहचान करायें - 19
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ज्ञान ने मुझे देखते ही कुछ तेज़ आवाज़ में कहा था -"बेईमान, धोखेबाज, गद्दार !"
और मैं एकदम सन्नाटे में डूब गया था ! 
ऐसा क्या कर दिया मैंने ? मन ही मन मैंने सोचा था !

पर ज्ञान की आवाज़ की एक विशेषता यह थी कि वह गुस्से में भी बोलता तो आवाज़ में कड़कपन या कठोरता नहीं महसूस होती थी ! 
पता नहीं क्यों...उस दिन मुझे ज्ञान के शब्दों से आघात-सा अवश्य लगा, पर तुरंत ही शब्द होठों से निकले -"क्या हुआ ? इतने गर्म क्यों हो रहे हो ?"

अक्सर ज्ञान के होठों से गालियों के फूल भी बरसते थे ! गुस्से में ही नहीं सामान्य सी बात-चीत में भी ! मेरे सवाल का जवाब उसने मुंह से एक भद्दी गाली निकालने के बाद दिया -"तू भरोसे के काबिल ही नहीं है ! क्या प्रॉमिस किया था तूने ? दरीबे में कदम तब रखेगा, जब मेरे लिए स्क्रिप्ट लेकर आएगा ?"     
"तो यह क्या है ?" मैंने बाल पॉकेट बुक्स की स्क्रिप्ट ज्ञान के सामने रख दी -"तुम्हारे लिए स्क्रिप्ट लेकर ही आया हूँ !"
"बहुत एहसान कर दिया ! हमें नहीं चाहिए तेरी स्क्रिप्ट ! ले जा, यह भी उन्हीं को दे आ, जो तेरे सगे हैं !" ज्ञान स्क्रिप्ट उठाकर पीछे रखते हुए बोला !

उपन्यास साहित्य का रोचक संसार- 17,18

आइये, आपकी पुरानी किताबी दुनिया से पहचान करायें - 17,18
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उन दिनों मैं आज जैसा चतुर-चालाक-हाज़िरजवाब कुछ भी नहीं था !

जब ज्ञानेन्द्र प्रताप गर्ग ने मुझसे कहा -"ओए छोटू ! हमने तेरा नाम छाप दिया, ये क्या कम है ? ओए तू तो सारे हिन्दुस्तान में मशहूर हो गया ! हिन्दुस्तान के कोने-कोने में जाती है गोलगप्पा !"

तो एक बार तो मुझे कुछ भी नहीं सूझा कि क्या कहूँ ! फिर भी धीरे से बोला -"सब लोग तो कहानी छापने के पैसे देते हैं !"
सच कहूँ तो मैं उस समय बोल नहीं रहा था, घिघिया रहा था !

पर जो लोग ज्ञानेन्द्र प्रताप गर्ग को जानते रहे हैं, कभी न कभी उससे मिले हैं – वे अच्छी तरह समझ सकते हैं कमसिन उम्र में मेरा उस आदमी से बात करना कितना कठिन था ! मैं उसके सामने खड़ा था, यही बहुत था !  

"कहाँ-कहाँ छपी है तेरी कहानी ? किस-किस ने दिए हैं पैसे ?" ज्ञानेन्द्र प्रताप गर्ग ने पूछा !
बच्चों की पत्रिकाओं में तो मैंने गोलगप्पा के अलावा कहीं कोई कहानी भेजी नहीं थी ! अतः ज्ञानेन्द्र के सवाल तो और कोई जवाब तो सूझा नहीं, मैंने कह दिया -"मनोज वाले भी देते हैं !"
"ये कबाड़िये..!" मेरे मुंह से मनोज नाम सुनते ही ज्ञानेन्द्र ने सिर को दायीं ओर झटका दिया और बोला था ! 

तब मैं नहीं समझ सका था कि ज्ञानेन्द्र ने मनोज वालों के लिए "कबाड़िये" क्यों कहा ! पर बाद में घनिष्ठता हो जाने पर जाना कि वह पीठ पीछे हमेशा उन्हें इसी तरह सम्बोधित करता था, लेकिन जब भी राजकुमार गुप्ता या गौरीशंकर गुप्ता सामने पड़ते "भाई साहब-भाई साहब” करके बिछ जाता ! और बाद में मैंने यह भी जाना कि मनोज वालों ने किस तरह कड़ी मेहनत करके, कबाड़ के धंधे से, प्रकाशन व्यवसाय में बुलंदी हासिल की ! 

उपन्यास साहित्य का रोचक संसार-15,16

आइये, आपकी पुरानी किताबी दुनिया से पहचान करायें - 15
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बिमल चटर्जी को मैंने अरुण के साथ मनोज पाॅकेट बुक्स जाने का किस्सा सच-सच बता दिया, वह सचमुच नाराज हुए।
"योगेश जी, मैंने आपसे कहा भी था कि हम मनोज पाॅकेट बुक्स चलेंगे ! फिर अरुण के साथ जाने की क्या जरूरत थी ?" बिमल बोले ! 
मैं चुप रहा ! मैंने पहले ही उन्हें बता दिया था कि मुझे बिना बताये - फिल्म के बहाने ले जाया गया था !

बिमल का गुस्सा थोड़ी ही देर का रहा ! 

कुछ देर बाद बोले -"चलो, कोई बात नहीं ! गौरी भाई साहब से सब्र नहीं हो रहा होगा, तभी अरुण को बोला होगा ! दरअसल मैंने उन्हें बताया था कि योगेश मित्तल एक छोटा बच्चा है, जो मेरे लिए कहानियाँ लिख रहा है ! तो उन्हें छोटे बच्चे को देखने की धुन सवार हो गई थी ! मुझसे भी कई बार कहा था - यह योगेश मित्तल कौन है ? इसे लेकर आ ! मेरी ही गलती है, जो अब तक आपको साथ लेकर नहीं गया !"

उसके बाद दिनचर्या में बदलाव यह आया कि मेरा बिमल चटर्जी के लिए लिखना बन्द हो गया, लेकिन हमारे सुबह-शाम अब भी साथ बीतते थे ! अक्सर हम साथ बैठकर भी लिखते थे !  


उपन्यास साहित्य का रोचक संसार-13,14

आइये, आपकी पुरानी किताबी दुनिया से पहचान करायें - 13
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कुछ दिन यूँ ही बीत गये ! फिर आया शुक्रवार का दिन !

बिमल चटर्जी बोले - "आओ योगेश जी, आज फिल्म देखने चलते हैं !"

"फिल्म ! कौन-सी फिल्म ?"मैंने पूछा !
"जवानी दीवानी !"

अखबार पढ़ना बचपन से मेरी आदत रही थी ! कलकत्ता में घर में अंग्रेजी का स्टेट्समैन रोज आता था, किन्तु रविवार के दिन अंग्रेजी का अमृत बाजार पत्रिका तथा हिन्दी के सन्मार्ग और दैनिक विश्वमित्र भी आते थे ! पर फिल्मों वाला पन्ना सिर्फ़ फिल्मों के नाम देखने तक सीमित था ! शुक्रवार को कौन सी नई फिल्म लगी है, इस पर ध्यान जाता था, पर कहाँ लगी है ? इस पर कभी ध्यान नहीं देता था, क्योंकि फिल्म देखने के प्रति मन में कोई इच्छा या उत्साह नहीं होता था !


इसलिए उस दिन मुझे यह मालूम था कि फिल्म आज ही लगी है ! अत: बोला -"फिल्म आज ही लगी है ! टिकट नहीं मिलेगा !"

"सब मिल जायेगा, पर आपने यहाँ किसी से कहना नहीं है कि हम फिल्म देखने जा रहे हैं और बाद में भी....कि हम फिल्म देखकर आये हैं !"
"ऐसा क्यों ?" तब मैंने नहीं पूछा, लेकिन बाद में बिमल के बिना बताये पता चल गया !

मंगलवार, 19 फ़रवरी 2019

विनोद यादव 'मनोरम नंदन'

 विनोद यादव उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। इनके दो उपन्यास बाजार में आये थे, ये उपन्यास चन्द्रकांता उपन्यास की तरह तिलस्मी आधारित उपन्यास थे। इस प्रकार के उपन्यास प्रचलित जासूसी उपन्यासों से अलग तरह के उपन्यास होते हैं।

      

विनोद यादव के उपन्यास 'दुर्गा पॉकेट बुक्स मेरठ' प्रकाशित उपन्यास

  1.  जालांशा (प्रथम भाग)
  2. न्मजात योद्धा (द्वितीय भाग)

लेखक संपर्क

- विनोद यादव 'मनोरमा नंदन'

पुत्र श्री रतिराम यादव

ग्राम -धरमपुर, पोस्ट- बरईपार

थाना- मछली शहर, 

जनपद- जौनपुर, उत्तर प्रदेश- 222144

संपर्क- 9616864656, 9918864656

राकेश मोहन

नाम- राकेश मोहन
राकेश मोहन जी जो कभी 'धरम राकेश' के द्वय नाम से चर्चित लेखक जोड़ी के एक अंग थे। धरम बारिया जी और राकेश मोहन जी कभी दोनों संयुक्त नाम 'धरम राकेश' नाम से लेखन करते थे।
          उपन्यास जगत में आयी मंदी से उपन्यास जगत बंद होने की कगार पर आ गया तो 'धरम-राकेश' जी भी अलग -अलग हो गये। जहाँ धरम जी उपन्यास साहित्य से दूर होकर सामान्य किताब लेखन जारी रखा तो वहीं राकेश मोहन जी कुछ समय बाद उपन्यास क्षेत्र में सक्रिय दिखाई दिये।
        उनके कुछ उपन्यास बाद में माया पॉकेट बुक्स से प्रकाशित होते रहे। 
राकेश मोहन
 राकेश मोहन
राकेश मोहन जी के माया पॉकेट बुक्स से प्रकाशित उपन्यास
1. सिगरेट का आखिरी कश
2. मुर्दे को फांसी दो
3. खून को बदल दूंगा (विजय-हिना सीरीज-03)
4. तेरह करोड़ की बोतल
5. चैक करेगा नोट पर वार
संपर्क
राकेश मोहन
7656, गली नंबर-09, अमर मौहल्ला
रघुवरपुरा, नई दिल्ली-110031
संपर्क-
राकेश मोहन
61A, ज्वाला नगर
स्ट्रीट नंबर -02, मेरठ, उत्तरपदेश
धरम राकेश जी के संयुक्त उपन्यास यहाँ देखें।
धरम राकेश उपन्यास सूची

रेखा बरनवाल

रेखा जी के विषय में हमें पर्याप

 जानकारी उपलब्ध नहीं है।

संपर्क-
डाॅ. रेखा बरनवाल
स्टेशन रोड़, भदौही, UP-221401
Email- designgview@sify.com

डाॅ. रेखा बरनवाल के उपन्यास


1. भंवर (साहित्य सम्मान)
2. परछाई उत्कृष्ट रचना सम्मान)
3. दर्द का रिश्ता
4. सुलगती चांदनी (स्क्रीन प्ले)
5. अधूरे सपने
6. काजल से काला कौन
7. शक
8. गुनाहों‌ की मण्डी
9. सोने का पिंजरा
10. अग्नि परीक्षा
11. क्यों चांद लगे मैला
12. तुमको न भूल पायेंगे
13.

रेखा पब्लिकेशन
राज श्रीअपार्टमेंट,
ब्लॉक-01, फ्लैट नंबर -102,
सिद्धगिरी बाग, वाराणसी।

अयोध्या नाथ जोशी

‌अयोध्या नाथ जोशी जी के विषय में जो जानकारी उपलब्ध है वह इनके एक उपन्यास से प्राप्त हुयी है।
    इनके उपन्यास डायमंड पॉकेट बुक्स से प्रकाशित हुए थे।
संपर्क
अयोध्या नाथ जोशी
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र
कैलारस, मुरैना (मध्य प्रदेश)
अयोध्या नाथ जोशी के उपन्यास
1. कलंक की किलकारी
2. माँ का लाल

मंगलवार, 12 फ़रवरी 2019

कमल कुमार आनंद

कमल कुमार आनंद के एकमात्र उपन्यास की जानकारी उपलब्ध हुयी है।
  उक्त लेखक विषय में और कॊई भी जानकारी उपलब्ध नहीं ।

कमल कुमार के उपन्यास
1. रिवेंज....एक‌ अनोखा बदला

शनिवार, 9 फ़रवरी 2019

उपन्यासकार सूची

साहित्य देश ब्लॉग पर उपलब्ध उपन्यासकारों की सूची।


अकरम इलाहाबादी
अजय सिंह
अजिंक्य शर्मा/ ब्रजेश शर्मा
अनिता
अनिल मोहन
अनिल राज
अनिल सक्सेना
अनिल सलूजा
अनुराधा
अभिमन्यु पण्डित
अमित खान
अमित श्रीवास्तव
अमिताभ
अम्बरीश कश्यप
अरुण अंबानी
अरुण आनंद
अरुण कुमार
अरुण कुमार शर्मा
अर्जुन पण्डित
अंशुल
अशोक कुमार शर्मा
अशोक दत्त
अशीत चटर्जी
अश्विन कुमार
अयोध्या नाथ जोशी

आदिल रसीद
आबिद रिजवी
आरिफ माहरवी
आशीर्वाद
आशीर्वाद पण्डित

इंस्पेक्टर गिरीश

ए. हमीद
एडवोकेट विकास गुप्ता
एन. सफी
एम. इकराम फरीदी
एम. एल.पण्डया
एम. के. शर्मा
एस. एन. कंवल
एस. एम. मेहन्दी
एस. कुमार


ओमप्रकाश शर्मा
ओमप्रकाश शर्मा जनप्रिय लेखक


कर्नल सुरेश
कबीर कोहली
कमल शुक्ल
कमाण्डर देव
कर्नल बलवीर
कर्नल रंजीत
करिश्मा दवा
किशोरी लाल गोस्वामी
कुमार कश्यप
कुमार मनेष
कुँवर नरेन्द्र सिंह
कुशवाहा कांत
कुसुम गुप्ता
कृष्ण चंदर
केवल पण्डित
केशव पण्डित
केशव शर्मा
केसर पण्डित
कैप्टन विक्रांत
कैप्टन सुभाष
कौशल पण्डित



गजाला, गजाला करीम
गीतारानी कुशवाहा
गुप्तदूत
गुलशन नंदा
गोपाल शर्मा
गोविन्द सिंह
गौरी पण्डित


घनश्याम मालाकार


चंदर
चन्द्रहास
चेतना


जयंत कुशवाहा
जयपाल सिंह बजाड़
जे. के. सागर


टाइगर

डार्लिंग
ड़ाॅ फखरेआलम खान


तरूण इंजिनियर
तीर्थ राम फिरोजपुरी

प्रकाश भारती
प्रकाश पण्डित
प्रदीप भारती
प्रकाश प्रियदर्शी
प्रेम प्रकाश
प्रेम वाजपेयी
प्रोफेसर दिवाकर


बसंत
बसंत कश्यप
बादल
बी. पाल भारती
बृजेश्वर चौधरी
ब्रह्म प्रकाश

भारत
भूपेन्द्र चौधरी
भोपाल सिंह


मदन शर्मा
मयंक
मल्लिका जोशी
महेश
माया मैमसाब
मिस्टर
मीना सरकार
मीनू वालिया
मीरा
मेजर बलवंत
मोना चौधरी
मोना डार्लिंग
मोहन चौधरी

यशपाल वालिया
योगेश मित्तल


रजत राजवंशी
रमन कुमार चौधरी
रमन कुमार
रवि
रवि माथुर
रवि शर्मा 'मयंक'
राकेश
राकेश अग्रवाल
राकेश पाठक
राकेश मोहन
राज
राज भारती
राजवंश
राजहंस
रानू
रामचन्द्र
राम रहीम
राहुल
रितुराज
रिशी
रुनझुन सक्सेना
रेखा बरनवाल
रेणू
रोमा चौधरी


लता तेजेश्वर
लाट साहब / जेठा लाल सोमैया
लोकदर्शी


वासुदेव
विकास
विजय मल्होत्रा
विजेता पण्डित
विनय प्रभाकर
विनोद यादव 'मनोरमा यादव'
विमल
विमल चटर्जी
विमल शर्मा
विशाल
विश्व मोहन विराग
वीरेन्द्र कौशिक
वेदप्रकाश
वेदप्रकाश कांबोज
वेदप्रकाश वर्मा
वेदप्रकाश शर्मा




शंकर सुल्तानपुरी
शगुन शर्मा
श्याम तिवारी / शैैैैैलेन्द्र तिवारी
शहंशाह
शिवा पण्डित
शुभानंद
शेखर
शैलेन्द्र तिवारी
श्रीकांत पाटेकर


सजल कुशवाहा
संतोष पाठक
सत्यपाल
सत्यपुष्प
सरला रानू
सावन
सीमा कपूर
सुदर्शन बाली
सुनील पण्डित
सुनील मोहन पाठक
सुनील शर्मा
सुभाष शर्मा
सुमन शर्मा
सुरेन्द्र मोहन पाठक
सुरेश
सुरेश मोदी
सुरेश साहिल
सुरेश श्रीवास्तव
सुशील जैन
सोनू पण्डित
सोफिया
सोमनाथ अकेला


हरीश पाठक

- उक्त सूची में से जो लेखक बाहर रह गये हैं, कृपया उनके नाम कमेंट बॉक्स में लिख दें।
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              साहित्य देश टीम
- sahityadesh@gmail.com




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 लोकप्रिय उपन्यास साहित्य को समर्पित मेरा एक ब्लॉग है 'साहित्य देश'। साहित्य देश और साहित्य हेतु लम्बे समय से एक विचार था उपन्यासकार...