पूरा नाम - ब्रह्मदेव 'मधुर'
मधुर के उपन्यास
1. लपटें
2. छैला (दो भाग)
3. चोट
उपन्यास 'छैला' की कहानी में कुशवाहा कांत के चर्चित उपन्यास 'पराया' को आगे बढाया गया है।
| वेदप्रकाश शर्मा जी |
वो यादें जो मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गई...
18 फरवरी, 2017 की सुबह एक अशुभ समाचार मेरा इंतजार कर रहा था-लोकप्रिय उपन्यासकार वेदप्रकाश शर्मा नहीं रहे। मैं हत्प्रभ रह गया। ऐसा लगा कि जैसे वक्त वहीं थम गया हो और आत्मा अचानक एक अनजानी सी बेचैनी से भर उठी। मुझे उनके जाना का अभी भी यकीन नहीं हो रहा था। यादों की न जाने कितनी परछाइयां मेरे आस-पास जीवंत हो उठी।
मेरा उनका साथ दो-चार वर्षों का नहीं, लगभग चालीस वर्षों का था। इन वर्षों के दौरान हम सिर्फ, प्रकाशक और लेखक ही नहीं रहे थे बल्कि जिंदगी की तमाम कठिनाइयों में साथ रहने वाले परम प्रिय दोस्त बन गये थे। उनके व्यक्तित्व में एक जादू था, जो उन्हें हर दिल अजीज बनाता था।
| वेदप्रकाश शर्मा जी के साथ सुरेन्द्र मोहन पाठक जी |
प्रशांत सीरीज का पहला उपन्यास
औसत दर्जे की उस चाय की दुकान में पहुंचना मेरी मजबूरी थी।
उस रोज शनिवार था और उस वक्त रात के बारह बज चुके थे। लम्बी कार ड्राइविंग, थकान, सुस्ती और ऊपर से अकेलेपन की बोरियत। इन सबकी वजह से मेरी हालत खस्ता थी। बार–बार उबासियां आ रही थीं ! आंखें रह–रहकर मुंदने लगती थीं। मेरी तकदीर अच्छी थी कि रास्ते में एक्सीडेंट नहीं हुआ और करीमगंज से विशालगढ़ मैं सहीसलामत पहुंच गया था।
लेकिन अपने फ्लैट तक पहुंचने में अभी कम से कम आधा घंटा और लगना था। और अब शहरी सीमा में क्योंकि यातायात अपेक्षाकृत बढ़ता जा रहा था इसलिए और ज्यादा रिस्क लेना खतरनाक था। अपनी थकान और सुस्ती से वक्ती तौर पर कुछ निजात पाने के लिए मुझे कड़क चाय या स्ट्रांग कॉफी की जरूरत महसूस होने लगी।
नववर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं
साहित्य देश ब्लॉग इस वर्ष पाठकों के लिए लेकर आया है एक रोचक पहेली। उम्मीद है हमारा यह नया प्रयोग/प्रयास आपको अच्छा लगेगा। @साहित्यदेश
सुनील पण्डित का एक और रोमांचकारी उपन्यास
'अण्डरवर्ल्ड' का 'जुर्म का पण्डित' 'विमल खन्ना' और उसके मौत के हरकारे...जब टकराये, जुर्म की अँधेरी दुनिया के बेताज बादशाह 'दाऊद' से जो तूफान और जलजला आया उसने दाऊद के अभेद किले तक को हिला दिया। और काली दुनिया के इन महारथियों की इस खूनी मुठभेड़ का चश्मदीद गवाह है- इंस्पेक्टर केशव पण्डित।
पिस्तौल के खिलाड़ी विमल खन्ना व अनूठे पुलिस इंस्पेक्टर केशव पण्डित का एक और तूफानी हंगामा।
जुर्म का पण्डित
नमस्ते पाठक मित्रो,
आपने सुनील पण्डित के उपन्यास 'जुर्म का पण्डित' उक्त कथन पढ लिया होगा। अब आपको यह बताना है की इस कथन में किस- किस उपन्यास/ पात्र या लेखक का आपका आभास मिलता है।
लोकप्रिय उपन्यास साहित्य को समर्पित मेरा एक ब्लॉग है 'साहित्य देश'। साहित्य देश और साहित्य हेतु लम्बे समय से एक विचार था उपन्यासकार...