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गुरुवार, 13 अप्रैल 2023
रविवार, 9 अप्रैल 2023
क्लब में हत्या- ओमप्रकाश शर्मा
किस्सा तीन हत्याओं का
क्लब में हत्या- जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा
उपन्यास साहित्य में जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा का नाम विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है। जितना सम्मान पाठक ओमप्रकाश शर्मा का करते हैं उतने ही सम्मानजनक इनके पात्र होते हैं। शर्मा जी का एक विशेष पात्र है राजेश। प्रस्तुत उपन्यास 'क्लब में हत्या' राजेश -जयंत शृंखला का है। जो की एक मर्डर मिस्ट्री कथा है।राजेश और जयन्त संयोगवश इस मामले में सम्बन्धित हुये । वह दोनों झाँसी से लौट रहे थे और घटना रात के ग्यारह बजे की है जब उनकी कार दिल्ली की सीमा में प्रविष्ट होकर मथुरा रोड पर दौड़ रही थी। जयन्त कार चला रहा था और राजेश पिछली सीट पर बैठे एक उपन्यास पढ़ने में तल्लीन थे ।
रास्ते में एक एक्सीडेंट देखकर दोनों को रुकना पड़ा था। जयंत ने राजेश को भी वहाँ बुला लिया।
" राजेश, जरा आओ तो ।”
- "क्या बात है ?"
-"एक्सीडेंट है एक, बिल्कुल अजीब-सा एक्सीडेंट ।” राजेश उठे। उनकी कार के आगे लगभग दस कारें खड़ी थीं । उसके बाद...... उसके बाद था एक ट्रक और ट्रक के पिछले पहियों में दबा हुआ था एक नवयुवक।
वहाँ उपस्थित सब इंस्पेक्टर चतरसेन का मानना था की यह एक दुर्घटना है। लेकिन परिस्थितियों का विश्लेषण करने के पश्चात राजेश ने घोषणा की कि यह महज एक दुर्घटना नहीं बल्कि सोच- समझकर किया गया कत्ल है।
चतुर चतुरसेन ने राजेश से अनुरोध न किया की वह इस मामले में उसकी मदद करे। वहीं बाद में केन्द्रीय खूफिया विभाग ने भी राजेश को इस केस पर नियुक्त कर दिया था।
मृतक का नाम प्रमोद कुमार था और वह 'विश्राम लोक क्लब, नई दिल्ली' में असिस्टेंट मैनेजर था। राजेश- जयंत और सब इंस्पेक्टर की जाँच का केन्द्र अब विश्राम क्लब था। क्लब प्रमोद कुमार की शोक सभा में ही जब राजेश ने यह घोषणा की कि कातिल इस क्लब में ही उपस्थित है तो एक बार वहां सन्नाटा छा गया।
क्लब के अवैतनिक मैनेजर रंगबिहारी लाल और मालकिन मोहिनी देवी नहीं चाहते थे की क्लब की बदनामी हो। लेकिन उनके चाहने न चाहने से कुछ नहीं होने वाला था।
राजेश की जाँच अभी चल ही रही थी कि क्लब में हत्या हो गयी। इस बार हत्यारे ने क्लब के सदस्य को क्लब में ही मार दिया, हंगामा तो होना ही था।
और राजेश ने यह प्रण किया की वह शीघ्र असली अपराधी तक पहुंच जायेगा।
राजेश तनिक मुस्कराए— “ आप बिल्कुल बजा फरमाते हैं. मिर्जा साहब, सवाल सिर्फ हत्यारे की खोज का नहीं है। सवाल यह है कि शमा ने खुद जलकर कितने परवाने जला दिए ? मुझे इसका हिसाब जानना है और यकीन कीजिए मिर्जा साहब ! हिसाब जानकर ही रहूंगा।
और एक हंगामें के चलते राजेश भी अपराधियों की गिरफ्त में आ गया। और यही अपराधियों के लिए खतरनाक साबित हुआ।
उपन्यास मर्डर मिस्ट्री कथा पर आधारित है। उपन्यास में कुल तीन हत्याएं होती हैं।
उपन्यास का जो सशक्त पक्ष है वह है जासूस राजेश। शर्मा जी द्वारा रचित पात्रों में राजेश सबसे अलग है। अन्य जासूस साथी भी राजेश का अत्यंत सम्मान करते हैं।
राजेश का नैतिक पक्ष अत्यंत मजबूत है। वह अपराधी के साथ भी क्रूरता नहीं करता।
राजेश का प्रमोद की पत्नी को बहन कहकर संबोधित करना, उस के साथ यह वायदा करना की प्रमोद से संबंधित कोई भी अनुचित बात जनता नहीं पहुंचेगी।
राजेश एक जासूस है और जासूस अपने बुद्धिबल से कार्य करता है। राजेश की जो कार्यशैली वह इसलिए भी प्रभावित करती है की वह एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़कर शेष अपराधियों तक अपने चातुर्य और बुद्धि से पहुंचता है।
उपन्यास के अंत में राजेश और प्रमोद की पत्नी रत्ना का संवाद अत्यंत प्रभावशाली है। (पृष्ठ संख्या 105)विशेष कथन-
धरती का आकर्षण, जो भी आवारा घुमक्कड़ तारा धरती की आकर्षण परीक्षा में आ जाता है, बिना जले रहता नहीं । जलता है और फिर राख होकर धरती के अंक में समा जाता है ।
- कौन जान सकता है, पुरुष के भाग्य को और स्त्री के चरित्र को ?
जनप्रिय ओमप्रकाश शर्मा जी द्वारा लिखित 'क्लब में हत्या' एक मर्डर मिस्ट्री रचना होने के साथ-साथ एक सामाजिक संदेश भी है। हत्या क्यों होती है? इसका कारण जो प्रत्यक्ष होता है, आवश्यक नहीं की वही हो, अप्रत्यक्ष कारण भी बहुत होते हैं।
एक पठनीय मार्मिक मर्डर मिस्ट्री है।
उपन्यास- क्लब में हत्या
लेखक- ओमप्रकाश शर्मा- जनप्रिय लेखक
प्रकाशक- मारुति प्रकाशन, मेरठ
पृष्ठ- 110
किस्सा तीन हत्याओं का
क्लब में हत्या- जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा
उपन्यास साहित्य में जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा का नाम विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है। जितना सम्मान पाठक ओमप्रकाश शर्मा का करते हैं उतने ही सम्मानजनक इनके पात्र होते हैं। शर्मा जी का एक विशेष पात्र है राजेश। प्रस्तुत उपन्यास 'क्लब में हत्या' राजेश -जयंत शृंखला का है। जो की एक मर्डर मिस्ट्री कथा है।राजेश और जयन्त संयोगवश इस मामले में सम्बन्धित हुये । वह दोनों झाँसी से लौट रहे थे और घटना रात के ग्यारह बजे की है जब उनकी कार दिल्ली की सीमा में प्रविष्ट होकर मथुरा रोड पर दौड़ रही थी। जयन्त कार चला रहा था और राजेश पिछली सीट पर बैठे एक उपन्यास पढ़ने में तल्लीन थे ।" राजेश, जरा आओ तो ।”
- "क्या बात है ?"
-"एक्सीडेंट है एक, बिल्कुल अजीब-सा एक्सीडेंट ।” राजेश उठे। उनकी कार के आगे लगभग दस कारें खड़ी थीं । उसके बाद...... उसके बाद था एक ट्रक और ट्रक के पिछले पहियों में दबा हुआ था एक नवयुवक।
वहाँ उपस्थित सब इंस्पेक्टर चतरसेन का मानना था की यह एक दुर्घटना है। लेकिन परिस्थितियों का विश्लेषण करने के पश्चात राजेश ने घोषणा की कि यह महज एक दुर्घटना नहीं बल्कि सोच- समझकर किया गया कत्ल है।
चतुर चतुरसेन ने राजेश से अनुरोध न किया की वह इस मामले में उसकी मदद करे। वहीं बाद में केन्द्रीय खूफिया विभाग ने भी राजेश को इस केस पर नियुक्त कर दिया था।
मृतक का नाम प्रमोद कुमार था और वह 'विश्राम लोक क्लब, नई दिल्ली' में असिस्टेंट मैनेजर था। राजेश- जयंत और सब इंस्पेक्टर की जाँच का केन्द्र अब विश्राम क्लब था। क्लब प्रमोद कुमार की शोक सभा में ही जब राजेश ने यह घोषणा की कि कातिल इस क्लब में ही उपस्थित है तो एक बार वहां सन्नाटा छा गया।
क्लब के अवैतनिक मैनेजर रंगबिहारी लाल और मालकिन मोहिनी देवी नहीं चाहते थे की क्लब की बदनामी हो। लेकिन उनके चाहने न चाहने से कुछ नहीं होने वाला था।
राजेश की जाँच अभी चल ही रही थी कि क्लब में हत्या हो गयी। इस बार हत्यारे ने क्लब के सदस्य को क्लब में ही मार दिया, हंगामा तो होना ही था।
और राजेश ने यह प्रण किया की वह शीघ्र असली अपराधी तक पहुंच जायेगा।
राजेश तनिक मुस्कराए— “ आप बिल्कुल बजा फरमाते हैं. मिर्जा साहब, सवाल सिर्फ हत्यारे की खोज का नहीं है। सवाल यह है कि शमा ने खुद जलकर कितने परवाने जला दिए ? मुझे इसका हिसाब जानना है और यकीन कीजिए मिर्जा साहब ! हिसाब जानकर ही रहूंगा।
और एक हंगामें के चलते राजेश भी अपराधियों की गिरफ्त में आ गया। और यही अपराधियों के लिए खतरनाक साबित हुआ।
उपन्यास मर्डर मिस्ट्री कथा पर आधारित है। उपन्यास में कुल तीन हत्याएं होती हैं।
उपन्यास का जो सशक्त पक्ष है वह है जासूस राजेश। शर्मा जी द्वारा रचित पात्रों में राजेश सबसे अलग है। अन्य जासूस साथी भी राजेश का अत्यंत सम्मान करते हैं।
राजेश का नैतिक पक्ष अत्यंत मजबूत है। वह अपराधी के साथ भी क्रूरता नहीं करता।
राजेश का प्रमोद की पत्नी को बहन कहकर संबोधित करना, उस के साथ यह वायदा करना की प्रमोद से संबंधित कोई भी अनुचित बात जनता नहीं पहुंचेगी।
राजेश एक जासूस है और जासूस अपने बुद्धिबल से कार्य करता है। राजेश की जो कार्यशैली वह इसलिए भी प्रभावित करती है की वह एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़कर शेष अपराधियों तक अपने चातुर्य और बुद्धि से पहुंचता है।
उपन्यास के अंत में राजेश और प्रमोद की पत्नी रत्ना का संवाद अत्यंत प्रभावशाली है। (पृष्ठ संख्या 105)विशेष कथन-
धरती का आकर्षण, जो भी आवारा घुमक्कड़ तारा धरती की आकर्षण परीक्षा में आ जाता है, बिना जले रहता नहीं । जलता है और फिर राख होकर धरती के अंक में समा जाता है ।
- कौन जान सकता है, पुरुष के भाग्य को और स्त्री के चरित्र को ?
जनप्रिय ओमप्रकाश शर्मा जी द्वारा लिखित 'क्लब में हत्या' एक मर्डर मिस्ट्री रचना होने के साथ-साथ एक सामाजिक संदेश भी है। हत्या क्यों होती है? इसका कारण जो प्रत्यक्ष होता है, आवश्यक नहीं की वही हो, अप्रत्यक्ष कारण भी बहुत होते हैं।
एक पठनीय मार्मिक मर्डर मिस्ट्री है।
उपन्यास- क्लब में हत्या
लेखक- ओमप्रकाश शर्मा- जनप्रिय लेखक
प्रकाशक- मारुति प्रकाशन, मेरठ
पृष्ठ- 110
रविवार, 26 मार्च 2023
शनिवार, 4 मार्च 2023
सुरिन्द्रजीत चोपड़ा
नाम - सुरिन्द्रजीत चोपड़ा
इलाहाबाद के प्रकाशन 'प्रेमी जासूस कार्यालय' से सुरिन्द्र
जीत चोपड़ा के एक उपन्यास का विवरण प्राप्त हुआ है।
हिंदी लोकप्रिय साहित्य में इलाहाबाद का विशेष योगदान रहा है पर वर्तमान में वहाँ की जानकारी अत्यंत अल्प है।
सुरिन्द्रजीत चोपड़ा के उपन्यास
बुधवार, 1 मार्च 2023
बिमल चटर्जी
नाम- बिमल चटर्जी
दिल्ली निवासी बिमल चटर्जी एक्शन उपन्यासों के लेखक के रूप में चर्चित रहे हैं। इनके पात्र पाठकों में अत्यंत प्रिय थे। बिमल चटर्जी के छोटे भाई अशीत चटर्जी जी ने भी इन्हीं पात्रों पर रोचक उपन्यासों की रचना की थी।
बिमल चटर्जी के उपन्यास
- टैंजा के दुश्मन
- टैंजा का जाल
- टैंजा का अंत
- दुश्मनों के दुश्मन
- दुश्मनों के देश में
- दुश्मनों का अंत
- पहली चोट
- दूसरी चोट
- तीसरी चोट
- चोट पर चोट
- बर्फीला तूफान
- नीले गगन की आग
- गुरु और चेला
- राजा जानी खतरे में
- टैंजा की वापसी
- महाबली टैंजा का अंत
- युद्ध और प्रलय
- मास्टर प्लान ऑफ फोमांचू
- चार लड़ाके
- खतरनाक फोमांचू
- चार शैतान
- मैडम शिवाना लड़ाकों के देश में
- राहू केतू और फोमांचू
- जहाँ मौत बसती है
- मौत के दुश्मन (क्रम 01-24 तक, मनप्रिय प्रकाशन दिल्ली)
- मौत की बाजी
- कयामत की आग
- सुपरमैन फोमांचू
- फोमांचू और टैंजा के दुश्मन
- काला खतरा
- सब से बड़ा खिलाड़ी (क्रांति प्रकाशन, सहारनपुर)
- साधु, संत और फकीर ।। समीक्षा (भारती पॉकेट बुक्स, दिल्ली)
- डंके की चोट
- मौत का डंका
- डंके का अंत (गंगा पॉकेट बुक्स, मेरठ)
- जाग उठा शैतान
- घायल शेर
- दहल उठी दुनिया
- जय ज्वाला,
- भड़क उठी ज्वाला
- मौत की ज्वाला
- प्रतिशोध की ज्वाला।
- पासा पलट न जाये
- चीख उठा काल
- फोमांचू युद्ध के घेरे में
- पहला शोला
- दूसरा शॊला
- तीसरा शोला
- आग और शोला
- ओमर की वापसी
- पहला तूफान
- दूसरा तूफान
- तीसरा तूफान
- आंधी और तूफान
- चढ़ जा बेटा सूली पर
- फिर आया तूफान
- गर्ज उठा तूफान
- तूफान का जलजला
- नर्क की आग
- ठाकुर दादा
- आग का गोला
- कफन बांध लो
- सम्राट फोमांचू का अंत
- बिच्छू का आतंक
- जिंदा जला डालो (क्रम 62-65,गंगा पॉकेट बुक्स)
- आफत का बेटा
- प्रलय फिर न आयेगी
- आखिरी संग्राम
- मौत की वसीयत
- निशाना चूक न जाये (क्रम 67-70,गंगा पॉकेट बुक्स)
मंगलवार, 28 फ़रवरी 2023
अपाहिज फरिश्ता - सरला रानू
अपाहिज फरिश्ता - सरला रानू
उदयपुर विश्वविद्यालय कुछ अपने नाम जैसा ही अत्यन्त अलग एवम् प्रिय। अनेक शहरों के लड़के-लड़किया, अमीर-गरीब तथा सभी धर्मों के छात्र इस विद्यालय को शोभायमान बनाए हुए थे। अगस्त का महीना यूं भी छात्र- छात्राओं के अन्दर नया उत्साह उत्पन्न कर देता है—क्योंकि इलेक्शन आरम्भ हो चुके थे। छात्रों में एक नया जोश सहज ही देखा जा सकता था, किन्तु शाम होते ही चीखते एम्प्लीफायर खामोश हो जाते, जैसे इस समय चारों ओर खामोशी व्याप्त थी। कुछेक लड़के-लड़कियां अपने होस्टल के कमरों में पढ़ाई में व्यस्त थे, कुछ बैडमिंटन खेल रहे थे, तो कुछ प्रेमिकाओं की झलक के लिए 'गर्ल्स होस्टल' के इर्द-गिर्द चक्कर काट रहे थे। लड़कियां भी कम नहीं थीं किसी-न- किसी बहाने अपने प्रियतम को दर्शन दे दिया करती। माहौल कुछ अजीब था।
आज रविवार था, इसीलिए शायद ऐसा समां बंधा था। ठंडी हवा चारों ओर चहलकदमी कर रही थी। आकाश में चांद दिखने लगा था। लॉन के एक कोने में विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध छात्र नेता बैठे हुए थे। उनकी संख्या चार थी। चारों के हाथों में सिगरेटें सुलग रही थीं। अनायास प्रथम छात्र नेता बोला- "हमारा ग्रुप आज यूनिवर्सिटी में काफी चर्चित है— इसका श्रेय अमित तिवारी को जाता है।”मंगलवार, 21 फ़रवरी 2023
मायाजाल - विक्की आनंद
मायाजाल - विक्की आनंद
साहित्य देश के उपन्यास अंश स्तम्भ के अंतर्गत इस बार पढें लोकप्रिय उपन्यासकार विक्की आनंद के उपन्यास मायाजाल का एक रोचक अंश।
विनोद के पलटने तक मोना अपने सांचे में ढले दूध जैसे गोरे बदन से कपड़े उतार चुकी थी। सिर्फ अण्डरवियर्स शेष रह गए थे। उसके गोरे बदन पर काले रंग की चड्ढी और काले ही रंग की चोली अलग से चमक रही थी।
दरवाजा अंदर से बंद करके मुड़ने पर विनोद उसे विस्मय से देखता का देखता रह गया।
उसने ऐसा दिलकश-दिलफरेब-हाहाकारी हुस्न पहली बार देखा था।
मोना ने तौबा शिकन अंदाज से दोनों हाथ उठाकर अंगड़ाई ली। उस घड़ी वह किसी नृत्यांगना जैसी मुद्रा में पंजों के बल खड़ी थी। अंगड़ाई लेते समय उसके उन्नत वक्षों में अतिरिक्त तनाव आ गया था। उसने विनोद की ओर देखते हुए कातिलना अंदाज में घनेरी पलकों और नाक को हल्की-सी जुम्बिश दी।
फिर उसका निचला अधर दांतों के बीच दब गया।
गहरी लाल लिपिस्टिक उसके अधरों को अलग-सी चमक प्रदान कर रही थी। व्हिस्की के नशे में थी वह।
उसी नशे में उसके नेत्र जगमग-जगमग कर रहे थे।
आमंत्रण की मुद्रा में उसने अपनी दोनों गुदाज बांहें फैला दीं।
खुद विनोद भी गहरे नशे में था।
जिस होटल में वह ठहरा था, उसके ठीक बाहर मोना से एक गुण्डे ने छेड़छाड़ शुरू कर दी। ऐन वक्त पर पहुंचकर विनोद ने उसे गुण्डे से बचा लिया। गुण्डे ने पहले चाकू, उसके बाद उस्तरे से उस पर वार करने चाहे थे, लेकिन उसका एक भी वार कामयाब न हो सका।
शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2023
सुनीता अग्रवाल
नाम- सुनीता अग्रवाल
लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में एक विवादस्पद प्रश्न रहा है और वह प्रश्न है प्रथम उपन्यास लेखिका। इस विषय पर विभिन्न विद्वानों के मत अलग-अलग हैं। कोई भी किसी एक मत पर सहमत नहीं है।
इस शृंखला में एक और नाम शामिल होता है और वह नाम है सुनीता अग्रवाल। अब यह नाम वास्तविक है या छद्म लेखन है कुछ कहा नहीं जा सकता पर लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में महिला उपन्यासकार की सूची में एक और नाम अवश्य जुड़ गया है।
सुनिता अग्रवाल के विषय में हालांकि कोई संतोषप्रद जानकारी उपलब्ध नहीं है। समस्त जानकारी का स्त्रोत 'बुद्धिमान प्रकाशन- मुम्बई' से प्रकाशित एक पत्रिका है।
सुनीता अग्रवाल के उपन्यास
1. मानव कंकाल
सुनीता अग्रवाल के विषय में किसी पाठक को कोई जानकारी हो तो हमसे अवश्य संपर्क करें।
Email- sahityadesh@gmail.com
लोकप्रिय साहित्य की पत्रिकाएं
कुछ लोकप्रिय साहित्य की पत्रिकाएं
जासूस साहित्य में एक और प्रकाशन की जानकारी प्राप्त हुयी है। दिल्ली का प्रकाशन संस्थान है - चित्रलोक प्रकाशन।
चित्रलोक प्रकाशन की चार पत्रिकाएं प्रकाशित होती थी। जैसा की चित्र में देख सकते हैं।
- सी. आई. डी.
- इमराम के कारनामें सीरीज
- के. थ्री सीरीज
- जासूसी चिंगारी
![]() |
सी आई डी मासिक पत्रिका |
बुधवार, 15 फ़रवरी 2023
फंदा- अनिल सलूजा, उपन्यास अंश
फन्दा - अनिल सलूजा, बलराज गोगिया, प्रथम उपन्यास
साहित्य देश के 'उपन्यास अंश' स्तम्भ में इस बार प्रस्तुत है अनिल सलूजा द्वारा लिखित प्रथम उपन्यास 'फंदा' का अंश। यह बलराज गोगिया सीरीज का प्रथम उपन्यास है और अनिल सलूजा जी के नाम से प्रकाशित होने वाला भी प्रथम उपन्यास है।
"क.... कौन हो तुम...." - बड़ी मुश्किल के बोल फूट पाया कुलकर्णी साहब के होंठों से।रंगत एक दम से स्याह पड़ी हुई थी कुलकर्णी साहव की आंखों में खौफ के साये मंडराने लगे थे....। फटी-फटी आंखों से वे अपने सामने खड़े उन पांच नकाबपोशों को देख रहे थे जो कि उनके आठ साल के बेटे बबलू की खोपड़ी से स्टेनगन लगाये खड़े थे।
काले कपड़े में झांकते पांचों नकाबपोशों के होठों पर जहरीली मुस्कान रेंग गई।
एक नकाबपोश आगे बढ़ा- स्टेनगन अपने कंधे पर रखा और मुस्कान को और तेज करते हुए बोला- "जाहिर है हम अच्छे लोग नहीं हैं वर्ना काले कपड़ों में अपने मुंह छुपाकर तुम्हारे पास क्यों आते ।"
"क्या....क्या चाहते हो ?"
“हां....यह सवाल तुमने अच्छा किया।" - नकाबपोश अपनी स्टेनगन को कुलकर्णी साहब के सीने के सटाते हुए बोला- "बलराज गोगिया को फांसी का हुक्म तुमने ही सुनाया था न कुलकर्णी ?"
बुरी तरह से चौंके कुलकर्णी साहब....।
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केशव पण्डित हिन्दी उपन्यासकार केशव पण्डित गौरी पॉकेट बुक्स के Ghost Writer थे। गौरी पॉकेट बुक्स बंद हो जाने के बाद इसका टाइटल 'तु...
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रानू हिंदी के बहुचर्चित उपन्यासकार थे। अपने समय के प्रसिद्ध लेखक रानू के पाठकों का एक विशेष वर्ग था। रानू के उपन्यास जितने चाव से अपने समय...
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- मेरे पास उपलब्ध उपन्यासों की सूची। समयानुसार इसे संशोधित किया जाता रहा है। मेरा उद्देश्य 'लोकप्रिय उपन्यास संग्रह' है, जिसके अ...
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नाम- राज भारती लोकप्रिय साहित्य के सितारे राज भारती मूलत पंजाबी परिवार से संबंधित थे। इनका मूल नाम ....था। दिल्ली के निवासी राज भारती जी ने...















