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रविवार, 9 अप्रैल 2023

क्लब में हत्या- ओमप्रकाश शर्मा

किस्सा तीन हत्याओं का
क्लब में हत्या- जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा

           उपन्यास साहित्य में जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा का नाम विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है। जितना सम्मान पाठक ओमप्रकाश शर्मा का करते हैं उतने ही सम्मानजनक इनके पात्र होते हैं। शर्मा जी का एक विशेष पात्र है राजेश।  प्रस्तुत उपन्यास 'क्लब में हत्या' राजेश -जयंत शृंखला का है। जो की एक मर्डर मिस्ट्री कथा है।
राजेश और जयन्त संयोगवश इस मामले में सम्बन्धित हुये । वह दोनों झाँसी से लौट रहे थे और घटना रात के ग्यारह बजे की है जब उनकी कार दिल्ली की सीमा में प्रविष्ट होकर मथुरा रोड पर दौड़ रही थी। जयन्त कार चला रहा था और राजेश पिछली सीट पर बैठे एक उपन्यास पढ़ने में तल्लीन थे ।
   रास्ते में एक एक्सीडेंट देखकर दोनों को रुकना पड़ा था। जयंत ने राजेश को भी वहाँ बुला लिया।
" राजेश, जरा आओ तो ।”
- "क्या बात है ?"
-"एक्सीडेंट है एक, बिल्कुल अजीब-सा एक्सीडेंट ।” राजेश उठे। उनकी कार के आगे लगभग दस कारें खड़ी थीं । उसके बाद...... उसके बाद था एक ट्रक और ट्रक के पिछले पहियों में दबा हुआ था एक नवयुवक।
   वहाँ उपस्थित सब इंस्पेक्टर चतरसेन का मानना था की यह एक दुर्घटना है। लेकिन परिस्थितियों का विश्लेषण करने के पश्चात राजेश ने घोषणा की कि यह महज एक दुर्घटना नहीं बल्कि सोच- समझकर किया गया कत्ल है।
   चतुर चतुरसेन ने राजेश से अनुरोध न किया की वह इस मामले में उसकी मदद करे। वहीं बाद में केन्द्रीय खूफिया विभाग ने भी राजेश को इस केस पर नियुक्त कर दिया था।
    मृतक का नाम प्रमोद कुमार था और वह 'विश्राम लोक क्लब, नई दिल्ली' में असिस्टेंट मैनेजर था। राजेश- जयंत और सब इंस्पेक्टर की जाँच का केन्द्र अब विश्राम क्लब था। क्लब प्रमोद कुमार की शोक सभा में ही जब राजेश ने यह घोषणा की कि कातिल इस क्लब में ही उपस्थित है तो एक बार वहां सन्नाटा छा गया।
    क्लब के अवैतनिक मैनेजर रंगबिहारी लाल और मालकिन मोहिनी देवी नहीं चाहते थे की क्लब की बदनामी हो। लेकिन उनके चाहने न चाहने से कुछ नहीं होने वाला था।
   राजेश की जाँच अभी चल ही रही थी कि क्लब में हत्या हो गयी। इस बार हत्यारे ने क्लब के सदस्य को क्लब में ही मार दिया, हंगामा तो होना ही था।
और राजेश ने यह प्रण किया की वह शीघ्र असली अपराधी तक पहुंच जायेगा।
राजेश तनिक मुस्कराए— “ आप बिल्कुल बजा फरमाते हैं. मिर्जा साहब, सवाल सिर्फ हत्यारे की खोज का नहीं है। सवाल यह है कि शमा ने खुद जलकर कितने परवाने जला दिए ? मुझे इसका हिसाब जानना है और यकीन कीजिए मिर्जा साहब ! हिसाब जानकर ही रहूंगा।
     और एक हंगामें के चलते राजेश भी अपराधियों की गिरफ्त में आ गया। और यही अपराधियों के लिए खतरनाक साबित हुआ।
    उपन्यास मर्डर मिस्ट्री कथा पर आधारित है। उपन्यास में‌ कुल तीन हत्याएं होती हैं।
उपन्यास का जो सशक्त पक्ष है वह है जासूस राजेश। शर्मा जी द्वारा रचित पात्रों में राजेश सबसे अलग है। अन्य जासूस साथी भी राजेश का अत्यंत सम्मान करते हैं।
राजेश का नैतिक पक्ष अत्यंत मजबूत है। वह अपराधी के साथ भी क्रूरता नहीं करता।
   राजेश का प्रमोद की पत्नी को बहन कहकर संबोधित करना, उस के साथ यह वायदा करना की प्रमोद से संबंधित कोई भी अनुचित बात जनता नहीं पहुंचेगी।
   राजेश एक जासूस है और जासूस अपने बुद्धिबल से कार्य करता है। राजेश की जो कार्यशैली वह इसलिए भी प्रभावित करती है की वह एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़कर शेष अपराधियों तक अपने चातुर्य और बुद्धि से पहुंचता है।
   उपन्यास के अंत में राजेश और प्रमोद की पत्नी रत्ना का संवाद अत्यंत प्रभावशाली है।‌ (पृष्ठ संख्या 105)
विशेष कथन-
धरती का आकर्षण, जो भी आवारा घुमक्कड़ तारा धरती की आकर्षण परीक्षा में आ जाता है, बिना जले रहता नहीं । जलता है और फिर राख होकर धरती के अंक में समा जाता है ।
- कौन जान सकता है, पुरुष के भाग्य को और स्त्री के चरित्र को ?
    जनप्रिय ओमप्रकाश शर्मा जी द्वारा लिखित 'क्लब में हत्या' एक मर्डर मिस्ट्री रचना होने के साथ-साथ एक सामाजिक संदेश भी है। हत्या क्यों होती है? इसका कारण जो प्रत्यक्ष होता है, आवश्यक नहीं की वही हो, अप्रत्यक्ष कारण भी बहुत होते हैं।
एक पठनीय मार्मिक मर्डर मिस्ट्री है।

उपन्यास-  क्लब में हत्या
लेखक-    ओमप्रकाश शर्मा- जनप्रिय लेखक
प्रकाशक-   मारुति प्रकाशन, मेरठ
पृष्ठ-         110

क्लब में हत्या - ओमप्रकाश शर्मा novel

रविवार, 25 जुलाई 2021

रोशनी की मौत- अब्बास हुसैनी

 रोशनी की मौत

  जासूसी साहित्य के इतिहास में अँधकार

  इब्ने सफी की मृत्यु पर जासूसी दुनिया पत्रिका में संपादक अब्बास हुसैनी काश्रद्धांजलि स्वरूप छपा एक आर्टिकल। 

 महान जासूसी उपन्यासकार इब्ने सफी 26 जुलाई 1980 को मौत  की गोद में हमेशा के लिये सो गये।

            आज से अट्ठाईस वर्ष पूर्व जब मैंने इब्ने सफी के प्रथम उपन्यास का संपादकीय लिखा था तो उस समय क्या मालूम था कि जीवन में कोई ऐसा मनहूस समय भी आयेगा जब मुझे अपनी इस लेखनी से इब्ने सफी की मृत्यु की भी घोषणा करनी पड़ेगी। काश उसी अशुभ समय को ही मौत आ गई होती, जिसने इब्ने सफी को सदैव के लिये हमसे छीन लिया।

     इस समय अकेला मैं ही इब्ने सफी के निधन पर शोकाकुल नहीं हूँ, बल्कि मेरी नजरें साक्षात यह देख रही हैं कि सहस्त्रों, लाखों पढने वाले इब्ने सफी के दुख में अश्रुपात कर रहे हैं। जासूसी इतिहास के संपूर्ण वातावरण पर शोक के बादल छाये हुये हैं। संपूर्ण वातावरण अँधकार में विलिन है, पूरे वातावरण पर जानलेवा सन्नाटा है।

28 जुलाई सन् 1980 को जब तार द्वारा मुझे यह दुखदाई सूचना मिली कि इब्ने सफी का 26 जुलाई को देहांत हो गया तो मैं विचार करने लगा लगा कि-क्या किसी रोशनी को भी मौत आ सकती है?, क्या किसी युग को भी मौत आ सकती है?, क्या किसी शैली को भी मौत आ सकती है?....नहीं...नहीं, इब्ने सफी कभी मर सकते। वह जासूसी साहित्य के इतिहास में सदैव जीवित रहेंगे। वह लोगों के दिल व दिमाग में जिंदा रहेंगे। वह आकर्षक शैली में जीवित रहेंगे। वह अपने निर्मित पात्रों के दिलों की  धड़कनों में जिंदा रहेंगे। वह अपने व्यंग्य, उपहास और परिहास की छटामयी घाटियों में जीवित रहेंगे। वह हमीद की मधुर मुस्कानों में जीवित रहेंगे। वह विनोद के मायावी व्यक्तित्व में जीवित रहेंगे। वह राजेश के आकाशभेदी अट्ठहासों में जीवित रहेंगे। इब्ने सफी ने तो पूरा एक संसार सजा है, इसलिये जब तक उस संसार का श्रृंगार शेष रहेगा तब तक इब्ने सफी को भी को मौत नहीं आ सकती- वह जीवित रहेंगे।

        आज हम इसलिये दुखी हैं कि हमारी आँखें अब इब्ने सफी को नहीं देख  सकती फिर भी जुदाई का यह दुख  बड़ा ही हृदयविदारक दुख है किंतु यह दुख केवल मेरा या तुम्हारा या किसी एक परिवार का दुख नहीं है बल्कि इस दुख में आज इब्ने सफी के लाखों पढने वाले सम्मलित हैं। अतः मैं जासूसी दुनिया के समस्त पाठकों को उनके प्रिय लेखक इब्ने सफी की मृत्यु पर सांत्वना देता हूँ और इब्ने सफी की आत्मा की शांति के लिये स्वयं अपनी ओर से और आप सब लोगों की ओर से भी खुदा से दुआ करता हूँ।

       जमाना बड़े शौक से सुन रह था,

      तुम ही सो गये दास्तां कहते-कहते।

                                                सोगी-

                                             अब्बास हुसैनी

इब्ने सफी कुछ उपयोगी लिंक
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इब्ने सफी उपन्यास झलक

गुरुवार, 8 जुलाई 2021

इब्ने कैफी

 नाम- इब्ने कैफी

   मेरठ शहर लोकप्रिय उपन्यास साहित्य का केन्द्र रहा है। यहाँ से संपादक देवीदयाल गंभीर जी के संपादन में एक मासिक पत्रिका आरम्भ हुयी थी -भयानक दुनिया।

   भयानक दुनिया 'अशोक पब्लिकेशन' की पत्रिका थी। और इसके प्रथम अंक में इब्ने कैफी नामक लेखक का एक उपन्यास प्रकाशित हुआ था। 

हालांकि इब्ने कैफी के विषय में कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं है।

इब्ने कैफी के उपन्यास

1.  आवारा देवता ( सितम्बर-1986)


शुक्रवार, 12 अप्रैल 2019

इब्ने सफी के उपन्यासों की झलक

इब्ने सफी की 'जासूसी दुनिया सीरिज' के कुछ उपन्यासों की एक झलक


1. दिलेर मुजरिम

            यह इब्ने सफी का प्रथम उपन्यास है।
                ‘दिलेर मुजरिम’ की कहानी पैसे की हवस के चलते जुर्म की दुनिया में डूबते चले जाने की कहानी है। नवाब वजाहत मिर्ज़ा के बीमार पड़ते ही सलीम, जो उनका नज़दीकी रिश्तेदार है, उनकी जायदाद को हासिल करने के लिए क़त्ल पर उतर आता है। इसी में डॉक्टर शौकत का क़िस्सा भी है जो नवाब वजाहत मिर्ज़ा का बेटा है, लेकिन चूँकि नवाब साहब ने अपनी दिवंगत बीवी की इच्छा पर उसे परवरिश के लिए अपनी दोस्त सविता देवी के पास रख दिया था, इसलिए यह राज़ राज़ ही रहा और जैसे ही सलीम को इस राज़ का पता चला, उसने शौकत को रास्ते से हटाने की ठान ली।
               अपने मंसूबे में सलीम किस तरह नाकाम रहा और अपने ही बनाये जाल में फँसता चला गया, इसे जानने के लिए पाठकों को ‘दिलेर मुजरिम’ के पन्नों से गुज़रना होगा और हम आपको इस सफ़र पर चलने का न्योता देते हैं।


2. जंगल में लाश 
                      


                      जब जंगल में एक के बाद एक लाशें मिलने लगती हैं तो किसी को अन्दाज़ा नहीं होता कि मामला कहाँ अटका है। असली मुजरिम कौन है और इन हत्याओं की असली वजह क्या है? जानने के लिये पढ़िये इब्ने सफ़ी की दूसरी हैरतअंगेज़ कहानी ‘जंगल में लाश’।


3. औरत फ़रोश का हत्यारा
                       


                जब इन्स्पेक्टर फ़रीदी और सार्जेंट हमीद के बीच ‘गुलिस्ताँ होटल’ में जा कर नाच के जश्न में को ले कर नोंक-झोंक होती है तो ज़रा भी अन्दाज़ा नहीं होता कि यह जश्न जुर्मों के कैसे सिलसिले को पैदा करनेवाला है। हमीद अपनी नयी मित्र शहनाज़ के साथ नाचने की तमन्ना दिल ही में सँजोये रखता है और इन्स्पेक्टर फ़रीदी शहनाज़ के साथ नाचने लगता है। तभी गोली चलने की आवाज़ आती है और सारा माहौल बदल जाता है। पता चलता है कि किसी आदमी ने ख़ुदकुशी कर ली है और यह आदमी फ़रीदी की तफ़तीश की मुताबिक़ औरतों का धन्धा करने वाला एक पुराना मुजरिम था।
                ज़ाहिर है वह ख़ुदकुशी नहीं है, बल्कि क़त्ल है। मगर किसने किया है ? जानने के लिये पढ़िये इब्ने सफ़ी की तीसरी हैरतअंगेज़ कहानी ‘औरत फ़रोश का हत्यारा’।


4. तिजोरी का रहस्य

              क्या आपने कभी ऐसे मुजरिम के बारे में पढ़ा है जो तिजोरियाँ तोड़े,  मगर चुराये कुछ भी नहीं ? नहीं सुना न ? तो हम आपसे गुज़ारिश करेंगे कि आप इब्ने सफ़ी का यह उपन्यास ‘तिजोरी का रहस्य’ पढ़िए।
               ‘तिजोरी का रहस्य’ ऐसे मुजरिम की कहानी है जो एक राज़ जानने के बाद उसे अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहता है। दिलचस्प बात यह है कि इस मुजरिम का पता लगाने के लिए फ़रीदी आम जासूसों से अलग हट कर ख़ुद भी कुछ मुजरिमों जैसे तरीक़े अपनाता है। यही नहीं, बल्कि वह एक पुराने मुजरिम दिलावर की मदद भी लेता है। मगर कैसे? जानने के लिये पढ़िये इब्ने सफ़ी की दूसरी हैरतअंगेज़ कहानी ‘तिजोरी का रहस्य’।


5. फ़रीदी और लियोनार्ड
                 
             लियोनार्ड बेहद घटिया क़िस्म का ब्लैकमेलर है, जो सिर्फ़ ब्लैकमेलिंग तक ही नहीं रुकता, बल्कि क़त्ल और दूसरे ओछे हथकण्डे अपनाने पर उतर आता है। क्या-क्या गुल खिलाता है और फिर कैसे फ़रीदी के हत्थे चढ़ता है–इसे जानने के लिए आइए, इस उपन्यास के हैरत-अंगेज़ सफ़र पर चलें। हमारा य़कीन है आप निराश न होंगे।


6. कुएँ का राज़
         ‌   


             जब नवाब रशीदुज़्ज़माँ की कोठी में बने पुराने कुएँ से अचानक अंगारों की बौछार होने लगती है, घर की दीवारों से जंगली आवाज़ें आने लगती हैं और पालतू जानवर एक-एक करके मरने लगते हैं। दहशत में भरकर कोठी के लोग ऐसी हरकतें करते हैं कि ग़ज़ाला, जिसे य़कीन हैकि यह कोई भूत-नाच नहीं, इन्सानी साज़िश है, फ़रीदी को बुला लाती है।
    फिर क्या होता है ? किसका पर्दाफ़ाश होता है ? यही ‘कुएँ काराज़’ की अचरज-भरी कहानी है।


7. चालबाज़ बूढ़ा
              

         हालाँकि ‘चालबाज़ बूढ़ा’ का केन्द्रीय पात्र जाबिर है - निहायत ही पेचीदा शख़्स, जिसे किसी भी क़िस्म का इन्सानी जज़्बा छू नहीं पाता और जो आख़िर में फ़रीदी जैसे होशियार भेदिये को भी चकमा दे कर फ़रार हो जाता है - लेकिन जो किरदार उपन्यास में अनायास उभर आया है वह रुक़ैया का। ‘चालबाज़ बूढ़ा’ की भटकती हुई खलनायिका रुक़ैया का किरदार इब्ने सफ़ी ने लाजवाब मिट्टी से गढ़ा है और उसे उपन्यासकार की भरपूर हमदर्दी भी मिली है।
            ज़िन्दगी में भटकाव का शिकार हो कर गुनाह की गहराइयों में डूब जाने के बावजूद रुक़ैया के दिल में गहरे कहीं प्यार की प्यास है। फ़रीदी जैसे ही इन जज़्बात को छेड़ता है तो रुक़ैया के चरित्र का बेहद उजला पहलू सामने आता है। लेकिन इब्ने सफ़ी जानते हैं कि हृदय-परिवर्तन के बाद भी रुक़ैया का अन्त मौत है और वे उसे उसके स्वाभाविक अन्त तक जाने देते हैं।
            इब्ने सफ़ी की ख़ूबी है कि वे भयानक-से-भयानक चरित्र को पेश करते समय भी उस बुनियादी उसूल पर काम कर रहे होते हैं कि गुनाह से नफ़रत करो, गुनहगार से नहीं। इसलिए वे कोरी किताबी बात न करके गुनहगार की ज़ेहनियत को समझने की कोशिश करते हैं। रुक़ैया जैसे बहुत-से खलनायकों को वे इसी आधार पर हमदर्दी भी दे पाते हैं।

इब्ने सफी साहब
जासूसी दुनिया पत्रिका 



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धन्यवाद।
इब्ने सफी साहब के उपन्यासों की लिस्ट यहाँ उपलब्ध है।-इब्ने सफी उपन्यास सूची

बुधवार, 6 मार्च 2019

इब्ने सफी


इब्ने सफी उपन्यास सूची

1. अजनबी मेहमान  

2. अंधा मुजरिम 

3.  अनदेखा दुश्मन

4. अशांत सागर 

5. अनोखी लड़की 

6. अनोखी औरत 

7. अनोखी नर्तक

8. अनोखी वसीयत 

9. अनोखा चोर 

10. अनोखा जाल 

11. अधूरा कत्ल

12. अपाहिज की मौत 

13. अंधेरे का शिकार 

14. अंधेरे का सम्राट 

15. अँधेरे का खून 

16. अँधेरे का जलजला 

17. अंगारे की मौत

18 अंगारों का संगीत 

19. अपराधी की बाहों

20. अपराधी का रूप

21. अपराधी का चैलेंज

22. अपराध की गूंज 

23. अपराधी के दो 

24. अपराधी की खोज  

25. अपराध का पुजारी 

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मेरठ उपन्यास यात्रा-01

 लोकप्रिय उपन्यास साहित्य को समर्पित मेरा एक ब्लॉग है 'साहित्य देश'। साहित्य देश और साहित्य हेतु लम्बे समय से एक विचार था उपन्यासकार...