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मंगलवार, 21 फ़रवरी 2023

मायाजाल - विक्की आनंद

मायाजाल - विक्की आनंद

साहित्य देश के उपन्यास अंश स्तम्भ के अंतर्गत इस बार पढें लोकप्रिय उपन्यासकार विक्की आनंद के उपन्यास मायाजाल का एक रोचक अंश।

विनोद के पलटने तक मोना अपने सांचे में ढले दूध जैसे गोरे बदन से कपड़े उतार चुकी थी। सिर्फ अण्डरवियर्स शेष रह गए थे। उसके गोरे बदन पर काले रंग की चड्ढी और काले ही रंग की चोली अलग से चमक रही थी।
दरवाजा अंदर से बंद करके मुड़ने पर विनोद उसे विस्मय से देखता का देखता रह गया।
मायाजाल - विक्की आनंद

उसने ऐसा दिलकश-दिलफरेब-हाहाकारी हुस्न पहली बार देखा था।

मोना ने तौबा शिकन अंदाज से दोनों हाथ उठाकर अंगड़ाई ली। उस घड़ी वह किसी नृत्यांगना जैसी मुद्रा में पंजों के बल खड़ी थी। अंगड़ाई लेते समय उसके उन्नत वक्षों में अतिरिक्त तनाव आ गया था। उसने विनोद की ओर देखते हुए कातिलना अंदाज में घनेरी पलकों और नाक को हल्की-सी जुम्बिश दी।

फिर उसका निचला अधर दांतों के बीच दब गया।

गहरी लाल लिपिस्टिक उसके अधरों को अलग-सी चमक प्रदान कर रही थी। व्हिस्की के नशे में थी वह।

उसी नशे में उसके नेत्र जगमग-जगमग कर रहे थे।

आमंत्रण की मुद्रा में उसने अपनी दोनों गुदाज बांहें फैला दीं।

खुद विनोद भी गहरे नशे में था।

जिस होटल में वह ठहरा था, उसके ठीक बाहर मोना से एक गुण्डे ने छेड़छाड़ शुरू कर दी। ऐन वक्त पर पहुंचकर विनोद ने उसे गुण्डे से बचा लिया। गुण्डे ने पहले चाकू, उसके बाद उस्तरे से उस पर वार करने चाहे थे, लेकिन उसका एक भी वार कामयाब न हो सका।

सोमवार, 26 दिसंबर 2022

विक्की आनंद

 नाम- विक्की आनंद Ghost Writer
प्रकाशक - डायमण्ड पॉकेट बुक्स
डायमण्ड पॉकेट बुक्स द्वारा अनेक Ghost writer बाजार में उतारे गये थे जिनमें एक नाम था विक्की आनंद।
  विक्की आनंद द्वारा लिखी गयी डैडमैन सीरीज चर्चा में रही है।
               विक्की आनंद के उपन्यास
  1. किले का रहस्य
  2. कफन
  3. महादेव
  4. शोले
  5. मुलजिम
  6. सन्नाटा
  7. बारूद
  8. वारंट

बुधवार, 1 दिसंबर 2021

29 दिसम्बर की रात - विक्की आनंद, उपन्यास अंश

 अब उसके लिये कत्ल करना बहुत जरूरी हो गया था...इस ताबड़तोड़ भयानक घटनाचक्र में यही एकमात्र उसके बचाव का मार्ग रह गया था।

      अपने अँधेरे कमरे में वह बड़ी देर से इन्हीं विचारों के बवंडर में इधर-उधर घूमे जा रहा था। अपने तीव्र मानसिक तनाव में वह कमरे की बत्ती जलाना भी भूल गया था। एकाकीपन तथा घना अँधेरा मन को और भी विचलित कर देता है।

          तनाव में इधर से उधर और उधर से इधर चलते हुये वह सिगरेट पर सिगरेट फूँके जा रहा था। उसके  मस्तिष्क में सुधा के वाक्य गूँज-गूँज कर प्रलय मचा रहे थे। 

29 दिसम्बर की रात - विक्की आनंद
29 दिसम्बर की रात - विक्की आनंद

“केवल चौबीस घण्टे...इससे अधिक समय मैं तुम्हें नहीं दे सकती।”

“मेरे पेट में पनप रहा तुम्हारा बच्चा- अब मुझे कुलबुलाता अनुभव हो रहा है।”

उसने सुधा से आँख न मिलाते हुये कहा- 

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