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गुरुवार, 29 जुलाई 2021

विनोद प्रभाकर

 नाम- विनोद प्रभाकर

मेरठ उपन्यास लेखकों का केन्द्र रहा है। मेरठ जिला मुख्यालय ही नहीं वरन आसपास के क्षेत्रों से भी काफी उपन्यास लेखक सक्रिय थे।
    मेरठ के नजदीक शहर है मलियाना। वहीं के एक जासूसी उपन्यासकार थे विनोद प्रभाकर।
विनोद प्रभाकर के उपन्यास 'श्यामा पॉकेट बुक्स, मलियाना' से प्रकाशित हुये थे। 
       विनोद प्रभाकर के उपन्यास
  1. नहीं खुलेगा राज- 1990
  2. कत्ल के हिस्सेदार
  3. रात के शहंशाह
  4. महानायक
  5. जलाकर राख कर दूंगा
  6. अयोध्या का पापी
संपर्क -श्यामा पॉकेट बुक्स
          1252, मलियाना मेरठ
उक्त लेखक के विषय में कोई जानकारी उपलब्ध हो तो हमसे शेयर करें।
Email- sahityadesh@gmail.com




मंगलवार, 27 जुलाई 2021

वह विनय प्रभाकर है और रामनारायण पासी भी- विजयशंकर चतुर्वेदी

काफी सयाना है तु। आज से दुश्मनी नहीं दोस्ती बनाना मांगता है। क्योंकि अपन भी तेरा भाई बंद है। फरक है तो दोनों के काम करने के स्टाइल में। तू तो खूब माथा-पच्ची करके प्लान बनाता है। लोगों के अपनी मिठी बातों के जाल में फसाकर ऐसा बेवकूफ बनाता है कारण तू आज तक पुलिस के हाथ नहीं लगा, बरोबर? जबकि अपन का स्टाइल एकदम शार्टकट है, चापर या तलवार या तमंचा दिखाया कि तुरंत सामने वाले का सारा माल अपन के पास, क्या?

    ये लाइनें हैं विनय प्रभाकर के जंगी उपन्यास `मौत आयेगी सात तालों में` की। रेल्वे स्टालों में देश भर के यात्रियों के मनोरंजन का साधन होते थे विनय प्रभाकर के ऐसे उपन्यास। जलजलाते संवाद, रहस्य-रोमांच से भरी कहानी और शब्दों के जादू में बांध लेने वाली पठनीयता विनय प्रभाकर की पूंजी है। विनय प्रभाकर चर्चगेट में  एमटीएनएल यानि महानगर टेलिफोन निगम लिमिटेड के कर्मचारी हैं। रेल्वे की इमारत में लाइनमैन का पद संभाल रहे हैं। लोअर परेल की सीबी गुलवाली चाल में रहते हैं। दस बाई बारह के कमरे में। पानी खोली के अंदर आता है, टेलिफोन पड़ोसी के सांझे में और संडास पूरी चाल के।

     सस्पेंस लिखने वाले विनय प्रभाकर के नाम के लेकर  भी कुछ कम सस्पेंस नहीं है। उनका असली नाम है रामनारायण पासी और वह देख चुके हैं उमर के अड़तीस वसंत। रामनारायण तीन भाइयों और एक बहन में सबसे बड़े हैं। वैसे तो उनका मुलुक उत्तर प्रदेश है। प्रतापगढ़ जिले का संगीपुल उनका गाँव है। लेकिन पढाई लिखाई मुंबई में होने और बचपन से लेकर जवानी यहीं बिताने के कारण यही अपना मुलुक लगने लगता है। छोटा भाई जगदीश तो अब गाँव लौट गया है, वरना वह भी पिता रामेश्वर के साथ इसी खोली में रहता और सायन के एक म्युनिसिपल स्कूल में पढता। खुद रामनारयण ने हाईस्कूल पास किया परेल की तुलसी मानस स्कूल से। पिता चिंचपोकली की अपोलो मिल में मुलाजिम थे। दस-बारह साल पहले रियायर होकर गाँव चले गये अपने पिता की सेवा करने। रामनारायण की दादी तो अभी-अभी गुजरी है, छह-सात माह पहले।

राकेश पाठक - उपन्यास पोस्टर

 लोकप्रिय उपन्यास साहित्य के एक्शन लेखक राकेश पाठक जी के उपन्यासों के कुछ पोस्टर


राकेश पाठक जी के उपन्यास 'प्लास्टिक की बीवी' का एक पोस्टर


Rakesh pathak novel

Rakesh pathak novel

Rakesh pathak novel


सोमवार, 26 जुलाई 2021

कहानी विनय प्रभाकर की

वह विनय प्रभाकर भी है और रामनारायण पासी भी और मेरे पापा है- दीपक पासी
    लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में विनय प्रभाकर को एक छद्म लेखक के तौर पर जाना जाता है। लेनिक इस छद्म लेखक के पीछे एक चेहरा और है और वह चेहरा है रामनारायण पासी का। रामनारायण पासी जी ने विनय प्रभाकर के नाम से अधिकांश उपन्यास लिखे हैं और 'नाना पाटेकर' जैसा जीवंत किरदार उपन्यास साहित्य को दिया है। 
       रामनारायण पासी के सुपुत्र दीपक पासी से जाने उनके बारे में।
      एक समय था जब मनोरंजन का मुख्य साधन था उपन्यास ।वेद प्रकाश शर्मा और सुरेंद्र मोहन पाठक जैसे कई उपन्यास लेखक उस समय एक स्टार थे।
इन्हीं में से एक थे विनय प्रभाकर। विनय प्रभाकर द्वारा लिखे उपन्यास की काफ़ी माँग थी। बहुत से लोग उन्हें पढ़ा करते थे।
बहुत कम लोगों को पता है विनय प्रभाकर  के नाम से लिखने वाले अधिकतर उपन्यास श्री राम नारायण पासी जी  ने लिखा था। विनय प्रभाकर की मेजर  नाना पाटेकर सीरीज के तो सारे उपन्यास रामनारायण पासी जी ने ही लिखा थे।
    बहुत कम लोगों को पता है और मैंने भी कभी पब्लिक प्लेटफ़ोरम पर इसका ज़िक्र नहीं किया की विनय प्रभाकर के नाम से उपन्यास लिखने वाले रामनारायण पासी जी मेरे पिताजी है। 
   रामनारायण पासी/ विनय प्रभाकर
विनय प्रभाकर के नाम से तक़रीबन सभी उपन्यास पापा ने ही लिखे थे। इसके अलावा कुछ उपन्यास अर्जुन पंडित और दूसरों के नाम से भी लिखे थे। थ्रिलर और सस्पेंस  के साथ साथ  प्रकाशक जो भी विषय कहते हर उस  सब्जेक्ट पर लिखने में महारत हासिल थी पापा को। 

द ट्रेल- अजिंक्य शर्मा, समीक्षा

द ट्रेल - अजिंक्य शर्मा 
उपन्यास समीक्षा- संजय आर्य
                                उपन्यास समीक्षा-03
 "एक और नई मर्डर मिस्ट्री जिसमे रहस्य के साथ जज्बातों का सैलाब भी है जिसमे आप खो जाएंगे । कातिल को पकड़ने में इस बार पाठकों को बहुत मशक्कत करनी होगी । अंत काफी चौकाने वाला है।"
         'द ट्रेल' अजिंक्य शर्मा का सातवां उपन्यास है और  उनके पहले उपन्यास 'मौत अब दूर नही' को पाठकों से अच्छा प्रतिसाद मिला था जिसके कारण  लेखक से पाठकों की उम्मीद बढ़ गई थी जिस पर 'द ट्रेल' के माध्यम से लेखक 100 प्रतिशत खरे उतरे है, और मिस्ट्री लेखक के रूप में अपना सिक्का एक बार फिर से जमाने मे सफल रहे है। 
        'द ट्रेल' को मैंने एक बार पढ़ना शुरू किया तो खत्म करके ही माना। उपन्यास का अंत काफी हैरत अंगेज है  उनके अन्य उपन्यास से इतर इसमें जज्बातों का तूफान भी है । ऐसी मर्डर मिस्ट्री की आप भी खुद को जासूस मानते हुवे कातिल की तलाश करने लग जाएंगे।

रविवार, 25 जुलाई 2021

रोशनी की मौत- अब्बास हुसैनी

 रोशनी की मौत

  जासूसी साहित्य के इतिहास में अँधकार

  इब्ने सफी की मृत्यु पर जासूसी दुनिया पत्रिका में संपादक अब्बास हुसैनी काश्रद्धांजलि स्वरूप छपा एक आर्टिकल। 

 महान जासूसी उपन्यासकार इब्ने सफी 26 जुलाई 1980 को मौत  की गोद में हमेशा के लिये सो गये।

            आज से अट्ठाईस वर्ष पूर्व जब मैंने इब्ने सफी के प्रथम उपन्यास का संपादकीय लिखा था तो उस समय क्या मालूम था कि जीवन में कोई ऐसा मनहूस समय भी आयेगा जब मुझे अपनी इस लेखनी से इब्ने सफी की मृत्यु की भी घोषणा करनी पड़ेगी। काश उसी अशुभ समय को ही मौत आ गई होती, जिसने इब्ने सफी को सदैव के लिये हमसे छीन लिया।

     इस समय अकेला मैं ही इब्ने सफी के निधन पर शोकाकुल नहीं हूँ, बल्कि मेरी नजरें साक्षात यह देख रही हैं कि सहस्त्रों, लाखों पढने वाले इब्ने सफी के दुख में अश्रुपात कर रहे हैं। जासूसी इतिहास के संपूर्ण वातावरण पर शोक के बादल छाये हुये हैं। संपूर्ण वातावरण अँधकार में विलिन है, पूरे वातावरण पर जानलेवा सन्नाटा है।

28 जुलाई सन् 1980 को जब तार द्वारा मुझे यह दुखदाई सूचना मिली कि इब्ने सफी का 26 जुलाई को देहांत हो गया तो मैं विचार करने लगा लगा कि-क्या किसी रोशनी को भी मौत आ सकती है?, क्या किसी युग को भी मौत आ सकती है?, क्या किसी शैली को भी मौत आ सकती है?....नहीं...नहीं, इब्ने सफी कभी मर सकते। वह जासूसी साहित्य के इतिहास में सदैव जीवित रहेंगे। वह लोगों के दिल व दिमाग में जिंदा रहेंगे। वह आकर्षक शैली में जीवित रहेंगे। वह अपने निर्मित पात्रों के दिलों की  धड़कनों में जिंदा रहेंगे। वह अपने व्यंग्य, उपहास और परिहास की छटामयी घाटियों में जीवित रहेंगे। वह हमीद की मधुर मुस्कानों में जीवित रहेंगे। वह विनोद के मायावी व्यक्तित्व में जीवित रहेंगे। वह राजेश के आकाशभेदी अट्ठहासों में जीवित रहेंगे। इब्ने सफी ने तो पूरा एक संसार सजा है, इसलिये जब तक उस संसार का श्रृंगार शेष रहेगा तब तक इब्ने सफी को भी को मौत नहीं आ सकती- वह जीवित रहेंगे।

        आज हम इसलिये दुखी हैं कि हमारी आँखें अब इब्ने सफी को नहीं देख  सकती फिर भी जुदाई का यह दुख  बड़ा ही हृदयविदारक दुख है किंतु यह दुख केवल मेरा या तुम्हारा या किसी एक परिवार का दुख नहीं है बल्कि इस दुख में आज इब्ने सफी के लाखों पढने वाले सम्मलित हैं। अतः मैं जासूसी दुनिया के समस्त पाठकों को उनके प्रिय लेखक इब्ने सफी की मृत्यु पर सांत्वना देता हूँ और इब्ने सफी की आत्मा की शांति के लिये स्वयं अपनी ओर से और आप सब लोगों की ओर से भी खुदा से दुआ करता हूँ।

       जमाना बड़े शौक से सुन रह था,

      तुम ही सो गये दास्तां कहते-कहते।

                                                सोगी-

                                             अब्बास हुसैनी

इब्ने सफी कुछ उपयोगी लिंक
उपन्यास सूची 
इब्ने सफी उपन्यास झलक

शुक्रवार, 23 जुलाई 2021

एम. एल. देव

नाम- एम. एल. देव
    लोकप्रिय साहित्य में‌ जब लेखकों को खोजने‌ निकलो तो एक के बाद एक नये नाम सामने आते हैं।
     ऐसा ही एक नया नाम मिला है - एम. एल. देव।
   इनका एक उपन्यास मिला है, समस्त जानकारी का स्त्रोत वही उपन्यास है। 
इनके उपन्यास 'जिस्म का सौदागर' का पुस्तकालय संस्करण भी आया था जिसका नाम भी परिवर्तित था। पुस्तकालय संस्करण में नाम 'परदे के पीछे' था। यह मधुर पॉकेट बुक्स - मथुरा से प्रकाशित हुआ था।
एम. एल. देव के उपन्यास
1. जिस्म‌ के सौदागर -1969 (मधुर पॉकेट बुक्स)
उक्त लेखक के विषय में अगर आपके पास कोई भी जानकारी है तो शेयर करें।
धन्यवाद।
Email- sahityadesh@gmail.com
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मंगलवार, 20 जुलाई 2021

एस. सी. बेदी

नाम- एस. सी. बेदी
पूरा नाम     - सुभाषचन्द्र बेदी
जन्म-
मृत्यु- 


 
 
                              1.            अँधे की आँखें
            2.            अँधेरे का खिलाड़ी
            3.            अँधेरे की आँख
            4.            अंधेरे के बादशाह
            5.            अग्नि मंदिर
            6.            अजगर
            7.            अजगर का रहस्य
            8.            अनोखी दुनिया
            9.            अनोखे अपराधी
          10.           अपराधी का अंत
          11.           अफ्रीकी लड़ाके
          12.           आँख का तमाशा
          13.           आओ मरें
          14.           आकाश की देवी
          15.           आखिरी मंजिल
          16.           आग का दरिया
          17.           आग की चट्टानें (नूतन पॉकेट बुक्स)
          18.           आग की मुर्ति
          19.           आग के आदमी
          20.           आग के शैतान
          21.           आग के शोले (नूतन पॉकेट बुक्स)
          22.           आतंक
          23.           आतंक के टुकड़े
          24.           आत्मा का अंत
          25.           आत्मा की चट्टान
          26.           आदमखोर शैतान
          27.           आधी रात

रविवार, 18 जुलाई 2021

लौटेंगें वे दिन- अजिंक्य शर्मा

 लौटेंगें वे दिन- अजिंक्य शर्मा
बने रहे ये पढ़ने वाले, बनी रहे ये पाठशाला

जी हांँ, हिन्दी पाठकों की मस्ती की पाठशाला, जिसमें पाठकों ने बहुत मजे किए। एक वक्त था जब बुकस्टालों पर जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा, इब्ने सफी, वेद प्रकाश काम्बोज, कर्नल रंजीत, सुरेंद्र मोहन पाठक, अनिल मोहन, वेद प्रकाश शर्मा, अमित खान आदि लेखकों के उपन्यासों का इंतजार उतनी ही शिद्दत से किया जाता था, जितनी शिद्दत से आज दर्शक क्रिस्टोफर नोलन या मार्वल सिनेमेटिक यूनिवर्स की नई फिल्म का इंतजार करते हैं। इन लेखकों की लोकप्रियता का आलम ये था कि किताबें बुकस्टाल पर आते ही हाथों-हाथ बिक जातीं थीं। आज भी इनके दीवानों की कमी नहीं है और इनके उपन्यास रिप्रिंट होकर भी बिक रहे हैं।  
उपन्यासकार अजिंक्य शर्मा
                     उपन्यासकार अजिंक्य शर्मा

मंगलवार, 13 जुलाई 2021

जगदीशकृष्ण जोशी

 नाम- जगदीश कृष्ण जोशी

   उक्त लेखक के विषय में‌ कोई विशेष जानकारी तो उपलब्ध नहीं होती। मैंने इनका एक उपन्यास पढा था जो रोचक जासूसी उपन्यास था। 

    उपन्यास प्रतिशोध में एक वृद्ध जासूस गोपालराम होता है। ऐसे कम ही अवसर आये हैं जहाँ जासूस वृद्ध हो।

जगदीशकृष्ण जोशी के उपन्यास

1. प्रतिशोध (उपन्यास समीक्षा के‌ लिए नाम‌ पर क्लिक करें)

प्रतिशोध- जगदीश कृष्ण जोशी



    

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 लोकप्रिय उपन्यास साहित्य को समर्पित मेरा एक ब्लॉग है 'साहित्य देश'। साहित्य देश और साहित्य हेतु लम्बे समय से एक विचार था उपन्यासकार...