बने रहे ये पढ़ने वाले, बनी रहे ये पाठशाला
जी हांँ, हिन्दी पाठकों की मस्ती की पाठशाला, जिसमें पाठकों ने बहुत मजे किए। एक वक्त था जब बुकस्टालों पर जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा, इब्ने सफी, वेद प्रकाश काम्बोज, कर्नल रंजीत, सुरेंद्र मोहन पाठक, अनिल मोहन, वेद प्रकाश शर्मा, अमित खान आदि लेखकों के उपन्यासों का इंतजार उतनी ही शिद्दत से किया जाता था, जितनी शिद्दत से आज दर्शक क्रिस्टोफर नोलन या मार्वल सिनेमेटिक यूनिवर्स की नई फिल्म का इंतजार करते हैं। इन लेखकों की लोकप्रियता का आलम ये था कि किताबें बुकस्टाल पर आते ही हाथों-हाथ बिक जातीं थीं। आज भी इनके दीवानों की कमी नहीं है और इनके उपन्यास रिप्रिंट होकर भी बिक रहे हैं। उपन्यासकार अजिंक्य शर्मा















