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सोमवार, 19 जून 2023

हरविंदर - उपन्यास सूची

नाम - हरविंदर
श्रेणी- सामाजिक उपन्यासकार
लोकप्रिय उपन्यासकारों की सूची में एक और नाम शामिल हुआ हैऔर वह नाम है हरविंदर।
हरविंदर उपन्यास harvinder novel
  
हरविंदर के उपन्यास
1. अहसास - (सितंबर- 1977) प्रथम सामाजिक उपन्यास
2. चुभन
3. सिंदूर की लाली
4. मासूम
5. बदलते चेहरे
6. महक
7. बस और नहीं
8. अहसास
9. अधूरा इंसान (क्रमांक 01-09 तक विजय पॉकेट बुक्स, दिल्ली से प्रकाशित)
10. आवारा लहू
11. दुल्हन एक रात की (क्रमांक 10 से 11तक, दुर्गा पॉकेट बुक्स, मेरठ से प्रकाशित)

12. बुजदिल
लेखक हरविंदर के विषय में किसी सज्जन के पास कोई भी जानकारी उपलब्ध हो तो हमसे संपर्क करें
Email- Sahityadesh@gmail.com


प्रसिद्ध उपन्यासकार योगेश मित्तल जी के हरविंदर के विषय में विचार-
                हरविन्दर बहुत प्यारे इंसान हैं। विजय पॉकेट बुक्स में अनेक बार मिला हूँ। बहुत ज्यादा बातें कभी भी नहीं हुईं, क्योंकि आरम्भ के दिनों में हरविन्दर कुछ मितभाषी भी थे। या हर एक से न खुलते रहे हों। लेकिन जब भी जितनी भी बात हुई - हमेशा बहुत अच्छा लगा। पहले लुधियाना, फिर डलहौज़ी रहे। तब मोबाइल नहीं हुआ करते थे। लैंडलाइन भी हर एक के यहां नहीं होते थे, इसलिए हम टच में नहीं रहे। अपने बारे में खुद हरविन्दर ही सबसे बेहतर बता सकेंगे। मैं तो  इतना जानता हूँ कि विजय पॉकेट बुक्स के स्वामी हरविन्दर के बारे में बड़े ऊँचे ख्यालात रखते थे। उनका विचार था कि हरविन्दर दिल्ली रहने लगे तो राजहंस से भी आगे निकल जाएगा। राज भारती और यशपाल वालिया भी हरविन्दर से एक दिन तहलका मचाने की उम्मीद रखते थे।        

रविवार, 18 जून 2023

सात जुलाई की रात- विकास सी एस झा

साहित्य देश के स्तम्भ 'उपन्यास अंश' में उस बार प्रस्तुत है युवा उपन्यासकार विकास सी एस झा द्वारा रचित 'सी.एस.टी. सीरीज' के उपन्यास 'सात जुलाई की रात' के रोचक अंश।

'सात जुलाई की रात' के कुछ अंश :

मेफेयर रेस्टोरेंट।
बांद्रा, मुम्बई।
ड्रीम हाउस का विजेता आदित्य आहूजा अपनी मौजूदा गर्लफ्रैंड तान्या मुखर्जी, जो शो के अंदर उसकी को-कंटेस्टंट भी थी, के साथ इस वक्त बांद्रा के एक रेस्टोरेंट के अंदर मौजूद था जहां वे किसी गंभीर चर्चा में रत दिख रहे थे।
"आदी, मुझे उस रात के बाद से पता नहीं क्यों हमेशा एक डर सा लगा रहता है।" तान्या मुखर्जी ने चेहरे पर आशंका के भाव लिए हुए आदित्य आहूजा से कहा।
"इसमें डरने की कौन सी बात हुई भला ? जिसे जाना था, चला गया। तकदीर की लिखी को कौन काट सकता है !" आदित्य आहूजा ने समझाते हुए तान्या से कहा।
सात जुलाई की रात

"यार, लेकिन मुझे गीता की खुदकुशी वाली बात पर अब भी यकीन नहीं होता। इतना क्या पागलपन सवार हो गया था उसे। अच्छी-खासी जिंदादिल लड़की थी, पता नहीं क्यों ऐसा कदम उठा बैठी ?" तान्या के चेहरे पर तनाव साफ दिख रहा था।
"यार, तुम ये पूछ रही हो ? पता तो है तुम्हें सब।" आदित्य ने उसकी ओर देखा।

हत्यारिन हूँ-विषभरी- हादी हसन, उपन्याश अंश

 साहित्य देश के 'उपन्यास अंश' स्तम्भ के अंतर्गत इस बार प्रस्तुत है उपन्यासकार हादी हसन साहब के नये उपन्यास 'हत्यारिन हूँ-विषभरी' का एक अंश। मेजर रणवीर बराड़ का कारनामा।

 उपन्यास  अंश....
डिसूजा वो शख्स था जिस पर लाल बिहारी अपने बाद सबसे ज्यादा विश्वास किया करता था।
"आवा डिसूज़ा...आवा...!" लाल बिहारी मोटे सिगार का कोना शार्पनर से छीलता हुआ बोला—"क्या खबर लाए हो...?"
डिसूजा ने शनील की लाल रंग की थैली उसके सामने रख दी। 
"ई का है ?"
"हीरे...मिस्टर लाल...इन्हें उसी रँजीत से हासिल किया गया है जो हमारे बिज़नेस में सेंध लगाने के लिए आया था।" डिसूजा भारी प्रभावी स्वर में बोला।
"रँजीत का का बना ?" 
"वही जो होना था।" 
"लाश...?"
"लाश कभी बरामद नहीं होती क्योंकि हमारे केस में लाश की बरामदगी एक सिरदर्द साबित होती है।"

मंगलवार, 6 जून 2023

रैना कहे पुकार के- उपन्यास पोस्टर

वेदप्रकाश शर्मा जी के उपन्यासों के कुछ पोस्टर






रैना कहे पुकार के- वेदप्रकाश शर्मा
उपन्यास पोस्टर, 




शुक्रवार, 2 जून 2023

प्यार करना तो बुरी बात है- हास्यरस

साहित्य देश की हास्य रस स्तम्भ में इस बार पढें राजा पॉकेट बुक्स से प्रकाशित लेखक धीरज के उपन्यास 'वतन के आँसू' का एक हास्यजनक किस्सा।

रामलाल ने अंदर आते ही शीला को अपने आलिंगन में ले लिया था तथा उसके लाल सुर्ख रसीले होंठों को अपने होंठों के मध्य भींच लिया था !

"छोड़ो भी...आप भी बस !"- शीला ने स्वयं को रामलाल की कैद से मुक्त कराते हुए कहा—शर्म से उसका चेहरा लाल-भभूका हो गया था तथा वह घबराई हुई नजरों से उस कोने की तरफ देखने लगी, जहां उनके दोनों बच्चे खड़े थे।

“आहा जी...पापा ने मम्मी की पप्पी ले ली-पापा ने मम्मी की पप्पी ले ली।” - सुमिता ताली पीटते हुए उछल-उछलकर कह रही थी ! 

"मैं तुम्हारी मम्मी को प्यार कर रहा था, सुमि !"

“ल....लेकिन प्यार करना तो बुरी बात है !" 

“तुमको किसने कहा ?"-  रामलाल के चेहरे पर नागवारी वाले भाव उभरे थे !

"परसों, जब राखी आंटी मौल्हले वाले एक अंकल से प्यार कर रही थीं, तो मौहल्लेवालों ने अंकल को कितना मारा था!"

मंगलवार, 23 मई 2023

नये उपन्यास - may-2023

सूरज पॉकेट बुक्स के तीन नये उपन्यास
इंतजार अब खत्म हुआ 🎉🎉
पुस्तकें अब सूरज की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं आज ही अपनी प्रतियां सुरक्षित कीजिए !!
पुस्तक विवरण :-

1. 7 जुलाई की रात (लेखक : विकास सी. एस. झा )

‘ड्रीम हाउस’ टेलीविजन की दुनियां का एक बेहद चर्चित रियलिटी शो था जहां 7 जुलाई की रात को शो के ग्रैंड फिनाले के दौरान शो की एक कंटेस्टेंट गीता भसीन की लाश ड्रीम हाउस के सेट से महज कुछ दूर पर ही पड़ी मिली थी। लोकल थाने ने लड़की की मौत को आत्महत्या करार दिया था मगर एक बार जब क्राइम ब्रांच ऑफिसर चंद्रशेखर त्यागी के कदम मौका-ए-वारदात पर पड़े तो तफ्तीश ने एक नया ही रुख अख्तियार कर लिया।
आत्महत्या के बेहद साधारण से लगने वाले इस केस ने एक बार तो त्यागी जैसे ऑफिसर को भी हैरान-परेशान कर डाला था। तफ्तीश के दौरान त्यागी के कदम जहां भी पड़े उसका सामना किसी-न-किसी लाश के साथ ही हुआ।
क्या ये वाकई एक आत्महत्या का मामला था या फिर कुछ और ही बात थी ?
एक सिलसिलेवार ढंग से हुई इन चार हत्याओं के पीछे की सच्चाई क्या थी ? जानने के लिए पढ़िए सी.एस.टी. सीरीज की नई किताब “सात जुलाई की रात”

रविवार, 14 मई 2023

पंकज उपन्यास सूची

 नाम- पंकज
प्रकाशक- नूतन पॉकेट बुक्स, मेरठ
श्रेणी- सामाजिक उपन्यासकार, Ghost writer

मेरठ से प्रकाशित होने वाले Ghost writer में एक नाम और पता चला है और वह नाम है - पंकज।

   पंकज एक सामाजिक उपन्यासकार हैं और इनके उपन्यास नूतन पॉकेट बुक्स,मेरठ से प्रकाशित होते रहे हैं। हालांकि इनके विषय में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। 


पंकज के उपन्यास

  1. फैसला
  2. बेकसूर
  3. दर्द की छांव
  4. सुहानी शाम
  5. वचन
  6. पायल
  7. प्यासी जोगन
  8. आइना
  9. ममता




गोपालराम गहमरी

नाम- गोपालराम गहमरी 
जन्म- 1866, 
निधन- 1946
विशेष
- लगभग दो सौ उपन्यास की रचना।
- हिंदी कथा साहित्य में जासूसी साहित्य का आरम्भ कर्ता

हिंदी साहित्य और पत्रकारिता के विकास में गोपालराम गहमरी का अतुलनीय और अविस्मरणीय योगदान है। हिंदी को जन-जन तक पहुँचाने के लिए कविताएँ लिखीं, उपन्यास लिखे, उपन्यासों का अनुवाद किया, नाटक लिखे, हास्य-व्यंग्य लिखे, पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया, रिपोर्टें लिखीं, रिपोर्ताज लिखे। अपने गाँव गहमर से 'जासूस' नामक मासिक पत्र का संपादन और प्रकाशन किया। हिंदी में जासूस शब्द के प्रचलन की शुरुआत की।
'जासूस' का पहला अंक बाबू अमीर सिंह के हरिप्रकाश प्रेस से छपकर आया और पहले ही महीने में वी. पी.पी. से पौने दो सौ रुपए की प्राप्ति हुई। इसने अपने प्रवेशांक से ही लोकप्रियता की सारी हदों को पार करते हुए शिखर को छू लिया था। इसकी अपार लोकप्रियता को देखकर गोपालराम गहमरी जब जासूसी ढंग की कहानियों और उपन्यासों के लेखन की ओर प्रवृत्त हुए फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा और न इसकी परवाह की कि साहित्य के तथाकथित अध्येता उनके बारे में क्या राय रखते हैं। गहमरी जी अपनी रचनाओं में पाठकों की रुचि का विशेष ध्यान रखते थे कि वे किस तरह की सामग्री पसंद करते हैं।

रविवार, 7 मई 2023

गोपाल- उपन्यास सूची

नाम- गोपाल

प्रकाशक- संगीता पॉकेट बुक्स, मेरठ
  उपन्यास जगत की Ghost writing में एक और नाम मिलता है- गोपाल।
  गोपाल के उपन्यास संगीता पॉकेट बुक्स मेरठ से प्रकाशित हुये हैं।

गोपाल के उपन्यास
1. सिंदूर गया हार
2. तुम वो नहीं



शनिवार, 6 मई 2023

निराली थी उपन्यासों‌ की दुनिया- प्रदीप पालीवाल

 बिमल चटर्जी...चन्दर...वेद प्रकाश काम्बोज...जनप्रिय लेखक 'ओम प्रकाश शर्मा'...

निराली थी...इन 'उपन्यासों' की दुनिया... 

मैंने जब अपनी 'बुक स्टॉल' संभाली...मैं इनके बारे में 'ABC...D' भी नहीं जानता था... 

'मजरूह' (  सुल्तानपुरी ) साहब के शब्द उधार लेना चाहूँगा...कि -

...  

मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर 

लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया...



इन उपन्यासों के बारे में 'साहित्य' के लोगों की राय अच्छी नहीं थी. आज भी नहीं है...वे इसे 'पल्प फिक्शन' ( लुगदी साहित्य ) कहकर लगभग 'पाक़िस्तान' भेजने की बात करते थे...उनका मानना था कि 'ये पुस्तकें बच्चों को बिगाड़ती हैं...' 

ऐसे में मेरी मुलाक़ात होती है वन एण्ड ओनली...जनप्रिय लेखक 'ओम प्रकाश शर्मा'...जी से...

देखते ही देखते साहित्य ( प्रेमचंद...राही मासूम रज़ा ( 'मिली' फ़िल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक का पुरस्कार प्राप्त करने वाले...) का प्रेमी #प्रदीप_इटावा_वाला 'शर्मा' जी के अपनी ही दुकान #पालीवाल_बुक_सेण्टर पर उपलब्ध सभी उपन्यास पढ़ गया...मुझे तो वे कहीं से भी 'बच्चों' को बिगाड़ने वाले नहीं लगे...  

'ओम प्रकाश शर्मा'.जी...अपने नाम के आगे 'जनप्रिय लेखक' क्यों लगाते थे ?

जनप्रिय लेखक 'ओम प्रकाश शर्मा' जी...'विक्रांत'...सीरीज़ के 'ट्रेड' नाम वाले लेखक 'ओम प्रकाश शर्मा' जी ( ? ) से कैसे अलग थे...?

कहानी बहुत लम्बी है...मेरे 'सीने' में इन उपन्यासों को 'पल्प फिक्शन' की गाली देकर 'पुकारने' वालों के प्रति 'शिकायत' दफ़न है...विशाल अनुभव और अध्ययन तो है ही...

नीचे कुछ कोट कर रहा हूँ... 

"मैंने उससे दुबारा मेरठ जाने पर पूछा, ''प्रेमचंद और शरतचंद के बीच तुम किसे महान समझते हो ?''

मैंने सोचा कि वही रटा रटाया उत्तर कि दोनों. पर मैं स्वयं तनिक स्तब्ध रह गया, उसका उत्तर सुनकर. उसने कहा प्रेमचंद को ध्यान से पढ़ोगे तो जानोगे कि वह एक ऐसा कायस्थ था जिसका संपूर्ण साहित्य ब्राह्मण विरोधी था जबकि ब्रिटिश युग में ब्राह्मण भी साधारण प्रजा था. आज तो कुछ है ही नहीं.''

...ये किससे मुलाक़ात की 'चर्चा' थी ?

कौन था...जो...बातचीत में तुम...उसका...उसने...जैसे 'आत्मीय' संबोधन यूज़ कर रहा था...?

ये थे...ये तो बाद में बताऊंगा...वो भी यदि मौक़ा लगा... 

लेकिन प्रेमचंद जी को... ब्राह्मण विरोधी बताने वाले थे... 

वन एण्ड ओनली...जनप्रिय लेखक 'ओम प्रकाश शर्मा'...जी !

राजेश,जगत,जगन,बन्दूक सिंह जैसे 'यादगार' चरित्र को लेकर 'सीरीज़' लिखने वाले दिवंगत 'शर्मा' जी के...दो जासूसी उपन्यासों ( 'एक नवाब पन्द्रह चोर' और  'सुधाकर हत्याकांड' )  का मुख्य पृष्ठ निम्न में शामिल है... 

शुरुआत में ही... 

शामे-अवध अवश्य प्रसिद्ध है । 

परन्तु अवध की दोपहर...जून का महीना ।

चुंबक की तरह 'जकड़' लेने वाले...शर्मा जी...उनके पढ़े उपन्यास बहुत याद आते हैं... 

आमीन... 

लेकिन दुःखी मन से... 

#प्रदीप_इटावा_वाला 

( 9761453660 )

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मेरठ उपन्यास यात्रा-01

 लोकप्रिय उपन्यास साहित्य को समर्पित मेरा एक ब्लॉग है 'साहित्य देश'। साहित्य देश और साहित्य हेतु लम्बे समय से एक विचार था उपन्यासकार...