नाम- निर्मलकिशोर कपूर
निर्मलकिशोर कपूर के उपन्यास
1. खूनी सुंदरी
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नाम- निर्मलकिशोर कपूर
निर्मलकिशोर कपूर के उपन्यास
1. खूनी सुंदरी
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नाम- कपिल देव एम. ए.
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नाम- आर. के. अग्रवाल
एक समय था जब इलाहाबाद लोकप्रिय जासूसी उपन्यास साहित्य का केन्द्र था। तब इलाहाबाद से बहुत सी मासिक पत्रिकाएँ प्रकाशित होती थी। उन्हीं में एक प्रकाशन था- सुर्ख पंजा कार्यालय- इलाहाबाद। इसी प्रकाशन की पत्रिका 'सुर्ख पंजा' में आर. के. अग्रवाल के उपन्यास प्रकाशन की जानकारी प्राप्त हुयी है।
आर. के. अग्रवाल के उपन्यास
1. मौत के अंगारे
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नाम- वीरेन्द्र सिंह 'खजी'
वीरेन्द्र सिंह 'खजी' के उपन्यास
1. बहुरुपिणी
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नाम- पी. सी. अग्रवाल
पी. सी. अग्रवाल के उपन्यास
1.विद्युत रेखा
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पात्र परिचय की इस शृंखला में हमने विभिन्न पात्रों का परिचय यहाँ प्रस्तुत किया है। इस स्तम्भ के अंतर्गत श्याम तिवारी जी (शैलेन्द्र तिवारी) के प्रसिद्ध पात्र हर्रामी सिंह (सिद्धार्थ), बाल सांगड़ा जैसे पात्रों का परिचय आप पढ सकते हैं।
श्याम तिवारी जी के उपन्यास 'धरती का खुदा' में एक और पात्र है 'सौदागर'। आज आप पढेंगे सौदागर का परिचय।
सौदागरपात्र परिचय के इस स्तम्भ में इस बार प्रस्तुत है उपन्यासकार श्याम तिवारी (शैलेन्द्र तिवारी) के द्वारा रचित प्रसिद्ध पात्र हर्रामी सिंह (सिद्धार्थ) का परिचय ।
हर्रामी सिंह
आज के युग का फौलाद मानव। अनोखे, विलक्षण चमत्कारों एवं असाधारण प्रतिभाओं का स्वामी। कद लगभग पौने छः फुट का चेहरा किसी प्रिंस के समान आकर्षक पूरा बदन गठा हुआ। कोई भी युवती यदि उसे देख ले तो—वह उसे अपना बनाने के लिये अपनी समस्त दौलत दांव पर लगा दे।
पात्र परिचय की इस शृंखला में इस बार हम लेकर आये हैं एक खतरनाक अंतरराष्ट्रीय अपराधी का परिचय। लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में श्याम तिवारी जी ने एक खतरनाक अपराधी का सर्जन किया था जिसका नाम है- बाल सांगड़ा। बाल सांगड़ा को 'मास्टर' की उपाधि दी गयी है। लोग उसे बाल सांगड़ा न कहकर 'मास्टर' नाम से बुलाते हैं।
बाल सांगड़ा।
अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सबसे बदनाम मुजरिम । विश्व के नामी-गिरामी जासूसों ने आज तक न जाने कितनी बार चेष्टा की— कि बाल सांगड़ा पर हाथ डाल दें या उसका हमेशा के लिये सफाया कर दें, किन्तु आज तक वे उसका बाल बांका नहीं कर सके। जिन लोगों ने उसे समाप्त करने का बीड़ा उठाया — उन लोगों की लाशें बड़ी वीभत्स अवस्था में चौराहे, सड़कों पर मिलीं। जिसने भी उन लाशों को देखा उसी का कलेजा कांप गया।
विश्व का ऐसा कोई भी देश नहीं जहां बाल सांगड़ा ने अपराध न किया हो । बाल सांगड़ा का नाम पूरे विश्व में पीले बुखार के समान लिया जाता है वह जहां पहुंच जाता है वहाँ लाशों के ढेर लग जाते हैं। 
प्रतीकात्मक चित्र गूगल से
पूरे विश्व में उसके अड्डे थे। वह जहां चाहे अपराध कर सकता था। विश्व के अनेक देशों की सरकारें उसके नाम से घबराती थीं। उन्होंने गुप्त समझौता कर रखा था कि उनके देश में अपराध न करे इसके एवज में वे बाकायदा किस्तें चुकाया करते थे।
बाल सांगड़ा का चेहरा किसी बन्दर के बच्चे के समान छोटा था। लेकिन उसकी आंखें किसी टमाटर की भांति बड़ी-बड़ी लट्टू के समान प्रज्वलित आंखें थीं। चीनी टाइप की मूछें जो हमेशा नीचे की ओर झुकी रहती थीं दाढ़ी पर चार छः बाल बेतरतीबी से उगे हुये थे ।
पूरा चेहरा ऐसा खूंखार कि देखने वाला नजरें न मिला सके। चीनी बाप और सिसलियन मां के संयुक्त मिश्रित खून की दोगली औलाद बाल सांगडा और उसकी प्रत्येक बात में दोगलापन था । उसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि- वह किसी पर विश्वास नहीं करता था। यही कारण था- वह आज तक जिन्दा था ।
स्त्रोत- धरती का खुदा- श्याम तिवारी
परिचय - श्याम तिवारी
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| चित्र गूगल से |
लोकप्रिय उपन्यास साहित्य को समर्पित मेरा एक ब्लॉग है 'साहित्य देश'। साहित्य देश और साहित्य हेतु लम्बे समय से एक विचार था उपन्यासकार...