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सोमवार, 28 नवंबर 2022

निर्मलकिशोर कपूर

नाम- निर्मलकिशोर कपूर

निर्मलकिशोर कपूर के उपन्यास

1. खूनी सुंदरी


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कपिल देव एम. ए.

नाम- कपिल देव एम. ए.

कपिल देव के उपन्यास

1. खूनी गिरोह


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आर. के. अग्रवाल

नाम- आर. के. अग्रवाल

एक समय था जब इलाहाबाद लोकप्रिय जासूसी उपन्यास साहित्य का केन्द्र था। तब इलाहाबाद से बहुत सी मासिक पत्रिकाएँ प्रकाशित होती थी। उन्हीं में एक प्रकाशन था- सुर्ख पंजा कार्यालय- इलाहाबाद। इसी प्रकाशन की पत्रिका 'सुर्ख पंजा' में आर. के. अग्रवाल के उपन्यास प्रकाशन की जानकारी प्राप्त हुयी है।

आर. के. अग्रवाल के उपन्यास

1. मौत के अंगारे



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वीरेन्द्र सिंह 'खजी'

नाम- वीरेन्द्र सिंह 'खजी'


वीरेन्द्र सिंह 'खजी' के उपन्यास

1. बहुरुपिणी


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पी. सी. अग्रवाल

 नाम- पी. सी. अग्रवाल


पी. सी. अग्रवाल के उपन्यास

1.विद्युत रेखा


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शुक्रवार, 25 नवंबर 2022

विश्व का नामी ठग- सौदागर

पात्र परिचय की इस शृंखला में हमने विभिन्न पात्रों का परिचय यहाँ प्रस्तुत किया है। इस स्तम्भ के अंतर्गत श्याम तिवारी जी (शैलेन्द्र तिवारी) के प्रसिद्ध पात्र हर्रामी सिंह (सिद्धार्थ), बाल सांगड़ा जैसे पात्रों का परिचय आप पढ सकते हैं।

  श्याम तिवारी जी के उपन्यास 'धरती का खुदा' में एक और पात्र है 'सौदागर'। आज आप पढेंगे सौदागर का परिचय।

सौदागर
विश्व का नामी ठग। महान ठग नटवर लाल भी जिसे अपना गुरु मानता है। उसके चेले-चांटों की खेती पूरे विश्व में होती है। विश्व के बड़े-बड़े अपराधी सौदागर को अपना गुरु- उस्ताद बनाने के लिये बेताब रहते हैं। आज पूरे विश्व में सौदागर के नाम की धूम मची हुई है। विश्व के सभी जासूस सौदागर के पीछे पड़े हुये हैं लेकिन आज तक कोई भी जासूस सौदागर का बाल बांका नहीं कर सका । सौदागर विश्व के सभी देशों में बेधड़क होकर घूमता — और जो भी जासूस उसके पीछे पड़ता वह उसे तिगनी का नाच नचा देता ।
      विक्रांत, जेम्स बांड, माईक, फूचिंग आदि कितने नामी जासूसों ने सौदागर को पकड़ने के लिये कमर कसी लेकिन सालों बीत गये कोई भी सौदागर के ऊपर हाथ डाल नहीं सका । सौदागर का कहना है कि बगैर मेरी मर्जी के मुझे चौबीस घन्टे से अधिक कैद में नहीं रख सकता।

    यह संक्षिप्त परिचय है उपन्यास पात्र सौदागर का। अगर किसी पाठक को सौदागर के विषय में अन्य कोई जानकारी हो तो संपर्क करें।
Email- sahityadesh@gmail.com
स्त्रोत- धरती का खुदा- श्याम तिवारी
अन्य लिंक
पात्र परिचय- बाल सांगड़ा | हर्रामी सिंह | मेरठ का बदमाश गैरीसन

पात्र परिचय- हर्रामी सिंह

पात्र परिचय के इस स्तम्भ में इस बार प्रस्तुत है उपन्यासकार श्याम तिवारी (शैलेन्द्र तिवारी) के द्वारा रचित प्रसिद्ध पात्र हर्रामी सिंह (सिद्धार्थ) का परिचय ।


हर्रामी सिंह
आज के युग का फौलाद मानव। अनोखे, विलक्षण चमत्कारों एवं असाधारण प्रतिभाओं का स्वामी। कद लगभग पौने छः फुट का चेहरा किसी प्रिंस के समान आकर्षक पूरा बदन गठा हुआ। कोई भी युवती यदि उसे देख ले तो—वह उसे अपना बनाने के लिये अपनी समस्त दौलत दांव पर लगा दे।

बाल सांगड़ा- पात्र परिचय

पात्र परिचय की इस शृंखला में इस बार हम लेकर आये हैं एक खतरनाक अंतरराष्ट्रीय अपराधी का परिचय। लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में श्याम तिवारी जी ने एक खतरनाक अपराधी का सर्जन किया था जिसका नाम है- बाल सांगड़ा। बाल सांगड़ा को 'मास्टर' की उपाधि दी गयी है। लोग उसे बाल सांगड़ा न कहकर 'मास्टर' नाम से बुलाते हैं।

बाल सांगड़ा।
अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सबसे बदनाम मुजरिम । विश्व के नामी-गिरामी जासूसों ने आज तक न जाने कितनी बार चेष्टा की— कि बाल सांगड़ा पर हाथ डाल दें या उसका हमेशा के लिये सफाया कर दें, किन्तु आज तक वे उसका बाल बांका नहीं कर सके। जिन लोगों ने उसे समाप्त करने का बीड़ा उठाया — उन लोगों की लाशें बड़ी वीभत्स अवस्था में चौराहे, सड़कों पर मिलीं। जिसने भी उन लाशों को देखा उसी का कलेजा कांप गया।

प्रतीकात्मक चित्र गूगल से
     विश्व का ऐसा कोई भी देश नहीं जहां बाल सांगड़ा ने अपराध न किया हो । बाल सांगड़ा का नाम पूरे विश्व में पीले बुखार के समान लिया जाता है वह जहां पहुंच जाता है वहाँ लाशों के ढेर लग जाते हैं।

        पूरे विश्व में उसके अड्डे थे। वह जहां चाहे अपराध कर सकता था। विश्व के अनेक देशों की सरकारें उसके नाम से घबराती थीं। उन्होंने गुप्त समझौता कर रखा था कि उनके देश में अपराध न करे इसके एवज में वे बाकायदा किस्तें चुकाया करते थे।

         बाल सांगड़ा का चेहरा किसी बन्दर के बच्चे के समान छोटा था। लेकिन उसकी आंखें किसी टमाटर की भांति बड़ी-बड़ी लट्टू के समान प्रज्वलित आंखें थीं। चीनी टाइप की मूछें जो हमेशा नीचे की ओर झुकी रहती थीं दाढ़ी पर चार छः बाल बेतरतीबी से उगे हुये थे ।

         पूरा चेहरा ऐसा खूंखार कि देखने वाला नजरें न मिला सके। चीनी बाप और सिसलियन मां के संयुक्त मिश्रित खून की दोगली औलाद  बाल सांगडा और उसकी प्रत्येक बात में दोगलापन था । उसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि- वह किसी पर विश्वास नहीं करता था। यही कारण था- वह आज तक जिन्दा था ।

स्त्रोत- धरती का खुदा- श्याम तिवारी

परिचय - श्याम तिवारी
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रणविजय सिंह का चरित्र चित्रण - तरकीब उपन्यास

 उपन्यास साहित्य में कुछ पात्र ऐसे होते हैं जो पाठकवर्ग में अपनी विशेष पहचान छोड़ जाते हैं। वह पात्र चाहे जैसा भी हो, अच्छा या बुरा लेकिन उसका व्यवहार, चरित्र ऐसा होता है जो पाठक को प्रभावित कर लेता है। 
   श्री आलोक खालौरी जी का तृतीय उपन्यास है 'तरकीब'। इसी उपन्यास का खल पात्र है रणविजय। रणविजय विपक्षी पार्टी का नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री रह चुका है। लेकिन उसका चरित्र ऐसा है जो एक अलग पहचान स्थापित करता है और वह उपन्यास का मुख्य खल पात्र है।
  यहाँ हम  'तरकीब' उपन्यास के खल पात्र रणविजय के चरित्र को समझने का प्रयास करते हैं।
चित्र गूगल से

1. शारीरिक चित्रण-  रणविजय शारीरिक रूप से मजबूत और आकर्षक व्यक्तित्व है। इस आकर्षण के बल पर सामने वाले को प्रभावित भी करता है। 
  उसका वर्णन देखें।
रणविजय कोई पचपन साल का औसत क़दकाठी का आदमी था। सिर पर घने काले बाल थे, जो वक़्त के साथ सफेद हो चले थे। गोरा रंग, सुंदर नैननक़्श, आँखों पर सुनहरी फ्रेम का नज़र का चश्मा लगाए, वह बहुत ही संभ्रांत और पढ़ा लिखा नज़र आता था, जबकि पढ़ाई-लिखाई के नाम पर वह दसवीं फेल था, और सभ्रांत दिखने का, उसके इस ऊँचाई तक पहुँचने में बहुत बड़ा रोल था। (उपन्यास अंश)
2. फर्श से अर्श तक का सफर- रणविजय ने अपने जीवन में बहुत संघर्ष देखा है, लेकिन उसने कभी हार स्वीकार नहीं की। छल- बल से उसने अपने आपको स्थापित किया है। यही कारण है की एक दसवीं फेल आटो ड्राइवर से वह केन्द्र सरकार में मंत्री पद तक पहुँच गया।

बुधवार, 23 नवंबर 2022

मैं गुनहगार हूँ- मोहन मौर्य

मैं गुनहगार हूँ- मोहन मौर्य
उपन्यास अंश
 सुबह के या फिर देखा जाए तो रात के 4 बज रहे थे। यह वह वक़्त होता है, जब लोग अपने-अपने बिस्तरों में चैन की नींद सोये हुए रहते हैं। रात की शिफ्ट में काम करने वाले लोग, खासतौर पर सरकारी विभाग के अधिकारी वर्ग भी इस समय सोने से नहीं बच पाते। यह वह वक़्त भी होता है जब लैला-मजनू बनकर देर रात तक एक-दूसरे से चैट करने नौजवान लोग या सोशल मीडिया पर नौजवान बनकर रहने वाले रसिक वृद्ध लोग भी अपनी चैट से थक-हारकर सो जाते हैं। आखिर उन्हें सुबह उठकर अपना-अपना काम भी करना होता है। 

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