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शुक्रवार, 25 नवंबर 2022

विश्व का नामी ठग- सौदागर

पात्र परिचय की इस शृंखला में हमने विभिन्न पात्रों का परिचय यहाँ प्रस्तुत किया है। इस स्तम्भ के अंतर्गत श्याम तिवारी जी (शैलेन्द्र तिवारी) के प्रसिद्ध पात्र हर्रामी सिंह (सिद्धार्थ), बाल सांगड़ा जैसे पात्रों का परिचय आप पढ सकते हैं।

  श्याम तिवारी जी के उपन्यास 'धरती का खुदा' में एक और पात्र है 'सौदागर'। आज आप पढेंगे सौदागर का परिचय।

सौदागर
विश्व का नामी ठग। महान ठग नटवर लाल भी जिसे अपना गुरु मानता है। उसके चेले-चांटों की खेती पूरे विश्व में होती है। विश्व के बड़े-बड़े अपराधी सौदागर को अपना गुरु- उस्ताद बनाने के लिये बेताब रहते हैं। आज पूरे विश्व में सौदागर के नाम की धूम मची हुई है। विश्व के सभी जासूस सौदागर के पीछे पड़े हुये हैं लेकिन आज तक कोई भी जासूस सौदागर का बाल बांका नहीं कर सका । सौदागर विश्व के सभी देशों में बेधड़क होकर घूमता — और जो भी जासूस उसके पीछे पड़ता वह उसे तिगनी का नाच नचा देता ।
      विक्रांत, जेम्स बांड, माईक, फूचिंग आदि कितने नामी जासूसों ने सौदागर को पकड़ने के लिये कमर कसी लेकिन सालों बीत गये कोई भी सौदागर के ऊपर हाथ डाल नहीं सका । सौदागर का कहना है कि बगैर मेरी मर्जी के मुझे चौबीस घन्टे से अधिक कैद में नहीं रख सकता।

    यह संक्षिप्त परिचय है उपन्यास पात्र सौदागर का। अगर किसी पाठक को सौदागर के विषय में अन्य कोई जानकारी हो तो संपर्क करें।
Email- sahityadesh@gmail.com
स्त्रोत- धरती का खुदा- श्याम तिवारी
अन्य लिंक
पात्र परिचय- बाल सांगड़ा | हर्रामी सिंह | मेरठ का बदमाश गैरीसन

पात्र परिचय- हर्रामी सिंह

पात्र परिचय के इस स्तम्भ में इस बार प्रस्तुत है उपन्यासकार श्याम तिवारी (शैलेन्द्र तिवारी) के द्वारा रचित प्रसिद्ध पात्र हर्रामी सिंह (सिद्धार्थ) का परिचय ।


हर्रामी सिंह
आज के युग का फौलाद मानव। अनोखे, विलक्षण चमत्कारों एवं असाधारण प्रतिभाओं का स्वामी। कद लगभग पौने छः फुट का चेहरा किसी प्रिंस के समान आकर्षक पूरा बदन गठा हुआ। कोई भी युवती यदि उसे देख ले तो—वह उसे अपना बनाने के लिये अपनी समस्त दौलत दांव पर लगा दे।

बाल सांगड़ा- पात्र परिचय

पात्र परिचय की इस शृंखला में इस बार हम लेकर आये हैं एक खतरनाक अंतरराष्ट्रीय अपराधी का परिचय। लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में श्याम तिवारी जी ने एक खतरनाक अपराधी का सर्जन किया था जिसका नाम है- बाल सांगड़ा। बाल सांगड़ा को 'मास्टर' की उपाधि दी गयी है। लोग उसे बाल सांगड़ा न कहकर 'मास्टर' नाम से बुलाते हैं।

बाल सांगड़ा।
अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सबसे बदनाम मुजरिम । विश्व के नामी-गिरामी जासूसों ने आज तक न जाने कितनी बार चेष्टा की— कि बाल सांगड़ा पर हाथ डाल दें या उसका हमेशा के लिये सफाया कर दें, किन्तु आज तक वे उसका बाल बांका नहीं कर सके। जिन लोगों ने उसे समाप्त करने का बीड़ा उठाया — उन लोगों की लाशें बड़ी वीभत्स अवस्था में चौराहे, सड़कों पर मिलीं। जिसने भी उन लाशों को देखा उसी का कलेजा कांप गया।

प्रतीकात्मक चित्र गूगल से
     विश्व का ऐसा कोई भी देश नहीं जहां बाल सांगड़ा ने अपराध न किया हो । बाल सांगड़ा का नाम पूरे विश्व में पीले बुखार के समान लिया जाता है वह जहां पहुंच जाता है वहाँ लाशों के ढेर लग जाते हैं।

        पूरे विश्व में उसके अड्डे थे। वह जहां चाहे अपराध कर सकता था। विश्व के अनेक देशों की सरकारें उसके नाम से घबराती थीं। उन्होंने गुप्त समझौता कर रखा था कि उनके देश में अपराध न करे इसके एवज में वे बाकायदा किस्तें चुकाया करते थे।

         बाल सांगड़ा का चेहरा किसी बन्दर के बच्चे के समान छोटा था। लेकिन उसकी आंखें किसी टमाटर की भांति बड़ी-बड़ी लट्टू के समान प्रज्वलित आंखें थीं। चीनी टाइप की मूछें जो हमेशा नीचे की ओर झुकी रहती थीं दाढ़ी पर चार छः बाल बेतरतीबी से उगे हुये थे ।

         पूरा चेहरा ऐसा खूंखार कि देखने वाला नजरें न मिला सके। चीनी बाप और सिसलियन मां के संयुक्त मिश्रित खून की दोगली औलाद  बाल सांगडा और उसकी प्रत्येक बात में दोगलापन था । उसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि- वह किसी पर विश्वास नहीं करता था। यही कारण था- वह आज तक जिन्दा था ।

स्त्रोत- धरती का खुदा- श्याम तिवारी

परिचय - श्याम तिवारी
आप के पास अगर बाल सांगड़ा के विषय में कोई और जानकारी हो तो अवश्य शेयर करें।


सोमवार, 25 मार्च 2019

श्याम तिवारी

लेखक श्याम तिवारी जी के विषय में जो जानकारी प्राप्त हुयी है उसके अनुसार मकड़ा सीरीज के लेखक शलैन्द्र तिवारी जी पहले 'श्याम तिवारी' जी के नाम से लेखन करते थे। बाद में इन्होंने अपना नाम बदल लिया। यह बदलाव क्यों किया इसका तो पता नहीं पर 'शलैन्द्र तिवारी' नाम से ये खूब प्रसिद्ध हुये।
श्याम तिवारी के नाम से इन्होंने 'सूर्यकांता संतति' उपन्यास भी‌ लिखा था।
 श्याम तिवारी जी ने हर्रामी सिंह (सिद्धार्थ), बाल सांगड़ा (खल पात्र) जैसे किरदारों की रचना की है। इसके अतिरिक्त इन्होंने विक्रांत, कर्नल विनोद, जेम्स बॉण्ड, बागारोफ जैसे पात्रों पर लेखन किया है।
 श्याम तिवारी जी से संबंधित अगर कोई भी जानकारी आपके पास है तो हमसे शेयर करें।
Emai- sahityadesh@gmail.com

श्याम तिवारी  नाम से प्रकाशित उपन्यास   

1. दावत मौत की
2. प्रेतलोक (प्रथम भाग)
3. प्रेतलोक की शहज़ादी (द्वितीय भाग)
4. सूर्यकांता संतति (चार भाग)
5. बेताज बादशाह-www.sahityadesh.blogspot.com
6. शेर को सवा शर
7. फांसी चढा इंसान (थ्रिलर)
8. चिंगारी (क्रांतिकारी उपन्यास)
9. शोले (क्रांतिकारी उपन्यास)
10. जय क्रांति (क्रांतिकारी उपन्यास)

11. झुक गया संसार

रविवार, 30 अप्रैल 2017

शैलेन्द्र तिवारी

नाम- शैलेन्द्र तिवारी
द्वितीय नाम- श्याम तिवारी

हिंदी की प्रचलित जासूसी उपन्यासों की दुनिया में एक अलग नाम था - शैलेन्द्र तिवारी। शैलेन्द्र तिवारी ने पहले काफी उपन्यास श्याम तिवारी नाम से भी लिखे थे, लेकिन इनके फतांसी उपन्यास शैलेन्द्र तिवारी नाम से ही आये थे। श्याम तिवारी लेखन के दौरान इनका प्रसिद्ध पात्र 'हर्रामी सिंह' था।
जब सारे उपन्यासकार जासूसी, मर्डर मिस्ट्री, सामाजिक इत्यादि उपन्यास लिख रहे थे तब शैलेन्द्र तिवारी ने बिलकुल अलग अंदाज में एक उपन्यास श्रृंखला आरम्भ की।  जादू- टोना, तंत्र-मत्र और मन की शक्ति जैसे नये प्रयोग के साथ। पाठक वर्ग ने भी इनके उपन्यासों को हाथो-हाथ लिया, क्योंकि पाठक एक जैसे परम्परागत उपन्यासों से ऊब चुका था और उसके लिए यह एक नया प्रयोग था। शैलेन्द्र तिवारी का यह प्रयोग खूब सफल रहा।
  काले जादू जैसे अलग विषय को लेकर एक- दो उपन्यास तो लिखे जा सकते हैं पर एक सीरीज लिखना स्वयं में एक चुनौती है। उस चुनौती को शैलेन्द्र  ने अच्छी तरह से निभाया।
मकङा सीरीज के बाद इन्होंने अजगर राजा नाम से नयी सीरीज आरंभ की थी। (नागिन सीरीज)

  इनका प्रसिद्ध पात्र था - मकङा। जी हां, मकङा, काले जादू का जानकार।

काले जादू पर आधारित बहुत ही रोचक श्रृखंला आरम्भ की थी शैलेन्द्र तिवारी जी ने। जहाँ तक मेरा विचार है उपन्यास जगत में इस प्रकार के उपन्यासों की कमी थी, और वह कमी शैलेन्द्र तिवारी जी ने पूरी।
शैलेन्द्र तिवारी के शब्द-
"मैं सन् 1975 से अपने पाठकों का मनोरंजन करता आ रहा हूँ। मेरे उपन्यासों  संख्या सैकङों में पहुँच गयी है। मैं आज जिस मुकाम पर हूँ...उस पर मुझे गर्व है।"
     ‌‌‌   मकङा- काले जादू का महारथी।
            काले जादू की खौफनाक दुनिया के थर्रा देने वाले मंजर...... एक ऐसे शैतान की खूनी दास्तान जो ' आज का रावण' बनकर भगवान को चुनौती देने निकल पङा था....उसके पास था जादूई ताकत का अकूत खजाना...और उसके जाल में फंसा एक ऐसा मासूम इंसान.... जिसकी उसने जिंदगी ही नहीं बल्कि पूरा परिवार ही तबाह करके रख दिया।

संपर्क-
शैलेन्द्र तिवारी
400/3, जागृति विहार
मेरठ, UP
दूरभाष- 0121-2601505
शैलेन्द्र तिवारी के उपन्यास धीरज पाॅकेट बुक्स, मेरठ से प्रकाशित होते रहे हैं।

शैलेन्द्र तिवारी के उपन्यास

मकड़ा सीरीज के उपन्यास

1. मकङा
2. खूनी मकङा
3. कहर बरसायेगा मकङा
4. जहरीला मकङा
5. जलजला मकङा का
6. मकङा का कोहराम
7. मकङा का मकङजाल
8. फिर आया मकङा
9. करामाती मकङा
10. चक्रव्यूह मकङा का
11. चैलेंज मकङा का
12. चण्डालिनी बेला
13. चण्डालिनी बेला का जाल
14. चण्डालिनी बेला और मकङा
15. कहर चण्डालिनी बेला का
16. चण्डालिनी बेला का चैलेंज

 अजगर राजा सीरीज

  1.  अजगर राजा

नागिन सीरीज / रानी चौधरी के उपन्यास

  1. कहर नागिन का
  2. मैं नागिन हूँ
  3. कोहिनूर
  4. नागिन बनी शेरनी
  5. नागिन की फुंफकार
  6. काले जादू के जाल में नागिन
  7. काला जादू और कोबरा
  8. नागिन और तांत्रिक सम्राट

हमारे पास उक्त लेखक के विषय में इतनी ही जानकारी उपलब्ध है। अगर आपके पास इस लेखक के विषय में कोई अन्य जानकारी हो तो हमें भेजने का कष्ट करें।

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