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बुधवार, 7 फ़रवरी 2024
रविवार, 24 दिसंबर 2023
मनोहर कहानियां, मई 1999
इलाहाबाद के मित्र प्रकाशन से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका मनोहर कहानियाँ अपने समय सर्वाधिक रोमांचक पत्रिका रही है।
सत्य और काल्पनिक कहानियों के संगम वाली इस पत्रिका को हर वर्ग के पाठकों ने चाहा, सराहा और पढा है।
इलाहाबाद के मुट्ठीगंज के 'मित्र प्रकाशन' से मनोहर कहानियाँ, सत्यकथा, माया जैसे चर्चित पत्रिकाएं प्रकाशित होती थी। इसके संस्थापक स्वर्गीय श्री क्षितिज मोहन मित्र थे।
मनोहर कहानियाँ पत्रिका का आरम्भ सन 1944 में हुआ था, तब इस पत्रिका में मात्र रहस्य-रोमांच कथाएं ही प्रकाशित होती थी। मित्र प्रकाशन ने सन् 1972 में 'सत्यकथा' नामक पत्रिका की शुरुआत की जिसमें सिर्फ सत्यकथाएं ही प्रकाशित होती थी। पाठकवर्ग ने सत्यकथा के साथ-साथ रहस्य-रोमांच को ज्यादा महत्व दिया। मित्र प्रकाशन ने सन् 1973 में मनोहर कहानियाँ पत्रिका में रहस्य- रोमांच के साथ-साथ सत्यकथाएं छापनी शुरु की।
सन् 2000 तक यह पत्रिका नियमित प्रकाशित होती रही लेकिन मित्र प्रकाशन की आंतरिक स्थितियां कुछ बदल गयी और मित्र प्रकाशन बंद हो गया।
बाद में 'डायमंड प्रकाशन दिल्ली' से इस पत्रिका का प्रकाशन हुआ, लेकिन वर्तमान में यह पत्रिका अपने तृतीय प्रकाशन 'दिल्ली प्रेस' के अंतर्गत प्रकाशित हो रही है।
अब इस पत्रिका में वह 'स्वाद' नहीं रहा, जिसके कारण इसे पाठकों को अत्यंत प्रयास मिल रहा है।
जिन पाठकों ने 90 के दशक में इसे पढा है उन्हें प्रमेन्द्र मित्र, कुमार मित्र, पुष्पक पुष्प, इंस्पेक्टर अहमद यार खान, इंस्पेक्टर नवाज खान, सुरजीत के अनुवाद, पुलिस की डायरी जैसे किस्से याद ही होंगे।
अब यह पत्रिका और इसकी यादें ही शेष हैं।
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| मनोहर कहानियाँ, मई 1999, आवरण पृष्ठ |
यहाँ हम मनोहर कहानियाँ may 1999 के अंक के कुछ महत्वपूर्ण पृष्ठ प्रस्तुत कर रहे हैं, जो इस पत्रिका के विषय में बहुत कुछ कहने में सक्षम हैं।
रविवार, 17 दिसंबर 2023
उपन्यास की दुनिया के बेताज बादशाह वेद प्रकाश शर्मा
उपन्यास की दुनिया के बेताज बादशाह वेद प्रकाश शर्मा
वेद प्रकाश शर्मा मेरठ की शान हैं. उपन्यास साहित्य है या नहीं, यह साहित्य की मुख्य धारा से जुड़ी हस्तियों के बीच बहस का विषय हो सकता है लेकिन एक सफल उपन्यासकार इसकी परवाह न करते हुए अपने पाठकों से मिलने वाले प्यार को ही सबसे बड़ा ईनाम मानता है और उसकी नजर में यही है उसकी सफलता-असफलता का असली पैमाना। इस बहस से इतर एक उपन्यासकार उपन्यास की विधा को ही अपना सब कुछ मानता है। यही वह विधा है जो अपने पाठकों को तिलिस्म और फंतासी की दुनिया की सैर कराता है। इसके बावजूद समाज में मां-बाप बच्चों को आज भी उपन्यास पढ़ने से क्यों रोकते हैं? उपन्यास क्या है? इसे समाज अथवा साहित्य किस रूप में लेता है? इन बातों को लेकर उपन्यास की दुनिया के बेताज बादशाह वेद प्रकाश शर्मा से की गई चर्चा से अपने पाठकों को रूबरू करा रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार संतराम पाण्डेय। एक मुलाकात में श्री वेद प्रकाश शर्मा खुद ही बताना शुरू करते हैं। जब मैं हाई स्कूल में पढ़ रहा था तो स्कूल की मैग्जीन में मुझे भी कुछ लिखने का मौका मिला। मैंने जो कहानी लिखी उसका शीर्षक था ‘पैनों की जेल’। मेरी कहानी पढ़कर मेरेशनिवार, 7 अक्टूबर 2023
कर्नल अजीत
नाम- कर्नल अजीत
उपन्यास साहित्य में कर्नल रंजीत के पश्चात जो कर्नल, कैप्ट
इंस्पेक्टर नाम के लेखकों की आंधी चली उसमें एक और नाम हम शामिल करते हैं। वह नाम है कर्नल अजीत।
कर्नल अजीत के विषय में हमारे जानकारी संक्षिप्त है, किसी मित्र को किसी प्रकार की कोई जानकारी हो तो हमसे अवश्य संपर्क करें।
शुक्रवार, 6 अक्टूबर 2023
एस. सी. बेदी उपन्यास सेट सूची
नमस्ते,
हमारा यहाँ एक प्रयास है एस. सी. बेदी के उपन्यासों के सेट की सूचना देने का।
हालांकि यह अत्यंत क्लिष्ट कार्य है, क्योंकि राजा पॉकेट बुक्स के अतिरिक्त अन्य संस्थानों से प्रकाशित एस. सी. बेदी जी के उपन्यासों की 'सेट' अनुसार सूचना एकत्र करना मुश्किल है।
यहाँ हम कुछ जानकारी प्रकाशित कर रहे हैं, जिन्हे समय-समय पर अपडट करते रहेंगे।
आपके सहयोग का इंतजार रहेगा।
- प्रेतनी का आतंक
- महाशक्ति
- लुटेरिन
- लुटेरिन का अंत
- आत्मा की चट्टान
- चट्टान का रहस्य
- जहरीली गैसें
- मूछों की हत्या
- कंकालों की करामात
रविवार, 24 सितंबर 2023
कैप्टन राजेश
02. मौत की बाँहों में
03. सूनी घाटी का कत्ल
04. साँपों की प्रेमिका
05. सर कटी लाश
06. मौत के दावेदार
07. शह और मात
08. सुनहला कीड़ा
09. शैतान की मौत
10. खूनी प्यास
शनिवार, 23 सितंबर 2023
संघर्षकाल और जनप्रिय- सत्य व्यास
संघर्षकाल और जनप्रिय- सत्य व्यास
यह एक ऐसी जिंस है जिसके लिए इसके लिए न सिर्फ अच्छा लेखक होना बल्कि उम्दा इंसान होना भी मूलभूत गुण है।
जनप्रिय ओम प्रकाश शर्मा दोनों ही थे। बकौल "आबिद रिजवी" दोपहर में जनप्रिय के घर के सामने से गुजरते घोस्ट राइटर या संघर्षरत लेखकों में से कोई ऐसा नहीं होता था,जो उनकी नजर में आ जाए और बिना खाना खाए गुजर जाए।"
दरअसल,तब मेरठ पॉकेट बुक्स के प्रकाशकों का बड़ा बाजार था (मेरी समझ से यह भी जनप्रिय की ही देन थी, उन्होंने दिल्ली छोड़ कर मेरठ को अपने लेखन का शहर बनाने के प्रयास में व्यवसायियों को प्रकाशन की राह दिखाई।बाकी सब इतिहास है)
तब के प्रयत्नशील और संघर्षरत लेखक, मैनपुरी,इटावा, बरेली,हापुड़ जैसे शहरों से अपनी पांडुलिपि जमा करने प्रकाशकों के पास आते और पहुंचते न पहुंचते दोपहर तक भूखे रह जाते। जनप्रिय यह पीड़ा समझते थे। कोई लेखक यदि उनकी आंखों के आगे पद जाता तो वह साधिकार उन्हें घर ले आते।
जनप्रिय ने लेखकों की पांडुलिपि देखने की कोशिश नही की। कारण यह था कि वह जानते थे कि 90 फीसद लेखक उनके ही पात्रों पर रची पांडुलिपि लेकर आए हैं।जिन्हे बाद में प्रकाशक "ओम प्रकाश शर्मा" के जाली नाम से ही चिपका कर प्रकाशित कर देगा।वह युवा और संघर्षरत लेखकों को इसलिए दोषी भी नहीं मानते थे। द ट्रिब्यून(संभवतः) को दिए अपने साक्षात्कार में उन्होंने कहा था वह जानते थे कि यह युवा लेखकों की रोजी रोटी का मसला है। असली दोषी तो प्रकाशक हैं। वह ट्रेड नामों के खिलाफ लामबंद होने के लिए स्थापित लेखकों से आग्रह करते रहे। मगर हासिल वह स्वयं भी जानते ही थे।
बहरहाल साथ लगी कतरन और कवर सामाजिक लेखक साधना प्रतापी की 1970 में प्रकाशित उपन्यास "अंधेरी रात के हमसफर से है" जहां उन्होंने ओम प्रकाश शर्मा की प्रतिष्ठा की बाबत जिक्र किया है। गौरतलब यह कि साधना प्रतापी, सत्तर के दशक में स्वयं ही एक अच्छे लेखक थे।उनकी दो एक किताबों का फिल्मीकरण भी हुआ है।
किताब के नाम और कवर पर न जाएं। यह भ्रामक ही हुआ करती थीं । कहानी एक संघर्षरत लेखक की है, जो अपना उपन्यास प्रकाशित करवाना चाहता है।
आलेख- सत्य व्यास
सोमवार, 11 सितंबर 2023
विनोद प्रभाकर- साक्षात्कार
21 वर्ष की उम्र में मैं एक सफल उपन्यासकार और प्रकाशक बन चुका था- विनोद प्रभाकर
साक्षात्कार की इस शृंखला में इस बार प्रस्तुत है लोकप्रिय
साहित्य के सितारे विनोद प्रभाकर उर्फ सुरेश साहिल जी का प्रथम साक्षात्कार। मेरठ
निवासी विनोद प्रभाकर जी ने यहां अपने वास्तविक नाम से जासूसी लेखन किया वहीं
सुरेश साहिल के नाम से लौट आओ सिमरन जैसी चर्चित कृति का सर्जन भी किया।
वर्तमान में मेरठ के मलियाना में निवासरत सुरेश जी निजी
शिक्षण संस्थान का संचालन करते है और दीर्घ समय पश्चात अपनी रचना लेखन में व्यस्त
हैं।
01. लोकप्रिय साहित्य में विनोद प्रभाकर या सुरेश साहिल का नाम काफी चर्चित रहा है। लेकिन हम एक बार अपने पाठकों के लिये आपका जीवन परिचय जानना चाहेंगे।
- मेरा जन्म मेरठ जिले के मलियाना ग्राम में हुआ था। जो
मेरठ सिटी रेलवे स्टेशन से एक किलोमीटर की दूरी पर है। मेरे पिता श्री किरन सिंह
मेरठ जिले की सरधना तहसील के हबड़िया गांव के एक छोटे किसान परिवार से थे। और मेरठ
नगर महापालिका में सरकारी ओहदे पर थे।
मेरी शिक्षा ग्रेजुएट तक रही। किसी
कारणवश मुझे पोस्ट ग्रेजुऐशन की पढाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। पूर्व संस्कार ही
रहे होंगे की कक्षा पांच तक पहुंचते -पहुंचते मेरे अंदर का लेखक जागृत हो चुका
था। यह बचपन का वह दौर था, जब क्लासरूम
में बच्चों के झुण्ड के बीच फिल्मी गानों पर परोडी बनाकर सुनाता था। और ताज्जुब इस
बात का रहा कि दस फिट दूर बैठे सख्त मिजाज अध्यापक को मेरी आवाज सुनाई नहीं देती
थी। उस वक्त के मेरे ही ग्रुप का एक बच्चा (जिसका नाम शायद चतर सिंह था) कहीं से
दो अजीब सी लैंग्वेज सीख कर आया था। और मैं एकमात्र स्टुडेंट था जो हफ्ते भर में
उससे धाराप्रवाह उस लैंग्वेज में बातें करने लगा था। वह दोनों भाषायें में आज भी
धाराप्रवाह बोलना जानता हूँ। मुझे नहीं लगता लिखने में और बोलने में संस्कृत जैसी
प्रतीत होती दोनों भाषायें कहीं बोली भी जाती रही होंगी या अब भी कहीं बोली जाती
होंगी।
बहरहाल, दोनों भाषाओं का इतिहास कुछ भी हो, मगर अब यह भाषायें उन दो देशों की राष्ट्रीय भाषायें बन चुकी हैं, जो मेरे आने वाले उपन्यास के दो काल्पनिक देश हैं।
रविवार, 3 सितंबर 2023
होशियार सिंह
लोकप्रिय साहित्य में एक नाम और सामने आया है, वह नाम है। होशियार सिंह। हालांकि होशियार सिंह जी का एक ही उपन्यास अभी तक हमारी जानकारी में आया है। यहाँ प्रस्तुत जानकारी उसी उपन्यास पर आधारित है।
होशियार सिंह के उपन्यास
1. जंजीर और हथकडियां (नूतन पॉकेट बुक्स, मेरठ)
2. कसमें वायदे
संपर्क-
होशियार सिंह /
13/8, शाहगंज दरवाजा
कच्ची सडक- मथुरा
पिन-281001
उक्त समस्त जानकारी हमें छत्तीसगढ़ निवासी नवीन जी ने प्रेषित की है। नवीन जी का हार्दिक धन्यवाद |
लेखक होशियार सिंह जी के विषय में अन्य कोई जानकारी
किसी पाठक के पास हो तो हमसे संपर्क करें।
आनंद चौधरी, परिचय
जन्म - 10-05-1981
माता- श्रीमती उर्मिला देवी
पिता- श्री विजय चौधरी
शिक्षा- स्नातक
वर्तमान कार्य- उपन्यास लेखन, contractor (machenical steel construction) founder of our construction company "omkar engineering".
संपर्क- 8578853325, 9472621470.
Email- omkarengineering.1525@gmail.com
Add.- ग्राम- नुरपुर, पोस्ट- फुलाड़ी, थाना-अजीमाबाद,
![]() |
| उपन्यासकार आनंद चौधरी |
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उपन्यास सूची-
1. साजन मेरे शातिर- [ क्राइम -थ्रिलर ] नवम्बर 2009
दुर्गा पॉकेट बुक्स
2. हैरीटेज होस्टल हत्याकांड- [ मर्डर मिस्ट्री ] 10- 05- 2022 - अजय पॉकेट बुक्स
3.आयुष्मान- [ साइंस फिक्शन ] 1 जनवरी 2023 अजय पॉकेट बुक्स
4. मौत मेरे पीछे - [ मर्डर मिस्ट्री ] - प्रकाशकाधीन
आनंद चौधरी के उपन्यासों की समीक्षा यहाँ पढें
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केशव पण्डित हिन्दी उपन्यासकार केशव पण्डित गौरी पॉकेट बुक्स के Ghost Writer थे। गौरी पॉकेट बुक्स बंद हो जाने के बाद इसका टाइटल 'तु...
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रानू हिंदी के बहुचर्चित उपन्यासकार थे। अपने समय के प्रसिद्ध लेखक रानू के पाठकों का एक विशेष वर्ग था। रानू के उपन्यास जितने चाव से अपने समय...
-
- मेरे पास उपलब्ध उपन्यासों की सूची। समयानुसार इसे संशोधित किया जाता रहा है। मेरा उद्देश्य 'लोकप्रिय उपन्यास संग्रह' है, जिसके अ...
-
नाम- राज भारती लोकप्रिय साहित्य के सितारे राज भारती मूलत पंजाबी परिवार से संबंधित थे। इनका मूल नाम ....था। दिल्ली के निवासी राज भारती जी ने...







