काम्बोजनामा- रामपुजारी
आइए हम सभी काम्बोज सर के जन्मदिन के अवसर पर शुभकामना संदेश भेजें।
इस अवसर पर #काम्बोजनामा से एक झलकी आप सभी के लिए प्रस्तुत है...
बंद आँखों से तो आमजन भी सपने देख लेते हैं लेकिन जो खुली आँखों से सपने देखे उसे या तो लोग दीवाना, पागल कहते हैं या फिर विचारक अथवा दार्शनिक! अठारह साल का किशोर मन अपनी सपनों की दुनिया में खोया रहता। मन में हमेशा कुछ न कुछ चलता रहता, जिसका जिक्र वह किसी से भी नहीं कर पाता था। पड़ोस के ही बाबूराम स्कूल में वह पढ़ता था। जब स्कूल में नहीं होता था तो वह शॉप पर होता था। उसके पास वक़्त ही कहाँ था। वहीं वह अंतर्मुखी वेद अपने सपनों में खोया हुआ अपने पिता जितेंद्र सिंह काम्बोज का हाथ बँटाता था। आर्टिफ़ैक्ट्स और हैंडीक्राफ्ट की ये सोविनियर शॉप उस जमाने में लालकिले की एक बड़ी मशहूर शॉप थी।
