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रविवार, 1 सितंबर 2019

जासूसी दुनिया पत्रिका

जासूसी दुनिया पत्रिका की रोचक जानकारी।

आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि जासूसी दुनिया पहले राही मासूम रजा लिखने वाले थे. उन्होंने लिखा नहीं था. उनसे अब्बास हुसैनी ने नमूना माँगा था और उन्हें व इब्ने सफी को फाइनल किया गया. लेकिन अंत में सफी साहब को इसलिए फाइनल किया गया क्योंकि उनमें जासूसी के साथ हास्य की भी समझ थी. और यह अच्छा ही हुआ. इससे उर्दू ही नहीं हिंदी को भी बेहतरीन जासूसी लेखक मिला. कल्ट लेखक भी कह सकते हैं. वो इकलौते लेखक हैं जिनका उपन्यास छपते छपते बिकना शुरू हो जाता था।
      तब ट्रेडल पर धीमी छपाई होती थी. इलाहबाद के खासकर इक्के वाले शाम ही से प्रेस के पास मंडराने लगते थे और छपाई के बाद बाइंडिंग का भी इंतज़ार नहीं करते थे और वैसे ही खरीद कर ले जाते थे. हालाँकि बाइंडिंग के नाम पर इसमें सिर्फ पिन ही लगती थी. लेकिन लोग इतना भी सब्र नहीं दिखाते थे. हॉट केक का नाम सबने सुना होगा, लेकिन हॉट केक की तरह बिकने वाला हिंदुस्तान का एकमात्र लेखक था इब्ने सफी।

- प्रस्तुति- विनोद भास्कर

रविवार, 4 अगस्त 2019

रघुनाथ और विजय नामकरण

मेरे मन में एक इच्छा थी की उपन्यास पात्रों पर एक श्रृंखला आरम्भ की जाये जिसमें  पात्रों के बारे में महत्वपूर्ण बाते/घटनाएं आदि वर्णित हो। जैसे इमरान, अलफांसे, विमल, देवराज चौहान, नाना पाटेकर, विजय-विकास जैसे बहुसंख्यक पात्रों पर कुछ लिखा जाये।
श्री मान प्रवीण जैन जी ने एक सराहनीय प्रयास किया है और यह प्रयास स्वयं में अनूठा और एकदम अलग है। प्रवीण जी ने आदरणीय वेदप्रकाश कांबोज साहब के पात्रों का ज्योतिषीय महत्व रेखांकित किया है। 
इस श्रृंखला की प्रथम कड़ी में आप पढेंगे रघुनाथ और विजय के नाम का ज्योतिषीय महत्व। (गुरप्रीत सिंह, साहित्य देश)
     

     भाई वेद प्रकाश कम्बोज के जासूसी उपन्यास पढ़ने वाले मित्र उनके अन्य पात्र रघुनाथ को नही भूल सकते खास तौर से इसलिए कि विजय हमेशा उसे प्यारे तुला राशि कह कर सम्भोदित करता है। पाठको को ऐसी अनुभूति होती है जैसे अपने किसी अति घनिष्ठ मित्र से मिल रहे हो। पर क्या कभी आपने पढ़ा है कि विजय को किसी ने, रघुनाथ ने भी  वृष राशि कह कर पुकारा हो। नही न। ऐसा इसलिए कि कम्बोज ने कभी ऐसा लिखा ही नही। परंतु जाने अनजाने में उन्होंने दोनों के मध्य एक ज्योतिषीय साम्य प्रस्तुत किया है। वृष और तुला दोनो राशियों का स्वामी ग्रह शुक्र है। और उनकी मित्रता का मजबूत आधार है। रघुनाथ हमेशा विजय के पास प्रोफेशनल मदद की अपेक्षा करता है। क्यों? इसका उत्तर दोनो के नज़्म में ही छुपा है।
     विजय का नामांक 1, रघुनाथ के नामांक 5 का मित्र है इसके विपरीत रघुनाथ के नामांक 5 के लिए विजय का नामांक सपोर्टिव है मददगार है।
ज्योतिष के विद्वान जैमिनी ज्योतिष से भली भांति परिचित है। इसमें अंको की 'क, ट, प, य' आदि पद्धति से भावो को इंगित किया जाता है। इस पद्धति से विजय और रघुनाथ दोनों शब्दो से कुंडली के प्रथम भाव का बोध होता है।
   दोनों के राशि स्वामी होने से नव पंचम दोष इनके सम्बन्धो में बाधक नही बनता।।

लेखक- प्रवीण जैन
 
प्रस्तुत पोस्ट आपको कैसी लगी। अपने विचार अवश्य व्यक्त करें। 

मंगलवार, 23 जुलाई 2019

नये उपन्यास- जुलाई 2019


नमस्कार,
एक बार फिर उपस्थित हैं आपके लिए नये उपन्यासों की सूचना लेकर। कुछ नये उपन्यासों तो कुछ रिप्रिंट।
उम्मीद है ये उपन्यास आपके अच्छे मनोरंजन में सहायक होंगे।

रवि पॉकेट बुक्स मेरठ द्वारा प्रकाशित उपन्यास
उपलब्ध-25.07.2019 से   
रवि पॉकेट बुक्स की प्रस्तुति
1. एंट्रेप्ड- कंवल शर्मा
               कंवल शर्मा का नाम ही मनोरंजन का पर्याय बन चुका है। इनका हर उपन्यास एक नयी कहानी के साथ आता है और पाठकों पर गहरा प्रभाव छोड़ता है।
इनके एक पूर्व उपन्यास 'देजा वू' की तरह यह शीर्षक भी कुछ अलग हट कर है। उम्मीद है यह कहानी भी कुछ जुदा और मनोरंजक होगी।
          रवि पॉकेट बुक्स मेरठ से प्रकाशित कंवल जी का यह छठा उपन्यास है।
         हालांकि इनके एक उपन्यास 'कैच-04' की घोषणा को काफी समय हो गया, वह अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ।
वैसे भी कंवल जी के उपन्यासों के शीर्षक में संख्याओं का विशेष योगदान रहा है। जैसे -'वन शाॅट', 'सैकण्ड चांस', 'टेक थ्री'।

2. बाजीगर- शिवा पण्डित

                 अर्जुन त्यागी सीरिज से पहचाने जाने वाले शिवा पण्डित का एक और थ्रिलर उपन्यास प्रकाशित हो रहा है।

3. बारूद की बेटी- रीमा भारती

                         अपने एक्शन के कारण विशेष पहचान बनाने वाले रीमा भारती के उपन्यास आज भी पाठकों को बेहद पसंद है। एक बार फिर रीमा भारती का जलवा हाजिर है।
दुश्मनों को मौत की नींद सुलाने आ रही है बारूद की बेटी।

4. लूटमार-अनिल मोहन

               उपन्यास जगत के बेहतरीन लेखक अनिल मोहन का एक उपन्यास रवि पॉकेट से रिप्रिंट आ रहा है।
देवराज चौहान का कारनामा।

5. बदमाशों की टोली- अनिल मोहन

                              देवराज चौहान एक बार फिर जा टकराया बदमाशों‌ की टोली से। फिर छिड़ी एक जंग। एक कहर बरसाने वाला जबरदस्त कथानक।

6. कैदी प्रेतात्मा, गुलबदन- राज भारती
                                    राज भारती के हाॅरर उपन्यास पसंद करने वालों के लिए यह अच्छी खबर है की रवि पॉकेट बुक्स से उनके उपन्यास लगातार रिप्रिंट हो रहे हैं।
इस बार तो एक साथ दो उपन्यास, एक के मूल्य में दो उपन्यास उपलब्ध हैं।

सूरज पॉकेट बुक्स- मुंबई से प्रकाशित
इस सेट में सूरज पॉकेट बुक्स पहली बार कुछ अलग हटकर किताबें लेकर आया है। उम्मीद है की ये किताबें नये आयाम स्थापित करेगी।


7. महासमर- रमाकांत मिश्र, सबा खान।

                  रमाकांत मिश्र अपने प्रथम उपन्यास ...के साथ ही चर्चा में आ गये थे। वहीं सबा खान अपने रोचक और सरल अनुवाद के कारण चर्चा में रही है। उस बार यह संयोग है की दोनों लेखक एक साथ आ रहे हैं। ऐसा बहुत कम संयोग देखने को मिलता है। पाठकों के लिए यह अपार हर्ष का समय है।
'महासमर- परित्राणाम साधुनाम' उपन्यास एक विशेष टैग लाइन के साथ उपस्थित है। उपन्यास के विषय में सिर्फ इतना ही कहना काफी है की इसके लेखक द्वय रमाकंत मिश्र और सबा खान है।

8. बालि- देवेन्द्र पाण्डेय

            प्यार, इश्क और मोहब्बत जैसे विषय पर कलम चलाने वाले देवेन्द्र पाण्डेय जी इस बार एक पौराणिक कथा के साथ उपस्थित हैं। बालि- युग युगांतर प्रतिशोध।
उम्मीद है और प्रार्थना भी है की यह रचना एक अलग पहचान बनाने में सफल होगी।

9. धुरंधरों के बीच- एम. इकराम फरीदी

                            फरीदी जी के पाठकों के लिए यह एक अच्छी खबर है की उनके उपन्यास अब और भी बेहतरीन गुणवत्ता के साथ उपलब्ध हैं।
फरीदी जी पहली बार सूरज पॉकेट बुक्स से प्रकाशित हो रहे हैं।
10. Warlock- vickram e diwan
                        हिन्दी रचनाओं के मध्य अंग्रेजी पाठकों के लिए भी सूरज पॉकेट बुक्स एक उपहार लेकर उपस्थित है। विक्रम दीवान की रचना warlock.

Book cafe Publication द्वारा प्रकाशित
लेखक अमित खान जी के स्वयं के पब्लिकेशन के अंतर्गत कुछ नयी और कुछ रिप्रिंट उपन्यास शीघ्र प्रकाशय हैं।


11. हैरतअंगेज हत्या- संतोष पाठक
                              जैसा की नाम से ही स्पष्ट हो रहा है कि यह एक मर्डर मिस्ट्री है। संतोष पाठक जी के उपन्यास पाठक का भरपूर मनोरंजन करने में सक्षम होते हैं। यह बात उनके पूर्व उपन्यासों के आधार पर कही जा सकती है।
                उम्मीद है प्रस्तुत उपन्यास भी पाठकों को पसंद आयेगा। संतोष पाठक जी पहली बार book cafe के अंतर्गत प्रकाशित हो रहे हैं।

12. मेरे हाथ मेरे हथियार- अमित खान
                                    एक बार फिर पाठकों के लिए प्रस्तुत है कमाण्डर करण सक्सेना का जलवा। अमित खान जी की लेखनी से जन्मे कमांडर करण सक्सेना के उपन्यास किसी न किसी मिशन पर आधारित होते हैं। इस बार भी कमाण्डर करन सक्सेना निकले हैं किसी खतरनाक मिशन पर। आप भी पढे और खो जाये कमाण्डर की रोचक दुनिया में।


13. मैडम नताशा का प्रेमी- अमित खान
                                      यह एक हाॅट थ्रिलर है। ध्यान दें अश्लील नहीं है। यह कहानी है नताशा की। उस नताशा की जिसकी जिंदगी में प्यार नहीं था लेकिन प्रेमी बहुत थे।
यह कहानी है एक ऐसे व्यक्ति की जिसने अपनी मौत का प्लान खुद तैयार किया।
उपन्यास जगत की एक बेहतरीन रचना है। अगर आपने आज तक अमित खान को नहीं पढा तो यह रचना पढे। विश्वास है आपको यह बेहद पसंद आयेगी।

14. हम नहीं चंगे, बुरा न कोय- सुरेन्द्र मोहन पाठक
                                            सबसे रोचक है और बहु प्रतीक्षित रचना है वह है सुरेन्द्र मोहन पाठक जी की आत्मकथा का द्वितीय भाग।
हिन्दी लोकप्रिय उपन्यास जगत के वर्तमान जगमागते सितारे सुरेन्द्र मोहन पाठक की आत्मकथा 'न कोई बैरी, न बैगाना' का द्वितीय भाग ....को प्रकाशित हो रहा है।
इस उपन्यास में लेखक के जीवन के साथ-साथ उपन्यास जगत की बहुत सी रोचक और दुर्लभ जानकारियाँ पाठकों को उपलब्ध होंगी।
प्रकाशन तिथि- 19 अगस्त 2019
प्री आॅर्डर लिंक- अमजेन लिंक- यहा क्लिक करें


विशेष-
 एम. इकराम फरीदी का उपन्यास 'होटल चैलेंज' कुछ विशेष कारणों से निर्धारित समय से बाद में प्रकाशित होगा।


यह पोस्ट आपको कैसी लगी, अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।
धन्यवाद।


शुक्रवार, 19 जुलाई 2019

तीन लेखक

उपन्यास जगत के लेखक त्रय एक साथ।
 वेदप्रकाश कांबोज जी के घर पर।
बायें से- संतोष पाठक जी,वेदप्रकाश कांबोज जी,एम. इकराम फरीदी जी


सोमवार, 1 जुलाई 2019

3. साक्षात्कार- राम पुजारी

 आने वाला वक्त अच्छा होगा- राम पुजारी
साक्षात्कार शृंखला-03

'लव जिहाद..एक चिड़िया' और 'अधूरा इंसाफ...एक और दामिनी' जैसे सामाजिक उपन्यास लिख कर कम समय में ज्यादा चर्चित रहने वाले राम पुजारी जी की कलम में समाज की विकृतियों के प्रति एक स्वाभाविक आक्रोश दृष्टिगत होता है। 
     हमने राम पुजारी जी से विभिन्न विषयों पर साक्षात्कार रूप में चर्चा की जो यहाँ प्रस्तुत है। राम पुजारी जी वर्तमान में बठिण्डा (पंजाब) में एक  कम्पनी में कार्यरत हैं।


1. आप अपने बारे जरा बताइये?

     अपने बारे में..., मैं एक नवरतन कंपनी में इंजीनियर हूँ और पढ़ने का बहुत शौक है।
कॉमिक्स से लेकर लोकप्रिय साहित्य सभी पढ़ लेता हूँ। वैसे बता दूं लोकप्रिय साहित्य अभी पढ़ना शुरू किया।

2. किन लेखकों को पढा आपने?

     कॉमिक्स में फैंटम, ध्रुव, नागराज और चाचा चौधरी....और उपन्यास में शरतचंद्र बाबू, विमल मित्र जी, कम्बोज जी, शर्मा जी, पाठक जी, मंटो साहब, कृष्ण चन्दर जी, धर्मवीर भारती और अमृता प्रीतम जी...और भी हैं। पर...इनके सारे नहीं...कुछ-कुछ पढ़ें है।

डैन ब्राउन, चेतन भगत, सर आर्थर कॉनन डॉयल और मारियो पूजो इनके भी कुछ-कुछ पढ़ें हैं।

3.आपको सबसे ज्यादा कौन सी पुस्तक पसंद आयी।

     English में The God Father और हिंदी में गुनाहों का देवता।

4.  दोनों अलग है एक क्राइम फिक्शन है तो दूसरी लव स्टोरी।

      जी।  क्या करें पसंद-पसंद की बात है, जैसे ...कम्बोज जी के विजय ने बहुत प्रभावित किया... और गुनाहों के देवता की सुधा ने।

5. आपके मन में  लेखक बनने की इच्छा कब और कैसे उठी?

     लेखक होना या बनना... मैं मानता हूं कि अपने विचारों को अभिव्यक्त करना है। लिखता था...मैं शुरू से ही, लेकिन ऐसे नहीं कि बुक बन जाये। छोटी कहानियाँ-किस्से लिखता था, बाद कैरियर की दौड़ में समय ही नहीं मिला। फिर जब मेरे एक्सीडेंट हुआ तो मैं 4 महीनें बेड पर रहा, उसी दौरान समय बहुत था मेरे पास, जब लिखना शुरू किया तो बड़े भैया ने उसमें काफी सुधार किया और कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। फिर पुरानी आदत फॉर्म में आ गई, इस तरह से लेखक बन गया।

6. आपने किन लेखकों से प्रेरणा ली है? 

रविवार, 30 जून 2019

उपन्यास साहित्य का रोचक संसार-37,38

उपन्यास साहित्य का रोचक संसार-37

आइये, आपकी पुरानी किताबी दुनिया से पहचान करायें - 37
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अगले दिन कोई प्रकाशक नहीं आया ! मैं और बिमल चटर्जी दोनों इन्तजार करते रहे ! उसके अगले दिन भी कोई नहीं आया !
तीसरे दिन मैं सुबह-सुबह तैयार होकर बिमल चटर्जी के घर की ओर निकलने वाला ही था कि द्वार पर भारी-भरकम स्याह-सा चेहरा प्रकट हुआ !
वह उत्तमचन्द थे ! बुक बाइन्डर !
"बाबे दी मेहर है ! चिन्ता नहीं करनी !" दोनों हाथ ऊपर उठा, उत्तमचन्द ने चिर-परिचित अन्दाज़ में अभिवादन किया !
"बाबे दी मेहर है !" मैंने अपना दायां हाथ आगे बढ़ाया-"आज सुबह-सुबह कैसे ?"
"चिन्ता नहीं करनी ! इधर से गुज़र रहा था ! सोचा - बड़े-बड़े लोगों से मिलते चलें !"
मैं ठहाका मारकर हँसा -"बड़े-बड़े लोगों से मिलने के लिए आप चारफुटिये से मिलने आये हैं ! मैं कहाँ से बड़ा नज़र आ रहा हूँ आपको ?"
उत्तमचन्द गम्भीर हो गये -"हमें तो जो रोटी दे, वही हमारे लिए बड़ा है !"
"अरे तो मैंने कौन-सी रोटी खिला दी आपको ? खिलाने-पिलाने वाला तो भगवान है ! मेरे यहाँ आने की जगह किसी मन्दिर चले गये होते !"
"वहाँ भी जाऊँगा, पर अभी नहाया नहीं हूँ !"
"तो आप बिना नहाये-धोये सिर उठाकर सीधे मेरे यहाँ चले आये हैं ! कुछ तो बात है ! क्या बात हैं ?" मैंने मुस्कुराते हुए भवें नीचे से ऊपर करते हुए पूछा !
"लड़के खाली बैठे हैं ! मैंने सोचा - योगेश जी से ही पूछ लेते हैं - पंकज पाॅकेट बुक्स का नया सैट कब आ रहा है ?" उत्तमचन्द के मुखमण्डल की मुस्कान का स्थान गम्भीरता ने ले लिया !
"इस बारे में तो कुमार साहब ही कुछ बता सकते हैं !" मैंने कहा !
"तो चलें...कुमार साहब के घर ?" उत्तमचन्द ने पूछा !
"चलिए !"
हम दोनों जब कुमारप्रिय के यहाँ पहुँचे ! कुमारप्रिय घर पर ताला लगा रहे थे ! स्पष्ट था - कहीं जाने को तत्पर हैं !

शुक्रवार, 14 जून 2019

उपन्यास साहित्य का रोचक संसार-35,36

आइये, आपकी पुरानी किताबी दुनिया से पहचान करायें - 35
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राज भारती जी और यशपाल वालिया ने मेरा और बिमल का सहज स्वागत किया !
फोल्डिंग कुर्सी बिछाकर हम दोनों जम गये तो राज भारती जी ने बिमल से पूछा -"स्क्रिप्ट तैयार है तेरी ?"
"हाँ, लेकर आया हूँ !" बिमल ने कहा ! किन्तु सवाल मुझसे तो किया ही नहीं गया था ! मैं खुद टपक पड़ा जवाब देने को, बोला - "मैं भी लाया हूँ !"
"अच्छा...!" जवाबी आवाज यशपाल वालिया की थी, जो नाटकीय अन्दाज़ में कुर्सी से उठकर खड़े हुए और ऊपर से नीचे मुझे देख, भारती साहब से पंजाबी में बोले -"आपने इधर तो देखा ही नहीं ! इधर भी देख लो ! योगेश जी भी आये हैं ! स्क्रिप्ट भी लाये हैं !"
फिर वालिया साहब बिमल से बोले -"ये क्या मोटे ? तूने अपनी कुर्सी तो भारती साहब के पास रख ली, योगेश जी को पीछे छिपा दिया !"

उपन्यास साहित्य का रोचक संसार-33,34

आइये, आपकी पुरानी किताबी दुनिया से पहचान करायें - 33
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अचानक अपना ही घर मेरे लिए कारागार बन गया !

लेखकों-प्रकाशकों तथा बिमल चटर्जी की विशाल लाइब्रेरी में आनेवाले लोगों से जो रिश्ता बना था, उसकी वजह से घर में मेरा समय कम ही बीतता था !
बहुत बार तो केवल रात का खाना ही घर पर होता था, दिन का भोजन कहीं न कहीं यारों के साथ होता था !

लेकिन...
सब दिन होत न एक समाना !

वह दिन भी अन्य दिनों से अलग था !

सुबह-सुबह की पहली चाय कुमारप्रिय के साथ एक टी स्टाॅल में पीने के बाद अलग हुआ तो बिमल चटर्जी के यहाँ पहुँच गया ! वहाँ से हम साथ-साथ विशाल लाइब्रेरी पहुँचे !

"योगेश जी, भारती पाॅकेट बुक्स का मेरा नाॅवल तो कम्प्लीट होनेवाला है ! आपका 'जगत के दुश्मन' कहाँ तक पहुँचा ?" बिमल ने पूछा तो मैंने बताया - "आखिरी ढलान पर है, जरा-सा धक्का लगाना है, पूरा हो जायेगा !"
बिमल हँस पड़े -"मुझे तो आज और कल, दो दिन लगेंगे ! आप भी पूरा कर लो ! फिर साथ में ही चलेंगे ! ठीक !"
"ठीक !" मैंने कहा !

गुरुवार, 13 जून 2019

के. एम. मोहन

उपन्यास जगत में एक और लेखक के विषय में जानकारी प्राप्त हुयी है। लेखक हैं के. एम. मोहन।

के. एम. मोहन के उपन्यास
1. किरण- एक अभिशप्त हीरा (साधना पॉकेट बुक्स)

उक्त लेखक के विषय में कोई जानकारी उपलब्ध हो तो शेयर करें।
धन्यवाद।
. .




शनिवार, 1 जून 2019

अभिमन्यु पण्डित लेखकीय

अभिमन्यु पण्डित के प्रथम उपन्यास 'अभिमन्यु का चक्रव्यूह' का लेखकिय ।
परमप्रिय पाठकों,
सादर अभिनन्दन!

जिस तरह किसी भी मां को अपना पहला बच्चा प्यारा होता है, जौहरी को पत्थरों में हीरा प्यारा होता है, गुलशन के महकते फूलों में गुलाब प्यारा होता है, उसी तरह किसी भी लेखक के लिये उसका पहला उपन्यास प्यारा होता है, जिसे वह ताउम्र नहीं भूल पाता, क्योंकि उसी से उसकी पहचान बननी शुरू होती है। मैं अपनी इस प्यारी चीज को आप सबको समर्पित करता हूं। मेरी यह सौगात आपके नाम है। केशव पण्डित जैसे किरदार का जलवा ही समझिये जिसने मुझे प्रेरित किया कि मैं भी अपने टूटे-फूटे शब्दों से इस किरदार को लेकर पूरा केशव पुराण ही लिख सकूं। इस केशव पुराण की यह पहली कृति है, जिसके प्रकाशक हैं—'रवि पॉकेट बुक्स'।


          केशव पण्डित को मुख्य पात्र के रूप में लेकर अनेक उपन्यासों की इस घुड़दौड़ में पहली बार एक लंगड़ा घोड़ा मैदान में उतरा है, जो अभी इस रेस में सबसे पीछे है, अगर जौकी ने इस घोड़े को उसी अन्दाज में दौड़ाया, जिसकी मैंने परिकल्पना की है, तो दौड़ का एक अद्भुत आनन्द आप सब ले सकेंगे। हार-जीत का फैसला भविष्य के गर्भ में है--भविष्य, जिसे न कोई जान सका और न जान सकता है। इस घोड़े पर जो जौकी सवार है, उसका नाम है अभिमन्यु पण्डित और प्रस्तुत उपन्यास है--'अभिमन्यु का चक्रव्यूह'।

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मेरठ उपन्यास यात्रा-01

 लोकप्रिय उपन्यास साहित्य को समर्पित मेरा एक ब्लॉग है 'साहित्य देश'। साहित्य देश और साहित्य हेतु लम्बे समय से एक विचार था उपन्यासकार...