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रविवार, 14 अप्रैल 2019

उपन्यास साहित्य का रोचक संसार-29,30

आइये, आपकी पुरानी किताबी दुनिया से पहचान करायें - 29
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"मैं तो गर्ग एण्ड कम्पनी में पैसे लेने आया था ! मनोज में भी गया था।  उन्हें बाल पाॅकेट बुक्स देनी थीं ?" मैंने राज भारती जी से कहा।  फिर पूछा -"पर आप यहाँ कहाँ ?"
"क्यों ? तू ही यहाँ माल कमाने आ सकता है ? राज भारती को कोई नहीं जानता।" राज भारती हँसते हुए बोले तो मैं हड़बड़ाया -"नहीं-नहीं, मेरा वो मतलब नहीं था !"
"मतलब-वतलब छोड़ ये बता ज्ञान ने पैसे दिये ?"
"हाँ, दिये !" मैंने कहा।

उन दिनों मेरे मुँह से किसी भी पारिश्रमिक अथवा पेमेन्ट के लिए अधिकांशतः 'पैसे' शब्द ही मुँह से निकलता था ! राज भारती जी के संसर्ग ने ही मुझे 'पेमेन्ट' या 'पारिश्रमिक' बोलना सिखाया।

"आज तो लगता है - मनोज से भी पेमेन्ट मिल गई है ?" भारती साहब मेरा चेहरा गौर से देखते हुए चुटकी लेकर बोले !
"हाँ !" मैं हँसा।
"तब तो पार्टी हो जाये !"
"हाँ-हाँ, जरूर ! बताइये कहाँ चलना है ?"
"सब्र कर...सब्र कर ! तूने तो अपनी जेब भर ली ! अब मैं भी जरा कुछ नाश्ते-पानी का जुगाड़ कर लूँ !" राज भारती  बदस्तूर मुस्कुराते हुए बोले।

उपन्यास साहित्य का रोचक संसार-27,28

आइये, आपकी पुरानी किताबी दुनिया से पहचान करायें - 27
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बैठने के लिए उन दिनों चन्दर की दुकान में छोटे-छोटे स्टूल थे।

एक पर वो बैठा, दूसरे के शीर्ष पर हाथ से थपकी दे, मुझसे बोला -"बैठ।"
मैं यन्त्रवत् बैठ गया।

"यार, मैं तुझसे बहुत दिन से बात करने की सोच रहा था। पर कभी कस्टमर्स की भीड़, कभी तेरे साथ बिमल चटर्जी या अरुण शर्मा होते थे, इसलिए कभी चांस नहीं मिला, पर आज तू पकड़ में आ गया और अभी कस्टमर भी नहीं हैं !"
मैं मुस्कुरा दिया, बोला कुछ नहीं।

"तुझे जल्दी तो नहीं है ना ?" चन्दर ने फिर पूछा।
मैंने "नहीं" में सिर हिला दिया।

"पानी पियेगा ?" पूछने के साथ-साथ चन्दर ने स्टूल से उठ, वहीं कहीं से काँच का एक गिलास उठाया और कुछ पीछे नीचे जमीन पर रखी एक बेहद खूबसूरत सुराही उठाई और सुराही से पानी काँच के गिलास में उड़ेलकर, मेरी ओर बढ़ा दिया।

प्यास तो नहीं थी, फिर भी मैंने गट-गट पानी पीकर गिलास खाली कर दिया और वापस चन्दर को थमा दिया।

चन्दर गिलास वहीं कहीं नीचे रखने के बाद फिर से स्टूल पर बैठ गया।

"अच्छा बता, किस-किसके लिए लिख रहा है ?" स्टूल पर जमकर बैठने के बाद उसने पूछा।
मैंने पहले तो बगल की दुकान की ओर इशारा किया और बोला -"मनोज में लिख रहा हूँ।"
फिर एक क्षण रुककर बोला -"गर्ग एण्ड कम्पनी और भारती पाॅकेट बुक्स में भी लिख रहा हूँ।"
"बेकार है, यह सब बनिये लोग बड़े चालू होते हैं ! इनमें कोई भी तुझे तेरे नाम से नहीं छापेगा । तू जिन्दगी भर लिखता रहेगा। कोई फायदा नहीं होगा।" चन्दर ने कहा !

उपन्यास साहित्य का रोचक संसार-25,26

आइये, आपकी पुरानी किताबी दुनिया से पहचान करायें - 25
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"आप भी लीजिए ना...।" कुमारप्रिय ने बिमल जैन को केवल चाय की चुस्की भरते देखकर, बिस्कुट और नमकीन की ओर संकेत करते हुए कहा तो बिमल जैन बोले -"नहीं, ठीक है। आप लीजिए।"

     कुछ पल सन्नाटा रहा।  जब हमारे कपों में चाय लगभग अन्तिम घूँट भर थी, तभी बिमल जैन फट पड़े -"मुझे तो आप लोगों ने बरबाद कर दिया। आगे नहीं करना है - मुझे पब्लिकेशन। अब और एक पैसा नहीं लगाऊँगा !"
"अरे ! क्या हुआ ? ऐसे क्यों नाराज हो रहे हैं जैन साहब ?" कुमारप्रिय चौंकते हुए बोले।
"क्या हुआ ? चाय पी लीजिये। फिर दिखाता हूँ - क्या हुआ ?" बिमल जैन तल्ख स्वर में बोले।

कुमारप्रिय ने चाय का आखिरी घूँट भर कप टेबल पर रख दिया। मैं पहले ही अपना कप खाली कर चुका था।

बिमल जैन खड़े हो गये और दूसरे कमरे की ओर बढ़ते हुए बोले -"इधर आइये !"

शुक्रवार, 12 अप्रैल 2019

इब्ने सफी के उपन्यासों की झलक

इब्ने सफी की 'जासूसी दुनिया सीरिज' के कुछ उपन्यासों की एक झलक


1. दिलेर मुजरिम

            यह इब्ने सफी का प्रथम उपन्यास है।
                ‘दिलेर मुजरिम’ की कहानी पैसे की हवस के चलते जुर्म की दुनिया में डूबते चले जाने की कहानी है। नवाब वजाहत मिर्ज़ा के बीमार पड़ते ही सलीम, जो उनका नज़दीकी रिश्तेदार है, उनकी जायदाद को हासिल करने के लिए क़त्ल पर उतर आता है। इसी में डॉक्टर शौकत का क़िस्सा भी है जो नवाब वजाहत मिर्ज़ा का बेटा है, लेकिन चूँकि नवाब साहब ने अपनी दिवंगत बीवी की इच्छा पर उसे परवरिश के लिए अपनी दोस्त सविता देवी के पास रख दिया था, इसलिए यह राज़ राज़ ही रहा और जैसे ही सलीम को इस राज़ का पता चला, उसने शौकत को रास्ते से हटाने की ठान ली।
               अपने मंसूबे में सलीम किस तरह नाकाम रहा और अपने ही बनाये जाल में फँसता चला गया, इसे जानने के लिए पाठकों को ‘दिलेर मुजरिम’ के पन्नों से गुज़रना होगा और हम आपको इस सफ़र पर चलने का न्योता देते हैं।


2. जंगल में लाश 
                      


                      जब जंगल में एक के बाद एक लाशें मिलने लगती हैं तो किसी को अन्दाज़ा नहीं होता कि मामला कहाँ अटका है। असली मुजरिम कौन है और इन हत्याओं की असली वजह क्या है? जानने के लिये पढ़िये इब्ने सफ़ी की दूसरी हैरतअंगेज़ कहानी ‘जंगल में लाश’।


3. औरत फ़रोश का हत्यारा
                       


                जब इन्स्पेक्टर फ़रीदी और सार्जेंट हमीद के बीच ‘गुलिस्ताँ होटल’ में जा कर नाच के जश्न में को ले कर नोंक-झोंक होती है तो ज़रा भी अन्दाज़ा नहीं होता कि यह जश्न जुर्मों के कैसे सिलसिले को पैदा करनेवाला है। हमीद अपनी नयी मित्र शहनाज़ के साथ नाचने की तमन्ना दिल ही में सँजोये रखता है और इन्स्पेक्टर फ़रीदी शहनाज़ के साथ नाचने लगता है। तभी गोली चलने की आवाज़ आती है और सारा माहौल बदल जाता है। पता चलता है कि किसी आदमी ने ख़ुदकुशी कर ली है और यह आदमी फ़रीदी की तफ़तीश की मुताबिक़ औरतों का धन्धा करने वाला एक पुराना मुजरिम था।
                ज़ाहिर है वह ख़ुदकुशी नहीं है, बल्कि क़त्ल है। मगर किसने किया है ? जानने के लिये पढ़िये इब्ने सफ़ी की तीसरी हैरतअंगेज़ कहानी ‘औरत फ़रोश का हत्यारा’।


4. तिजोरी का रहस्य

              क्या आपने कभी ऐसे मुजरिम के बारे में पढ़ा है जो तिजोरियाँ तोड़े,  मगर चुराये कुछ भी नहीं ? नहीं सुना न ? तो हम आपसे गुज़ारिश करेंगे कि आप इब्ने सफ़ी का यह उपन्यास ‘तिजोरी का रहस्य’ पढ़िए।
               ‘तिजोरी का रहस्य’ ऐसे मुजरिम की कहानी है जो एक राज़ जानने के बाद उसे अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहता है। दिलचस्प बात यह है कि इस मुजरिम का पता लगाने के लिए फ़रीदी आम जासूसों से अलग हट कर ख़ुद भी कुछ मुजरिमों जैसे तरीक़े अपनाता है। यही नहीं, बल्कि वह एक पुराने मुजरिम दिलावर की मदद भी लेता है। मगर कैसे? जानने के लिये पढ़िये इब्ने सफ़ी की दूसरी हैरतअंगेज़ कहानी ‘तिजोरी का रहस्य’।


5. फ़रीदी और लियोनार्ड
                 
             लियोनार्ड बेहद घटिया क़िस्म का ब्लैकमेलर है, जो सिर्फ़ ब्लैकमेलिंग तक ही नहीं रुकता, बल्कि क़त्ल और दूसरे ओछे हथकण्डे अपनाने पर उतर आता है। क्या-क्या गुल खिलाता है और फिर कैसे फ़रीदी के हत्थे चढ़ता है–इसे जानने के लिए आइए, इस उपन्यास के हैरत-अंगेज़ सफ़र पर चलें। हमारा य़कीन है आप निराश न होंगे।


6. कुएँ का राज़
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             जब नवाब रशीदुज़्ज़माँ की कोठी में बने पुराने कुएँ से अचानक अंगारों की बौछार होने लगती है, घर की दीवारों से जंगली आवाज़ें आने लगती हैं और पालतू जानवर एक-एक करके मरने लगते हैं। दहशत में भरकर कोठी के लोग ऐसी हरकतें करते हैं कि ग़ज़ाला, जिसे य़कीन हैकि यह कोई भूत-नाच नहीं, इन्सानी साज़िश है, फ़रीदी को बुला लाती है।
    फिर क्या होता है ? किसका पर्दाफ़ाश होता है ? यही ‘कुएँ काराज़’ की अचरज-भरी कहानी है।


7. चालबाज़ बूढ़ा
              

         हालाँकि ‘चालबाज़ बूढ़ा’ का केन्द्रीय पात्र जाबिर है - निहायत ही पेचीदा शख़्स, जिसे किसी भी क़िस्म का इन्सानी जज़्बा छू नहीं पाता और जो आख़िर में फ़रीदी जैसे होशियार भेदिये को भी चकमा दे कर फ़रार हो जाता है - लेकिन जो किरदार उपन्यास में अनायास उभर आया है वह रुक़ैया का। ‘चालबाज़ बूढ़ा’ की भटकती हुई खलनायिका रुक़ैया का किरदार इब्ने सफ़ी ने लाजवाब मिट्टी से गढ़ा है और उसे उपन्यासकार की भरपूर हमदर्दी भी मिली है।
            ज़िन्दगी में भटकाव का शिकार हो कर गुनाह की गहराइयों में डूब जाने के बावजूद रुक़ैया के दिल में गहरे कहीं प्यार की प्यास है। फ़रीदी जैसे ही इन जज़्बात को छेड़ता है तो रुक़ैया के चरित्र का बेहद उजला पहलू सामने आता है। लेकिन इब्ने सफ़ी जानते हैं कि हृदय-परिवर्तन के बाद भी रुक़ैया का अन्त मौत है और वे उसे उसके स्वाभाविक अन्त तक जाने देते हैं।
            इब्ने सफ़ी की ख़ूबी है कि वे भयानक-से-भयानक चरित्र को पेश करते समय भी उस बुनियादी उसूल पर काम कर रहे होते हैं कि गुनाह से नफ़रत करो, गुनहगार से नहीं। इसलिए वे कोरी किताबी बात न करके गुनहगार की ज़ेहनियत को समझने की कोशिश करते हैं। रुक़ैया जैसे बहुत-से खलनायकों को वे इसी आधार पर हमदर्दी भी दे पाते हैं।

इब्ने सफी साहब
जासूसी दुनिया पत्रिका 



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धन्यवाद।
इब्ने सफी साहब के उपन्यासों की लिस्ट यहाँ उपलब्ध है।-इब्ने सफी उपन्यास सूची

रविवार, 7 अप्रैल 2019

कर्नल अशोक

कर्नल अशोक के एक उपन्यास का आवरण चित्र उपलब्ध हुआ है। कर्नल अशोक शायद उस दौर के लेखक हैं जब Ghost writing में कर्नल, इंस्पेक्टर, मेजर, कैप्टन जैसे नाम चला करते थे।
   कर्नल अशोक के विषय में कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं।

 कर्नल अशोक के उपन्यास

1. रंगीले बुड्ढे
2. चीखों‌ का संसार- 1974

मंगलवार, 2 अप्रैल 2019

सुरेश श्रीवास्तव

हिन्दी लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में एक और उपन्यासकार की जानकारी उपलब्ध हुयी है। जिनका नाम है सुरेश श्रीवास्तव । इनके एक उपन्यास की फोटो उपलब्ध हुयी है।
   अपने उपन्यास 'गुलाम मुल्क' के लेखकीय में इन्होंने एक बात का जिक्र किया है वह है -हठयोग। सुरेश श्रीवास्तव जी लिखते हैं - मैंने जासूसी साहित्य में 'हठयोग' के माध्यम से एक नया प्रयोग किया था। हालांकि यह प्रयोग क्या था कहीं कुछ स्पष्ट नहीं है।
 संपर्क-
सुरेश श्रीवास्तव
11-C, प्रहलाद नगर,मेरठ, उत्तर प्रदेश

सुरेश श्रीवास्तव के उपन्यास

  1. विक्रांत और द्वीप का देवता.
  2. देवता की गर्जना
  3. विक्रांत देवता के जाल में
  4. विक्रांत देवता की टक्कर
  5. देवता का अन्त
  6. विक्रांत और विराट
  7. तूफानी विराट
  8. अजेय विराट
  9. बारूद भरा समझौता
  10. वियोगिनी पावेला
  11. अपराधिनी पावेला
  12. विश्वद्रोही पावेला
  13. पावेला का प्रतिशोध
  14. पावेला फिर आई
  15. रणचण्डी पावेला
  16. पावेला का आतंक
  17. विक्रांत और डाक्टर प्रेत
  18. डाक्टर प्रेत का षड़यंत्र
  19. विक्रांत डाक्टर प्रेत की टक्कर
  20. डाक्टर प्रेत का अंत
  21. वतन बेचने वाले
  22. ये दीवाने भारत के
  23. गुलाम मुल्क
  24. मौत के सौदागर



सुशील जैन

मेरठ से प्रकाशित होने वाली 'गंगा पॉकेट बुक्स' में सुशील जैन जी के उपन्यास प्रकाशित होते रहे हैं।


सुशील जैन के उपन्यास
1. मिश्र की हसीना


सुरेश मोदी

उपन्यासकार सुरेश मोदी के विषय में कुछ ज्यादा जानकारी तो उपलब्ध नहीं है, पर उनका एक उपन्यास मिला है जहाँ से यह जानकारी प्राप्त हुयी है।


सुरेश मोदी के उपन्यास
1. मेरी सजनी तेरी सौत

वेदप्रकाश

एक लेखक वेदप्रकाश जी के विषय में कुछ जानकारी मिली। ये वेदप्रकाश नामक लेखक वेदप्रकाश कांबोज नहीं, ये वेदप्रकाश शर्मा नहीं और ये वेदप्रकाश वर्मा भी नहीं। इनका नाम तो मात्र 'वेदप्रकाश' है। इनका एक उपन्यास मिला है, यह जानकारी वहीं से उपलब्ध है।

वेदप्रकाश के उपन्यास
1. यहा रहमान, वहाँ शैतान
2. जाली लायसैंस

सोमवार, 1 अप्रैल 2019

अनिता

भोपाल निवासी अनिता जी एक सामाजिक उपन्यासकार थी। इनके उपन्यास 'धीरज पॉकेट बुक्स-मेरठ' से प्रकाशित होते रहे हैं।
इनका पूरा नाम अनिता बेल्बासे है।
संपर्क-
अनिता बेल्बासे
स्टेट बैंक कालोनी
MIG-44, अन्तोदय नगर,
दिल खुशबाद, रायसेन रोड़,
भोपाल, मध्य प्रदेश
मोबा.- 990788..74
- 998196..95

अनिता के उपन्यास
1. सीजन


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मेरठ उपन्यास यात्रा-01

 लोकप्रिय उपन्यास साहित्य को समर्पित मेरा एक ब्लॉग है 'साहित्य देश'। साहित्य देश और साहित्य हेतु लम्बे समय से एक विचार था उपन्यासकार...