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शनिवार, 20 नवंबर 2021

कैसे बना मैं उपन्यासकार- तरुण इंजिनियर

 'मैं उपन्यासकार कैसे बना' शृंखला के इस अंक में आप पढेंगे उपन्यासकार तरुण इंजिनियर के उपन्यासकार जीवन के आरम्भिक अंश कैसे बन उपन्यासकार बने।

कैसे बना मैं उपन्यासकार

दोस्तो,

मैं आपको बता दू कि मेरा जन्म बिजनौर के एक छोटे से कस्बे किरतपुर के रस्तोगी परिवार में सन् 1960 में हुआ था,मेरा पूरा नाम तरुण कुमार रस्तोगी है

बचपन से ही मैं नटखट व लेखक प्रवृत्ति क रहा हूँ। जिसकी वजह से मेरे पिता श्री रामनाथ रस्तोगी ने मुझे घर से दूर, नैनीताल पढने के भेज दिया था। उनका मानना था कि घर से दूर रहकर शायद मेरे जहन से लेखक रूपी कीड़ा एकदम‌ मर जायेगा, पर ऐसा हुआ नहीं।

      नैनिताल की वादियों में पहुंचकर, मेरे दिमाग ने शब्दरूपी झील में, कलम की परवार चलानी फिर शुरु कर दी क्योंकि नैनिताल का वातावरण ही कुछ ऐसा है, यहां की प्राकृतिक सुंदरता को देखकर ना कुछ लिखने वाला भी लिखना शुरु कर देता है।

      यही मेरे साथ हुआ। पढाई के साथ-साथ मेरी लघु कहानियाँ, कवितायें व गजलें देश की नामी-गिरामी पत्रिकाओं 'साप्ताहिक हिंदुस्तान', 'कादम्बिनी' व 'नंदन' में प्रकाशित होने लगी। प्रशंसकों के पत्र  आते रहे। मैं एक के बाद एक कहानियाँ लिखता गया। कुछ हास्य लेख मेरे 'अमर उजाला', 'नवभारत टाइम्स' व 'पंजाब केसरी' में भी छपे। दिन कटते रहे...साल कटते रहे, अचानक एक दिन मेरी मुलाकात हिंदी के लोकप्रिय उपन्यासकार रानू से हो गयी। जो उस समय नैनिताल की एक सत्य घटना पर आधारित 'पूजा' उपन्यास लिखने के लिये आये हुये थे। मेरी उनसे मुलाकातें होती रही, फिर मुलाकातें दोस्ती में बदल गयी और कुछ ही दिनों में रानू जी मेरे अच्छे दोस्तों में से एक बन गये। जितना मैं उनके सम्पर्क में आता गया,‌ मेरे अंदर भी उपन्यासकार बनने की ललक जागने लगी। मैं उनके साथ बैठकर छोटे-छोटे शाॅट लिखने लगा। उन्हें पसंद आये और उन्होंने मेरी प्रशंसा की, मेरा हौसला बढ  गया। 

बुधवार, 7 नवंबर 2018

तरुण इंजिनियर

तरुण इंजिनियर एक बहुमुखी प्रतिभा के स्वामी हैं।  उन्होंने कई विधायों में‌ लिखा है।  तरुण इंजिनियर एक ऐसे उपन्यासकार हैं जिन्होंने कभी भी कलम से साथ बंधकर लिखना नहीं सीखा...जो दिल में आता है वही लिख देते हैं...कभी फिल्मों के लिए गीत लिख देते हैं...तो कभी फिल्मों की पटकथा....कभी गजलें‌ लिखने लिखते हैं....तो कभी इंग्लिश उपन्यास.... (डाॅंट टच मी उपन्यास से)
    उपन्यास के अलावा भी तरुण साहब ने अन्य कई विषयों पर लेखन कार्य किया है।
    तरुण इंजिनियर दिल्ली के निवासी हैं। जो मूलतः उपन्यास क्षेत्र में सामाजिक उपन्यासकार हैं लेकिन सामाजिक उपन्यासों के साथ -साथ इन्होंने जासूसी उपन्यास भी लिखे हैं। तरुण इंजिनियर की एक अलग विशेषता है वह है इनके लिखे 'हास्य उपन्यास' जो की मेरे विचार से उपन्यास जगत में एक नया प्रयोग था।

तरुण इंजिनियर के उपन्यास
1. एक और लैला
2. कंवारी माँ
3. माँ और महबूबा
4. माशूका
5.  आशिक आवारा
6. प्यार एक नशा है
7. ये कैसा प्यार है
8. मांग भरो मेरी खून से
9. डाॅट टच मी (हास्य उपन्यास)- राधा पॉकेट बुक्स- मेरठ
10. ये दिल्ली है मेरी जान (हास्य उपन्यास)

जासूसी उपन्यास
11. बैंक राॅबरी
12. खतरनाक स्पाईडर
13. वतन का बेटा
14. सरहद मांगे खून- प्रथम भाग ( जतिन सीरिज)
15.  मेरा भारत महान- द्वितीय भाग  (जतिन सीरिज)


लेखक संपर्क
- तरुण इंजिनियर
 साहिल विला, जी.9/ बी.
स्ट्रीट नंबर- 1, शंकरपुर
नयी दिल्ली- 110092
Email- tarunengineer2003@yahoo.com
Mob - 9899153952




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