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सोमवार, 7 जून 2021

एक मुलाकात कुमार कश्यप से- योगेश मित्तल

साहित्य देश के संस्मरण स्तम्भ में पढें आदरणीय योगेश मित्तल जी की विक्रांत सीरीज के उपन्यासकार कुमार कश्यप जी के साथ बीते कुछ यादगार पलों की एक झलक।

कुमार कश्यप जब बहुत बुलन्दी पर थे, तब उनसे हमेशा मेरठ में किसी न किसी प्रकाशक के यहाँ ही मिलना हुआ, पर जब भी वह मिलते हमेशा जल्दी में रहते थे, "नमस्ते - जय राम जी की" से आगे बात कम ही बढ़ी।
आम तौर पर उन्हें बाहरी चाय की दुकान पर चाय पीते कभी देखा नहीं, पर एक बार सुबह-सुबह वह  ईश्वरपुरी के बाहर ही गिरधारी चाय वाले की दुकान पर दिख गये। 
      मेरठ में ईश्वरपुरी के बाद अगली ही गली हरिनगर की है, जिसका पहला और काफी बड़ा मकान मेरे मामाओं का था, मकान के चार हिस्सों में मेरे चार मामा रहते थे, जिनमें दूसरे नम्बर के मामा रामाकान्त गुप्ता के यहाँ मैं ठहरा हुआ था! 
मैं उन्हीं के यहाँ से बाहर सिगरेट फूंकने के लिए निकला था, तब मैं सिगरेट पीने लगा था, किन्तु बड़ों के सामने... न बाबा न, इतना माडर्न और बेहिचक नहीं हुआ था।  
कुमार कश्यप
कुमार कश्यप

गिरधारी चाय वाले की दुकान पर मैं सिगरेट लेने ही पहुँचा था कि बेंच पर बैठे कुमार कश्यप जी की आवाज आई- " आओ योगेश जी, आओ! चाय पीते हैं।"
हमने चाय पी। सिगरेट भी पी। पैसे कुमार कश्यप जी ने ही दिये।
मेरे बहुत कहने पर भी उन्होंने मुझे नहीं देने दिये।
दरअसल कुमार कश्यप जी को जिस पब्लिशर से मिलना था, उसका आफिस तब तक खुला नहीं था, इसलिए हमारे बीच औपचारिकता से आगे बढ़ने की शुरुआत होगी।

उसके बाद हम इटावा में मिले, तब मेरे सबसे बड़े बहनोई शान्तिभूषण जैन इटावा में यूपी रोडवेज़ में आर. एम. की पोस्ट पर थे।
बहन का घर रेलवे स्टेशन के पास ही था।
मैं दिल्ली वापस जाने के लिए रेलवे स्टेशन पहुँचा ही था कि उसी समय किसी ट्रेन से वापस लौटे कुमार कश्यप जी की नज़र मुझ पर पड़ी - "अरे योगेश जी!"

शनिवार, 15 मई 2021

कुमार कश्यप- जिसके रचित पात्र आज भी याद है - हादी हसन

कुमार कश्यप- स्मृतिशेष
आलेख- हादी हसन
            उपन्यासों की दुनिया में एक बहुत बड़ा नाम जो पल्प फिक्शन के संसार में ऐसी सुनामी लेकर आया जिस सुनामी ने हर स्टाल पर अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया।
            ओमप्रकाश शर्मा को बहुत सारे प्रकाशकों ने छपा। शर्मा जी के पात्रों पर उपन्यास लिखने वाले अनगिनत उपन्यासकार थे। राजेशजयन्तजगतजगनगोपालीचक्रमभुवनताऊजेम्स बाण्डबागारोफलिली आदि ऐसे पात्र थे जो किसी परिचय के मोहताज नहीं थे। कोई भी उपन्यासकार पूर्व से स्थापित उन पात्रों को लेकर अपनी रचना रच सकता था। पात्रों की उसी भीड़ में कुमार कश्यप ने अपने पात्रों की संरचना की।             बटलर के अतिरिक्त उनका जो पात्र पल्प के क्षितिज पर सूर्य बनकर चमका-वह था ठग जगत का शिष्य-विक्रांत
विक्रांत का नाम ऐसा चमका कि कुमार कश्यप उस दौर के बेताज बादशाह बन गए। आरम्भ उनका इलाहाबाद के किसी प्रकाशन से हुआ थानाम स्मरण नहीं हैकिन्तु जब वे मेरठ पहुंचे तब उनके अंदर विक्रांत नाम का महापरिर्वन हो चुका था। हर वर्ग ने विक्रांत को पसंद किया। विक्रांत- एक महानायक
मेरठ का हर प्रकाशक कुमार कश्यप को छापने का तलबगार था-लेकिन आखिरकार हाथ तो दो ही थे। जितना भी वो लिखते थे-छपने के लिए चला जाता था।
चलिए बताता हूं स्व. कुमार कश्यप जी के गृहजनपद के बारे में।
लाडली कटराशाहगंजआगरा के रहने वाले थे और उनका विवाह मुहल्ला कुंजइटावा में हुआ था।
इटावा पदार्पण हुआ एक बेहतरीन खिलाड़ी के रूप में।
आगरा की फुटबाल की टीम इटावा में मैच खेलने आई थी और उस टीम में कुमार कश्यप एक बेहद फ़ुर्तीले और प्रोफेशनल खिलाड़ी के रूप में आए थे। उनका खेल देखकर इटावा के दर्शक झूम उठे। वे न सिर्फ फुटबाल के खिलाड़ी थे बल्कि उससे भी आगे वे क्रिकेट के भी बहुत अच्छे खिलाड़ी थे। उसी दौरान मुझे ज्ञात हुआ कि एक ऐसा खिलाड़ी आगरा की टीम में है जो अपने आप में एक महान उपन्यासकार भी है।
प्रभावित होने के एक नहीं दो कारण। उसके बाद जब उनका व्यक्तित्व देखा तो देखता ही रह गया। उनके द्वारा हवा में लगाई गई फ़्लाइंग किक आज भी ज़हन में कौंध जाती है। हमारे एक सीनियर खिलाड़ी श्री राम सेवक सिंह चौहान जो कि डिफेंस के अच्छे खिलाड़ी हैंआज भी अपनी जांघ पर श्री कुमार कश्यप जी का फुटप्रिंट लिए घूमते हैं। उनका कथन है कि-पूरन (कुमार कश्यप) ने गोल करते हुए वह किक मारी थी...आज तक उसका निशान मौजूद है।
तो यह है छोटा सा परिचय उस जांबाज़ लेखक का जिसके चाहने वाले आज भी उस लेखक को-और उनके द्वारा रचे गए पात्रों विक्रांतबटलरअमरजीत आदि को भूले नहीं होंगे।
विनीत
हादी हसन/इशरत परवेज़
33, नौरंगाबादइटावा।
मो. 8630059207         

रविवार, 22 अक्टूबर 2017

कुमार कश्यप

कुमार कश्यप अपने समय के एक चर्चित जासूसी उपन्यासकार थे।

कुमार कश्यप के उपन्यास
1. सुहागिन लाश
2. दगाबाज दलाल
3. लाशों का द्वीप
4. इंसाफ की पुकार
5. लुटेरों के देश में
6. देश के दुश्मन
7. जगत और एजेंट जीरो
8. चार चोर
9. सिकंदर की वापसी
10. नवाब हवेली यार जंग
11. दो शैतान
12. तूफान के बेटे ( आशा पॉकेट बुक्स, नयी दिल्ली)
13. आग की कटार
14. मौत की मल्लिका (प्रथम भाग)
15. हत्यारों का शहर
16. लम्बे हाथ कानून के
17. अंधा बादशाह
18. कत्ल, कातिल और कानून
19. काली बस्ती
20. 
21. जहर हूँ मत छुओ
22. मुर्दा बोल उठा


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