लेबल

गुरुवार, 11 नवंबर 2021

प्रायश्चित - रानू, उन्यास समीक्षा

रानू – प्रायश्चित- 1977

सन् 1970 व 1980 ईं के दशक के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार रानू की प्रसिद्धि इतनी ज्यादा थी कि इस समय उनके नाम से कई जाली उपन्यास भी हाथोहाथ बिक जाते थे। उनकी पत्नी सरला रानू भी उन्यासकार थी। पति-पत्नी दोनों एलीगन रोड़ इलाहाबाद में रहते थे। उनकी पत्नी को भी उनकी प्रसिद्धि का भरपूर लाभ मिला। 

प्राश्चित उपन्यास का पहला संस्करण 1977ई. में हिंद पॉकेट बुक्स, दिल्ली से प्रकाशित हुआ था।

इस उपन्यास के मुख्य पात्र निम्नलिखित हैं।

       1.      विकास- नायक, 24 वर्ष, वायलिन वादक

       2.      वन्दना, शबनम- नायिका, नायक के लिये छदम नाम शबनम

       3.      पूमन-  विकास की विधवा और गर्भवती बहन

       4.      माँ- विकास की माँ

       5.      दुर्गाप्रसाद- शहर के प्रसिद्ध सितारवादक और विकास के गुरु

       6.      गौरी- दुर्गाप्रसाद की इकलौती पुत्री और नर्तकी

       7.      अर्चना- वन्दना की बड़ी बहन

       8.      शरद- 12-13 वर्षीय, सेठ सदानन्द की पुत्र

       9.      प्रभा-

    10.    अमृत- प्रभा का पति

    11.    अंजू- वन्दना की सबसे प्रिय सहेली

उस उपन्यास में कुल चार पुरूष और सात स्त्री पात्र हैं।

उपन्यास प्राश्चित का नायक विकास अपने पिता के ना रहने पर  अपनी माँ और विधवा गर्भवती बहन पूनम दोनों का पालन-पोषण क्लर्क की एक मामूली सी नौकरी कर के किसी तरह करता है। विकास एक दक्ष वायलिन वादक भी है। जिसके कारण उसे सेठ सदानन्द के इकलौते पुत्र शरद को सितार सीखाने का काम मिल जाता है।

  विकास को अभी मुश्किल से सितार सीखाते हुये तीन माह भी न बीते होंगे कि वह शरद की बड़ी बहन अर्चना की चीख सुनकर  उसके कमरे में जाता है। वह घायल अर्चना के पेट से जैसे ही चाकू निकालता है तुरंत उसे अर्चना के परिवार वाले अपराधी समझ कर पुलिस के हवाले कर देते हैं। अदालत विकास को आजीवन कारावास की सजा देती है।

  यहाँ तो कहानी सामान्य ढंग से चलती है। वहीं अर्चना के मंगेतर जगदीश का खुलासा उसकी पूर्व प्रेमिका प्रभा वन्दना से कर देती है कि अर्चना का खूनी जगदीश है। इस बात से वन्दना को प्रायश्चित होता है कि उसी के कारण विकास को जेल, उसकी माँ और बहन की मौत हो गयी है।

         इन्ही सब बातों का अहसास करके वह छदम नाम रखकर बुर्क में रहकर विकास की समय-समय पर मदद करती है।

  अब इस से आगे क्या हुआ यह जानने के लिये आपको रानू द्वारा लिखित उपन्यास प्रायश्चित पढ़ना चाहिये।

-           क्या होता है जब नायक को यह पता चलता है कि उसकी मदद करने वाली लड़की शबनम ही वन्दना है?

-           क्या नायक वन्दना को, जिसे से वह नफरत करता है उसे माफ कर पाता है या नहीं?

उपन्यास की कथावस्तु साधारण होते हुये भी उसका समापन बहुत असाधारण है। अतः उपन्यास को पढते हुये जरा भी बोरियत को अहसास नहीं होता।

   मैंने पहली बार रानू के उपन्यास को पढा है बल्कि नाम तो मैंने पहले ही बहुत सुन रखा था। परंतु उनके उपन्यास सहज बाजार में उपलब्ध नहीं है, यह तो केवल शौकीन पाठकगण की मदद से ही पुराने संस्करणों के रूप में मिल पाते हैं। कहते हैं `जहाँ चाह, वहां राह` तो मैंने प्रयास किया और उपन्यास मुझे मिल गया।

     रानू एक सुलझे हुये सामाजिक उपन्यासकार हैं। उपन्यासों के पात्रों के कथोपकथन, भाषा-शैली व भावाभिव्यक्ति भी ने संधे हुये अंदाज में करते हैं ताकि कथा में रोचकता बनी रहे और पाठक उपन्यास के साथ आबद्ध रहे और रानू अपने इस उद्देश्य में सफल भी रहे हैं।

    धन्यवाद

सुरेन्द्र कुमार पटवा

बस्ती, उत्तर प्रदेश

04.11.2021


उपन्यासकार रानू

रानू का परिचय
सरला रानू का परिचय



1 टिप्पणी:

  1. रोचक उपन्यास लग रहा है... रानू के काफी उपन्यास अमेज़न पर भी उपलब्ध हैं और ये उपन्यास भी उधर मौजूद है... जल्द ही पढ़ने की कोशिश रहेगी...

    जवाब देंहटाएं

Featured Post

मेरठ उपन्यास यात्रा-01

 लोकप्रिय उपन्यास साहित्य को समर्पित मेरा एक ब्लॉग है 'साहित्य देश'। साहित्य देश और साहित्य हेतु लम्बे समय से एक विचार था उपन्यासकार...