Friday, June 14, 2019

उपन्यास साहित्य का रोचक संसार-35,36

आइये, आपकी पुरानी किताबी दुनिया से पहचान करायें - 35
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राज भारती जी और यशपाल वालिया ने मेरा और बिमल का सहज स्वागत किया !
फोल्डिंग कुर्सी बिछाकर हम दोनों जम गये तो राज भारती जी ने बिमल से पूछा -"स्क्रिप्ट तैयार है तेरी ?"
"हाँ, लेकर आया हूँ !" बिमल ने कहा ! किन्तु सवाल मुझसे तो किया ही नहीं गया था ! मैं खुद टपक पड़ा जवाब देने को, बोला - "मैं भी लाया हूँ !"
"अच्छा...!" जवाबी आवाज यशपाल वालिया की थी, जो नाटकीय अन्दाज़ में कुर्सी से उठकर खड़े हुए और ऊपर से नीचे मुझे देख, भारती साहब से पंजाबी में बोले -"आपने इधर तो देखा ही नहीं ! इधर भी देख लो ! योगेश जी भी आये हैं ! स्क्रिप्ट भी लाये हैं !"
फिर वालिया साहब बिमल से बोले -"ये क्या मोटे ? तूने अपनी कुर्सी तो भारती साहब के पास रख ली, योगेश जी को पीछे छिपा दिया !"

उपन्यास साहित्य का रोचक संसार-33,34

आइये, आपकी पुरानी किताबी दुनिया से पहचान करायें - 33
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अचानक अपना ही घर मेरे लिए कारागार बन गया !

लेखकों-प्रकाशकों तथा बिमल चटर्जी की विशाल लाइब्रेरी में आनेवाले लोगों से जो रिश्ता बना था, उसकी वजह से घर में मेरा समय कम ही बीतता था !
बहुत बार तो केवल रात का खाना ही घर पर होता था, दिन का भोजन कहीं न कहीं यारों के साथ होता था !

लेकिन...
सब दिन होत न एक समाना !

वह दिन भी अन्य दिनों से अलग था !

सुबह-सुबह की पहली चाय कुमारप्रिय के साथ एक टी स्टाॅल में पीने के बाद अलग हुआ तो बिमल चटर्जी के यहाँ पहुँच गया ! वहाँ से हम साथ-साथ विशाल लाइब्रेरी पहुँचे !

"योगेश जी, भारती पाॅकेट बुक्स का मेरा नाॅवल तो कम्प्लीट होनेवाला है ! आपका 'जगत के दुश्मन' कहाँ तक पहुँचा ?" बिमल ने पूछा तो मैंने बताया - "आखिरी ढलान पर है, जरा-सा धक्का लगाना है, पूरा हो जायेगा !"
बिमल हँस पड़े -"मुझे तो आज और कल, दो दिन लगेंगे ! आप भी पूरा कर लो ! फिर साथ में ही चलेंगे ! ठीक !"
"ठीक !" मैंने कहा !

Thursday, June 13, 2019

के. एम. मोहन

उपन्यास जगत में एक और लेखक के विषय में जानकारी प्राप्त हुयी है। लेखक हैं के. एम. मोहन।

के. एम. मोहन के उपन्यास
1. किरण- एक अभिशप्त हीरा (साधना पॉकेट बुक्स)

उक्त लेखक के विषय में कोई जानकारी उपलब्ध हो तो शेयर करें।
धन्यवाद।





Saturday, June 1, 2019

अभिमन्यु पण्डित लेखकिय

अभिमन्यु पण्डित के प्रथम उपन्यास 'अभिमन्यु का चक्रव्यूह' का लेखकिय ।
परमप्रिय पाठकों,
सादर अभिनन्दन!

जिस तरह किसी भी मां को अपना पहला बच्चा प्यारा होता है, जौहरी को पत्थरों में हीरा प्यारा होता है, गुलशन के महकते फूलों में गुलाब प्यारा होता है, उसी तरह किसी भी लेखक के लिये उसका पहला उपन्यास प्यारा होता है, जिसे वह ताउम्र नहीं भूल पाता, क्योंकि उसी से उसकी पहचान बननी शुरू होती है। मैं अपनी इस प्यारी चीज को आप सबको समर्पित करता हूं। मेरी यह सौगात आपके नाम है। केशव पण्डित जैसे किरदार का जलवा ही समझिये जिसने मुझे प्रेरित किया कि मैं भी अपने टूटे-फूटे शब्दों से इस किरदार को लेकर पूरा केशव पुराण ही लिख सकूं। इस केशव पुराण की यह पहली कृति है, जिसके प्रकाशक हैं—'रवि पॉकेट बुक्स'।


          केशव पण्डित को मुख्य पात्र के रूप में लेकर अनेक उपन्यासों की इस घुड़दौड़ में पहली बार एक लंगड़ा घोड़ा मैदान में उतरा है, जो अभी इस रेस में सबसे पीछे है, अगर जौकी ने इस घोड़े को उसी अन्दाज में दौड़ाया, जिसकी मैंने परिकल्पना की है, तो दौड़ का एक अद्भुत आनन्द आप सब ले सकेंगे। हार-जीत का फैसला भविष्य के गर्भ में है--भविष्य, जिसे न कोई जान सका और न जान सकता है। इस घोड़े पर जो जौकी सवार है, उसका नाम है अभिमन्यु पण्डित और प्रस्तुत उपन्यास है--'अभिमन्यु का चक्रव्यूह'।

Friday, May 31, 2019

पुतली - राजवंश

 पुतली-  राजवंश,
 उपन्यास भाग - एक

खन खन खन खन।
 प्याली फर्श पर गिरकर खनखनाती हुई नौकरानी के पैरों तक आई और टुकड़े-टुकड़े हो गई। नौकरानी के बदन में कंप-कंपी जारी हो गई। उसने भयभीत नजरों से प्याली के टुकड़ों को देखा ओर फिर उस धार को देखा जो चाय गिरने से उसके पैरों के पास से बिस्तर तक बनती चली गई थी। फिर उसकी भयभीत निगाहें आशा के चेहरे पर रुक गईं। आशा का चेहरा गुस्से से सुर्ख हो रहा था। आँखें उबली पड़ रही थीं। वह कुछ क्षण तक होंठ भींचे नौकरानी को घूरती रही, फिर एकदम फूट पड़ी- ‘ईडियट...किस गंवार ने बनाई है यह चाय...?’
  ‘ज...ज...जी...म...मैंने मालकिन!’ नौकरानी भय-भीत लहजे में हकलाई।
           ‘जाहिल गंवार है तू। यह चाय है या जुशांदा-पानी की तरह ठण्डी और शर्बत की तरह मीठी। इससे पहले भी तूने किसी बड़े घराने में नौकरी की है? किस गधे ने नौकर रखा है तुझे?’
  ‘ज...ज...जी...ब...बड़े मालिक ने।' नौकरानी हकलाई।

पम्मी दीवानी

'सीक्रेट सर्विस कार्यालय-मेरठ' से प्रकाशित होने वाली 'पम्मी दीवानी' रोमांटिक उपन्यास लेखिका थी।

पम्मी दीवानी के उपन्यास
1. जा भी जा बेवफा
2. तड़फती जवानी
3. प्यार का मौसम
4. तन सोया मन जागा
5. सावन बहका बाहों में
6. प्यार भरे दिल
7. शोख अदायें सूनी राहें
8. सारी रात लूटती रही
9. सनम उठा लो बाहों में
10. मदहोश जवानी
11. जवानी की आग
12. बलखाई जवानी
13. नंगे रिश्ते नंगे लोग
14. हुस्न के सौदागर
15. यौवन की प्यास
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निरंजन चौधरी

निरंजन चौधरी सत्तर के दशक के चर्चित जासूसी उपन्यासकार रहे हैं।
      इनके पात्र जासूस सम्राट नागपाल, एस.पी. होमीसाईड निरंजन सिंह ठाकुर, कैप्टन दिलीप और सिगार उसमानी आदि होते थे।
           इनके उपन्यासों का कथानक रोचक और दिलचस्प था। इ‌नके उपन्यास 'चंदर पॉकेट बुक्स, सूरत, गुजरात' से प्रकाशित होते रहे हैं।

निरंजन चौधरी के उपन्यास

  1.  तलाश हत्यारे की
  2. अंधेरे का तीर                                 
  3. आखिरी हत्या
  4. बाहरवीं गली का मकान
  5. मैं हत्यारा हूँ
  6. पीले गुलाब
  7. काली रोशनी।
  8. यादें, धुआँ और परछाईयां
  9. मुर्दे की वापसी
  10. जानवरों का हंगामा
  11. दोहरा आदमी

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