आइये, आपकी पुरानी किताबी दुनिया से पहचान करायें - 23
=============================================
आबिद रिजवी मेरे और बिमल चटर्जी के लिए उस दिन से पहले महज़ एक नाम था, जिसकी हमने बहुत बार विभिन्न सन्दर्भों में चर्चा सुनी थी ! न केवल लालाराम गुप्ता और राज भारती जी से, बल्कि प्रकाशन जगत के कई अन्य दिग्गजों से ! एक बार जनाब फारुक अर्गली ने भी आबिद रिजवी का नाम लिया था, तब वह बिमल चटर्जी से एक विशेष चर्चा कर रहे थे !
मजे की बात यह कि तब तक फारुक अर्गली कभी भी आबिद रिजवी से मिले नहीं थे !
फारुक साहब ने बिमल से कहा था -"बिमल, मेरे विचार से जासूसी साहित्य और पाॅकेट बुक्स में हिन्दी में लिखनेवाले बंगाली लेखक अभी तक तो अकेले तुम्हीं हो !"
बिमल की मुस्कान बड़ी ही दिलफरेब थी ! वह मुस्कान बिखेरते हुए बोले -"हाँ, वरना जासूसी में तो आपके मुसलमान लेखकों ने हिन्दी पर पूरा कब्जा कर रखा था !"
=============================================
आबिद रिजवी मेरे और बिमल चटर्जी के लिए उस दिन से पहले महज़ एक नाम था, जिसकी हमने बहुत बार विभिन्न सन्दर्भों में चर्चा सुनी थी ! न केवल लालाराम गुप्ता और राज भारती जी से, बल्कि प्रकाशन जगत के कई अन्य दिग्गजों से ! एक बार जनाब फारुक अर्गली ने भी आबिद रिजवी का नाम लिया था, तब वह बिमल चटर्जी से एक विशेष चर्चा कर रहे थे !
मजे की बात यह कि तब तक फारुक अर्गली कभी भी आबिद रिजवी से मिले नहीं थे !
फारुक साहब ने बिमल से कहा था -"बिमल, मेरे विचार से जासूसी साहित्य और पाॅकेट बुक्स में हिन्दी में लिखनेवाले बंगाली लेखक अभी तक तो अकेले तुम्हीं हो !"
बिमल की मुस्कान बड़ी ही दिलफरेब थी ! वह मुस्कान बिखेरते हुए बोले -"हाँ, वरना जासूसी में तो आपके मुसलमान लेखकों ने हिन्दी पर पूरा कब्जा कर रखा था !"








