कत्ल की सौगात - राहुल
उपन्यास अंश
चांदनी रात भी इतनी भयानक हो सकती है, सीमा ने सपने में भी नहीं सोचा
था। भागते-भागते उसकी सांस फूल गई थी और शरीर का अंग-अंग थकावट से इस तरह टूटने लगा था कि उसे लगा वह अगले ही पल धमाके से बम की तरह फट जाएगी और अंग-अंग पत्थरों की तरह नीचे घाटी में लुढ़कता हुआ अपना अस्तित्व खो देगा 'हे भगवान!' सीमा पीड़ा और दुःख से पसीने में नहाई हुई आकाश पर
चमकते चांद को देखकर चीख पड़ी 'अरे रक्षा करो भगवान... मुझे इन राक्षसों से बचाओ...।'तभी उसे ठोकर लगी पर वह औंधे मुंह गिरी। अगर वह अनायास हाथ न टिका देती तो उसका चेहरा चट्टान से टकराकर कीमा बन जाता।
"धांय!"
ठीक उसी पल एक गोली सनसनसाती आई और उसके सिर के बालों को जलाती हुई निकल गई।
