अरुण आनंद - एक नाम की पहचान, जो खुद को ही रास न आई।
संस्मरण- रविन्द्र यादव
संस्मरण- रविन्द्र यादव
साहित्य देश इस बार 'संस्मरण स्तम्भ' में लेकर आया है। Ghost Writer रवीन्द्र यादव जी का मार्मिक संस्मरण। जो उनके लेखन के साथ-साथ जासूसी उपन्यासकार अरुण आनंद के जीवन के कुछ पृष्ठों से रूबरू करवाता है, वहीं लोकप्रिय साहित्य के नेपथ्य के पीछे छिपे काले सच को सामने लाता है।
मुझे उम्मीद है इस भावुक संस्मरण को पढकर आपकी आँखें नम हो जायेंगी।।
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आज पाकेट बुक्स के कारोबार से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप में जुड़े गिनती के ही ऐसे लोग बचे होंगें जिन्हे 1990 का वह सुनहरा दौर याद होगा, जो अब कभी लौटकर नहीं आएगा। उसी दौर के एक किरदार का नाम था अरुण आनन्द.
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| उपन्यासकार- अरुण आनंद |
मैं एक कामयाब लेखक बनने का बचकाना सपना साथ लेकर पैदा हुआ था और हताशा के साथ बेतहाशा धक्के खाता हुआ 1996 में आखिरकार ‘राजा पाकेट बुक्स तक जा पहुंचा था।
