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गुरुवार, 24 अगस्त 2023

खाली आंचल- सुरेश चौधरी, उपन्यास समीक्षा

उपन्यास - खाली आँचल
लेखक -   सुरेश चौधरी, 
उपन्यास समीक्षा- सूरज शुक्ला

हा विधाता! क्यों दिए कोमल हृदय, 
हर जरा सी बात पर होता सदय, 
सह न जाता, यह कठिनतम ताप है!
सच कहूँ, संवेदना अभिशाप है। 
- सूरज 
पर...वह जरा सी बात न थी... 
आकाश को आकाश भर दुख मिले, धोखे मिले, दर्द मिला, और यह सब उन्होंने दिया जो उसके अपने लगते थे, जिनके लिए उसने अपने सुख, अपनी खुशियां , अपनी सारी कामनायें त्याग दी। 
कहते हैं, प्यार में आदमी अंधा हो जाता है, आकाश भी हुआ पर उसके अंतर्मन में वह अंतर्दृष्टि मौजूद थी, जिससे वह सही-गलत का आकलन कर सकता था, उसने किया भी और हमेशा करता रहा और यही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुई।


एक बार‘विम्मी’ दी ने मुझसे कहा था, ‘भाई, कोई सही या गलत नहीं होता है, सब परिस्थितियों का खेल है, जो आज सही है, वह कल गलत लगेगा और जो आज गलत है वह कल सही लगेगा’ और सच कहूँ तो लगभग यही आकाश के साथ हुआ। 
     उसने हमेशा अपनों की खुशियों को केंद्र मे रख कर फैसले लिए, अपनी खुशियों को दरकिनार करता रहा, रोता रहा, कलपता रहा और रोते कलपते ही विदा हो गया पर जिनके लिए उसने ये सब किया, उन पर रत्ती भर भी फर्क न पड़ा। 
कौन करता है ऐसा? शायद होते हैं कुछ लोग, जिन्हें खुद से ज्यादा औरों की फिक्र होती है, उन्ही लोगों मे एक था ‘आकाश’ 
‘खाली आँचल’ सुरेश चौधरी सर का बहुत  इमोशनल सामाजिक उपन्यास है जो प्रेम पर आधारित है, इस उपन्यास को पढ़ते हुए एक और बात पता चलती है, वह यह कि एक प्रेमी तब भी गलत साबित होता है जब वह अपनों के लिए अपने प्रेम की कुर्बानी दे देता है और कुर्बानी न देने की स्थिति में तो वह गलत है ही। 
       उपन्यास की भाषा सरल और प्रवाह पूर्ण है, आप इसे पढ़ते हुए कहीं भी बोरियत महसूस नहीं करेंगे, इसके उलट इसका कथानक आपको पूरी तरह बांध लेगा। 
      संवादों में आप पाएंगे कि जहाँ नई उम्र के पात्रो में जोश, जल्दबाजी और हर उस चीज का विरोध करने की आतुरता भरी हुई है, जो उनके मनमुताबिक नहीं है, वहीं उम्रदराज पात्रों की गंभीरता और अनुभव की झलक साफ दिखती है और यही लेखक का प्लस पॉइंट भी है। हालांकि पूरा उपन्यास ही प्लस पॉइंट्स से भरा हुआ है, दृश्य आँखों के सामने खिंच से जाते हैं, आदर्शवाद और व्यावहारिकता की टक्कर और भावनाओं के ज्वार-भाटे में शनैः शनैः पाठक कथानक मे डूबता चला जाता है। 
      इससे ज्यादा और क्या कहूँ? अच्छा होगा आप यह उपन्यास खुद पढ़ें व महसूस करें, बताएं कि कौन गलत रहा और कौन सही रहा। 
 उपन्यास अंश
'तुम केवल अपने प्यार को तो पा सकोगे... बाकी सब कुछ हार जाओगे... हम तुम्हें कभी क्षमा नहीं कर पायेंगे... हम तुम्हें कभी क्षमा नहीं कर पायेंगे..।'' ये शब्द बार-बार आकाश के कानों में गूँजने लगे, जिनकी जुबान कभी पत्थर की लकीर हुआ करती थी... क्या जवाब देंगे... क्या जवाब देंगे... हम तुम्हें कभी क्षमा नहीं कर पायेंगे...।' आकाश के मस्तिष्क में जबर्दस्त उथल-पुथल मच गई, क्या करे... क्या न करे- आकाश उलझ कर रह गया। आकाश सोचने लगा, अगर प्यार को छोड़ता हूँ तो अनुपमा का क्या होगा... क्या मैं बिना अनुपमा के रह पाऊँगा.... शायद नहीं... मैं...नहीं रह पाऊँगा...लेकिन अनुपमा की मोहब्बत के कारण घर वालों की नफरत... क्या होगा...?' यह सोचते-सोचते आकाश स्वयं में ही बड़बड़ाने लगा।
आप इस उपन्यास को shopizen से मँगवा कर पढ़ सकते हैं और अगर आप ईबुक में इसे पढ़ना चाहते हैं तो वह भी मात्र 40/- रुपये मे shopizen पर उपलब्ध है, लिंक नीचे दे रहा हूँ। 
https://shopizen.app.link/OwMxLCysTzb
धन्यवाद 
- सूरज शुक्ला

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