लेबल

गुरुवार, 9 नवंबर 2017

रवि माथुर

रवि माथुर

रवि माथुर के उपन्यास
1. आखिरी औरत
2. हत्यारे हाथ
3. जहरीले होंठ
4. अंधा सौदा
5. जीने का हक
6. कत्ल के बाद
7. जिंदगी का जहर
8. तेरह जून की रात    (थ्रिलर विशेषांक)
9. नरम गोश्त
10. लोहे के कंगन        (थ्रिलर विशेषांक)
11. हत्यारी हड्डी
12. डिब्बा बंद लाशें  (थ्रिलर विशेषांक)
13. कानून का पुतला ( थ्रिलर विशेषांक)
14. इंसाफ का खुदा
15. कब्र का बिज्जू
16. नर्क का शैतान
17. कांपता शहर       ( थ्रिलर विशेषांक)
18. शहरी गुण्डे          ( थ्रिलर विशेषांक)
19. जादूगरनी का जाल
20. कांटों का ताज  (क्रम 01 -20 तक, थ्रिलर सीरिज)
21. मनहूस मखौटा     (सुंदरी सीरिज)
22. मुसीबत का मारा  (सुंदरी सीरिज)
23. मोम का मुर्दा        (सुंदरी सीरिज)
24. दर्द की दहशत      (राजा-लैला सीरिज)
25. दांत का जहर       (राजा-लैला सीरिज)
26. मानव बम            (राजा-लैला सीरिज)
27. फिरौती का फंदा    (राजा-लैला सीरिज)
28. ब्राउन शुगर          (राजा-लैला सीरिज)
29. लाल बादशाह       (राजा-लैला सीरिज)
30.
उपर्युक्त सभी उपन्यास दुर्गा पॉकेट बुक्स मेरठ से प्रकाशित हैं।

रवि माथुर
428/15 B,
ईश्वरपुरी, मेरठ- 250002

बुधवार, 8 नवंबर 2017

नये उपन्यास

नमस्कार मित्रो,
  इस पोस्ट के माध्यम से कुछ नये उपन्यासों की चर्चा की जा रही है जो शीघ्र बाजार में उपलब्ध होंगे।

1. ए टेरेरिस्ट- इकराम फरीदी।
      इकराम फरीदी का नया उपन्यास ए टेरेरिस्ट रवि पॉकेट बुक्स से बाजार में उपलब्ध हो गया है।
  फरीदी जी का ' गुलाबी अपराध' का भी शीघ्र रिप्रिंट बाजार में उपलब्ध होगा।
2. मिशन आश्रम वाला बाबा- टाइगर।
     हरियाणा निवासी टाइगर (JK VERMA) का उपन्यास ' मिशन आश्रम वाला बाबा' की स्क्रिप्ट प्रकाशक के पास भेज दी गयी है, जो की शीघ्र बाजार में उपलब्ध होगा।
पाठकों को इस उपन्यास का काफी लंबे समय से इंतजार था।
प्रकाशक- राजा पॉकेट बुक्स

3. वीर की विजय यात्रा- दिनेश चारण।
     दिनेश चारण का ऐतिहासिक फिक्शन वीर की विजय यात्रा सूरज पॉकेट बुक्स से अतिशीघ्र बाजार में आने को तैयार है।
ध्यान रहे की दिनेश चारण का यह उपन्यास ONLINE प्रकाशन के रूप में काफी समय से चर्चा में है। प्रिंट रुप में पाठकों के समझ पहली बार आ रहा है ।

4. वन शाॅट - ली चाइल्ड (अनुवाद)
     प्रसिद्ध अनुवादक शबा खान जी द्वारा ली चाइल्ड के प्रसिद्ध अंग्रेजी उपन्यास का हिंदी अनुवाद सूरज पॉकेट बुक्स ला रहा है।

5. मुर्दे की जान खतरे में - अनुराग कुमार जीनियस
   अनुराग कुमार जीनियस का बाल उपन्यास हिंदुस्तान पेपर बुक्स से शीघ्र बाजार में उपलब्ध होगा।
इसके अलावा अनुराग जी का एक उपन्यास सूरज पॉकेट बुक्स से भी आने वाला है।

6. अगिया बेताल- परशुराम शर्मा
अपने समय के बहुचर्चित उपन्यासकार परशुराम शर्मा का उपन्यास 'अगिया बैताल' का रिप्रिंट सूरज पॉकेट बुक्स ला रही है। यह एक हाॅरर उपन्यास है।

शनिवार, 4 नवंबर 2017

अरुण अंबानी

कानपुर के निवासी अरुण अंबानी लोकप्रिय उपन्यास जगत में जासूसी उपन्यास लेखक थे।
  इनका एक प्रसिद्ध पात्र था रंजन दूबे
रंजन दूबे:-
   महाहरामी, महाशातिर, महामक्कार, इक्कीस कत्ल करने के बाद उसने कत्लों की गिनती करनी छोङ दी थी।  इनके बारे में एक बात मशहूर है कि सांप पर विश्वास कर लेने वाला तो हो सकता है एक बार जिंदा बच सकता है, लेकिन रंजन दूबे पर विश्वास किया, वो तो मरा ही मरा।

  इनके उपन्यासों से संबंधित हालांकि अभी तक कोई विशेष जानकारी प्राप्त नहीं हो पायी।
इनके उपन्यास सूर्या पॉकेट बुक्स से प्रकाशित हैं।

अरुण अंबानी के उपन्यास
1. खलीफा
2. खजाने का साँप
3. दौलत सबकी दुश्मन
4. मौत का ताज
5.

संपर्क लेखक-
अरुण अंबानी
339/12,
बापू नगर, कानपुर।

- उक्त लेखक के विषय में अगर किसी के पास कोई भी जानकारी हो तो हमसे अवश्य शेयर करें।
- 9252829634

प्यारे लाल आवारा - संस्मरण

प्यारे लाल 'आवारा ' - संस्मरण

इलाहाबाद के कीडगंज में निवास और प्रकाशन था । अत्यन्त निर्धन , बैकवर्ड क्लास परिवार में जन्म हुआ था।
      सिरकी  बाँस को छीलकर उसके परदे बनाना उनके परिवारी जनों का कार्य था। जब मैं उनके सम्पर्क में आया तो वे बी.ए. पास, चालीस साल के करीब सुखी परिवार वाले थे, पर बहुत अमीर नहीं।
   रूपसी प्रकाशन, बिरहाना रोड, कीडगंज , इलाहाबाद पता लिखा जाता था। उस दौर में निकलने वाले नाॅवल,जासूसी सामाजिक सभी मैगज़ीन कहलाते थे। हर माह निश्चित तिथि को निकलते थे। ज़रूरी इसलिए होता था क्योंकि पोस्टल सुविधा प्राप्त होती थी। बंडल बनाकर,पोस्ट आफिस से आए बैगो में भरकर, रिक्शे पर लादकर पोस्ट आफिस ले जाने कि प्रक्रिया अपनाई जाती थी । एक रूपया पच्चीस पैसे व पचहत्तर पैसे, इस दो कैटेगरी में मैगजीन होती थी।  प्यारे लाल जी के यहाँ से एक उनका लिखा उपन्यास हर माह रूपसी(पत्रिका) में निकलता था, दो अन्य पचहत्तर पैसे वाली मैगज़ीने -- रहस्य व रोमांच होती थी।
       प्यारे लाल जी खुद प्रकाशन के काम में दखलअंदाजी करना पसन्द न करते थे। मालिक वे ही थे, पर सारा काम उन्होंने अपने छोटे भाई श्याम लाल को सौंप रखा था। वे सुबह आठ बजे सोकर उठने के बाद नीचे आफिस में आते थे । आफिस,एक तरह से उनकी बैठक थी। जब तक वे बैठक में हैं,बैठक चलती रहती थी। बैठक खाली है तो मानिये प्यारे लाल जी नहीं है। रिक्शे पर घूमने, मिलने- जुलने निकल गये। निकल गये तो निकल गये, कोई बता नहीं सकता कि कब आयेंगे।  रिक्शे के अलावा कोई और सवारी का साधन उन दिनों न था। कार, स्कूटर ,मोटर साइकिल...राम का नाम लीजिए , या तो साईकिल कुछ अच्छी हैसियत तो रिक्शा । मैं सन् साठ- पैंसठ की बात कर रहा हूँ। बड़े सादा मिजाज़, लम्बे बाल पीछे को काढ़े हुए। एक बार कंघा मारकर ऊपर से उतर आए तो फिर सारा दिन हाथ से या झटककर बालों को ऊपर ले जाने का खुद का स्टाइल।  चौड़ी मोहरी का पायजामा, लम्बा साफ़-सफ़्फाफ़ कुरता, पैरों में काली, अँगूठे वाली चप्पल । सफेद कुरते- पायजामे से हमेशा एक सा प्यार। कभी किसी और पोशाक में नहीं देखा । घर- आफ़िस में हैं तो लिज़मिज़ा कुरता- पायज़ामा भी चलेगा।  बाहर जा रहें हैं तो इस्त्री युक्त। कपड़े घर मे धुलते थे, इसकी सनद यह की बालकनी मे हर दिन धुला कुरता- पायजामा एक जोड़ी सूखता नज़र आता था। कुरता- पायजामा मोटे सूत का। जाड़े में भी वही पोशाक, अलबत्ता बस खादी की जैकेट का इज़ाफा हो जाता था।
     ‌कद लम्बा, छ: फुट से निकलता हुआ,  दो-तीन इँच ऊपर । सनद यह है कि जब उनके करीब जाकर खड़ा होता तो उनके कंधे तक खुद को आँकता।
    जब मैं उनके पास जाता-आता था तो एक नौ-दस वर्षीय पुत्री के पिता थे। पुत्री का नाम नीता। मैं सुबह आठ बजे पहुँचा नहीं कि वे उतरकर आ रहे होते या मिनट दो मिनट बाद आ जाते। गुरू- शिष्य की गरिमा युक्त औपचारिकता का निर्वाह। मेज के पीछे हमेशा एक जगह मौजूद कुर्सी पर आसीन होते ही हल्की आवाज़ में पुकार--" श्याम... "
और मैंने हाथ बढ़ाकर कहा--" मैं लाता हूँ। "
उन्होंने नोट बढ़ाया और मैं सिगरेट लेने के लिए क़दम बढ़ाए। विल्स सिगरेट पीते थे। मैंने पैकेट लाकर दी , सिगरेट शुरू।
फिर आवाज़ दी,"नीता "
नीता चाय के दो कप के साथ हाज़िर। एक कप मेरी ओर बढ़ाई , दूसरी खुद शुरू। इस तरह शुरू हुई गुरू जी की दिनचर्या। रात को लिखते थे। कभी सारी-सारी रात, इस बात की चुगली उनकी सुबह आँखों की सुर्खी, सोई- सोई आँखें कर देती थीं। शाम को सिविल लाइन स्थित काफी हाउस में जाना ज़रूरी होता था। उस दौर में सैकड़ों साहित्यकार के रूप मे ख्याति प्राप्त हो, लुगदी साहित्य का यशस्वी कथाकार हो, कवि हो या राजनीति का नया-पुराना खिलाड़ी...काफी हाऊस में देखा जाना शान की बात समझता था ।....आगे फिर कभी..

@ आबिद रिजवी जी के स्मृति कोष से।

आबिद रिजवी©
- लेखक, प्रकाशक की अनुमति के बिना इस आलेख का अन्यत्र किसी भी प्रकार का प्रकाशन अमान्य और कानूनन अपराध है।

शनिवार, 28 अक्टूबर 2017

विशाल

विशाल नामक उपन्यासकार के विषय में अभी तक कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं हो पायी।

विशाल के उपन्यास
1. वह देवी थी (सुबोध पॉकेट बुक्स)

कुसुम गुप्ता

कुसुम गुप्ता के विषय में अभी तक कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं हो पायी। प्राप्त जानकारी अनुसार कुसुम गुप्ता जी के उपन्यास 'सुबोध पॉकेट बुक्स, दिल्ली' से प्रकाशित होते थे।



कुसुम गुप्ता के उपन्यास

  1. लाश की गवाही ( सुबोध पॉकेट बुक्स)
  2. नर पिशाच
  3. वार्डरोब में हत्या
  4. मौत के साए
  5. जहरीले सांप
  6. अंधा महल
  7. लाश की गवाही


शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2017

नाना पण्डित- जितेन्द्र मिश्र

वेदप्रकाश शर्मा के एक सदाबहार पात्र केशव पण्डित की जितनी नकल लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में हुयी है उतनी शायद ही किसी पात्र की हुयी हो।
केशव पण्डित नाम से मिलते- जुलते असंख्य लेखक व पात्र उपन्यास जगत में आ गये।
  ऐसे ही एक लेखक हैं नाना पण्डित। नाना पण्डित का वास्तविक नाम जितेन्द्र मिश्र है और ये उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले से संबंध रखते हैं।
  नाना पण्डित ने भी केशव पण्डित को आधार बनाकर दुर्गा पॉकेट बुक्स से केशव पण्डित सीरीज नाम से उपन्यास लिखने आरम्भ किये।
लेखक का पता-
नाना पण्डित
मो. मुन्नूगंज गांधी विद्यालय के पीछे,
गोला गोकरन नाथ,
जिला- लखीमपुर खीरी,
उत्तर प्रदेश- 262802
नाना पण्डित के क्रमशः उपन्यास
1. डंक (प्रथम उपन्यास)
2. सबसे बङा डाका
3. जिगैलो
4. जंग
5. सब मरेंगे बारी-बारी
6. कत्ल का कारीगर
7. मर गये मारने वाले
8. गोली तेरे नाम की (आठवा उपन्यास)
9. वारदात              ( नौवां उपन्यास )
10. केशव पण्डित लङेगा वकील से।
उक्त लेखक के विषय में अगर किसी के पास कोई और जानकारी हो तो हमसे अवश्य शेयर करें।
धन्यवाद ।
- 9509583944

रविवार, 22 अक्टूबर 2017

प्यारे लाल आवारा

लोकप्रिय सामाजिक उपन्यासों में प्यारे लाल 'आवारा' का नाम चर्चित रहा है। इलाहाबाद निवासी प्यारे लाल 'आवारा' ने अपने लेखन की शुरुआत कुशवाहा कांत के सानिध्य में चिनगारी प्रकाशन के अन्तर्गत की थी।

 चिनगारी प्रकाशन से प्यारे लाल 'आवारा' का प्रथम उपन्यास 'राज-रानी' प्रकाशित हुआ था। सन् 1957 में प्यारे लाल 'आवारा' ने स्वयं का 'रूपसी प्रकाशन' आरम्भ किया किसके अंतर्गत स्वयं के और अन्य लेखकों के उपन्यास प्रकाशित होते रहे।

  रूपसी एक मासिक पत्रिका थी। जिसमें उपन्यास प्रकाशित होते थे।

प्यारे लाल आवारा के उपन्‍यास
1. पगडंडी
2. अँगङाई
3. जाङे की रात
4. अनारकली
5. सबेरा (सवेरा)
6. धङकन
7. खण्डहर
8. भँवर
9. घायल
10. सुखे पत्ते
11. शबनम
12. हमारी गलियां
13. अमावस
14. मोहमाया
15. पायल
16. सोलह अगस्त
17. मुमताज
18. पीली कोठी
19. रोते नैना

20. राज-रानी (लेखक का प्रथम उपन्यास)
21. बस- अड्डा (लेखक का सौवां उपन्यास)

प्यारे लाल आवारा 

कुशवाहा कांत का परिवार

    हिंदी लोकप्रिय उपन्यास जगत के एक जगमगाते सितारे थे कुशवाहा कांत। लेकिन यह सितारा असमय ही पाठकों को अलविदा कह गया।
कुशवाहा ने कुल 35 उपन्यास लिखे थे।
कुशवाहा कांत के पश्चात इनकी पत्नी गीतारानी ने भी लेखन क्षेत्र में हाथ आजमाया। 
कुशवाहा कांत के छोटे भाई जयंत कुशवाहा भी उपन्यास लेखक थे।
जयंत कुशवाहा के पुत्र सजल कुशवाहा ने भी सामाजिक और जासूसी दोनों तरह के उपन्यास लिखे थे।
हालांकि गीतारानी कुशवाहा, जयंत कुशवाहा और सजल कुशवाहा के उपन्यासों की संख्या का कोई पता नहीं की इन्होंने कितने उपन्यास लिखे।
    लेकिन कुशवाहा कांत के उपन्यासों के साथ- साथ  जयंत कुशवाहा के उपन्यास भी पाठकों के पास आज भी उपलब्ध हैं।
    कुशवाहा परिवार एक ऐसा परिवार है जिसने उपन्यास जगत को चार उपन्यास लेखक दिये।

-

गीतारानी कुशवाहा

श्रेष्ठ सामाजिक उपन्यासकार कुशवाहा कांत के बाद उनकी पत्नी भी लेखन क्षेत्र में आयी।
   हालांकि उनके द्वारा लिखे गये उपन्यासों की पूर्ण जानकारी तो उपलब्ध नहीं है।

गीतारानी कुशवाहा के उपन्यास

  1. सरोज (कुशवाहा कांत के उपन्यास 'नीलम' के आगे की कहानी)
  2. चिराग बुझ गया
  3. देशभक्त गद्दार
  4. स्मगलर
  5. मैली आँखें
  6. प्यार मुस्कुरा उठा
  7. फूल और पत्थर
  8. आँधी, तूफान, सवेरा
  9. गरम खून, ठण्डा पानी
  10. काली, गोरी साँवली
  11. समाज का पाप
  12. डॉक्टर सुप्रिया





   गीतारानी कुशवाहा जी के कुछ उपन्यासों के विषय में एक संशय है। और वह संशय यह है की उक्त सूची में शामिल कुछ उपन्यास जयंत कुशवाहा जी की उपन्यास सूची में भी शामिल हैं। जैसे 'स्मगलर' और 'डॉक्टर सुप्रिया' जैसे उपन्यास जब तक प्राप्त नहीं हो जाते तब तक यह विश्वास के साथ नहीं कहा जा सकता की इनके रचनाकार कौन हैं।
किसी पाठक मित्र के पास गीतारानी कुशवाहा जी से संबंधित कोई जानकारी हो तो हमसे संपर्क करें।
Email -  sahityadesh@gmail.com


Featured Post

मेरठ उपन्यास यात्रा-01

 लोकप्रिय उपन्यास साहित्य को समर्पित मेरा एक ब्लॉग है 'साहित्य देश'। साहित्य देश और साहित्य हेतु लम्बे समय से एक विचार था उपन्यासकार...