साहित्य मस्तिष्क के संवाद का विषय है- सत्यपाल
साक्षात्कार श्रृंखला -11
लोकप्रिय उपन्यास साहित्य के क्षेत्र में ऐसे अनेक सितारे हुये हैं जिन्होंने अपनी कलम से उपन्यास साहित्य को अनमोल मोती प्रदान किये हैं और इस क्षेत्र में एक विशेष पहचान स्थापित की है।
साहित्य देश अपने साक्षात्कार स्तंभ में लोकप्रिय साहित्य के सामाजिक उपन्यासकार 'सत्यपाल' जी का साक्षात्कार यहाँ प्रस्तुत कर रहा है, जिसमें अपने लेखन, तात्कालिक समय और अपने उपन्यासों के संबंध में विस्तृत चर्चा की है।
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| सत्यपाल |
- मेरा पूरा नाम सत्यपाल चावला है। मेरा जन्म अप्रैल 1955 में एक कृषक परिवार में गाँव बनियानी, जिला रोहतक, हरियाणा, भारत में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही हुई। तत्पश्चात परिवार दिल्ली आ गया। शेष शिक्षा दिल्ली में ही हुई। लिखने का शौक कहिए या जुनून बचपन से ही था। तुकबंदी करना छटी कक्षा से ही शुरू हो गया था। हायर सेकंडरी तक आते-आते निबंध, कहानी और मुक्त कविताएं इत्यादि भी लिखना शुरू कर दिया था। क्योंकि परिवार निम्न मध्यम वर्ग में था, माता-पिता अधिक पढ़े-लिखे नहीं थे। छोटे स्तर की एक डेयरी से भरण-पोषण चलता था। मैं पढ़ने में तेज था। अपने से छोटी क्लास के बच्चों को ट्यूशन देने के कारण मेरा स्वयं का शिक्षा का आधार भी मजबूत हो जाता था और कुछ आय भी हो जाती थी। समाज के लिए उपयोगी था इसलिए मुझे प्यार ओर आदर मिलता था। स्कूलिंग के उपरान्त हालांकि मुझे पहली ही लिस्ट में दिल्ली विश्वविद्यालय के डी.ए.वी. कॉलेज में बी.काम.आनर्स में प्रवेश मिला किंतु आर्थिक एवं पारिवारिक परिस्थितियों के कारण मुझे आगे की पढ़ाई पत्राचार द्वारा करनी पड़ी। मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी.काम. कर ली। घर की तरफ से स्पष्ट आदेश था कि पहले नौकरी प्राप्त करो। और कागज़ काले (लिखना) करना बंद करो। ट्यूशन, नौकरी के लिए कम्पीटीशन, सैल्फ स्टडी और लेखन सब साथ-साथ चले। कुछ नौकरियां कुछ-कुछ दिन ही चली। स्टेट बैंक की कलैरिकल परीक्षा और साक्षात्कार उत्तीर्ण कर लिया तब लगा कि अब चैन मिला। इधर शादी भी हो गई। एक पुत्री और दो पुत्रों जन्म हुआ आज मैं रिटायर्ड हूँ। परिवार सैटल है। मैं हिन्दी में स्नातकोत्तर करना चाहता था। मैंने रिटायर होने के बाद इग्नू से हिन्दी स्नातकोत्तर प्रथम श्रेणी में पास कर लिया।




