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शनिवार, 3 जुलाई 2021

एक थे गुलशन नंदा- एस. डी. ओझा

                एक थे गुलशन नंदा 
उपन्यास लेखन में जो नाम गुलशन नंदा ने कमाया वह अन्यत्र दुर्लभ है। एक ज़माना था जब हम कोर्स की किताबों में गुलशन नंदा के उपन्यास रख कर पढ़ा करते थे। रेलवे स्टेशन व बस स्टॉप के बुक स्टालों पर गुलशन नंदा के उपन्यासों की भरमार रहती थी।  
   हर कोई इन बुक स्टालों पर यही पूछता था -''गुलशन नंदा का कोई नया उपन्यास आया क्या?" 
 
मैंने गुलशन नंदा का सर्व प्रथम 'जलती चट्टान' उपन्यास पढ़ा था  और उसके बाद मैं उनके उपन्यासों का मुरीद हो गया। 
      गुलशन नंदा के उपन्यासों की जो धूम भारत में मची कि उसके आगे इब्ने सफी बी ए के जासूसी उपन्यास फीके पड़ने लगे।  इनके उपन्यासों पर धड़ाधड़ फ़िल्में बनने लगीं। उस समय के गुलशन नंदा कीर्तिमान के पर्याय व प्रतीक हो गए थे। कटी पतंग, दाग, झील के उस पार  और नया जमाना आदि  सुपर डुपर हिट फिल्मों के अतिरिक्त कुल 20 सिल्वर जुबली फिल्में इनके उपन्यासों पर बन चुकी हैं। इनके मरणोपरांत फ़िल्म 'पाले खां' भी हिट रही थी।  

रविवार, 24 फ़रवरी 2019

लेखक की कलम से- गुलशन नंदा

  ब्लॉग पर एक नया स्तम्भ आरम्भ किया है। जिसके अंतर्गत लेखकों के लेखकिय प्रकाशित किये जायेंगे। इस स्तंभ का आरम्भ गुलशन नंदा के एक लेखकिय से कर रहे हैं। जिसमें गुलशन नंदा ने नकली उपन्यास और स्वयं के उपन्यासों में लगे अश्लीलता के आरोपों पर लिखा है।

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प्रिय पाठक बंधु,
       यह मेरा सौभाग्य है कि आप सबके सहयोग एवं विश्वास के कारण मेरा नाम आज भारत के एक छोर से दूसरे छोर तक, बल्कि निदेशक में बसने वाले हिन्दी पाठकों में भी प्रिय है। यह भी आपके सहयोग एवं स्नेह का फल है कि मेरी रचनाओं को आज हिन्दी उपन्यासों में सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकें होने का गर्व प्राप्त हुआ है। मुझे आशा है कि मेरी प्रत्येक रचना को आप अपनी आशाओं के अनुकूल ही पायेंगे।
           किन्तु अधिक लोकप्रियता कभी-कभी परेशानी का कारण भी बन जाती है। तीन-चार वर्षों तक मेरे नाम से प्रकाशित जाली उपन्यासों ने मेरे मन को अशांत बनाये रखा। केन्द्रीय गुप्तचर विभाग, पाठकों एवं विक्रेताओं के अमूल्य सहयोग ने अब मुझे जाकर इस अशांति से मुक्ति दिलाई।
               अब एक नया लांझन इस लोकप्रियता के कारण मुझ पर लगाया जा रहा है। मेरे उपन्यासों के बारे में कुछ तथाकथित आलोचक तथा लेखक यह भ्रम फैला रहे हैं कि मेरी लोकप्रियता अश्लील एवं सैक्स से भरपूर उपन्यास लिखने हुई है।  यह एक अजीब बात है कि मेरे उन उपन्यासों में भी, जिनमें रोमांस न के बराबर है साहित्यकारों को अश्लीलता दिखाई देती है। संभव है, मेरी कुछ प्रारम्भिक रचनाओं में, जो मैंने विद्यार्थी जीवन में लिखी थी, रोमांस का कुछ अंश अधिक हो, किंतु बाद में‌ लिखे ग ए मेरे अधिकतर उपन्यासों के संबंध में इस प्रकार का आरोप उचित नहीं । ऐसा प्रतित होता है है, जैसे उन्होंने मेरे उपन्यास पढे बिना इस प्रकार के छींटे कसे हैं।
                    जब तक मुझे अपने पाठकों का स्नेह एव विश्वास प्राप्त है, इस प्रकार के लांछन मुझे निरुत्साह नहीं कर सकते। फिर भी मेरे आलोचकों से मेरा निवेदन है कि यदि वे मेरे उपन्यास पढकर स्वस्थ आलोचना करें तो मेरे लिए वह पथ-प्रदर्शक हो सकती है। लोकप्रियता के कारण यह अनुमान लगा लेना कि उपन्यास अश्लील होगा- सरासर अन्याय है, जिसके बारे में मैं इतना कह सकता हूँ कि कोई भी पुस्तक लाखों की संख्या  में तभी बिक सकती है यदि वह हर घर में खुलेआम पढी जा सके। अश्व पुस्तक न माँ बेटी के सामने पढ सकती है, न पिता पुत्र के सामने। मुझे संतोष और प्रसन्नता है कि मेरी रचनाएँ परिवार के सभी सदस्य एक -दूसरे से छुपाए बिना पढ सकते हैं।
                       मैं पाठकों से अनुरोध करूंगा कि वे मेरे इन उपन्यासों को पढकर सदा की तरह मुझे अपने विचार लिखें। साथ ही मैं उ‌नके भरपूर स्नेह के लिए आभार प्रदर्शित करता हूँ।

7, शीश महल 5-A, पाली हिल्ज,
बांद्रा, मुम्बई-400050
                                                                आपका
                                                             गुलशन नंदा

(सन् 1985)

रविवार, 22 अक्टूबर 2017

गुलशन नंदा- परिचय, उपन्यास सूची

हिंदी के रोमांटिक सामाजिक उपन्यासों में एक विशेष नाम थे गुलशन नंदा। गुलशन नंदा अपने समय के चर्चित उपन्यासकार थे, जिनके कई उपन्यासों पर फिल्में बन चुकी हैं।

   माना जाता है गुलशन नंदा के नये उपन्यास के लिए प्रकाशक इ‌नके दरवाजे पर खड़े रहते थे। उपन्यास का एडवांस रुपया गुलशन नंदा को मिलता था।

मुंबई निवासी गुलशन नंदा का 16 नंवबर 1985 को निधन हो।

गुलशन नंदा के उपन्यास

1. गुनाह के फूल 
2. घाट का पत्थर
3. जलती चट्टान
4. गेलार्ड
5. नीलकण्ठ
6. सितारों से आगे
7. राख और अंगारे (भारतीय साहित्य सदन)
8. देवछाया
9. शीशे की दीवार
10. टूटे पंख

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