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गुरुवार, 15 अप्रैल 2021

9. साक्षात्कार- नरेन्द्र नागपाल

उस दौर में प्रकाशक लेखकों का शोषण करते थे- नरेन्द्र नागपाल

साहित्य देश का उद्देश्य रहा है लोकप्रिय साहित्य के उन सितारों को सामने लाने का जिन्होंने अपनी सशक्त लेखनी के दम पर साहित्य में एक विशेष पहचान स्थापित की। लेकिन समयचक्र में कुछ लेखक आज साहित्य पटल से अदृश्य हैं। ऐसे ही एक लेखक हैं दिल्ली निवासी नरेन्द्र नागपाल जी। जिन्होंने अपनी कलम से अविस्मरणीय पात्रों का सृजन किया है। स्वयं नाम के अतिरिक्त उन्होंने तात्कालिक प्रसिद्ध लेखकों के नाम से लेखन भी किया है। इस साक्षात्कार में उन्होंने पूर्णतः सत्यता के साथ अपने लेखन जीवन के कुछ अविस्मरणीय घटनाओं का वर्णन किया है।
   साक्षात्कार की इस 09 शृंखला में प्रस्तुत है नरेन्द्र नागपाल जी का साक्षात्कार।
1. सर्वप्रथम हम आपसे आपके जीवन के बारे में जानना चाहेंगे? (जन्म कहां हुआ, शिक्षा और वर्तमान आदि)
- मेरा जन्म दिल्ली में हुआ है।  यहीं शिक्षा दीक्षा भी हुई है। मैं स्नातक हूँ। फिलहाल मैं वेस्ट पटेलनगर में निवास कर रहा हूँ।
- Born in Delhi Graduate Presently living in West Patel Nagar 

नरेन्द्र नागपाल
2. आपने किन-किन लेखकों को ज्यादा पढा है औए कौन-कौन सी रचनाएँ आपकों अच्छी लगी।
- मुझे याद है जब मैं छठवीं कक्षा में था तब मुझे एस सी बेदी जी की राजन इकबाल श्रृंखला और रायजादा (जो कि एक ट्रेड नेम था) द्वारा लिखे गये राम रहीम श्रृंखला के उपन्यास पढ़ना बहुत अच्छा लगता था। उन दिनों मैं इन उपन्यासों के सेट, जिनमें की छः उपन्यास हुआ करते थे, दो ही दिन में ही पढ़ डालता था।  मुझे याद है अक्सर मैं रजाई के भीतर घुसकर सोने के बजाय यह उपन्यास पढ़ा करता था। एक बार तो मेरी मम्मी ने मुझे रजाई के भीतर उपन्यास पढ़ते हुए पकड़ लिया। फिर क्या हुआ होगा वह तो आप भी समझ सकते हैं... हा हा हा..
मुझे वेद प्रकाश शर्मा जी के उपन्यास पढ़ना भी पसंद था। मैंने उनके द्वारा लिखी गयी देवकान्ता श्रृंखला आठवीं कक्षा में पढ़ी थी और उसके बाद उनके द्वारा लिखे हर एक उपन्यास को बड़े चाव के साथ पढ़ा।
कुमार कश्यप जी द्वारा लिखी गयी विक्रांत-बटलर श्रृंखला भी मुझे बहुत पसंद आई थी। उनके लिखे उपन्यास मुझे काफी भावुक कर देते थे और पढ़ते पढ़ते मेरी आँखों से आँसू निकल आते थे। विमल चटर्जी जी के टैंजा श्रृंखला ने भी पढ़ते हुए मुझे काफी भावुक कर दिया था।
सुरेन्द्र मोहन पाठक जी की विमल श्रृंखला मैंने काफी देर में पढ़नी शुरू की। उस वक्त तक मैं काफी परिपक्व हो गया था और मुझे विमल का किरदार काफी पसंद आया था। मुझे राज भारती जी द्वारा लिखे गये कुछ फंतासी उपन्यास भी काफी पसंद आये थे। वह चूँकि मेरे घर के नजदीक रहा करते थे तो अक्सर मैं उनके पास पहुँच जाया करता था। वह बेहतरीन इनसान थे और लेखन क्षेत्र से जुड़े लोगों में मुझे वह सबसे अच्छे लगे थे।
- #Class 6th onwards I loved Rajan-Iqbal series of S.C.Bedi and Ram-Rahim series of trade name writer Raizada.I used to read their 6 Books pocket Set in 2 days.
Many a times I read them in Quilt while sleeping.And one day my Mummy caught me and guess what would be happened next...
#2. I was fond of Late Sh Ved Prakash Sharma,
Read his Dev Kanta Santti in class 8th and thereafter his every novel
#3.Vikrant- Butler series by Kumar Kashyap made me cry too much
#4. Tainza series by Vimal Chatterjee was also an emotional series
5.Vimal Series of SMP I started very lately while getting maturing and liked the Character
#6. I also liked some Fantasy books of late Sh Raj Bharti.And also he was my first GoTo person living nearby...He was the nicest person in this Field I have ever met...May God rest him Peace


3. आपके मन में लेखक बनने का विचार कैसे आया और आप किस से प्रभावित हुये?
- जैसे कि मैंने बता ही दिया है कि मैं ऊपर बताये गये सभी लेखकों से काफी प्रभावित था। एक बार मुझे ख्याल आया कि मैं पढ़ने के बजाय क्यों न कुछ लिखने की कोशिश करूँ।  यह ख्याल आते ही मैंने अपनी डायरी में अपना पहला उपन्यास लिखना शुरू किया। जब मैं उपन्यास लिख चुका था तो मैंने उसे गृहशोभा पत्रिका के सम्पादक द्वारा सम्पादित भी करवाया था।
- As you know I was impressed by all of the above Writers...One day I thought why do you read them...Start writing...then I wrote my first novel in a Diary...then edited it from the editor of GrehShobha...

4. जासूसी साहित्य में आपके नाम से प्रथम उपन्यास प्रकाशित हुआ, तो प्रकाशन आसानी से हो गया या कोई परेशानी भी देखनी पड़ी?
- मुझे अपने पहले उपन्यास को प्रकाशित करवाने के लिए लगभग एक साल की भागदौड़ करनी पड़ी थी। फिर जब मैंने उस वक्त प्रकाशक को चार उपन्यास छपवाने के लिए बारह हजार रूपये दिये तो वह उन्हें छापने के लिए राजी हुआ था।
यह उपन्यास निम्न थे-

  1. 22 दिसम्बर
  2. जुर्म का आशिक
  3. 5 लुटेरे
  4. मैडम एक्स

- It took me atleast 12 months to get published my first novel and even I paid 12000 to Publish 4 Novels atleast...then he Published...
  1. 22 December
  2. Jurm ka Aashiq
  3. 5 Lutere
  4. Madam X

5. आपने अपने नाम के अतिरिक्त और किन-किन छद्म नामों से लिखा है?
- मैंने लगभग 25 उपन्यास अनिल मोहन के लिए लिखे हैं। 18 उपन्यास मैंने रीमा भारती नाम से, 6 उपन्यास सीमा कपूर नाम से और 22 उपन्यास केशव पण्डित के 2,3 ट्रेड नेम से लिखे हैं।
-About 25 Novels for Anil Mohan
18 Novels for Trade name Rima Bharti
6 Novels for Seema Kapoor
22 novels for 2,3 Trade names of Keshav Pandit

6. आपके स्वयं के नाम से कितने उपन्यास आये हैं? (संख्या) और आपने किन-किन पात्रों को आधार बना कर लिखा है?(आपके द्वारा स्थापित नायक आदि)
- मैंने अपने नाम से लगभग 74 उपन्यास लिखे हैं।  श्रृंखला की बात करूँ तो अर्जुन भारद्वाज श्रृंखला, जिम्बो श्रृंखला, केशव पंडित श्रृंखला, रीमा भारती श्रृंखला, जेम्स बांड श्रृंखला, ऊर्जा मस्तान श्रृंखला, कॉनमैन श्रृंखला और कई एकल थ्रिलर्स मैंने लिखे हैं।
- About 74 Novels in my name ...
Arjun Bhardwaj Series,Jimbo Series, Keshav Pandit Series, Rima Bharti Series,James Bond Series,Oorja Mastaan Series,Conman Series and various Thrillers


7. 'काली' जैसा उपन्यास एक अलग कथानक पर है, क्या ऐसे और भी उपन्यास आपने लिखे हैं?
- असल में काली अर्जुन भारद्वाज श्रृंखला का उपन्यास है। और मैं आपको बताऊँ कि इस श्रृंखला का हर एक उपन्यास मेरी बेहतरीन रचनाओं में से एक है। हर एक उपन्यास किरदार का अलग भावनात्मक कोण पाठकों के समक्ष लेकर आता है।
- Actually Kaali belongs to Arjun Bhardwaj Series and every novel of that series is Master Piece of mine which shows the different Emotional angle of the Character.


8.  जासूसी उपन्यास साहित्य का एक सुनहरा दौर खत्म हो गया, आपकी दृष्टि में इसका कारण क्या रहा है?
- उस दौर में प्रकाशक लेखकों का शोषण करने लगे थे। वह एक तरफ अपने अपने ट्रेड नामों को स्थापित कर रहे थे और दूसरी तरफ किसी भी लेखक को स्थापित नहीं होने दे रहे थे। इस करण होता यह था कि पाठक लेखक के साथ जुड़ाव महसूस नहीं कर पाते थे।  वह लेखक को चिट्टियाँ तो लिखते थे लेकिन प्रकाशक चूँकि  ट्रेड नाम से प्रकाशित होने वाली कहानी और किरदारों से अनभिज्ञ रहता था तो वह जवाब भी नहीं देता था।  पाठकों को जवाब न मिलने के कारण वह ऐसे नामों से दूर होने लगे और ऐसे ट्रेड नाम से प्रकाशित उपन्यासों से दूरी बनाने लगे।
     - In that particular Era ,Publishers were exploiting the Writers by starting their own Trade Name not giving any Chance to establish a Writer.So readers could not make a Connect with their Favourite Writers... they write their letters to Publishers which did not know about the Story and Characters of his  Trade Name's TITLE...so readers didn't get their Replies and sooner or later they reject the Writer (trade name)


9. अगर समय मिला तो क्या आप पुनः जासूसी साहित्य के लिए लेखन करेंगे?
- बिल्कुल मैं यह कार्य जरूर करना चाहूँगा।
- Ofcourse and always...


10. 'साहित्य देश' के लिए कोई दो शब्द?
-    आप भुला चुके लेखकों और रचनाओं को पाठकों के समक्ष लाकर एक बेहतरीन कार्य कर रहे हैं। मैं चाहूँगा कि आप आगे भी जारी रखें।
- You are doing a Great Job by making dead Alive...keep and keeping it up Gentle man


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- उक्त साक्षात्कार के लिए साहित्य देश नरेन्द्र नागपाल जी का हार्दिक आभार व्यक्त करता है।

- विकास नैनवाल जी का हार्दिक धन्यवाद। जिन्होंने इस साक्षात्कार को अंग्रेजी से हिंदी में अनुदित किया।

नरेन्द्र नागपाल जी संबंधित अन्य जानकारी

उपन्यास सूचीब्लॉग - नरेन्द्र नागपालउपन्यास समीक्षा 

रविवार, 11 अप्रैल 2021

नये उपन्यास- अप्रैल 2021

 नये उपन्यास- अप्रैल 2021

  इस  माह में कुछ नये उपन्यासों की जानकारी प्राप्त हुयी है।
1. जा चुडैल- देवेन्द्र पाण्डेय
    प्रकाशन- सूरज पॉकेट बुक्स
   अमेजन लिंक- जा चुडैल
    देवेन्द्र पाण्डेय जी की हर रचना पूर्व रचना से अलग हटकर होती है।
   इस बार वह लाये हैं एक हास्य हाॅरर कथा।
अगर आप को हास्य पसंद है हाॅरर पसंद है तो यह रचना आपके लिए ही है।
पढे और आनंद लें।
2. द ट्रेल- अजिंक्य शर्मा
    प्रकाशन- eBook on Kindle
अमेजन ‌लिंक- द ट्रेल
  मर्डर मिस्ट्री के तौर पर अपनी अपनी अलग पहचान स्थापित कर चुके अजिंक्य शर्मा जी का यह सातवा उपन्यास किंडल पर आ चुका है।
  हर बार की तरह इस बार भी कुछ नया पढने को मिलेगा।
पाठक संजय आर्य के शब्दों में-
द ट्रेल - अजिंक्य शर्मा

" एक और नई मर्डर मिस्ट्री जिसमे रहस्य के साथ जज्बातों का सैलाब भी है जिसमे आप खो जाएंगे । कातिल को पकड़ने में इस बार पाठकों को बहुत मशक्कत करनी होगी । अंत काफी चौकाने वाला है ।"
द ट्रेल अजिंक्य शर्मा का सातवां उपन्यास है और  उनके पहले उपन्यास "मौत अब दूर नही " को पाठकों से अच्छा प्रतिसाद मिला था जिसके कारण  लेखक से पाठकों की उम्मीद बढ़ गई थी जिस पर
"द ट्रेल ' के माध्यम से लेखक 100 प्रतिशत खरे उतरे है ।और मिस्ट्री लेखक के रूप में अपना सिक्का एक बार फिर से जमाने मे सफल रहे है।
"द ट्रेल " को मैंने एक बार पढ़ना शुरू किया तो खत्म करके ही माना। उपन्यास का अंत काफी हैरत अंगेज है  उनके अन्य उपन्यास से इतर इसमें जज्बातों का तूफान भी है । ऐसी "मर्डर मिस्ट्री" की आप भी खुद को जासूस मानते हुवे कातिल की तलाश करने लग जाएंगे।

रंजीत विस्वास  एक प्रसिद्ध मिस्ट्री लेखक है और पब्लिशिंग हाउस का मालिक है ।एक रात अचानक उसका खून हो जाता है और वह दीवार पर लिखकर जाता है
"United we rise "   जबकि कोई भी मरने से पहले अपने कातिल का नाम लिखना चाहेगा।
घटना स्थल पर मिलते है सिर्फ जूतों के निशान और रंजीत विस्वास के गले में फंसे कांच के टुकड़े
जिसके बाद शुरू होती है मर्डर की इन्वेस्टीगेशन और इंस्पेक्टर हितेश कश्यप इसमें तब उलझ कर रह जाता है जब एक संदिग्ध कातिल की भी हत्या हो जाती है।
इस केस में एक के एक मोड़ आते है और रंजीत विस्वास की सेक्रेटरी और उसकी विस्वास पात्र शैली पर जब शक की सुई जाती है तो.एक के बाद एक खुलासे होते है।
कहानी के बारे में ज्यादा बताना पाठकों के साथ नाइंसाफी होगी ।
शुरू से आखरी तक रहस्य को बनाकर रखने में लेखक सफल हुवे है और शैली का पात्र पाठकों को खूब पसंद आने वाला है और बरबस ही आपको वेदप्रकाश शर्मा की विभा जिंदल की याद दिला देती है।
"कातिल कितना ही शातिर हो वो अपने पीछे सबूत छोड़ ही जाता है " और अंततः पकड़ा जाता है।
रंजीत विस्वास को किसने मारा?
क्यो रंजीत विस्वास ने लिखा "united we rise"
दो दो खून  की साजिश के पीछे कौन था ?
ताज का क्या रहस्य था?
इसके लिए आपको उपन्यास पढ़ना होगा।
उपन्यास किंडल पर उपलब्ध है।
3. विषकन्या- चन्द्रप्रकाश पाण्डेय
      प्रकाशन- थ्रिल वर्ल्ड
    चन्द्र प्रकाश पाण्डेय जी का नया उपन्यास 'विषकन्या' थ्रिल वर्ल्ड पब्लिकेशन से आया है।
   ज्ञातव्य हो कि 'विषकन्या' पूर्व प्रकाशित उपन्यास 'अवंतिका' की अगली कड़ी है, जिसकी प्रतीक्षा पाठकों को लम्बे अर्से से थी।
  इसी के साथ पाण्डेय जी के दो रिप्रिंट भी आ रहे हैं

'आवाज' किंडल पर प्रकाशित लघु-उपन्यास है, जिसका पेपरबैक संस्करण अब थ्रिल वर्ल्ड द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।

यद्यपि 'मौत के बाद' अमेजन प्राइम पर भी उपलब्ध है किन्तु पाठकों तक वाजिब दाम में पुस्तकें पहुंचाने के प्रयास के अंतर्गत 'थ्रिल वर्ल्ड' द्वारा इस रचना का भी डायरेक्ट ऑर्डर लिया जा रहा है।
      पोस्टर में दिए गये नम्बर पर भुगतान करने के पश्चात उसी नम्बर पर पेमेंट कन्फर्मेशन के साथ अपना शिपिंग एड्रेस भेजें। किसी भी व्यक्तिगत दुविधा या समस्या के निदान के लिए कृपया 8528578186 पर मैसेज करें।
पुस्तकों के जॉनर की जानकारी अधोलिखित है:
विषकन्या (माइथालॉजिकल थ्रिलर)
आवाज (पैरानॉर्मल थ्रिलर)
मौत के बाद (हॉरर थ्रिलर)

सोर्स ऑफ इन्फॉर्मेशन:- @Thrill World Publication WA Group

मैं आवारा, इक बनजारा- अशोक कुमार शर्मा-05

मैं आवारा, इक बंजारा- अशोक कुमार शर्मा
       आत्मकथा, भाग-05   
क्रिकेट की इस दास्तान के बाद लगे हाथ मैं आपको अपनी  फिल्म स्क्रिप्ट राइटर बनने की दास्तान भी सुना ही देता हूँ।
    हुआ यूं दोस्तो कि उपन्यास लेखन छोड़ देने के करीब बारह वर्षो बाद ईस्वी सन 2012 में मुझ पर 'फिल्म स्क्रिप्ट राइटर' बनने का जुनून सवार हो गया था ।
     और वो इसलिए, क्यों कि उपन्यास लेखन में बहुत ज्यादा टाइम लगता है और दूसरा उपन्यास जल्दी लिखने के लिए पब्लिसरों का भी बहुत ज्यादा प्रेशर रहता है और मेरे पास अपनी नौकरी के चलते अब उतना टाइम नहीं बचता था कि मैं एक के बाद दूसरा उपन्यास फटाफट लिखता रहूं।
इसलिए मैंने शॉर्ट कट ढूंढा और मुड़ गया 'फिल्म स्क्रिप्ट' लिखने की ओर। 

मैंने तीन - चार महीने कड़ी मेहनत करके एक फिल्म स्टोरी लिख डाली, जिसका कि टाईटल था - 'बेडलकिया'
        अब साहेबान, ये फिल्म स्टोरी लेकर मैं जा पहुंचा अपने सपनों की नगरिया - मुंबई।
वहां उस शहर में मेरे बचपन का लंगोटिया यार श्रीराम शर्मा अपने परिवार सहित रहता था ।
तो जनाब, उसी दोस्त के घौंसले में जाकर मैंने अपना भी डेरा डाल दिया और उसे बताया कि मैं मुंबई घूमने के लिए आया हूँ।
शर्मो - हया की वजह से मैं मुंबई आने का असली मकसद उसे नहीं बता सका था।
         दूसरे दिन उसने मुझे घुमाने के लिए जुहू चौपाटी की ओर ले जाना चाहा, तो मैंने हिम्मत जुटाते हुए कहा कि यार जुहू चौपाटी फिर कभी घूम लेंगे, तू तो मुझे घुमाने के लिए 'अंधेरी' ले चल । 

शनिवार, 3 अप्रैल 2021

मैं आवारा, इक बनजारा- अशोक कुमार शर्मा-04

मैं आवारा, इक बनजारा- अशोक कुमार शर्मा

जैसा कि मैं आपको पहले बता चुका हूं कि स्कूल के दिनों में मैं स्कूल से भागकर किसी एकान्त जगह में छुप जाया करता था या अपने आवारा दोस्तो के साथ दिन भर मटरगस्ती करता रहता था। चूंकि उन दिनों में मैं बीड़ी पीना और तंबाकू खाना, दोनों गंदी आदतें सीख चुका था, इसलिए इस आवारगी के कारण मुझे अपने अध्यापकों से सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि अनेक बार मार खानी पड़ी और मुर्गा भी बनना पड़ा।

इसका नतीजा ये हुआ कि मैंने अपने आवारगी भरे जीवन की रक्षा और सुरक्षा के लिए कक्षा चार में पढ़ाई छोड़ दी थी ।

फिर जैसा कि मैं आपको पहले बता चुका हूं कि कक्षा चार की पढ़ाई मैंने अपनी बुआजी के पास जयपुर रहकर की थी ।

कक्षा चार जयपुर से पास करने के बाद मैं वापस अपने गांव रूपगढ़ लौट आया था और एक बार फिर किसी अड़ियल टट्टू की तरह मैं स्कूल न जाने के लिए अड़ गया था ।

फिर घरवालों के बाद अध्यापकों द्वारा बहुत समझाने पर मैंने दुबारा स्कूल में एडमिशन उनके सामने ये शर्त रखकर लिया कि आइंदा न तो कोई अध्यापक मुझे मारेगा और न ही कोई स्कूल का गृहकार्य करने के लिए देगा । 

कहने का मतलब ये है साहेबान कि मेरी इस आवारगी ने भी मेरे साथ ही इस धरती पर जन्म ले लिया था, जो किसी पक्के दोस्त या जुड़वां भाई की तरह आज भी मेरा साथ बड़ी वफा से निभा रही है।

कभी-कभी मुझे यूं लगता है कि जैसें मैं इस दुनिया का प्राणी न होकर किसी दूसरे ग्रह से आया हुआ एक एलियन हूं, जिसका कि अंतरिक्ष यान इस धरती पर उतरते ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और इस वजह से मैं पुनः अपने ग्रह पर नहीं जा सका।

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 लोकप्रिय उपन्यास साहित्य को समर्पित मेरा एक ब्लॉग है 'साहित्य देश'। साहित्य देश और साहित्य हेतु लम्बे समय से एक विचार था उपन्यासकार...