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Tuesday, June 19, 2018

आबिद रिजवी, वेदप्रकाश कंबोज

जासूसी उपन्यासकार वेदप्रकाश कंबोज जी के साथ
दिनांक- 03.06/2018

नये उपन्यास-2018

  नमस्कार,
उपन्यास पाठक मित्रों के लिए कुछ नये उपन्यासों की जानकारी।

1. काॅनमैन
         सुरेन्द्र मोहन पाठक जी का सुनील सीरीज का नया उपन्यास 'काॅनमैन' अतिशीघ्र प्रकाशित होने वाला है।

2. वंस एगेन
            बहुचर्चित लेखिका गजाला करीम का नया उपन्यास 'वंस अगेन' जून माह में रवि पॉकेट बुक्स से प्रकाशित होने वाला है। प्री आॅर्डर आरम्भ।
    इस उपन्यास से गजाला जी दस वर्ष पश्चात उपन्यास जगत में पुन: प्रवेश कर रही है।

3. सम-प्रीत
            रवि पॉकेट बुक्स से एम. इकराम फरीदी का उपन्यास 'सम-प्रीत' प्रकाशित होगा, पर इस उपन्यास के प्रकाशन में अभी काफी समय लगेगा।

Friday, June 15, 2018

देवा ठाकुर

  

देवा ठाकुर के उपन्यास भवानी,सूर्या और माया पॉकेट बुक्स-मेरठ से प्रकाशित होते थे।
इनके पात्र शोला, गोली और काला बच्चा आदि थे।

देवा ठाकुर के उपन्यास
1. शोला                 (भवानी पॉकेट बुक्स)
2. गोली                 (भवानी पॉकेट बुक्स)
3. ज्वालामुखी        (भवानी पॉकेट बुक्स)
4. कौन जीता कौन हारा  (भवानी पॉकेट बुक्स)
5. पावर हाउस            (सूर्या पॉकेट बुक्स)
6. शोला का डंका       (सूर्या पॉकेट बुक्स)
7. डंके की चोट          (सूर्या पॉकेट बुक्स)
8. स्ट्रीट फाइटर           (सूर्या पॉकेट बुक्स)
9. काला बच्चा           (माया पॉकेट बुक्स)
10.

Sunday, June 10, 2018

परशुराम शर्मा

परशु राम शर्मा के उपन्यास
तुलसी पॉकेट बुक्स से प्रकाशित

1. बादशाह
2. फिर जन्म लेंगे
3. फरिश्ता
4. पांच पति
5. ज्वाला
6. जन्म-जन्म की बाजी

एम. के. शर्मा

एम. के. शर्मा के उपन्यास
1. खून का प्यासा
2. पहला अपराध
3. अंधा गवाह

Saturday, June 9, 2018

सुरेन्द्र मोहन पाठक की एक स्क्रिप्ट

सुरेन्द्र मोहन पाठक जी के उपन्यास 'ओवरडाॅज' की हस्तलिखित स्क्रिप्ट।
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     आज के समय के प्रसिद्ध मर्डर मिस्ट्री लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक जी के  एक उपन्यास 'ओवरडाॅज' की हम पाण्डुलिपि यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं।
      ओवरडाॅज उपन्यास की मूल स्क्रिप्ट के कुछ पृष्ठ यहाँ प्रकाश्य हैं ताकी पाठक देख सके की एक लेखक कितनी मेहनत से एक उपन्यास तैयार करता है।
पाठक साहब तो स्वयं एक -एक बिंदु पर बहुत मेहनत करते थे, यह उनकी स्क्रिप्ट देख कर जाना जा सकता है।
    अपने उपन्यास का टाइटल डिजाइन तक भी स्वयं तैयार करते थे।
       रवि पॉकेट बुक्स के मालिक मनेष जैन जी ने पाठक जी की‌ मेहनत की बहुत सराहना की है।
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उपन्यास- ओवरडाॅज
लेखक-   ‌‌सुरेन्द्र मोहन पाठक


धन्यवाद- मनेष जैन जी (रवि पॉकेट बुक्स)







अनिल मोहन जी की एक स्क्रिप्ट

अनिल मोहन जी के उपन्यास की स्क्रिप्ट।
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             अनिल मोहन जी के उपन्यास की स्क्रिप्ट।
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      पाठक के मन में एक जिज्ञासा होती है की लेखक कैसे लिखता है। क्या वह कम्प्यूटर पर टाइप करता है या कागज पर लिखता है।
            पाण्डुलिपि वह हस्तलिखित/टाइप की गयी प्रथम कृति होती है जो मूलत: लेखक तैयार करता है और उसी पाण्डुलिपि को फिर प्रकाशक अच्छी तरह से टाइप कर एक किताब की शक्ल प्रदान करता है।
            हम अपने पाठकों के लिए लेकर आये हैं अनिल मोहन जी के उपन्यास 'नफरत की दीवार' की पाण्डुलिपि। जो की अनिल मोहन के स्वयं द्वारा कागज पर लिखी गयी है।
  - इसमें आप देख सकते हैं एक लेखक कैसे लिखता है।
  -  फिर प्रकाशक उसे कैसे किताब का रूप देता है।

उपन्यास- नफरत की दीवार
लेखक-    ‌अनिल‌ मोहन

             




Friday, June 1, 2018

एस. एम. मेहंदी


एस. एम. मेहंदी जी का जीवन परिचय यहाँ उपलब्ध है।

Tuesday, May 29, 2018

अर्जुन पण्डित

केशव पण्डित सीरीज लिखने वाले असंख्य लेखकों में से एक Ghost writer अर्जुन पण्डित थे।
अर्जुन पण्डित मनोज पॉकेट बुक्स के लेखक थे।

अर्जुन पण्डित के उपन्यास
1. केशव पण्डित की सुपारी
2. एक और केशव पण्डित
3. मर गया केशव पण्डित
4. केशव पण्डित और शैतान का बाप
5. केशव पण्डित और कफन तेरे बेटे का
6. केशव का इंसाफ
7.
8.
9.
10.

सजल कुशवाहा

सजल कुशवाहा प्रसिद्ध उपन्यास कुशवाहा कांत के छोटे भाई उपन्यासकार जयंत कुशवाहा के पुत्र हैं।

सजल कुशवाहा के उपन्यास
1. कत्ल दर कत्ल
2. बेरिया की तलाश
3. दिमाग की हत्या
4. आखिरी चीख
5. पाँच साल बाद
6. मरी हुयी औरत
7.
8.
9.
10.
11.
12.
13.
14.
15.

राकेश पाठक

राकेश पाठक
         अपनी कलम‌ से सनसनी लिखने वाले राकेश पाठक जी का उपन्यास जगत में एक अलग ही‌ मुकाम था। इनके उपन्यासों में रहस्य और रोमांच का अद्भुत संगम होता था।
      'अब क्या होगा', 'क्राइम स्कूल' जैसे अद्भुत उपन्यास राकेश पाठन जी की प्रतिभा का ही चमत्कार है। हालांकि बाद के उपन्यास इनके हिंसा से भरे होते थे। लेकिन पात्रों के संवाद हाहाकारी‌ लिखने में पाठक जी का कोई सानी न था।
        हिंसक उपन्यास का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है की पाठक जी के एक पात्र अमरकांत का नाम ही 'कत्ल की‌ मशीन' था।
           राकेश पाठक जी के आरम्भिक उपन्यासों के बाद सभी उपन्यास गौरी पॉकेट बुक्स मेरठ से ही प्रकाशित होते थे।

राकेश पाठक जी के उपन्यास (गौरी पॉकेट बुक्स से प्रकाशित)
1. मेरा पति जिंदा करो
2. कत्ल एक अजूबा
3. मर्डर मिस्ट्री
4. थाना देगा दहेज
5. बहन के कटे हाथ
6. गुण्डों की सरकार
7. पुलिस स्टेशन
8. बापू मुझको रोटी दो
9. खूब बहेगा सङकों पर
10. चूहा लङेगा शेर से
11. भाषण नहीं राशन दो
12. खिलौनों को बना दो हथियार
13. चुन-चुन कर मारुंगा
14. विधवा का गैंग
15. चौबीस घण्टे की जंग
16. आर-पार की लङाई
17. क्राइम स्कूल
18. अदालत में खङा यमराज
19. मियां-बीवी का गैंग
20. मेरा शेर सबका बाप
21. भूखा हूँ लाश चाहिए
22. दस सिर वाला मुख्यमंत्री
23. शेरनी का बेटा
24. शीsss कातिल आ रहा है।
25. हिटलर की माँ
26. मुर्दा कत्ल करेगा
27. कानून की देवी
28. गुमनाम है कोई
29. मेरा ससूरा मुख्यमंत्री
30. सावधान! आगे थाना है।
31. डायमण्ड राॅबरी
32. कातिल की बारात
33. कत्ल की‌ मशीन
34. कत्ल का जादूगर
35. चूङियां पहनेगा गैंगस्टर
36. बौने की करामात
37. कौन है मेरा कातिल
38. प्लास्टिक की बीवी
39. इच्छाधारी नेता
40. वर्दी का धमाका
41. मेरी मम्मी पापा की जेब में
42. क्राइम एक्सपर्ट
43. सुनामी
44. दहशत


संपर्क-
राकेश पाठक
544, गणेशपुरी, खतौली,
जिला. -मुज्जफरनगर
उत्तर प्रदेश- 2512001

Saturday, May 26, 2018

वेदप्रकाश कंबोज

वेदप्रकाश कंबोज के उपन्यास

A.
1. आतंक के बीज
2. अपराध की छाया
3. आखिरी बाजी
4. आखिरी मुजरिम
5. अंधे कातिल
6. अपराधों का बादशाह
7. आग की दीवार
8. अज्ञात अपराधी
9. असली युवराज
10. असली दुशमन
11. अंधेरे की चोट
12. आत्मा की आहट
13. अत्याचार के अँधेरे (डायमण्ड पॉकेट बुक्स)
14.
15.
16.
17.
18.
19.
20.

B.

1. बौना बदमाश
2. भयानक बदला
3.भय के क्षण
4. भयानक चीखें
5.
6.
7.
8.
9.
10.
11.
12.
13.
14.
15.
16.
17.
18.
19.
20.

C.
1. दहशत की घाटी
2.
3.
4.
5.
6.
7.
8.
9.
10.
11.
12.
13.
14.
15.
16.
17.
18.
19.
20.

D.
1. धङकन मौत की (डायमण्ड पॉकेट बुक्स)
2.
3.
4.
5.
6.
7.
8.
9.
10.
11.
12.
13.
14.
15.
16.
17.
18.
19.
20.
E.
F.
1. फाॅरेस्ट आॅफिसर

G.
1. गद्दार
2. गुमशुदा जासूस  (डायमण्ड पॉकेट बुक्स)
3.
4.
5.
6.
7.
8.
9.
10.

H.
1. हीरों की खोज
2. हत्यारे की खोज
3. हत्या के हथकण्डे (डायमण्ड पॉकेट बुक्स)
4. हिंसा की ज्वाला    (डायमण्ड पॉकेट बुक्स)

I.
1. इंसाफ का जनाजा

J.
1. जुर्म की हुकूमत (शिवा पॉकेट बुक्स)
2. जासूसों‌ का जाल
3. जुर्म की जुबान
4. झूलती‌ मौत
5.

K.
1. खून खराबा
2. कानून मेरी ठोकर में
3. खूनी जंग
4. काला तूफान
5. कातिल
6. खून से लिखा खत
7.
8.
9.
10.
11.
12.
13.
14.
15.
16.
17.
18.
19.
20.

L.
1. लहरों‌ पर लिखा विनाश

M.
1. मदभरी हत्या
2. मौत की आत्मकथा
3. मूर्ति की चीख
4. मौत का साम्राज्य
5.

N.
1. निर्जीव अट्हास
2. नाइट ड्रेगन (डायमण्ड पॉकेट बुक्स)

O.
1. और दिलदार मर गया
P.
1. पासे पलट गये
2. रात का कातिल

R.
1. रेलगाङी का भूत
2. रहस्यमयी आवाज (भाग-1,2)
3. रेत की कबरें
4. रात के कातिल
5

S.
1. सिहंगी की वापसी
2. सिहंगी का प्रतिशोध
3. सिंगलैण्ड की खोज
4. सिहंगी का अंत (भाग-1,2,3)
5. सारगोशा की सनसनी
6. संघर्ष के क्षण
7. शैतान संपोले
8. सागर का बेटा
9. साहस के कदम
10. शिकारगाह का रहस्य
11. शस्त्रों के सौदागर
12. षड्यंत्र की गंध. (डायमण्ड पॉकेट बुक्स)
13. शिकारी कुत्ते  (डायमण्ड पॉकेट बुक्स)
14. सिहंगी का जाल
15. सागर में सोना (डायमण्ड पॉकेट बुक्स)
16. सात सितारे मौत के  (डायमण्ड पॉकेट बुक्स)
17. शैतानी त्रिगुट के दुश्मन (डायमण्ड पॉकेट बुक्स)
18.
19.
20.

T.
1. तोरा नागा

U.
1. उलझनों का शिकार

V.
1. विद्रोह की आग
2. विध्वंस के उपासक (डायमण्ड पॉकेट बुक्स)
W.
X.
Y.
Z.

जिन पाठक मित्रों के पास वेदप्रकाश कंबोज जी ले उपन्यासों की लिस्ट है वह अवश्य शेयर करें।
- कंबोज से से संबंधित कोई भी जानकारी, संस्मरण, रोचक किस्सा हो तो अवश्य शेयर करें।
धन्यवाद
ईमेल- sahityadesh@gmail.com
W/ A- 9509583944
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वेदप्रकाश कंबोज के उपन्यास
1. और दिलदार मर गया
2. गुमशुदा जासूस
3. धङकन मौत की
4. सारगोसा की सनसनी
5. नकली हीरे जाली नोट
6. जहर के पुलते
7. हिंसा की ज्वाला
8. कदम-कदम पर धोखा
9. फाॅरेस्ट ऑफिसर
10. शिकारी कुत्ते
11.
12.
14.
14.
15.


अमित खान

अमित खान के उपन्यास
कमाण्डर करन सक्सेना सीरीज
1. तिलक रोङ का भूत(प्रथम उपन्यास)
2. दो डकैत
3. जान खतरे में
4. मौत की कुर्सी
5. खतरनाक आदमी
6. मुट्ठी में‌ बदं मौत
7. गैंडास्वामी का आतंक
8. एक चिट्ठी खून भरी
9. मिस्टर जीरो
10. चौकी नंबर ती‌न
11. गोली करेगी फैसला
12. आगे खतरा, पीछे मौत
13. हत्यारे का चैलेंज
14. लाल कफन
15. गन‌ मास्टर
16. भेदिया
17. कत्ल होगा सरेआम
18. चक्रा का चक्रव्यूह
19. जलता शहर
20. हाहाकार
21. कैदी
22. डण्डा परेड
23. एक डकैती ऐसी भी
24. एक नंबर का जल्लाद
25. हमलावर
26. सात दिन का अभियान
27. गद्दार
28. कमाण्डर
29. दोहरी चाल
30. मुर्दाघर
31. बम‌ काण्ड
32. मेरे हाथ, मेरे हथियार
33. बारूद का बेटा
34. दस टन सोना
35. मौत के मुँह में
36. आखिरी गोली
37. हिटलर का खजाना
38. आतंकवादी
39. हेराफेरी
40. सात तालों‌ में बंद मौत
41. एक वैज्ञानिक की तलाश
42. कौन जीता, कौन हारा
43. एक गोली, एक निशान
44. पासे पलट गये
45. रॉयल पैलेस
46. सांप-सीढी का खेल
47. नाकाब के पीछे
48. बाज बिग्रेड
49. एक चोट लौहार की
50. झांसेबाज
51. प्लानर
52. मरियम का बेटा
53. वन मैन आर्मी
54. सांप का बिल
55. नौ इंच का आदमी
56. एक अजनबी लङकी
57. रावणलीला
58. प्राइम‌ मिनिस्टर का मर्डर (धीरज पॉकेट बुक्स)
59. किस्मत का सुल्तान
60.

शीतल राजपूत सीरीज

61. घायल शेरनी
62. निशाना निगाहों‌ का
63. परकटा पंक्षी
64. मौत का जहाज
65. पुरानी बीवी नया प्यार

थ्रिलर

66. चकमें पर चकमा
67. बिच्छू का खेल
68. बाॅस
69. हादसे की रात
70. फंस जाओ मेरे लिए
71. तुम‌ मरोगी मेरे हांथों
72. गरम छुरी
73. नाइट क्लब
74. मैडम नताशा का प्रेमी
75. साथ जियेंगे, साथ मरेंगे
76. करिश्मा हाथों‌ का
77. औरत मेरी दुश्मन
78. तीन मुकदमें
79. मोहब्बत एक गुनाह
80. मेरा प्रेमी कातिल नहीं
81. जुआरी
82.
83.
84.
85.

लेखक संपर्क
अमित खान
D-603, स्काई पार्क
अजीत ग्लास गार्डन के‌ नजदीक,
आॅफ एस. वी. रोङ, गोरेगाँव(वेस्ट)
मुंबई-40040
Mob- 9821163955(only Sunday)
Email- for am it khan I gmail.com
Facebook-

Sunday, May 13, 2018

वेदप्रकाश कंबोज- परिचर्चा

वेद प्रकाश कांबोज की रहस्य रोमांच से भरी दुनिया :               
जासूसी नावलों का अद्भुत संसार (भाग-1)      
दिनाक -09.5.18
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वेद प्रकाश काम्बोज जी का नाम रोमांचक जासूसी उपन्यासों की दुनिया मे परिचय का मुहताज नहीं है एक समय था कि मार्केट मे इब्ने सफ़ी सूरज की तरह से प्रतिष्ठित लेखक थे।
            उनके उपन्यास 1950 से 60 के दशक मे इतने पापुलर थे कि हर छोटा या बड़ा दुकानदार, बस का या रेल का यात्री,  काम वाली ग्रहणी इनके हाथ मे, जासूसी दुनिया नॉवेल, धर्मयुग, या मनोहर कहानियाँ, जैसी कोई ना कोई पत्रिका को देखा जा सकता था । गर्मी की दोपहर हो या रात,  मकान की छत पर भोजन के बाद जलते लालटेन या पेट्रोमेक्स के उजाले मे बजते रेडियो के साथ लोग इन्हीं मेगज़ीन या नोवेल्स मे समय गुजारते देखे जाते थे।
               तभी अचानक जैसे सूरज पर बदली छा जाए,  सफ़ी साहब काफी ज्यादा बीमार हो गए, और उसके बाद वो लगभग दो साल बाद मार्केट मे वापस अपनी उपस्थिती दर्ज करवा पाये, तब तक उनके किरदारों पर लिखने वाले नए लेखकों का पदार्पण मार्केट मे होना शुरू हो चुका था, विनोद हमीद का एडिक्शन इतना जबर्दस्त था कि पाठक उन नए लेखकों को भी पढ़ने लगे।
            सन् 1958  से 16-17 वर्ष की अल्प आयु मे काम्बोज साहब ने अपने शुरुआती लेखन मे सेल्फ नरेटिंग स्टाइल मे कुछ उपन्यास लिखे, फिर इनहोने जो विजय रघुनाथ सीरीज लिखी, तो क्या आदमी क्या औरतें सभी इनकी कलम के दीवाने बन गए, धीरे धीरे कुछ 4  नोवेल्स के बाद शोहरत ने इनका दामन मजबूती से जो थामा है तो फिर उन्हें मुड़ कर ....पीछे देखने की जरूरत नहीं पड़ी, हिंदुस्तान के पाठकों मे सफ़ी साहब के पापुलर किरदार थे कर्नल विनोद और कैप्टेन हमीद ,मगर पड़ोसी देश और उर्दू के पढ़ने वालों मे ज्यादा मशहूर हुआ चरित्र इमरान था, यहाँ भारत मे भी उसे राजेश के रूप मे पसंद किया गया मगर डिमांड विनोद -हमीद की ज्यादा थी और इन पात्रों ने उर्दू लेखक एन. सफ़ी और एच॰ इकबाल और जनाब आबिद रिजवी साहब को भी काफी जगह दिलवा दी और भी कई नये लेखक आए ऊनका
      जिक्र मैं एक अलग ब्लॉग मे करूंगा। उन दिनों देश के प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी भी, सफ़ी साहब के जबर्दस्त फ़ैन थे उन्होने भी डेढ़ मतवाले (हिन्दी नाम हम्बग दी ग्रेट )जो इब्ने सफ़ी जी ने Schizophrenia नामक बीमारी से ठीक होने के बाद लिखा था को मँगवा कर पढ़ा था।  कहते हैं कि, रिलीज वाले दिन लोगों ने कतार मे लग कर नॉवेल लिया था जिसकी shortage हो जाने से वो दोबारा प्रकाशित हुआ था।
            हिन्दी जासूसी दुनिया मे अनुवादक प्रेम प्रकाश ने सफ़ी साहब के किरदारों के नए नाम रख दिये थे , इमरान हो गए राजेश।   राजेश से प्रेरित हो कर काम्बोज जी ने अपने चरित्र का नाम रखा था, विजय । लेकिन दोनों मे काफी अंतर था जो कालांतर मे बढ़ता ही चला गया, पुलिस का कप्तान फ़ैयाज़ जो हिन्दी जासूसी दुनिया मे कैप्टेन मलखान कहलाया, वो काम्बोज साहब के उपन्यासों मे सुपर रघुनाथ हो गया, पढ़ने वाले बाखूबी जानते हैं कि मानस पुत्र पर पूरी छाप उसके रचयिता की होती है, ये भी फ़ैयाज़ या मलखान से काफी जुदा चरित्र स्थापित हुआ, सीक्रेट सर्विस के चीफ विजय जो अपनी हकीकत छुपाये रखते थे और खुद को मूर्ख पोज करके दूसरों को मूर्ख बना कर अपना मकसद हल कर लेते थे, इस तरह का चरित्र कई लेखकों ने अड़ोप्ट किया मगर मकबूलियत कांबोज साहब को ही मिली, उन्होने इस चरित्र को कमाल का तराशा। 
         कांबोज साहब ने  विजय के सहायक का नाम ब्लैक ब्वाय रखा था जो बाकी सब सदस्यों के सामने काला नकाब डाल कर आता था और सीक्रेट सर्विस के चीफ का रोल प्ले करता था, वैसे ही जैसे उर्दू जासूसी दुनिया मे सफ़ी साहब का स्मार्ट मगर खुद को बेवकूफ दिखा कर बड़ी अय्यारी से काम करने वाला इमरान हकीकत मे सीक्रेट सर्विस का नकाबपोश चीफ एक्स टू होता था जिसे अनुवादक प्रेम प्रकाश द्वारा पवन का नाम दे दिया गया था राजेश की गैर मौजूदगी मे पवन का रोल उसका कभी भी सामने ना आने वाला सहायक फाइव टू करता था।

..... सिलसिला जारी रहेगा कड़ी 2-  मे कृपया इंतेजार कीजिये और अपनी जानकारी कमेंट्स के जरिये शेयर करिए ।। बा कलम

लेखक-  Balwinder Singh

विश्व मोहन विराग

विश्व मोहन विराग झारखण्ड के निवासी हैं और साहित्य क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में विराग साहब फिल्म‌ निर्माण और लेखन में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
   उपन्यास क्षेत्र में ज्यादा समय सक्रिय नहीं रहे। प्राप्त जानकारी के अनुसार इनके उपन्यास रजत पॉकेट बुक्स- मेरठ से प्रकाशित हुये थे।

विश्व मोहन विराग के उपन्यास
1. मरघट
2. सौ करोङ डाॅलर के हीरे
3. आये नहीं सजना(अप्रकाशित)

संपर्क
विश्व मोहन विराग
(लेखक, निर्देशक,गीतकार)
विद्यापुरी,
झुमरीतिलैया(कोडरमा)
झारखण्ड

Friday, May 4, 2018

रितुराज

रितुराज के उपन्यास

1. नसीब औरत का 
2. बीवी बच्चे
3. घर की लक्ष्मी
4. सिंदूर
5. पत्थर की देवी
6. आंचल में है दूध
7. बिंदिया
8. प्रेमदीप
9. राखी
10. पूजा करुंगी मैं
11. नसीब 
12. देवी माँ
13. परिवार
14. बहूरानी
15. कफन
16. काला सिंदूर
17. वो आ गये
18. रानी बेटी
19. औरत 
20. खानदान
21. सुहाग
22. विधवा
23. काजल
24. किराये की माँ
25. जीवन दान
26. चिराग
27. परमवीर चक्र
28. गुङिया (पचासवां उपन्यास)
29. बारात
30.  उधार का बेटा
31. चांद सूरज

उपर्युक्त सभी उपन्यास तुलसी पॉकेट बुक्स- मेरठ

32. देवी माँ- कंचन पॉकेट बुक्स

33. राखी- कंचन

34. नई महाभारत- राजा पॉकेट बुक्स

35. कर्जदार- राजा

36. प्यार नहीं करना - तुलसी साहित्य
37. मेरा प्यार मेरा अधिकार- TSP
38. दीवाना सा
39. जुदा न होंगे
40. कोई नहीं अपना
41. चांद के पार
42. नया ताजमहल
43. चिराग
44. सिंदूर
(36-44 तक TSP)

रितुराज का जीवन परिचय यहाँ उपलब्ध है।

अजय सिंह

नाम- अजय कुमार

माता- दुर्गा देवी

पिता नाम- बिरेन्द्र सिंह( birendra Singh

शिक्षा- MSC in applied mathematics 

जन्म दिनांक- 29.07.1982

संपर्क नंबर- 98551916207

इमेल- 27@gmail.com (o alphabet)

प्रथम उपन्यास/किताब-  कौओं का हमला

कुल किताबों की‌ लिस्ट-

वर्तमान कार्यक्षेत्र- टीवी क्षेत्र में धारावाहिक लेखन।

- CID, आहट, क्राइम पेट्रोल, अगले जन्म मोहे बिटिया हि कीजो  ्



Wednesday, May 2, 2018

Iam Back- गजाला करीम

जासूसी उपन्यास जगत में एक और हलचल

लगभग दस वर्ष की खामोशी के पश्चात गजाला अपने उपन्यास के साथ लौट रही है।

उपन्यास नाम- iam Back

प्रकाशन- 3 मई 2018

फाॅरमेट- इ बुक

प्रकाशक- प्राची डिजीटल पब्लिकेशन- मेरठ

बुक्स प्राप्ति के लिए यहाँ क्लिक करें- iam Back- playstor


Wednesday, April 25, 2018

आबिद रिज़वी- जीवन परिचय

नाम- आबिद रिज़वी
पिता- श्री जव्वाद हुसैन(सैनिक सेवा, 07 राजपूताना रायफल्स Retd.)
माता- श्रीमती एज्जाज बानो
भाई - सैयद सज्जाद हुसैन (फ्लाइंग आॅफिसर I.A.F, (Retd.)
बहन- मुमताज़ बानो(सरकारी शिक्षिका- सेवानिवृत्त)
जन्मतिथि- 06 -फरवरी-1942 ई.
शिक्षा- एम. ए.- हिंदी( प्रयाग विश्वविद्यालय, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश-1963ई.)
        - बी.एड.(पंजाब युनिवर्सिटी-1965ई.)
शिक्षण कार्य-नेशनल इण्टर काॅलेज, महौदा, हमीरपुर ( उत्तर प्रदेश)
प्रथम उपन्यास-अनजानी-अनचाही राह( सामाजिक उपन्यास)
परिवार- तीन पुत्रियां- राना जैदी, जैदा रिज़वी, हिना रिज़वी
पत्नी- स्वर्गीय गौहर जहाँ (गवर्नमेंट गर्ल्स इण्टर काॅलेज- बागपत, Retd.)
पता- म.नं.- 258, सेक्टर-10, शास्त्री नगर, मेरठ, उतर प्रदेश-
संपर्क-8218846970,  9837408357
ईमेल- abidrizvi102@gmail.com
साइट- abidrizvi.com
लेखन कार्य- उपन्यास, जीवनी,
अनुवाद- उर्दू और अंग्रेजी की विभिन्न रचनाओं का हिंदी में अनुवाद।


आबिद रिजवी जी के उपन्यास

1.अनचाही-अनजानी राह,

2. धुंधला चेहरा-धुंधला रूप, 

3. अतीत की परछाईयां, 

4. सरिता।

5. कोई आवाज न दे

6. दरवाजा खोल दो

7.  बंद गली का रास्ता

8. संगमरमर के घोंसले

9. सवेरा होने वाला है।

10. अंगङाई

 (उपन्यास क्रम 5-10 तक, नीलम पॉकेट बुक्स से)

11. मेरी मदहोशी के दुश्मन (रवि पॉकेट बुक्स, 2018)

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विकिपीडिया लिंक

Tuesday, April 10, 2018

नये उपन्यास 10 अप्रेल 2018

नमस्कार,
     उपन्यास प्रेमियों के लिए यह समय बहुत अच्छा है। क्योंकि एक लंबे समय तक उपन्यास जगत में सन्नाटा था। लेकिन अब नये- पुराने लेखकों और नये-पुराने प्रकाशकों की बदौलत कुछ उपन्यास बाजार में आ रहे हैं।

उपन्यास प्रकाशन- 10 अप्रैल 2018
  इसी क्रम में रवि पॉकेट बुक्स -मेरठ द्वारा नये - पुराने उपन्यास बाजार में आ रहे हैं।
1. खून का रिश्ता - अनिल मोहन ( Reprint)
2. देजा वू- कंवल शर्मा
3. रिवेंज-   इकराम फरीदी
4. भूखा शेर- शिवा पण्डित
5. मेरी मदहोशी के दुश्मन- आबिद रिजवी
6. नागिन मांगे खून - रीमा भारती
7. रागिनी-        राजहंस

उपर्युक्त उपन्यासों को रवि पॉकेट बुक्स के वाटस एप/ paytm नंबर 9412200594 पर संपर्क कर मंगवा सकते है।

धन्यवाद - गजाला

साहित्य देश ब्लॉग के संचालक के लिए दो शब्द ....

मैं सुनती रही औरों की कही
मेरी बात मेरे मन ही में रही.

आज बात करते हैं एक सबसे विशेष मुद्दे पर
वो समय जब मैंने अपनी पहचान बना कर भी कुछ व्यक्तियों  के रहते खो दी थी मुझे उस पहचान को वापस दिलाने में विशेष महत्वपूर्ण योगदान है आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी का। यही वो मसीहा है जिन्होंने मेरे जैसे गुमनाम कलमकारों को उनकी पहचान दिलाने में सहायता की। मैं गुरप्रीत जी को हार्दिक धन्यवाद करती हूँ और गर्व है मुझे ऐसे लोगो पर जो निस्वार्थ लोगों की सहायता करते हैं। अब जबकि मैं वापस एक लेखिका के रूप में अपनी पहचान हासिल कर चुकी हूँ तो इसका पूरा श्रेय सम्मानजनक व आदरणीय गुरप्रीत जी को देती हूँ। आप लोगो के समक्ष अपना कोई भी नया लेख लाने से पूर्व मैं चाहूंगी कि "बाग़बान" रूपी श्री गुरप्रीत जी को मुझ सहित आप लोग भी सम्मान से नवाज़े। 
              मैं खुश हूँ यह जान कर के इंसानियत आज भी जिंदा है। कोई पूछे मुझसे इंसानियत कैसी होती है तो मैं आदरणीय गुरप्रीत जी का नाम लेकर उनकी तस्वीर सभी को दिखाना चाहूंगी।   खासतौर पर चाहूंगी मुझसे ज़्यादा सम्मानित श्री गुरप्रीत जी को किया जाये, साथ ही आदरणीय मनीष जैन।  मेरे आने वाले उपन्यासों के लिए भी बधाई गुरप्रीत जी को ही दी जाए। क्योंकि आज के समय मे मेरे लेखन को लेकर जन्म कर्ता श्री गुरप्रीत जी ही हैं जो मुझे एक बार फिर कलम तक लेकर आये साहित्य देश की ओर संकेत देते कहा
"आ चल के तुझे मैं लेके चलू एक ऐसे गगन के तले, जहां गम भी न हो आंसू भी न हो बस प्यार ही प्यार पले।"
    वो समय था जब मेरी पहचान को छीनते समय मुझे कुछ बोलने की इजाज़त भी मुझसे छीन ली गयी थी। फिर गुरप्रीत जी की सहायता प्राप्त हुई तो सबके बीच अपने मन की बात कह सकी। हार्दिक आभार और धन्यवाद गुरप्रीत जी को।
Please one salute to Mr. Gurpreet Singh👏👏👏

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उपन्यासकार गजाला जी की कलम से...

गजाला जी की फेसबुक वाॅल से..